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व्यापक स्तर पर हुआ है वित्तीय घोटाला - विवादित रही भर्ती प्रक्रिया 26-Sep-2021

 विकास उपाध्याय द्वारा भी किया गया था साक्षात्कार को रोकवाने का प्रयास 

छत्तीसगढ़ के शासकीय आईटीआई में नियमित 723 प्रशिक्षण अधिकारियों की भर्ती होगी शून्य,

रोस्टर का पालन नही हुआ - व्यापक स्तर पर हुआ है वित्तीय घोटाला

छत्तीसगढ़ के विभिन्न शासकीय आईटीआई में वर्ष 2010 सितम्बर में 723 पदों पर विभिन्न व्यवसाय हेतु नियमित प्रशिक्षण अधिकारियों की सीधी भर्ती निकाली गई थी। उक्त भर्ती डॉ रोहित यादव आईएएस तत्कालीन विभागीय संचालक रोजगार एवं प्रशिक्षण (जन शक्ति नियोजन) द्वारा 1 सितम्बर 2010 को जारी किया गया था।
यह भर्ती प्रक्रिया शुरू से ही विवादित रही, क्योंकि इस भर्ती प्रक्रिया की अधिसूचना जारी होने के पूर्व विभागीय सेवा भर्ती नियम 2005 को विभागीय अमलो द्वारा अपने निकट संबंधियों को लाभ पहुंचाने के लिए संशोधित किया गया और 3 वर्ष अनुभव के अनिवार्य बिंदु को शून्य कर दिया गया था। जबकि जून 2007 - सितम्बर 2009 एवं फरवरी 2010 में आईटीआई में संविदा प्रशिक्षण अधिकारियों की भर्ती 3 वर्ष के अनिवार्य अनुभव होने के आधार पर किया गया था।
उस समय भी जब भर्ती प्रकाशित हुई थी, तो विभाग में भर्ती प्रक्रिया , तत्कालीन विभागीय मंत्री स्व हेमचन्द यादव को भी इस मामले के बारे में अवगत करवाया गया था, परन्तु विभागीय अधिकारियों की और जन प्रतिनिधियों के हठधर्मिता के कारण पूरा मामला यह कहते हुए वही दबा दिया गया कि छत्तीसगढ़ में इस विभाग में आईटीआई में  कार्य करने के लिए अनुभवधारी अभ्यर्थी नही मिलेंगे।
इस दोषपूर्ण भर्ती का फॉर्म भरने का आखिरी तिथि 30 सितम्बर 2010 थी, अंतिम तिथि उपरांत भी सैकड़ो फॉर्म बैकडोर से विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा अभ्यर्थियों से सांठगांठ करके लिया गया।
इसके बाद भर्ती से संबंधित आंतरिक खबरे विभाग द्वारा समय समय पर दी जाने लगी। संविदा प्रशिक्षण अधिकारियों ने छत्तीसगढ़ तृतीय वर्ग कर्मचारी संगठन से मदद की गुहार लगाई और कई बार संचालनालय रोजगार एवं प्रशिक्षण बैरन बाजार कार्यालय का घेराव इत्यादि किया। निष्कर्ष कुछ भी नही निकला, कई आईएएस अधिकारी संचालक के रुप में सितम्बर 2010 से जनवरी 2013 पदस्थ हुए। प्रत्येक संचालक को संविदा प्रशिक्षण अधिकारियों और तृतीय वर्ग कर्मचारी संगठन के प्रांतीय नेतृत्व कर्ताओं के माध्यम से ज्ञापन निवेदन किया गया, यहां तक कि भर्ती हेतु गठित विभागीय समिति में बार बार हो रहे बदलाव और अंदरूनी सांठगांठ के बारे में  भी अवगत करवाया गया, परन्तु किसी संचालक ने ध्यान नही दिया।
फलस्वरूप भर्ती प्रक्रिया 2 वर्ष तक विलंबित रही। अगस्त 2012 को विभाग ने संयुक्त संचालक स्थापना के पद पर ऐ के सोनी को नियुक्त किया, जो कि संविदा कर्मियों के सबसे बड़े विरोधी थे। नियमित भर्ती किये जाने की कमान उन्हें सौंपी गई जिस तारतम्य में भर्ती का साक्षात्कार नवंबर 2012 में 10 से 12 दिनों तक चला। इसका पुरजोर विरोध कर रहे संविदा प्रशिक्षण अधिकारियों का साथ आकाश शर्मा एनएसयूआई और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस युवा मोर्चा के तत्कालीन अध्यक्ष विकास उपाध्याय द्वारा दिया गया था और साक्षात्कार को रोकवाने का प्रयास किया गया था, अभ्यर्थियों को व्यापक फर्जीवाड़ा सम्बन्धी बाते बताई गई थी, परन्तु नियामित शासकीय नौकरी जब किसी को मिलने वाली हो तो कौन गलत सही देखता है।अंततः साक्षात्कार उपरांत जनवरी 2013 को नियमित पदस्थापना एवं नियुक्ति आदेश विभाग द्वारा कर दिया गया था, जिसके कारण संविदा कर्मचारियों के कार्यरत पदो के विरुद्ध जानबूझ कर विभागीय अधिकारियों ने आर्थिक भ्रष्टाचार कर पदस्थापना दे दिया गया और विभाग में कार्यरत 176 संविदा प्रशिक्षण अधिकारियों की सेवाएं समाप्त हो गयी।
यहां से विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों का खेल तृतीय वर्ग कर्मचारी संगठन और संविदा कर्मियों को समझ मे आ गया।

इस बीच जिनकी नौकरी गयी थी उन्होंने अंदरूनी जानकारी एकत्रीत करना चालू कर दिया गया, जिससे धीरे धीरे भर्ती में हुए विभिन्न स्तर पर अनियमितता के राज खुलते चले गए।
इन अनियमितताओं की शिकायतें भी की गई, तत्कालीन विभागीय मंत्री रामविचार नेताम ने 2013 अगस्त में विभागीय जांच करवाने का आश्वासन भी दिया था और आगामी सीधी भर्ती तत्काल निकालने हेतु विभागिय अधिकारियों को निर्देशित भी किया था जिसमे संविदा प्रशिक्षण अधिकारियों को उनके कार्यानुभव का लाभ देते हुए भर्ती किये जाने हेतु नस्ती भी चलाई गई थी, 2013 चुनावी वर्ष होने के कारण ना जांच हुई ना भर्ती प्रक्रिया जारी हुई।
2013 के अंत मे विभाग के एक संविदा कर्मचारी ने  छग लोक आयोग में 2010 की भर्ती में हुए व्यापक धांधलियों में से एक विषय व्यवसाय डीजल मेकैनिक और ड्राइवर कम मेकेनिक के लिए अनिवार्य वैध ड्राइविंग लाइसेंस के सम्बन्ध में शिकायत दर्ज करवायी। जांच आयोग ने एसआईटी का गठन कर सूक्ष्मता से जांच की तो करीब दो दर्जन से अधिक मामले पाए गए, जिनमे से कइयों का पास निर्धारित फॉर्म भरने की तिथि 30 सितम्बर 2010 तक वैध ड्राइवर लाइसेंस नही थे और कुछ के पास लर्निंग लाइसेंस था, जो कि प्रथमतः गठित समिति द्वारा अमान्य किया गया था, बाद में भर्ती समिति का पुनर्गठन हुआ, जिसने पूरी प्लानिंग के साथ पहले तो एक दैनिक समाचार पत्र में शुद्धि पत्र छपवाया जिसका विभागीय प्रकाशनार्थ आदेश तक जारी नही किया गया। इस शुद्धि पत्र के कारण तत्कालीन विभागीय भर्ती समिति ने अपात्र अभ्यर्थियों को बैक डोर से पात्र बना कर साक्षात्कार की सूची में सूचीबद्ध तक करवा दिया गया का पता चला ।

और उसके बाद सूत्रों के अनुसार साक्षात्कार के बाद इन्हीं में से ही कई व्यक्ति से 5 से 8 लाख रुपये लेकर उन्हें नियमित प्रशिक्षण अधिकारी के पद पर नियुक्तियां प्रदान तक करवा दिया गया। इन्हीं सूत्रों ने बताया है कि  ए के सोनी और उनकी तथाकथित भर्ती समिति ने विभाग के स्थापना के दो बाबू जायसवाल और हरखराम क साथ मिलकर करोड़ो रूपये की हेरा फेरी करते हुए बंदरबांट कर लिया गया। साक्षात्कार के बहाने अभ्यर्थियों के प्रदाय अंकों में व्यापक स्तर पर कांट छांट किया गया जिसमें 1 अंक को 9 बनाया गया 3 और 5 को 8 बनाया 7 और 4 को 9 बनाया गया इत्यादि की बाते भी बाहर निकल कर आई, जिसकी प्रमाणित प्रतिलिपि भी शिकायतकर्ता द्वारा निकाली जा चुकी है। 2010 के 723 नियमित पदों के भर्ती के सम्बंध में लोक आयोग में प्रस्तुत दूसरे मामले में 100 बिंदु रोस्टर का अनुपालन नही किया गया कि शिकायत हुई, जिसमे एसआईटी के गठन एवं जांच उपरांत यह सबसे बड़ी त्रुटि के रूप में उभर कर सामने आया, जिसके कारण आज वह भर्ती प्रक्रिया छग शासन के सामान्य प्रशासन विभाग के द्वारा शुन्यीकरण योग्य पाया गया। परन्तु इसी भर्ती में अन्य मामलों में चल रहे माननीय उच्च न्यायलय में प्रकरण के तहत विभाग एवं शासन कार्यवाही करने से बच रहा है, जबकि शासन इसमे त्वरित निर्णय लेकर उक्त भर्ती को शून्य कर सकता है और 22 आरोपी अधिकारी कर्मचारियों के ऊपर कड़ी से कड़ी कार्यवाही हो सकती है।वर्तमान सरकार के मंत्री उमेश पटेल, अवर सचिव आलोक शुक्ला जहां इस भर्ती को बचाने में लगे है, वही संचालक अवनीश शरण आरोपित 500 लोगो की डीपीसी करवा कर प्रोमशन करने की तैयारी में जुटे हुए है।

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