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  • केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करना पॉजिटिव हुए - स्वयं किया ट्वीट
     

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्वयं ट्वीट कर कहा कि कोरोना के शुरूआती लक्षण दिखने पर मैंने टेस्ट करवाया और रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।  मेरी तबीयत ठीक है परन्तु डॉक्टर्स की सलाह पर अस्पताल में भर्ती हो रहा हूँ। मेरा अनुरोध है कि आप में से जो भी लोग गत कुछ दिनों में मेरे संपर्क में आयें हैं, कृपया स्वयं को आइसोलेट कर अपनी जाँच करवाएं।

     

  • मंत्री बंगले में 8 कर्मचारियों के कारोना पॉजिटिव पाए जाने के बावजूद बंगला सैनिटाइज नहीं
    प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव के बंगले में विगत दिनों दो कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद आज आई रिपोर्ट के अनुसार आठ और कोरोना पॉजिटिव कर्मचारी पाए गए हैं | स्वास्थ्य मंत्री के बंगले में इतनी संख्या में कर्मचारियों के करोना पॉजिटिव पाये जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है | दूसरी तरफ यह भी देखने में आया है कि इतनी संख्या में कर्मचारियों के कारोना पॉजिटिव पाए जाने के बावजूद बंगले को सील नहीं किया गया है और ना ही बंगले को सैनिटाइज किया गया है साथ ही किसी तरह की कोई सुरक्षा व्यवस्था वहां नहीं की गई है, लोगों के आने-जाने पर भी प्रतिबंध नहीं लगाया गया है |देखने में आ रहा है कि बंगले में आने जाने वालों का सिलसिला लगातार जारी है | प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री के बंगले को ना ही कंटेनमेंट जोन घोषित किया गया और ना ही उस क्षेत्र में आवाजाही बंद की गई है और ना ही सील किया गया है बंगले के अंदर का नजारा आम दिनों की तरह ही है जो प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोलने के लिए काफी है |
  • छत्तीसगढ विधान सभा के मानसून सत्र की अधिसूचना जारी।
    छत्तीसगढ विधान सभा के मानसून सत्र की अधिसूचना जारी। 25 अगस्त से 28 अगस्त तक चलेगा विधानसभा सत्र
  • 10 बड़ी बातें: देश में आई नई शिक्षा नीति, प्राइमरी से लेकर उच्च शिक्षा तक हुए अहम बदलाव

    देश की शिक्षा नीति में ये बदलाव करीब 34 साल बाद पेश किया गया है. इसमें एक ओर प्राइमरी स्तर पर मातृ भाषा में शिक्षा का प्रावधान किया गया है तो ग्रेजुएशन स्तर पर डिग्री कोर्स को 4 साल तक का कर दिया गया है.

     देश में शिक्षा के क्षेत्र में बड़े बदलाव का एलान हुआ है. केंद्र सरकार ने बुधवार 29 जुलाई को देश में नई शिक्षा नीति की घोषणा की, जिसके तहत प्राइमरी से लेकर यूनिवर्सिटी स्तर तक की शिक्षा में व्यापक बदलाव किए गए हैं. इसके अलावा देश में शिक्षा का जिम्मेदारी संभाल रहे मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर भी शिक्षा मंत्रालय कर दिया गया है. नई शिक्षा नीति को व्यावहारिकता और कौशल विकास पर जोर दिया गया है.

     

    देश की शिक्षा नीति में ये बदलाव करीब 34 साल बाद पेश किया गया है. इसमें एक ओर प्राइमरी स्तर पर मातृ भाषा में शिक्षा का प्रावधान किया गया है तो ग्रेजुएशन स्तर पर डिग्री कोर्स को 4 साल तक का कर दिया गया है.

    1. कम से कम पांचवी कक्षा तक और संभव हो तो आठवीं और उसके आगे भी स्थानीय भाषा या मातृभाषा में पढ़ाई कराई जाएगी. यानी हिंदी, अंग्रेजी जैसे विषय भाषा के पाठ्यक्रम के तौर पर तो होंगे, लेकिन बाकी पाठ्यक्रम स्थानीय भाषा या मातृभाषा में होंगे.
    2. देश में 10+2 के आधार पर चलने वाली पद्धति में बदलाव होगा. अब ये 5+3+3+4 के हिसाब से पाठ्यक्रम होगा. यानी प्राइमरी से दूसरी कक्षा तक एक हिस्सा, फिर तीसरी से पांचवी तक दूसरा हिस्सा, छठी से आठवीं तक तीसरा हिस्सा और नौंवी से 12वीं तक आखिरी हिस्सा होगा.
    3. नई शिक्षा नीति में बोर्ड परीक्षाओं को तो बरकरार रखा गया है, लेकिन इन्हें ज्ञान आधारित बनाया जाएगा और उसमें रटकर याद करने की आदतों को कम से कम किया जाएगा.
    4. बच्चा स्कूली शिक्षा के दौरान अपनी रिपोर्ट कार्ड तैयार करने में भी भूमिका निभाएगा. अब तक रिपोर्ट कार्ड केवल अध्यापक लिखता है. लेकिन नई शिक्षा नीति में तीन हिस्से होंगे. पहला बच्चा अपने बारे में स्वयं मूल्यांकन करेगा, दूसरा उसके सहपाठियों से होगा और तीसरा अध्यापक के जरिए.
    5. इतना ही नहीं, अब कक्षा छठीं से ही छात्रों को कोडिंग भी पढ़ाई जाएगी, जो कि स्कूली शिक्षा पूरी करने तक उनके कौशल विकास (स्किल डेवलपमेंट) में मदद करेगी.
    6. अंडर ग्रेजुएट कोर्स को अब 3 की बजाए 4 साल का कर दिया गया है. हालांकि छात्र अभी भी 3 साल बाद डिग्री हासिल कर पाएंगे, लेकिन 4 साल का कोर्स करने पर, सिर्फ 1 साल में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल कर पाएंगे. 3 साल की डिग्री उन छात्रों के लिए, जिन्हें हायर एजुकेशन नहीं करना है. हायर एजुकेशन करने वाले छात्रों को 4 साल की डिग्री करनी होगी
    7. इतना ही नहीं, ग्रेजुएशन के तीनों साल को सार्थक बनाने का भी कदम उठाया गया है. इसके तहत 1 साल बाद सर्टिफिकेट, 2 साल बाद डिप्लोमा और 3 साल बाद डिग्री हासिल हो जाएगी.
    8. इसके साथ ही Phil को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है, जबकि MA के बाद छात्र सीधे Phd कर पाएंगे.
    9. नई शिक्षा नीति में प्राइवेट यूनिवर्सिटी और गवर्नमेंट यूनिवर्सिटी के नियम अब एक होंगे. अब किसी भी डीम्ड यूनिवर्सिटी और सरकारी यूनिवर्सिटी के नियम अलग अलग नहीं होंगे.
    10. नई नीति स्कूलों और एचईएस दोनों में बहुभाषावाद को बढ़ावा देती है. राष्ट्रीय पाली संस्थान, फारसी और प्राकृत, भारतीय अनुवाद संस्थान और व्याख्या की स्थापना की जाएगी
  • समता पार्टी की पूर्व अध्यक्ष जया जटेली को भ्रष्टाचार के एक मामले में सजा सुनाई गई है.

    दिल्ली की एक अदालत ने समता पार्टी की पूर्व अध्यक्ष जया जटेली को कथित रक्षा सौदे में भ्रष्टाचार के मामले में चार साल कैद की सजा सुनाई है. दोषियों के वकील ने ये जानकारी दी. जया जेटली के पूर्व पार्टी सहयोगी गोपाल पचेरवाल, मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) एस. पी. मुरगई को भी चार साल कैद की सजा सुनाई गई है.

     

     सीबीआई ने लगभग 20 साल पुराने रक्षा सौदे में कथित भ्रष्टाचार के मामले में समता पार्टी की पूर्व अध्यक्ष जया जेटली और दो अन्य दोषियों को अधिकतम सात साल जेल की सजा देने की मांग की थी.

     

    जेटली, पार्टी के उनके पूर्व साथी गोपाल पछेरवाल और मेजर जनरल (सेवानिवृत) एस पी मुरगई को थर्मल इमेजर खरीद में भ्रष्टाचार और आपराधिक षड़यंत्र का दोषी करार देने वाले सीबीआई के विशेष न्यायाधीश वीरेन्द्र भट ने बृहस्पतिवार तक के लिये अपना फैसला सुरक्षित रख लिया.

    अदालत ने कहा था कि अभियोग पक्ष द्वारा मुहैया कराए गए सबूत से यह साबित होता है कि 25 दिसंबर 2000 को होटल के कमरे में हुई बैठक में सुरेखा और मुरगई ने सैम्युअल को रक्षा मंत्रालय से उसकी कंपनी द्वारा निर्मित उत्पाद के मूल्यांकन के लिए पत्र जारी करवाने का भरोसा दिया था.अदालत के अनुसार, इसके साथ ही जया जेटली के साथ सैम्युअल की बैठक की व्यवस्था की गई ताकि उन्हें राजनीतिक सरंक्षण प्राप्त हो सके. अदालत ने कहा कि यह सहमति बनी कि सैम्युअल सुरेखा और मुरगई को एक-एक लाख रुपये देगा जबकि इसके लिए जेटली को दो लाख रुपये की राशि दी जाएगी.

     
  • नकली पासपोर्ट पर लगेगी लगाम, अब आएंगे चिप वाले E-passport, ये फीचर्स होंगे खास

    भारत सरकार तेजी से इलेक्ट्रॉनिक पासपोर्ट पर काम कर रही है जो पासपोर्ट वेरिफिकेशन की पूरी प्रक्रिया को 10 गुना तक तेज कर देगा. ये पूरी तरह से टचलेस होने के अलावा कई शानदार फीचर्स से भी लैस रहेगा. 

    नई दिल्ली: कोरोना (Coronavirus) संकट, साइबर हमले और पासपोर्ट फ्रॉड की बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकार ने बड़े बदलाव की दिशा में कदम उठाया है. भारत सरकार तेजी से इलेक्ट्रॉनिक पासपोर्ट (E-Passport) पर काम कर रही है जो पासपोर्ट वेरिफिकेशन की पूरी प्रक्रिया को 10 गुना तक तेज कर देगा. ये पूरी तरह से टचलेस होने के अलावा कई शानदार फीचर्स से भी लैस रहेगा. 

    इसी कड़ी में कार्यरत IIT कानपुर ई-पासपोर्ट के लिए 60 केबी की सिलिकॉन चिप बना रही है. इस चिप में 30 ट्रिप तक का डेटाबेस स्टोर किया जा सकेगा. इसके अलावा चिप डेटाबेस में बायोमेट्रिक जैसे फीचर्स भी देखने को मिलेंगे. सरकार का दावा है कि इसके चलन से पासपोर्ट फ्रॉड जैसी वारदातों पर लगाम लगाई जा सकेगी. 

    दरअसल, ई-पासपोर्ट निर्माण का पूरा काम विदेश मंत्रालय की निगरानी में किया जाएगा. इसके लिए नेशनल इनफॉर्मेटिक्स सेंटर और आईआईटी कानपुर के बीच करार हुआ है. यह दोनों संस्थान मिलकर इलेक्ट्रॉनिक पासपोर्ट की सिलिकॉन चिप का निर्माण कार्य में जुटी हुईं हैं. पासपोर्ट की प्रिंटिंग और असेंबलिंग का काम इंडियन सिक्योरिटी प्रेस नासिक में किया जाएगा, यानी पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक से लैस होगा यह सुरक्षित इलेक्ट्रॉनिक पासपोर्ट.

    बताते चलें कि भारत सरकार ने 2017 में ही इलेक्ट्रॉनिक पासपोर्ट की तरफ कदम बढ़ाए थे. बढ़ते हुए साइबर अपाध, पासपोर्ट फ्रॉड और करोना संक्रमण को ध्यान में रखते हुए इस योजना पर कार्य गति को तेज कर दिया गया है और टचलेस सुविधा लाने की कोशिश चल रही है. बता दें कि भारत से पहले हांगकांग और सिंगापुर जैसे देशों में इस तरह के पासपोर्ट प्रचलित है जो सुरक्षित भी हैं और सफल भी.

    क्या है ई-पासपोर्ट?
    ये एक एडवांस्ड सिक्योरिटी फीचर्स से लैस पासपोर्ट होगा जिसपर आवेदक के डिजिटल साइन होगें. इसमें एक 60kb की चिप को लगाया गया है जिसमें आवेदक का पूरा डेटा जैसे फोटो, ई-सिगनेचर, आंखों और फिंगरप्रिंट जैसे बायोमेट्रिक सूचनाएं स्टोर होंगी. ऐसे में अगर किसी शख्स द्वारा इस चिप को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जाती है तो उसका पासपोर्ट बेकार हो जाएगा. इसके अलावा चिप में स्टोर की हुई जानकारी को बिना फिजिकल पासपोर्ट के नहीं पढ़ा जा सकेगा.क्या है खासियत ?
    ई-पासपोर्ट स्वदेशी भारतीय तकनीक से निर्मित होगा. जिसमें आगे और पीछे के कवर मोटे होंगे. फिजिकल पासपोर्ट के पीछे के कवर पर पोस्टेज स्टांप से भी छोटा सिलिकॉन चिप लगा होगा. इस चिप को रीड करने में महज कुछ सेकंड ही लगेंगे. इसके अलावा ई-पासपोर्ट में 30 विदेशी यात्राओं और वीजा के सभी बारकोड शामिल रहेंगे. इस पासपोर्ट के जरिए टचलेस इमीग्रेशन संभव होगा, जिससे करोना संक्रमण काल में अधिक सुरक्षा दी जा सके.

  • बिस्तरों की सुविधा के अलावा बाकी सुविधाएँ मुहैया करने के सरकारी दावे महज़ हवा-हवाई हैं - भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का तंज
    कोविड सेंटर्स में भी अब अव्यवस्था के चलते मरीज़ों का ठीक से इलाज नहीं, मरीज़ अस्पतालों से भाग रहे : भाजपा

     भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का तंज : बिस्तरों की सुविधा के अलावा बाकी सुविधाएँ मुहैया करने के सरकारी दावे महज़ हवा-हवाई हैं

     कोविड-19 सेंटर्स में बदइंतज़ामी से परेशान होकर मरीज़ अब अपनी व्यथा विभिन्न माध्यमों से लोगों तक पहुँचा रहे : साय

     महामारी को लेकर सरकार की लापरवाही के चलते दिल्ली-मुंबई जैसे हालात छत्तीसगढ़ में भी होते देर नहीं लगेगी


    रायपुर : भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में कोरोना के लगातार भयावह स्तर तक पहुँचने के बाद भी प्रदेश सरकार की इससे निपटने की क्या योजना है, सरकार किस रणनीति से इस पर रोकथाम लगाने का काम कर रही है, इसका कोई रोडमैप अब तक सामने नहीं आना बेहद चिंताजनक है। श्री साय ने आरोप लगाया कि प्रदेश में कोविड-19 सेंटर्स भी अब अव्यवस्थाओं के चलते मरीज़ों की परेशानी बढ़ा रहे हैं और अब इन कोविड सेंटर्स से भी मरीज़ों के भागने और भागने का प्रयास करने की ख़बरें मिलने लगी हैं।
    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री साय ने कहा कि कोरोना संक्रमण के इस भयावह दौर में भी प्रदेश सरकार जिस तरह लापरवाही का परिचय दे रही है, उससे एक ओर कोरोना के मरीज़ त्रस्त हैं और दूसरी तरफ कांग्रेस व सरकार के लोग अपनी सियासत में मस्त हैं। श्री साय ने कहा कि अब बिना देर किए प्रदेश सरकार को कोरोना की रोकथाम की अपनी तैयारियों से प्रदेश को अवगत कराना चाहिए, अन्यथा सरकार की लापरवाही के चलते प्रदेश की हालत दिल्ली-मुंबई जैसी होते देर नहीं लगेगी क्योंकि कोरोना संक्रमण को लेकर प्रदेश सरकार अब तक संजीदा नहीं दिख रही है। श्री साय ने कहा कि यदि समय रहते राज्य सरकार इस महामारी से निपटने की तैयारी कर लेती, सबको विश्वास में लेकर सबके साथ मिलकर इससे मुक़ाबले की तैयारी करती तो प्रदेश के हालात इतने भयावह नहीं होते।
    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री साय ने कहा कि आज प्रदेश में हालात ये हैं कि एक तो कोरोना संक्रमितों को उपचार के लिए अस्पतालों में बड़ी मुश्क़िल से प्रवेश मिल पा रहा है, और दूसरे जो मरीज कोविड-19 सेंटर्स में इलाज करा रहे हैं, वे इन सेंटर्स की बदइंतज़ामी से खासे परेशान हैं। वहाँ भर्ती मरीज़ अपनी व्यथा विभिन्न माध्यमों से लोगों तक पहुँचा रहे हैं कि वहाँ न तो उनके खाने-पीने का कोई पुख़्ता इंतज़ाम है, न उनके इलाज के प्रति गंभीरता दिखाई जा रही है। बिस्तरों की सुविधा के अलावा बाकी सुविधाएँ मुहैया करने के सरकारी दावे महज़ हवा-हवाई हैं। इन सेंटर्स में सरकार ने इलाज के लिए डॉक्टर्स-नर्सेस तक मुहैया नहीं कराए हैं। आपात मरीज़ भी इन सेंटर्स में सुविधाओं के मोहताज़ हैं। सरकार उन मरीज़ों की चिंता नहीं कर रही है। नतीजतन इन कोविड-19 सेंटर्स से भी मरीज़ों के भागने और भागने का प्रयास करने की ख़बरे प्रकाश में आ रही हैं। श्री साय ने इस बात पर भी चिंता व्यक्त की और कहा कि यदि इन सेंटर्स में भी कोरोना संक्रमितों के इलाज को लेकर सरकार गंभीर नहीं है तो फिर प्रदेश में कोरोना का संक्रमण कैसे रुकेगा?
    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री साय ने कहा कि टेस्ट की संख्या नहीं बढ़ाने, टेस्टिंग लैब नहीं बढ़ाने के कारण इन संदिग्धों व मरीजों की जाँच रिपोर्ट भी समय पर नहीं आ रही है जिससे कोरोना के संक्रमण का ख़तरा और अधिक बढ़ता जा रहा है। कई मामलों में तो मौत के बाद संदिग्धों की कोरोना पॉज़ीटिव रिपोर्ट आई है! श्री साय ने कहा कि प्रदेश सरकार न तो कोरोना की टेस्टिंग के मामले में गंभीर है और न ही अब वह मरीज़ों के उपचार को लेकर चिंता कर रही है। प्रदेश में कोरोना संक्रमण की तेज़ रफ़्तार ने सबकी चिंता बढ़ा रखी है लेकिन प्रदेश सरकार अब भी सियासी ड्रामेबाजी से बाज नहीं आ रही है। प्रदेश के क्वारेंटाइन सेंटर्स आज भी नारकीय यंत्रणा और अस्वाभाविक मौतों के सेंटर बने हुए हैं। श्री साय ने कहा कि प्रदेश सरकार को कोरोना की रोकथाम को अपनी प्रथमिकता में रखना चाहिए था लेकिन अपने ही अहंकार में चूर इस प्रदेश सरकार ने झूठ-फ़रेब की सियासत में मशगूल रहकर न तो समय पर टेस्टिंग लैब बढ़ाए, न कोविड अस्पतालों की व्यवस्था की और न ही उसे स्वास्थ्य विभाग में समय रहते रिक्त पदों पर भर्तियों की सुध आई - 
     
  • पीड़ीत महिला को कब मिलेगी न्यायABVP पर लगे बैन- आकाश शर्मा
    रायपुर28 जुलाई 2020-एनएसयूआई के प्रदेश प्रवक्ता सौरभ सोनकर ने बताया कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष (ABVP) डाक्टर सुब्बैया शनमुगम ने चेन्नई मे अकेले रही रह 62 वर्षीय विधवा महिला के घर के बाहर पेशाब करता है व महिला को बहुत दिनों से परेशान कर रहा है,इसकी शिकायत महिला ने पुलिस थाने में कि है व पुलिस को सी सी टी कैमरा से विडयो भी दिया है , अभी तक न्याया नहीं मिल पाया है व महिला ने उत्पीड़न का आरोप लगाया है , इससे ABVP के राष्ट्रीय मानसिक पता चलता है व यहा संगठन छात्र हित की बात करती है व छात्र हित में कार्य ना कर के इस तरह से घिनोना कार्य करती है इस संगठन पर तत्काल प्रभाव से बैन लगाना चाहिए व इनकी संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष के उपर तुरंत कार्यवाही कर के जेल भेजा जाना चाहिए व इनने कड़ी से कडी सजा मिलना चाहिए , सौरभ सोनकर ने कहा कि इस घिनोना हरकत की छत्तीसगढ़ प्रदेश एनएसयूआई कड़ी निदा करती है।
  • जलविहार में जल भरे या विषैले जीव आये, क्या फर्क पड़ता है -शासन को सिर्फ टैक्स चाहिए -

     

    राजधानी में 1 घंटे की बारिश से अनेक बस्तियां जलमग्न हो गई, जल विहार कॉलोनी के घरों में पानी भरने का रिकॉर्ड टूट गया, जहां पिछले सालों तक तेलीबांधा तालाब के पिछले हिस्से में 2 फीट पानी होता था वहां इस बार 4 फीट तक पानी भर गया | नगर निगम और जिला प्रशासन का कोई भी अधिकारी इस दौरान वहां सहायता के लिए नहीं पहुंचा | लोग अपने घरों में सामान खराब होते अपनी आंखों से देखते रहे, मजबूर थे कि सामान को उठाकर कहां ले जाएं | पलंग, फ्रीज, टेबल - कुर्सी सब कुछ पानी में आधा आधा डूब गया |

    जल विहार कॉलोनी, श्याम नगर, सीजी 24 न्यूज़ चैनल के कार्यालय, सुलभ शौचालय वाली गली एवं तालाब के पीछे सागर किराया भंडार सहित अनेक घरों में दो से ढाई फीट तक पानी भर गया|

     

    ऐसा लगता है कि शासन-प्रशासन सिर्फ टैक्स वसूलने के लिए ही बना है, लोगों की मुख्य मुसीबतों, समस्याओं का निराकरण करने के बदले नगर निगम, स्मार्ट सिटी कार्यालय एवं अन्य सभी शासकीय संस्थाएं सड़कों के किनारे सौंदर्यीकरण, चौक चौराहों का सौंदर्यीकरण, फुटपाथ, जिम, गार्डन के अलावा बिना वजह के स्काईवॉक, ऑक्सीजोन जैसी कम उपयोगी जरूरतों पर अरबों खरबों खर्च करते हैं | परंतु मूलभूत समस्याओं, जलभराव से लोगों को बचाने मैं शासन-प्रशासन आज तक सफल नहीं हो पाया है |

    पिछले 25 वर्षों से देखने में आ रहा है कि राजा तालाब अरमान नाला, जल विहार कॉलोनी तेलीबांधा, टिकरापारा , अवंति विहार विजय नगर, पंडरी गांधी नगर, जैसी शहर की अनेक निचली बस्तियां, मोहल्ले हरसाल बरसात में पानी भराव की गंभीर समस्या से जूझते हैं और लाखों का नुकसान उठाने मजबूर हैं - परंतु शासन प्रशासन उनकी सुध लेने नहीं आता |

     

  • दिल्ली में सड़कों पर फिर निकलेंगे फेरीवाले, केजरीवाल सरकार जारी करेगी आदेश

    दिल्ली सरकार सड़क किनारे सामान बेचने वालों और फेरीवालों के लिए एक आदेश पारित कर सकती है. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने डिजिटल प्रेस वार्ता के दौरान कहा है कि सड़क विक्रेता और फेरीवालों के लिए एक विशेष आदेश पारित किया जा रहा है. इसके तहत उन्हें सुबह 10 बजे से रात 8 बजे तक काम शुरू करने की अनुमति होगी.

     मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को कहा कि दिल्ली सरकार सड़क किनारे सामान बेचने वालों और फेरीवालों को अपने काम और व्यवसायों को फिर से शुरू करने की अनुमति देने के लिए एक आदेश पारित करेगी.

     

    कोरोना वायरस महामारी और इसके कारण लगे लॉकडाउन ने छोटे कारोबारों और व्यक्तिगत व्यवसायों दोनों को बुरी तरह से प्रभावित किया है, जिसमें सड़क किनारे सामान बेचने वाले, फेरीवाले विक्रेता सबसे अधिक प्रभावित होने वाले समूहों में शामिल हैं.

     

    केजरीवाल ने एक डिजिटल प्रेस वार्ता में कहा, ‘‘एक विशेष आदेश पारित किया जा रहा है, जिसके माध्यम से सड़क विक्रेता और फेरीवाले दिल्ली में अपने काम और आजीविका को फिर से शुरू कर सकते हैं.’’ सरकार ने एक बयान में कहा कि फेरीवालों को हर दिन सुबह 10 बजे से रात 8 बजे तक काम करने की अनुमति दी जाएगी और उन्हें कोरोना वायरस के प्रसार से बचने के लिए सामाजिक दूरी और अन्य सभी एहतियाती उपाय सुनिश्चित करने होंगे.

     

    केजरीवाल ने कहा कि कुछ भ्रम के कारण, इन लोगों को पहले काम करने की अनुमति नहीं थी, लेकिन अब उन्हें सुबह 10 बजे से रात 8 बजे तक काम शुरू करने की अनुमति होगी.

     

    बता दें कि भारत में अबतक कोरोना से 1483157 लोग संकर्मित हो चुके हैं. वहीं 33 हजार से ज्यादा लोगों की मौत कोरोना के कारण हुई है. इसमें से 952743 संक्रमित लोग इलाज के बाद ठीक भी हुए हैं. वर्तमान में भारत में 496988 संक्रमितों लोगों का इलाज चल रहा है.

  • Ram Mandir: अयोध्या में भूमि पूजन से पहले राजनीति तेज, मोदी सरकार और विपक्ष आमने सामने | बड़ी बातें

    पीएम मोदी के इस कार्यक्रम और देश में बढ़ते कोरोना वायरस के मामलों के बीच मोदी सरकार और विपक्ष आमने सामने है. विपक्ष जहां इस कार्यक्रम को सोशल डिस्टेंसिंग के खिलाफ बता रहा है तो दूसरी ओर बीजेपी विपक्ष पर राम मंदिर निर्माण के कार्य में बाधा डालने का आरोप लगा रही है.

    आने वाली पांच अगस्त को अयोध्या में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राम मंदिर का भूमि पूजन करेंगे. पीएम मोदी के इस कार्यक्रम और देश में बढ़ते कोरोना वायरस के मामलों के बीच मोदी सरकार और विपक्ष आमने सामने है. विपक्ष जहां इस कार्यक्रम को सोशल डिस्टेंसिंग के खिलाफ बता रहा है तो दूसरी ओर बीजेपी विपक्ष पर राम मंदिर निर्माण के कार्य में बाधा डालने की कोशिश का आरोप लगा रही है. इतना ही नहीं बीजेपी के कई नेताओं ने तो यहां तक कह दिया है कि राम मंदिर के निर्माण से देश से कोरोना खत्म होने लगेगा. जानिए राम मंदिर को लेकर पक्ष और विपक्ष की इस लड़ाई की बड़ी बातें.

     

    कौन-कौन लोग शामिल होंगे?

     

    गौरतलब है कि पीएम मोदी पांच अगस्त को सुबह 11.30 बजे अयोध्या पहुंचेंगे. इसके बाद पहली बार पीएम मोदी रामजन्म भूमि रवाना होंगे. भूमि पूजन के कार्यक्रम में साधु-संतों समेत कुल 200 मेहमान शामिल होंगे. जिन दो सौ महमानों को बुलाया गया है, उनमें से पचास साधु संत, पचास अधिकारी और पचास लोग विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) और न्यास के होंगे.

     

    राम मंदिर भूमि पूजन के लिए रतन टाटा, मुकेश अंबानी सहित उद्योग जगत की नामचीन हस्तियों को निमंत्रण मिला

     

    दूरदर्शन पर लाइव प्रसारण संविधान की भावना के ख़िलाफ़- CPM

     

    पूजन के मुहर्त और पूजन में जुटने वाली भीड़ पर सवाल उठने के बाद अब इसके दूरदर्शन पर सीधे प्रसारण का भी विरोध शुरू हो गया है. केरल से सीपीएम सांसद बिनॉय विश्वम ने सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को पत्र लिखा है. पत्र में विश्वम ने भूमि पूजन का सीधा प्रसारण दूरदर्शन पर करवाए जाने के फ़ैसले को ग़लत बताते हुए इसका विरोध किया है. विश्वम ने पत्र में प्रसार भारती क़ानून के अनुच्छेद 12 के खंड 2(के) का हवाला देते हुए कहा कि दूरदर्शन का मुख्य उद्देश्य देश की एकता और अखंडता के साथ संविधान की भावना को बनाए रखना है.

     

    AIMIM के सांसद ने भी उठाए पूजन पर सवाल

     

    ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल-मुस्लीमीन (AIMIM) के सांसद इम्तियाज जलील ने शुक्रवार को कहा कि वह अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन कोविड-19 महामारी को देखते हुए ‘भूमि पूजन’ को टाला जा सकता है. जलील ने आगे कहा कि इस कार्यक्रम के लिए दो घंटे की अनुमति दी जाती है तो सामान्य श्रद्धालुओं को मंदिरों में पूजा करने या मस्जिद में नमाज पढ़ने की अनुमति क्यों नहीं दी जा सकती, जहां बहुत कम समय लगता है.

     

    AAP ने भी उठाए पूजन कार्यक्रम पर सवाल


    आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय ने कहा कि भूमि पूजन समारोह में सोशल डिस्टेंसिंग समेत कोरोना की दूसरी गाइडलाइंस का पालन कराना सरकार और आयोजकों के लिए बड़ी चुनौती होगी. संजय सिंह के मुताबिक कोरोना के मुश्किल दौर में जहां एक तरफ सभी धार्मिक गतिविधियां बंद हैं तो वहीं दूसरी तरफ बीजेपी ने अपने फायदे वाले किसी भी काम को बंद नहीं किया है. उनका कहना है कि अयोध्या में इन दिनों बड़ी तादात में कोरोना के मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद वहां भीड़ जुटाई जा रही है.

    एनसीपी प्रुमख शरद पवार ने क्या कहा था?

     

    एनसीपी के प्रमुख शरद पवार ने कुछ दिन पहले कहा था कि हमें तय करना होगा कि कौन सा काम कितना महत्वपूर्ण है? उन्होंने कहा कि कुछ लोग सोचते हैं कि राम मंदिर बनने से कोरोना खत्म हो जाएगा. उन्होंने नसीहत देते हुए कहा कि सरकार को लॉकडाउन की वजह से हुए नुकसान और कोरोना के बढ़ते मामलों पर चिंता करनी चाहिए.

     

    समारोह में रंजन गोगोई को मिले न्यौता- अधीर रंजन

     

    लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने भूमि पूजन समारोह में देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई को आमंत्रित करने की मांग उठाई है. वर्तमान में राज्यसभा सांसद रंजन गोगोई की अध्यक्षता में ही पिछले साल सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने अयोध्या विवाद में राम मंदिर के पक्ष में फैसला दिया था. अधीर रंजन ने कहा कि यदि गोगोई को भूमि पूजन के लिए आमंत्रित नहीं किया गया तो यह उनके साथ अन्याय होगा.

     

    मंदिर बनते ही देश से कोरोना भाग जाएगा- बीजेपी सांसद

     

    एमपी विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा ने बड़ा दावा किया था कि राम मंदिर का निर्माण कार्य शुरू होते ही, कोरोना का विनाश होने लगेगा. अब राजस्थान की दौसा लोकसभा सीट से सांसद जसकौर मीणा ने भी कुछ ऐसा ही बयान दिया है. जसकोर मीणा का कहना है. हम तो आध्यात्मिक शक्ति के पुजारी हैं. आध्यात्मिक शक्ति के हिसाब से चलते हैं. मंदिर बनते ही कोरोना देश से भाग जाएगा.

     

    विपक्ष को बीजेपी का जवाब

     

    विपक्ष के आरोपों पर बीजेपी सांसद राकेश सिन्हा ने हमला करते हुए कहा की राम जन्म भूमि के भूमि पूजन का इंतजार आज से नहीं, बल्कि सदियों से किया जा रहा था. साथ ही अब जबकि यह तारीख सामने आ गई है और खुद प्रधानमंत्री भूमि पूजन करने के लिए अयोध्या जा रहे हैं. ऐसे में कांग्रेस अपने इन्हीं मुखौटों और मुखबिरों के सहारे अलग-अलग तरीकों से उस पर सवाल खड़े करवा रही है, जिससे कि किसी भी सूरत में राम जन्मभूमि का भूमिपूजन का कार्यक्रम टल जाए.

  • Breaking.... लॉकडाउन 6 अगस्त तक बढ़ा

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     मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय बैठक : ज्यादा संक्रमण वाले इलाकों में 6 अगस्त तक लॉकडॉउन बढ़ाने का फैसला

     

    जिले की परिस्थिति को देखते हुए कलेक्टर लेंगे निर्णय
    खरीफ फसलों की सिंचाई के लिए 28 जुलाई से  जलाशयों से छोड़ा जाएगा पानी

     

          रायपुर 27 जुलाई 2020

    छत्तीसगढ़ में कोरोना संक्रमण की रोकथाम और बचाव के लिए हॉटस्पॉट क्षेत्रों में लॉकडाउन की अवधि को अब 6 अगस्त तक के लिए बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। जिलों में कोरोना संक्रमण वाले इलाकों की स्थिति को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर स्थानीय स्तर पर लॉकडाउन के संबंध में निर्णय लेंगे। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में उनके निवास कार्यालय में उच्च स्तरीय बैठक में राज्य में कोरोना संक्रमण की स्थिति पर गहन विचार विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया। इस अवसर पर मंत्रिपरिषद के सदस्यगण उपस्थित थे।
         बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी देते हुए कृषि एवं जल संसाधन मंत्री रविन्द्र चौबे ने बताया कि रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर जैसे बड़े शहरों में जहां कारोना संक्रमण तेजी से फैल रहा है, उसकी रोकथाम के मद्देनजर राज्य शासन ने लॉकडाउन की अवधि को 28 जुलाई से बढ़ाकर 6 अगस्त तक करने का निर्णय लिया गया है। जिन इलाकों में संक्रमण की स्थिति अधिक है वहां लॉकडाउन के कायदे कानून का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
         उच्च स्तरीय बैठक में स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को राज्य में कोरोना संक्रमण की रोकथाम और उपचार हेतु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के साथ ही अस्पतालों में कोविड-19 के इलाज के लिए बेड की संख्या बढ़ाने, लैब तकनीशियन, एएनएम एवं स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की पूर्ति जिला खनिज निधि न्यास मद से करने के निर्देश जिला कलेक्टरों को दिए गए हैं।  
         उच्च स्तरीय बैठक में राज्य में खरीफ फसलों की स्थिति पर भी विस्तार से चर्चा की गई। खरीफ फसलों की सिंचाई के लिए आवश्यकता और जलाशयों में पानी उपलब्धता को देखते हुए 28 जुलाई से ही जलाशयों से पानी छोड़ने का भी निर्णय लिया गया। बैठक में निगम, मंडल, आयोग, प्राधिकरण के शेष रिक्त पदों पर नियुक्ति के संबंध में भी विस्तार से चर्चा की गई।

    लॉकडाउन 6 अगस्त तक बढ़ा... मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मंत्रियों के साथ विचार करने के बाद बढाया... 9 दिन के लिए बढ़ाया... प्रदेश में कोरोना के बढ़ते मामलों के कारण लिया निर्णय.... टेस्ट की संख्या बढ़ाने का भी लिया निर्णय