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हिंद की चादर गुरु तेग बहादर : शहीदी दिवस 24-Nov-2020
*गुरु तेग बहादुर शहीदी दिवस* *हिन्दू धर्म के रक्षक को हिन्द की चादर भी कहा जाता है* औरंगजेब द्वारा कश्मीरी पंडितों को जबरन मुसलमान बनाने से बचाने श्री गुरु तेगबहादुर जी ने अपने पुत्र सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोविंद सिंह जी की सलाह पर अपने प्राणों की आहुति देकर कश्मीरी पंडितों सहित हिंदू धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिये | 24 नवंबर सिखों के नौवें गुरु तेग बहादुर के शहादत दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस्लाम कबूल न करने पर मुगल बादशाह औरंगजेब ने चांदनी चौक में उनका सिर कलम करवा दिया था। इस दिन उनकी शहादत को याद करके जुल्म और अन्याय का डटकर मुकाबला करने की प्रेरणा मिलती है। मुगल बादशाह औरंगजेब चाहता था कि सभी गैर-मुस्लिमों को मुस्लिमों में तब्दील कर दिया जाए। इसके लिए उसके अधिकारियों ने लोगों को जबरन मुस्लिम बनाने के लिए सख्ती शुरू कर दी। धर्म बदलने के दबाव से परेशान कश्मीरी पंडितों के एक समूह ने गुरु तेग बहादुर की शरण ली। गुरु की सलाह पर इन कश्मीरी पंडितों ने मुगल अधिकारियों से कहा कि अगर गुरु तेग बहादुर इस्लाम को स्वीकार कर लेते हैं, तो वे भी बड़ी खुशी से मुस्लिम बन जाएंगे। यह सुनते ही औंरगजेब ने गुरु तेग बहादुर को गिरफ्तार करवा दिया। 3 महीनों से भी ज्यादा वक्त तक गुरु को बंदी बनाकर रखा गया। इस दौरान उन्हें लगातार टॉर्चर किया जाता रहा कि वे इस्लाम स्वीकार कर लें, लेकिन गुरु ने ऐसा नहीं किया। तो आखिर में औरंगजेब ने उनका सिर कलम करने का आदेश दे दिया। 11 नवंबर, 1675 ईसवी को चांदनी चौक में उनका सिर कलम करवा दिया गया। शीशगंज नाम का गुरुद्वारा इसी जगह पर है। गुरु तेग बहादुर को ‘हिन्द दी चादर’ भी कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने दूसरों को बचाने के लिए अपनी कुर्बानी दे दी। --------------------- गुरू तेग़ बहादुर सिखों के नवें गुरु थे जिन्होने प्रथम गुरु नानक द्वारा बताए गये मार्ग का अनुसरण किया | उनके द्वारा रचित ११५ पद्य गुरु ग्रन्थ साहिब में सम्मिलित हैं। उन्होने काश्मीरी पण्डितों तथा अन्य हिन्दुओं को बलपूर्वक मुसलमान बनाने का विरोध किया था | 24 नवंबर 1675 में मुगल शासक औरंगजेब ने उन्हे इस्लाम कबूल करने को कहा कि पर गुरु साहब ने कहा सीस कटा सकते है केश नहीं। फिर उसने गुरुजी का सबके सामने उनका सिर कटवा दिया। गुरुद्वारा शीश गंज साहिब तथा गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब उन स्थानों का स्मरण दिलाते हैं जहाँ गुरुजी की हत्या की गयी तथा जहाँ उनका अन्तिम संस्कार किया गया। विश्व इतिहास में धर्म एवं मानवीय मूल्यों, आदर्शों एवं सिद्धांत की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति देने वालों में गुरु तेग़ बहादुर साहब का स्थान अद्वितीय है। - Sukhbir Singhotra सुखबीर सिंघोत्रा Raipur
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