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सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट ने सिद्ध कर दिया कि आरोप पॉलिटिकली मोटिवेटेड थे : अमित शाह 25-Jun-2022
नई दिल्ली। गृह मंत्री अमित शाह ने 2002 में गुजरात दंगों पर आज अपनी चुप्पी तोड़ी। न्यूज एजेंसी को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले, अदालती कार्रवाई के दौरान मीडिया, गैर सरकारी संगठनों और राजनीतिक दलों की भूमिका पर बात की। शाह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट ने सिद्ध कर दिया कि तत्कालीन गुजरात सरकार पर लगाए गए सभी आरोप पॉलिटिकली मोटिवेटेड थे। पूरी न्यायिक प्रकिया के दौरान नरेंद्र मोदी जी ने कोई बयान नहीं दिया। हमने न्यायिक प्रकिया में लगातार सहयोग किया। जिन लोगों ने भी मोदी जी पर आरोप लगाए थे, उन्हें भाजपा और मोदी जी से माफी मांगनी चाहिए। करीब 40 मिनट के इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि PM मोदी ने हमेशा से न्यायपालिका में विश्वास रखा है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को PM मोदी के खिलाफ दाखिल याचिका को खारिज कर दी थी। यह याचिका 2002 गुजरात दंगों में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट देने वाली SIT रिपोर्ट के खिलाफ दाखिल की गई थी। ​​​​​ यह याचिका जकिया जाफरी ने दाखिल की थी। जकिया जाफरी के पति एहसान जाफरी की इन दंगों में मौत हुई थी। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि जकिया की याचिका में मेरिट नहीं है। 72 साल के एहसान जाफरी कांग्रेस नेता और सांसद थे। उन्हें उत्तरी अहमदाबाद में गुलबर्ग सोसाइटी के उनके घर से निकालकर गुस्साई भीड़ ने मार डाला था। जकिया ने दंगे की साजिश के मामले में मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती दी थी। मजिस्ट्रेट ने SIT की उस क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार किया था, जिसमें तत्कालीन CM नरेंद्र मोदी समेत 63 लोगों को दंगों की साजिश रचने के आरोप से आजाद किया गया था। हाईकोर्ट भी इस फैसले को सही करार दे चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2021 में फैसला सुरक्षित रखा यह मामला जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस सीटी रविकुमार की बेंच ने सुना। सुप्रीम कोर्ट ने जकिया की याचिका पर सिर्फ 14 दिन में सुनवाई पूरी की और 9 दिसंबर 2021 को फैसला सुरक्षित रख लिया था। याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल, SIT की ओर से सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी और गुजरात की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलीलें दीं। सिब्बल की दलील- अहम पहलुओं को नजरअंदाज किया गया इसे केस में याचिकाकर्ता के वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट से कहा कि SIT ने मामले के महत्वपूर्ण पहलुओं पर जांच नहीं की। इससे साबित होता कि पुलिस इस केस में एक्टिव नहीं रही। सिब्बल ने यह भी कहा कि SIT ने जिस तरह जांच की उससे लगता है कि वह कुछ छिपाने की कोशिश कर रही है। SIT की दलील- हमने अपना काम किया SIT के वकील मुकुल रोहतगी ने कहा- किसी को नहीं बचाया गया और पूरी छानबीन गहराई से हुई है। कुल 275 लोगों से पूछताछ हुई। कोई ऐसा सबूत नहीं मिला जिससे साजिश की बात साबित होती हो।
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