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कैट के आह्वान पर अमेजन और फ्लिपकार्ट के खिलाफ धरने में व्यापारियों ने दिखाई एकता 20-Nov-2019
देश के 700 शहरों में हुआ अमेजन और फ्लिपकार्ट के खिलाफ विरोध स्वरूप धरना - काॅन्फेडरेशन आॅफ आल इंड़िया टेडर्स कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर पारवानी, प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष मगेलाल मालू, प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष विक्रम सिंहदेव, प्रदेश महामंत्री जितेंद्र दोशी, प्रदेश कार्यकारी महामंत्री परमानंद जैन, प्रदेश कोषाध्यक्ष अजय अग्रवाल, वरिष्ट उपाध्यक्ष राम मंधान एवं प्रदेश प्रवक्ता राजकुमार राठी ने बताया कि कॉन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स कैट द्वारा प्रदेश की राजधानी में विशाल धरना दिया गया। रायपुर शहर के 90 से अधिक व्यापारी संगठनों एवं व्यापारी बन्धुओं धरना प्रदर्शन में शामिल हुए तथा धरना प्रदर्शन में विभिन्न व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारियों एवं व्यापारीगण ने अमेजन, फ्लिपकार्ट और अन्य ई-कॉमर्स कंपनियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की तथा केन्द्र सरकार से अमेजन, फ्लिपकार्ट और अन्य ई-कॉमर्स कंपनियों के खिलाफ कठोर कार्यवाही करने की मांग की। यह धरना पूरे प्रदेश में रायपुर, दुर्ग, भिलाई, राजनांदगांव, भाटापारा, तिल्दा, धमतरी, कांकेर, कोरबा, महासमुंद, मनेन्द्रगढ़ एवं कैट सी.जी. चैप्टर की सभी ईकाइयों में किया गया। प्रदेश के सभी व्यापारिक संगठनों एवं व्यापारीगण अपने-अपने शहरों में धरना प्रदर्शन दिया। प्रदेश के 6 लाख व्यापारी एवं देश के 7 करोड़ व्यापारी, अमेजन, फ्लिपकार्ट और अन्य ई-कॉमर्स कंपनियों के अनैतिक और अनुचित व्यापारिक प्रथाओं से परेशान है। सरकार की एफडीआइ नीति का खुले रूप से उल्लंघन करने के मुद्दे पर आज देश भर में काॅन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्ज (कैट) के आहृवान पर व्यापारियों ने 700 से अधिक शहरों में विरोध धरने किए और सरकार से इन दोनों कम्पनियों के खिलाफ कड़ी कारवाई तुरंत किए जाने की माँग की । अमेजन एवं फ्लिपकार्ट द्वारा लगातार केंद्रीय वाणिज्य मंत्री की सख्त चेतावनी के बावजूद अमेजन एवं फ्लिपकार्ट अपने ई कॉमर्स पोर्टल को सीधे प्रभावित कर रही है जो एफडीआइ नीति में स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित है । इसके कारण देश भर के व्यापारियों का व्यापार बुरी तरह तबाह हो गया है जिसके कारण देश भर के व्यापारियों में बेहद रोष और आक्रोश है । कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर पारवानी का कहना है कि लागत से भी बेहद कम मूल्य जो किसी भी वस्तु की बाजार के वास्तविक मूल्य से बेहद कम होती है, ये कम्पनियाँ उस दर पर ही जीएसटी वसूलती हैं जबकि इनको उस वस्तु के वास्तविक मूल्य पर जीएसटी लेना चाहिए, इस तरह से ये कम्पनियाँ केंद्र एवं राज्य सरकारों को करोड़ों रुपए के राजस्व का चूना लगा रही हैं । इसके साथ ही प्रति वर्ष कृतिम रूप से हजारों करोड़ रुपए का घाटा दिखा कर सरकार को आय कर से भी वंचित कर रही हैं । व्यापारी नेताओं ने कहा की देश में यदि किसी व्यापारी से अनजाने में भी कोई गलती हो जाती है या किसी कानून के पालन में कोई चूक हो जाती है तो सरकारी विभाग तुरंत व्यापारी के खिलाफ अनेक प्रकार की कारवाई करते हैं किंतु ये विदेशी कम्पनियाँ इतने बड़े पैमाने पर सरकार की नीति और कर कानूनों का खुले आम उल्लंघन कर रही है और आज तक किसी भी विभाग ने कोई कारवाई नहीं की है जिससे इन कम्पनियों के होंसले और अधिक बुलंद हो गए हैं । व्यापारियों का सवाल है की क्या देश में दो तरह के कानून हैं ? -- इन कम्पनियों को बाजार का दोहन करने की छूट क्यों मिली हुई है ? कैट ने सरकार से माँग की है की इन कम्पनियों के खिलाफ तुरंत कारवाई करते हुए इनको पोर्टल तब तक तुरंत बंद करने के आदेश दिए जाएँ जब तक ये कम्पनियाँ अपने पोर्टल को पूरी तरह से एफडीआई की नीति के सभी प्रावधानों के मुताबिक नहीं बना लेती । कैट ने सरकार से यह भी माँग की है की इन कम्पनियों के व्यापारिक मॉडल, खातों एवं कितना विदेशी निवेश आया और कहाँ कहाँ वो पैसा खर्च हुआ उसकी जाँच भी कराई जाए । यह भी गहराई से जाना जाए की वो ऐसा कौन सा बिज्नेस मॉडल है जिसमें प्रति वर्ष हजारों करोड़ का घाटा होने के बाद भी इन कम्पनियों का व्यापार चालू ही नहीं बल्कि प्रति वर्ष अनेक प्रकार की सेल लगाकर भारी डिस्काउंट भी दिए जा रहें हैं यह मॉडल चाणक्य के अर्थशास्त्र के विरुद्ध है तो क्या यह माना जाए की वर्तमान में चाणक्य का अर्थशास्त्र भारत के संदर्भ में फेल हो गया । कैट ने यह भी माँग की है की काफी अरसे से लम्बित ई कामर्स पॉलिसी को अंतिम रूप देकर तुरंत लागू किया जाए तथा ई कामर्स व्यापार में कैश ऑन डेलिवरी को बंद कर पेमेंट केवल डिजिटल भुगतान से ही ली जाए । कैट ने कहा की ई कॉमर्स भविष्य का एक अच्छा बाजार है जिसे इन कम्पनियों ने अपनी मनमानी के चलते बुरी तरह तहस नहस कर असमान प्रतिस्पर्धा का व्यापार बना दिया है । कैट ने कहा की देश के व्यापारी किसी भी प्रतिस्पर्धा से मुकाबला करने की क्षमता रखते हैं लेकिन उसके लिए बराबरी की प्रतिस्पर्धा वातावरण होना जरूरी है और सरकार को ऐसा वातावरण बनाने के लिए आवश्यक कदम तुरंत उठाने होंगे । कानून का पालन न करने पर सख्त रूप से दंडित करना भी आवश्यक है । कैट द्वारा 25 नवम्बर को व्यापारियों के साथ एक विशाल रैली का आयोजन किया जायेगा। जिसमें प्रदेश के सभी व्यापारी अपने जिले एवं शहर, कलेक्टर या एस.डी.एम. को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम से ज्ञापन सौपेगे।
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