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मन की बात में बोले पीएम मोदी- हमें अपने प्रयासों से बनाना है एक भारत- श्रेष्ठ भारत 25-Oct-2020
दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम के जरिए देशवासियों को दशहरा पर्व की शुभकामनाएं दीं। पीएम मोदी ने कहा कि अभी कोरोना का संकट टला नहीं है, इसलिए त्योहारों में भी हमें संयम बरतना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पूरा देश भारतीय सेना के जवानों के साथ है। दीपावली पर एक दीया जवानों के नाम का भी जलाएं। पीएम मोदी ने कहा कि आज विजयादशमी यानि दशहरे का पर्व है। इस पावन अवसर पर आप सभी को ढेरों शुभकामनाएं।दशहरे का ये पर्व, असत्य पर सत्य की जीत का पर्व है, लेकिन साथ ही ये एक तरह के संकटों पर धैर्य की जीत का पर्व भी है। पीएम मोदी ने ट्विटर हैंडल से लोगों से रेडियो कार्यक्रम मन की बात सुनने की अपील की। पीएम मोदी हर महीने के आखिरी रविवार को देशवासियों से मन की बात के जरिए रूबरू होते हैं और कई मुद्दों पर चर्चा करते हैं। पीएम मोदी ने देशवासियों से अपील की कि इन त्योहारों में लोकल प्रोड्क्टस को प्राथमिकता दें और लोकल ही खरीदें। प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनियाभर में भारत के लोकल उत्पादों को पसंद किया जाता है तो देशवासियों को भी इन्हें बढ़ावा देना चाहिए। पीएम मोदी ने कहा कि अगर हम अपने लोकल उत्पादों में जिज्ञासा और दिलचस्पी दिखाएंगे तो दुनिया भी इस तरफ आकर्षित होगी। पीएम मोदी ने कहा कि इस बार खादी में भी कुछ जरूरी खरीदें। हमें अपने उन जांबाज सैनिकों को भी याद रखना है जो त्योहारों में भी सीमाओं पर डटै हैं। भारत माता की सेवा और सुरक्षा कर रहे हैं। हमें उनको याद करके ही अपने त्योहार बनाने हैं। हमें घर पर एक दीया भारत माता के इन वीर बेटे-बेटियों के सम्मान में भी जलाना है। जब हम त्योहार की बात करते हैं, तैयारी करते हैं, तो सबसे पहले मन में यही आता है कि बाजार कब जाना है? इस बार जब आप खरीदारी करने जाएं तो ‘Vocal for Local’ का अपना संकल्प अवश्य याद रखें। बाजार से सामान खरीदते समय हमें स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देनी है। आज जब हम Local के लिए Vocal हो रहे हैं तो दुनिया भी हमारे Local products की fan हो रही है। हमारे कई Local products में Global होने की बहुत बड़ी शक्ति है। लॉकडाउन में हमने समाज के उन साथियों को और करीब से जाना है जिनके बिना हमारा जीवन बहुत मुश्किल हो जाता। कठिन समय में ये आपके साथ थे, अब अपने पर्वों में अपनी खुशियेां में भी हमें इनको साथ रखना है। खादी की popularity तो बढ़ ही रही है साथ ही दुनिया में कई जगह खादी बनाई भी जा रही है। मेक्सिको में एक जगह है ‘ओहाका (Oaxaca)’, इस इलाके में कई गांव ऐसे हैं जहां स्थानीय ग्रामीण खादी बुनने का काम करते हैं। दिल्ली के Connaught Place के खादी स्टोर में इस बार गांधी जयंती पर एक ही दिन में एक करोड़ रुपये से ज्यादा की खरीदारी हुई। इसी तरह कोरोना के समय में खादी के मास्क भी बहुत popular हो रहे हैं। जब हमें अपनी चीजों पर गर्व होता है तो दुनिया में भी उनके प्रति जिज्ञासा बढ़ती है। जैसे हमारे आध्यात्म ने, योग ने पूरी दुनिया को आकर्षित किया है। हमारे कई खेल भी दुनिया को आकर्षित कर रहे हैं। कुछ ही दिनों बाद सरदार वल्लभ भाई पटेल जी की जन्म जयंती, 31 अक्तूबर को हम सब ‘राष्ट्र्रीय एकता दिवस’ के तौर पर मनाएंगे। जरा उस लौह पुरुष की छवि की कल्पना कीजिए जो राजे-रजवाड़ों से बात कर रहे थे, पूज्य बापू के जन-आंदोलन का प्रबंधन कर रहे थे, साथ ही अंग्रेजों से लड़ाई भी लड़ रहे थे। इन सब के बीच भी उनका sense of humour पूरे रंग में होता था। बापू ने सरदार पटेल के बारे में कहा था- उनकी विनोदपूर्ण बातें मुझे इतना हंसाती थी कि हंसते-हंसते पेट में बल पड़ जाते थे। इसमें, हमारे लिए भी एक सीख है, परिस्थितियां कितनी भी विषम क्यों न हों, अपने sense of humour को जिंदा रखिये। सरदार पटेल ने अपना पूरा जीवन देश की एकजुटता के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने आजादी के साथ किसानों के मुद्दों को जोड़ने का काम किया। उन्होंने राजे-रजवाड़ों को हमारे राष्ट्र के साथ एक करने का काम किया। वे विविधता में एकता के मंत्र को हर भारतीय के मन में जगा रहे थे। PunjabKesari केरल में जन्मे पूज्य आदि शंकराचार्य जी ने, भारत की चारों दिशाओं में चार महत्वपूर्ण मठों की स्थापना की- उत्तर में बद्रिकाश्रम, पूर्व में पूरी, दक्षिण में श्रृंगेरी और पश्चिम में द्वारका। उन्होंने श्रीनगर की यात्रा भी की, यही कारण है कि वहां एक Shankaracharya Hill है। तीर्थाटन अपने आप में भारत को एक सूत्र में पिरोता है। ज्योर्तिलिंगों और शक्तिपीठों की श्रृंखता भारत को एक सूत्र में बांधती है। त्रिपुरा से लेकर गुजरात तक जम्मू-कश्मीर से लेकर तमिलनाडु तक स्थापित हमारे आस्था के केंद्र हमें एक करते हैं। हमारे सिख गुरुओं ने भी अपने जीवन और सद्कार्यों के माध्यम से एकता की भावना को प्रगाढ़ किया है। पिछली शताब्दी में हमारे देश में डॉ. बाबा साहब अम्बेडकर जैसी महान विभूतियां रही हैं, जिन्होंने हम सभी को संविधान के माध्यम से एकजुट किया।
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