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  • जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा लिया गया ऐतिहासिक कदम - करूणा योजना
    जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा लिया गया ऐतिहासिक कदम


    रायपुर 07 फरवरी 2022/ जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, रायपुर में परिवर्तित नाम श्रीमती कल्पना गुप्ता निवासी हनुमान नगर रायपुर द्वारा सूचना प्रेषित की गयी कि, उनकी आयु और उनके पति की आयु 70-72 साल से अधिक है। उन्होंने अपने मकान को अपनी एक बेटी को इस उद्देश्य से दान दिया था कि वह बुढ़ापे में उनका भरण-पोषण एवं जीवन-यापन करेगी। लेकिन बेटी ने मकान अपने नाम होने के पश्चात् माता-पिता का भरण-पोषण करने से इंकार करते हुए उन्हें दो वक्त की रोटी के लिए भी मोहताज कर दिया। विधिक सहायता हेतु बुजुर्ग दंपत्ति ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, रायपुर में जानकारी प्रेषित की। इस पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, रायपुर अरविंद कुमार वर्मा ने मामले का त्वरित संज्ञान लेकर जिले में पहली बार छ.ग. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा संचालित योजना ‘‘करूणा” के तहत बुजुर्ग दंपत्ति के घर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, के माध्यम से उन्हें हर संभव सहायता पहुंचाने हेतु प्रतिधारक अधिवक्ता श्रीमती सुनीता तोमर, पैरालीगल वालिंटियर  देवेन्द्र धीवर तथा कर्मचारी अमित गार्डिया को भेजा।

    उक्त टीम बुजुर्ग दंपत्ति के घर पहुंचकर उनके सारे दस्तावेज निःशुल्क तैयार करने में सहयोग किया और दंपत्ति को यह बताया कि उनकी हर संभव सहायता प्राधिकरण द्वारा निःशुल्क रूप से सुनिश्चित की जाएगी। उक्त प्रकरण के संबंध में अरविंद कुमार वर्मा ने कहा कि माता पिता की सेवा करना हर संतान का कर्तव्य है और ऐसे बुजुर्ग माता-पिता के लिए न्याय भी उनकी संतान की तरह अपने कर्तव्य का निर्वहन करता है और कानूनन रूप से हर बुजुर्ग माता-पिता या वरिष्ठजन के अधिकारों की सुरक्षा हेतु जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, प्रतिबद्ध है। सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, रायपुर प्रवीण मिश्रा ने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की ‘करूणा योजना‘ बहुत ही प्रभावशाली एवं लाभकारी है।

    इस योजना के तहत वरिष्ठजन प्राधिकरण में फोन के माध्यम से भी सूचना दे सकते है। ऐसे प्रकरण में जिनकी संतान अपने माता-पिता का भरण पोषण नहीं कर रही हैं, प्राधिकरण उसमें समझौता कराकर भरण-पोषण उपलब्ध कराने का प्रयास करता है यदि समझौता सुनिश्चित न हो सके तो भरण-पोषण के विभिन्न कानूनों के माध्यम से त्वरित न्याय प्रदान कराने हेतु निःशुल्क सारे कानूनी कार्यवाही करके प्रकरण न्यायालय में पेश करने में भी प्राधिकरण सहयोग करता है।

  • एयरपोर्ट की टैक्सियों के महंगे किराए पर ज्योतिरादित्य सिंधिया का जवाब
    नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने रायपुर में पत्रकारों से चर्चा करते हुए बजट की जानकारी विस्तार से दी | उन्होंने अपने विभाग के बारे में भी पत्रकारों के सवालों के जवाब दिए | रायपुर में कार्गो सुविधा की बात भी उन्होंने कही, बिलासपुर एयरपोर्ट के विस्तार के बारे में उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री से अनेकों बार चर्चा करने के बावजूद भूमि हस्तांतरण एयरपोर्ट अथॉरिटी को नहीं किया जा रहा है, इसलिए विस्तार रुका हुआ है | इसी प्रकार अंबिकापुर दरिमा हवाई अड्डे के बारे में उन्होंने कहा कि अब प्रदेश सरकार का अपना एयरपोर्ट है परंतु हम अति शीघ्र उसे भी मुख्यधारा में लाएंगे | एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि देश में हवाई अड्डों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है और हवाई यात्रा आसान हुई है , नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने रेल यात्रा और हवाई यात्रा की तुलना करते हुए बताया कि रेल के सेकंड एसी और फर्स्ट एसी के मुकाबले हवाई यात्रा का फेयर 15% कम है | एयरपोर्ट की संख्या में वृद्धि एवं सस्ती हवाई यात्रा के बावजूद यात्रियों को हवाई जहाज की टिकट से ज्यादा खर्च एयरपोर्ट से बाहर शहर जाने में लगता है इस पर नागरिक उड्डयन विभाग ध्यान क्यों नहीं देता ?* एक सवाल के जवाब में नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि हमारा विभाग टैक्सियों का संचालन नहीं करता इसलिए इस बारे में हम कुछ नहीं कर सकते | यहां यह बताना उल्लेखनीय है कि केंद्रीय मंत्री शायद यह भूल गए हैं कि एयरपोर्ट पर टैक्सियों का संचालन करने के लिए कंपनियों को ठेका दिया जाता है और यह ठेका इतना महंगा होता है कि टैक्सी संचालन करने वाले ठेकेदार ठेके की राशि को समायोजित करने के लिए महंगी दर पर टैक्सिया उपलब्ध कराते हैं और बाहर की टैक्सियों को एयरपोर्ट में आने की पूरी तरह मनाही रहती है | एयरपोर्ट में टैक्सियों का संचालन करने वाले ठेकेदार एयरपोर्ट अथॉरिटी के साथ मिलकर खुलेआम दादागिरी करते हैं, यात्रियों को मजबूर करते हैं कि एयरपोर्ट अथॉरिटी द्वारा निर्धारित कंपनी की महंगी टैक्सियों से ही अपने गंतव्य तक जाएं अन्यथा उन्हें पैदल ही जाना पड़ेगा | एयरपोर्ट से शहर तक जाने के लिए हवाई जहाज के टिकिट फेयर के बराबर तथा कभी कभी उससे भी ज्यादा किराया टैक्सी संचालक मांगते हैं | Ola और uber ऑनलाइन बुकिंग वाली कैब को भी एयरपोर्ट से यात्री ले जाने की इजाजत नहीं होती है |
  • राहुल गांधी का रायपुर प्रवास टी.एस. सिंहदेव निराश, भूपेश बघेल की योजनाओं को हरी झंडी

    *राहुल गांधी का रायपुर प्रवास, टी.एस. सिंहदेव निराश - राहुल गांधी भी मीडिया के सामने नहीं आए

    भूपेश बघेल की योजनाओं को हरी झंडी*

     

    कांग्रेस पार्टी के सबसे बड़े साहब आए और चले गए, प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के सपनों को हरी झंडी दिखाकर उन्होंने साबित कर दिया कि प्रदेश में सब कुछ ठीक ठाक है परंतु प्रदेश में चल रहे कुर्सी के विवाद पर कुछ नहीं बोले |

     

    हम बात कर रहे हैं इंडियन नेशनल कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की जो छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में अमर जवान ज्योति की आधारशिला रखने, राजीव गांधी भूमिहीन कृषक गरीब कल्याण योजना एवं राजीव मितान क्लब योजना का लोकार्पण करने के बाद दिल्ली वापस लौट गए | एयरपोर्ट से राहुल गांधी को बस के द्वारा सभा स्थल लाया गया जहां उन्होंने प्रदेश की योजनाओं, प्रदेश के कार्यक्रमों को प्रदर्शनी के माध्यम से प्रत्यक्ष देखा और समझा और सराहा | यहां तक तो सब कुछ ठीक-ठाक रहा परंतु इन सभी कार्यक्रमों के दौरान छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री पद की कुर्सी के अढ़ाई साल के दावेदार प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंहदेव दीन हीन की स्थिति में उनके पीछे पीछे घूमते रहे, स्टेज पर भी उन्हें राहुल गांधी के बाजू में जगह नहीं दी गई | कुछ क्षणों के लिए उन्हें राहुल गांधी से बात करने का मौका मिला परंतु उस मौके का उन्होंने क्या उपयोग किया यह सार्वजनिक नहीं हो पाया है, एक अंदाजा लगाया जा सकता है कि टी एस सिंहदेव ने उस छोटे मगर कीमती समय का उपयोग करते हुए राहुल गांधी से प्रदेश में उनके साथ हो रहे अपमान के बारे में बताने की कोशिश की होगी परंतु शोरगुल वाले उत्सवी कार्यक्रम में उनकी आवाज शायद दब कर रह गई होगी और हो सकता है कि राहुल गांधी ने भी उन्हें कोई तवज्जो नहीं दी होगी ! कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सांसद राहुल गांधी भी मीडिया के सामने नहीं आए क्योंकि वह जानते थे अगर वह मीडिया के सामने आए तो हो सकता है कि मीडिया की तरफ से सबसे पहला सवाल इस मामले में ही आ सकता है कि भूपेश बघेल और टी एस सिंहदेव के बीच कुर्सी विवाद पर क्या निर्णय लिया गया |

     

    उल्लेखनीय है कि राहुल गांधी के रायपुर प्रवास के दौरान उनके स्वागत के लिए स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव द्वारा लगाए गए स्वागत बोर्ड होल्डिंग्स को नगर निगम रायपुर द्वारा राहुल गांधी के रायपुर पहुंचने से पहले ही उतार कर हटा दिया गया था और यह अपमान भरा कड़वा घूंट टीएस सिंहदेव को पीना पड़ा और वे चुप रहे | अब राहुल गांधी के जाने के बाद स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव मीडिया का सामना किस तरह करेंगे और क्या जवाब देंगे यह तो उनके बयान के बाद ही पता चलेगा |

  • मंत्री टीएस सिंहदेव द्वारा लगाए गए स्वागत बोर्ड उतारे गए : राहुल के सामने हो सकता है विवाद
    मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंहदेव के बीच कुर्सी विवाद एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है | इस बार यह विवाद राहुल गांधी के रायपुर दौरे के 1 दिन पहले उनके स्वागत के लिए लगाए गए होल्डिंग और पोस्टर को लेकर सामने आया है | अपने राष्ट्रीय नेता राहुल गांधी के रायपुर दौरे के लिए स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव द्वारा साइंस कॉलेज मैदान के आसपास उनके स्वागत के लिए बड़े-बड़े पोस्टर लगाए गए थे इन पोस्टों में राहुल गांधी के साथ स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव के फोटो थे | पुलिस की उपस्थिति में नगर निगम की टीम द्वारा बैनर पोस्टर को उतारने दो दो वाहन लेकर उतारने की कार्यवाही शुरू की गई , इस तरह प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री द्वारा राहुल गांधी के स्वागत के लिए लगाए गए होल्डिंग और पोस्टरों को उतरवाने के पीछे किसका हाथ है और क्या मजा है यह तो बिना बताए ही समझी जा सकती है परंतु इस तरह बैनर पोस्टर उतार कर शायद स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव को राहुल गांधी के सामने नीचा दिखाने का प्रयास नजर आता है | यह भी संभावना नजर आती है कि कल राहुल गांधी के रायपुर प्रवास के दौरान हो सकता है स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव को उनसे दूर रखा जाए उन्हें स्टेज पर ना आने दिया जाए | और अगर यदि ऐसा होता है तो प्रदेश की राजनीति में उथल-पुथल होना स्वाभाविक है | राहुल गांधी के रायपुर दौरे के दौरान इस तरह का विवाद उत्पन्न होना राहुल गांधी मुश्किलें उत्पन्न कर सकता है | अब देखने वाली बात यह है कि राहुल गांधी के स्वागत के लिए लगाए गए होल्डिंग बैनर उतारे जाने के बाद स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव क्या कदम उठाते हैं ? क्या बयान जारी करते हैं ? प्रदेश के एक वरिष्ठ मंत्री के साथ इस तरह का व्यवहार हो सकता है तो आम आदमी के साथ क्या कुछ नहीं हो सकता ? राहुल गांधी के रायपुर आने और वापस जाने के बीच क्या क्या घटनाएं घटेगी, इस पर मीडिया सहित प्रदेश के नागरिकों की नजर रहेगी | इस घटनाक्रम से यह संभावना प्रबल नजर आती है कि प्रदेश में मंत्रिमंडल के पुनर्गठन के दौरान हो सकता है की टी एस सिंहदेव को मंत्री पद से हटा दिया जाए | CG 24 News-Singhotra *मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव के बीच का विवाद आया सड़कों पर* https://youtu.be/ukWNQC7wRkg *राहुल गांधी के दौरे के दौरान हो सकता है बड़ा राजनीतिक विवाद* *टी एस सिंहदेव के खिलाफ हुई कांग्रेस, नगर निगम ने उतारे बोर्ड* *CG 24 News-Singhotra*
  • *मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के एक्शन पर विशेष लेख*
    *मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के एक्शन पर विशेष लेख* छत्तीसगढ़ में 15 साल की सत्ता परिवर्तन के बाद कांग्रेस के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अपने 3 साल के कार्यकाल के बाद एक्शन मोड में आए हैं| प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेश के माफिया राज को खत्म करने के लिए जो अभियान चलाया है वह सराहनीय है | पिछले 15 सालों में और कांग्रेस के 3 सालों को मिला लें तो 18 सालों में छत्तीसगढ़ में कभी भी इस तरह का सख्त अभियान कभी नहीं चला | देर से ही सही परंतु प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जो अभियान चलाया है उससे प्रदेश की जनता बहुत खुश है| यहां यह उल्लेख करना भी आवश्यक है जब छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना हुई थी उस समय के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने गुंडाराज पर जो अभियान चलाया था वह भी सराहनीय था | उन्होंने प्रदेश के जितने भी माफिया - गुंडे थे उन्हें चुन चुन कर समाप्त करने का जो अभियान चलाया था तत्कालीन समय में प्रदेश की जनता में खुशी की लहर थी, प्रदेश गुंडाराज से मुक्त हुआ था| प्रदेश की जनता उनकी गुंडा विरोधी गतिविधियों से काफी खुश थी | मुख्यमंत्री अजीत जोगी के शासन के बाद 15 सालों तक डाक्टर रमन सिंह ने छत्तीसगढ़ में राज किया परंतु कभी भी कोई सख्त कार्रवाई नजर नहीं आई | रमन सिंह के 15 सालों के शासन के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य की सत्ता संभाली, सत्ता संभालने के बाद भूपेश बघेल 3 साल शांत रहे परंतु अब जो उन्होंने एक्शन लिया है वह सराहनीय है | प्रदेश में जो भ्रष्टाचार चरम सीमा पर था उसे समाप्त करने के लिए उन्होंने सख्त कदम उठाया | *मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेश में गांजा तस्करी, रेत माफिया, चिटफंड कंपनी, हुक्का बार और शराब के अवैध कारोबार को बंद करने के लिए शासन, प्रशासन, पुलिस अधिकारियों को जो चेतावनी दी उसके बाद से तो प्रदेश में जो ताबड़तोड़ कार्यवाहियां हो रही हैं उसकी जितनी भी प्रशंसा की जाए वह कम है |* चिटफंड कंपनियों के शिकार आम आदमी के साथ इन कंपनियों के एजेंट राहत की सांस ले रहे हैं | हुक्का बार जो रमन सरकार के समय चरम सीमा पर था खुलेआम युवक-युवतियों को गर्त की ओर धकेला जा रहा था, उस पर भूपेश बघेल ने सख्त कदम उठाकर प्रतिबंध का जो कड़ा आदेश जारी किया उससे युवक-युवतियों के माता पिता भारी खुश है | गांजा तस्करी के बारे में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केंद्र की एजेंसी को खुलेआम आमंत्रित किया था कि आप मुंबई में 10 ग्राम, 20 ग्राम, 50 ग्राम, 100 ग्राम गांजे को जप्त करने के लिए रात दिन एक कर अभियान चला रहे हैं , छत्तीसगढ़ में टनों टन गांजा माफियाओं द्वारा तस्करी किया जाता है, यहां का आबकारी विभाग, पुलिस विभाग उन पर कार्रवाई करता है, जप्त करता है | केंद्र की नारकोटिक एजेंसी यहां आए और कार्यवाही करें | परंतु मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के आमंत्रण के बावजूद कोई भी केन्द्रीय एजेंसी छत्तीसगढ़ नहीं आई | मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अपराधियों के खिलाफ कार्यवाही करने की कार्यशैली इस बात का सूचक है कि वे प्रदेश में गुंडाराज और माफिया राज को समाप्त करना चाहते हैं परंतु केंद्र से उन्हें सहयोग नहीं मिल रहा | प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल देर आए दुरुस्त आए, परंतु प्रदेश के हित के लिए उन्होंने जो अभियान चलाया है उस अभियान को गलत कहना, अभियान की आलोचना करना किसी भी तरह से सही नहीं माना जा सकता | नियमानुसार देखा जाए तो कोई भी राजनीतिक पार्टी दूसरी राजनीतिक पार्टी के अच्छे कार्यों की तारीफ नहीं करती, हर कार्य में मीन मेख निकालना विपक्ष अपना धर्म समझता है | ऐसा नहीं है कि भूपेश बघेल हर मामले में सही हैं, लेकिन उनका यह माफिया विरोधी अभियान तो हर हालत में सही है | आशा करते हैं कि भविष्य में वह गुंडा विरोधी अभियान भी शुरू करेंगे | CG 24 News-Singhotra
  • मुफ्त में सभी को सब कुछ -सोचिए कैसा होगा भारत ? - सुप्रीम कोर्ट संज्ञान ले

    राष्ट्रीय स्तर पर अगर नई पार्टी सभी को मुफ्त में सब कुछ देने का ऐलान कर दे तो भारत का क्या होगा ?

    *माननीय सुप्रीम कोर्ट को संज्ञान लेना चाहिए* 

    भारत में अगर कोई नई पार्टी बिना मांगे हिंदुस्तान के हर नागरिक को सत्ता में आने पर मकान फ्री, शिक्षा फ्री, इलाज फ्री, हर प्रकार की कार, बाइक, गाड़ी फ्यूल सहित फ्री, आवागमन की सुविधा फ्री, ट्रेन का सफर फ्री, हवाई यात्रा फ्री, खाना पीना फ्री, मनोरंजन फ्री, शादी ब्याह के खर्चे फ्री देने की घोषणा करे - - - - - तो सोचिए कैसा होगा भारत ? - -  इन सबके अलावा भी फ्री में लेने के लिए कुछ और बचता है तो सुझाव मांग ले तो |

    लोकसभा हो, विधानसभा हों या देश में होने वाले किसी भी तरह के चुनाव, सभी राजनीतिक पार्टियां मतदाताओं को बिना मांगे मुफ्त में बहुत कुछ देने की घोषणायें करतीं हैं क्यों ? -

    मध्यम वर्गीय परिवार इन राजनीतिक पार्टियों के मुफ्त की घोषणाओं के कारण अनेक प्रकार के बिना वजह टैक्स की बढ़ोतरी के नीचे दबता चला जा रहा है परंतु कोई भी सरकार इस अघोषित, रिश्वतखोरी, चुनावी लालच पर प्रतिबंध के लिए कोई कानून नहीं बनाती |

    अब यदि सुप्रीम कोर्ट ही संज्ञान नहीं लेगा तो आम आदमी जाएगा कहां ? क्योंकि राजनीतिक पार्टियां तो एक ही थैली के - - - - हैं ! 

     

  • डिजिटल इंडिया को डिजिटल तरीके से लूट रहे ठग : केंद्र सरकार मौन

    आम लोगों को सुरक्षित डिजिटल इंडिया देने में मोदी सरकार नाकाम

    मोदी सरकार डिजिटल इंडिया को डिजिटल डकैतों से बचाने में नाकाम

    कोविड पीड़ितों का व्यक्तिगत डाटा चोरी होना और नीलामी के वेब साइट में रखा जाना दुर्भाग्यजनक

    रायपुर/22 जनवरी 2022। रेड फोरम की वेबसाइट पर हजारों भारतीयों का कोविड-19 डाटा को चोरी कर नीलामी करने की खबर पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि मोदी सरकार डिजिटल इंडिया का नारा तो लगती है बड़े-बड़े दावा करती है जोर शोर से जनता को सभी कार्यो को डिजिटल माध्यम से करने प्रोत्साहित करती है दबाव बनाती है लेकिन डिजिटल प्लेटफॉर्म को डिजिटल डकैतों से बचाने में अब तक नाकाम रही है। दुर्भाग्य की बात है कोविड-19 के दौरान देशभर के नागरिक जो कोविड-19 संक्रमण के दायरे में थे और जो वैक्सीनेशन कराने के लिए कोविन पोर्टल में अपनी व्यक्तिगत जानकारियों को आधार कार्ड के नंबर के साथ लिंक किए हैं उनकी व्यक्तिगत जानकारी को मोदी सरकार साईबर चोरों से बचाने में असफल रही है। रेड फोरम के वेबसाइट में कोविड के दौरान भारतीयों के द्वारा दिये गये व्यक्तिगत जानकारी की चोरी कर डाटा नीलामी करने रखे जाने की खबर गंभीर है। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि डिजिटल इंडिया का नारा बेहद जोर शोर से लगाया तो जाता है लेकिन उनके सुरक्षा के उपाय के संबंध में ठोस उपाय नहीं कर पाई है। मोदी सरकार का आईटी मंत्रालय जनता को डिजिटल प्लेटफार्म की सुरक्षा की गारंटी देने में अभी तक नाकाम रही है। जब देश के प्रधानमंत्री जी का ट्विटर अकाउंट भी हैकरों ने हैक कर लिया था। ऐसे में आम लोगों की डाटा चोरी होने की पूरी गुंजाइश है। आम लोगों की बैंक अकाउंट से राशि चोरी हो जाना, उनके कंप्यूटर का हैक हो जाना, उनकी निजी जानकारी लीक होना आम बात हो गई। सरकारी दफ्तरों, रेल्वे, विमानन कंपनी, बैंक सहित अन्य सरकारी विभागों के वेब साइट पर भी कई बार साइबर क्राइम अटैक हो चुके है। देशभर के नागरिकों ने वैक्सीन लगाने के लिए अपने डाटा को कोविन ऐप में अपलोड करवाएं हैं अब आशंका है अगर साइबर क्राइम वालों ने सभी के डाटा को चोरी कर लिए होंगे तो निश्चित तौर पर आम लोगों की निजी जानकारी अब सुरक्षित नहीं है उन पर साइबर क्राइम वालों का नियंत्रण है। जहां भी आधार कार्ड लिंक है उनकी निजी जानकारी अब सुरक्षित नहीं है।

  • IPS जिस कार्यालय के चीफ थे, आज वहां आरोपी बनकर पहुंचे

    निलंबित आईपीएस जीपी सिंह को ईओडब्ल्यू की टीम दिल्ली से गिरफ्तार कर रायपुर ले आई, जीपी सिंह को ईओडब्ल्यू के दफ्तर में रखा गया है | उनसे पूछताछ की जा रही है, इसके बाद उन्हें रायपुर कोर्ट में किया जाएगा पेश,

  • देश के इतिहास का काला दिन - देश का प्रधानमंत्री किसी प्रदेश में जाने के लिए स्वतंत्र नहीं

    देश के इतिहास का काला दिन

    देश का प्रधानमंत्री किसी प्रदेश में जाने के लिए स्वतंत्र नहीं,

    यही कुछ आज की घटना - दुर्घटना का निचोड़ कहा जा सकता है, सियासत इतनी ज्यादा गंदी हो गई है कि अब भारत दुनिया में इस घटना के बाद बदनाम हो जाएगा |

    प्रधानमंत्री बनने के बाद व्यक्ति किसी राजनीतिक दल का नहीं रह जाता, वह देश का प्रधानमंत्री होता है, हर वर्ग का प्रधानमंत्री होता है और देश के नागरिकों का प्रधानमंत्री होता है और ऐसे में अगर प्रधानमंत्री को किसी प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था की चूक का सामना करना पड़े तो यह शर्म की बात है |

     

    हम आपको दूसरे पक्ष की बात बताते हैं पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने पत्रकार वार्ता के माध्यम से जानकारी दी कि उनके साथ चलने वाला सुरक्षाकर्मी कोविड पॉजिटिव पाया गया जिसके कारण उन्हें भी अपने आप को आइसोलेटेड करना पड़ा और प्रधानमंत्री के नियमानुसार कार्यक्रम में शामिल होने से परहेज करना पड़ा |

     

    अब बात यहां पर यह आती है कि मुख्यमंत्री जी आप जब यह बातें कह रहे हैं तो यह बातें नियमानुसार फोन के माध्यम से, अपने अधिकारियों के माध्यम से प्रधानमंत्री के सुरक्षा सलाहकार या एसजीपी के अधिकारियों तक पहुंचा सकते थे, परंतु ना आपने उनको सूचना दी और ना ही आप प्रधानमंत्री को रिसीव करने गए , आपकी यह सफाई किसी के गले नहीं उतरेगी |

    प्रधानमंत्री के काफिले के फंसने के बाद जब एसजीपी और प्रधानमंत्री के सुरक्षा दस्ते ने मुख्यमंत्री चन्नी सहित सीएम हाउस में संपर्क करने की कोशिश की तो किसी ने भी फोन अटेंड नहीं किया | आश्चर्यजनक बात है कि देश का प्रधानमंत्री किसी प्रदेश में जाए और उस प्रदेश के मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारी या मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था में लगे अधिकारियों का फोन अटेंड ना करें यह तो एक सोची समझी साजिश ही मानी जा सकती है!

     

    अब रही बात किसानों के धरना प्रदर्शन और डिमांड की तो सवाल यह उठता है कि इन किसान आंदोलन कारियों को कैसे पता चला कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सड़क मार्ग से आने वाले हैं ? जबकि यह निर्णय तात्कालिक था जिसकी पहले से कोई तैयारी नहीं थी, यह खराब मौसम के कारण लिया गया अचानक निर्णय था, तो जब सड़क मार्ग से जाने का निर्णय अचानक था तो आंदोलनकारी उस सड़क मार्ग पर कैसे पहुंच गए ?  सामने से ट्रैक्टर ट्राली कैसे अड़ाई गई ? 

     

    राजनीति जबकि बहुत गंदी है उसके तहत कोई भी अपनी गलती मानने को तैयार नहीं होता |

    परंतु देश का प्रधानमंत्री जो कि सर्वे सर्वा होता है वह ऐसी अव्यवस्था का शिकार हो जाए तो देश के लिए यह शर्म की बात है |

     

    बहरहाल हम फिर से यह अनुरोध अपील करते हैं कि जो कुछ हुआ सही नहीं हुआ और अगर पंजाब की सरकार के साथ-साथ कांग्रेस इस पर आरोप-प्रत्यारोप, तर्क - वितर्क - कुतर्क के साथ अपने बचाव की बातें करती है तो यह किसी भी हाल में मान्य नहीं है | देश का कोई भी नागरिक इसे सही नहीं मानेगा | CG 24 News Sukhbir Singhotra

  • करोना रात में ही निकलता है, रैलियों  - आम सभाओं में जाने से डरता है
    क्या आप जानते हैं कि करोना रात में ही निकलता है ? क्या आप जानते हैं की करोना स्कूल, सिनेमा हॉल, जिम और धार्मिक स्थलों पर ही आता है ? क्या आप जानते हैं करोना दिन में, रैलियों में,धरना -प्रदर्शनों में नहीं आता ? यह सब हम अपनी तरफ से नहीं कह रहे यह केंद्र सरकार प्रदेश सरकारों की नीतियों और उनके द्वारा जारी की जा रही करोना गाइडलाइन के अनुसार कह रहे हैं | केंद्र सरकार हो या प्रदेश की सरकारें सब के सब एक ही नजरिए से सोचते हैं क्योंकि उन्हें करनी है राजनीति और राजनीति के लिए जनता के बीच जाना पड़ता है जनता की भीड़ इकट्ठी करना पड़ता है भाषण देना पड़ता है और उन्हें लुभावने लालच देना पड़ता है | और जब भीड़ को बुलाना है उन्हें रोजी भी देना है उन्हें आने-जाने का खर्च भी देना है खाना पीना भी देना है इसके अलावा जितना बन सके सब कुछ निशुल्क अर्थात फ्री देने के तहत घोषणाएं भी करनी पड़ती है ताकि लोग उनके लुभावने ऑफर के झांसे में आकर उनकी पार्टी को वोट दें, उन्हें अर्थात राजनीतिक पार्टियों को कोई मतलब नहीं की करो ना दिन में निकलता है कि रात में निकलता है गरीबों को अपने घेरे में लेता है कि अमीरों को लेता है मुसलमानों को लेता है कि हिंदू को लेता है ईसाइयों को लेता है सिखों को लेता है उन्हें तो बस मतलब है अपनी रैलियों चुनावी घोषणाओं के लिए आम सभा में भीड़ इकट्ठी करने की उस भीड़ में आम आदमी करो ना पीड़ित हो ओमी क्रोन के से पीड़ित हो सीजन के लिए तड़प अस्पतालों में भर्ती होने के लिए तड़पते कोई लेना देना नहीं उनकी तो सोच रहती है कि हर व्यक्ति सिर्फ उन्हें ही वोट दें | अब ऐसे में हर आम और खास नागरिक को सचेत हो जाना चाहिए की कब कहां कैसे उन्हें करो ना महामारी घेर लेगी पता ही नहीं चलेगा और जब पता चलेगा तब तक देर हो चुकी होगी इसलिए सीजी 24 न्यूज़ आप से अपील करता है आगाह करता है कि भीड़भाड़ वाली जगहों पर ना जाएं खासकर राजनीतिक रैलियों में किसी भी लालच में आकर आम सभाओं में ना जाएं |
  • करोना का डर, लोगों पर प्रतिबंध - फिर चुनावी रैलियों के लिए आमंत्रण क्यों ?
    भीड़ भाड़ वाली जगह पर ना जाएं, मुंह पर मास्क लगाएं, बिना वजह घर से बाहर ना निकले, सैनिटाइजर करते रहे, हाथ धोते रहें यह सब फार्मूले आम पब्लिक के लिए हैं | वहीं दूसरी तरफ यही नेता जो प्रतिबंध लगाते हैं, लोगों को सबक सिखाते हैं, लोगों को शिक्षा देते हैं, उपदेश देते हैं चाहे प्रधानमंत्री हो, चाहे प्रदेशों के मुख्यमंत्री हो, चुनावी प्रदेशों में लगातार रैलियां कर रहे हैं, चुनावी सभाएं कर रहे हैं और उन चुनावी सभाओं में आम लोगों को एकत्रित करते हैं, लोगों को ज्यादा से ज्यादा सभा स्थल पर आने को प्रेरित करते हैं, उन्हें बसों में भरकर बुलाया जाता है, ट्रकों में भरकर बुलाया जाता है, ट्रैक्टर में भरकर बुलाया जाता है उस समय करोना के निर्देश - करोना की गाइडलाइन और सरकारी डंडों सख्ती का पालन करने के सुझाव कहां जाते हैं ? देखा जाए तो सबसे पहले प्रधानमंत्री को ही चाहिए कि ऐसी रैलियां, आम सभाएं बंद कर दें | नियमानुसार वह देश के प्रमुख हैं उन्हें ही फरमान जारी करना चाहिए कि चुनावी प्रदेशों में या अन्य प्रदेशों में किसी भी तरह की रैली प्रदर्शन नारेबाजी धरना आमसभा प्रतिबंधित कर दें | एक तरफ लोगों को लॉक डाउन की बंदिशों में बांधा जा रहा है , स्कूल - कॉलेज, सिनेमा हॉल, नाइट कर्फ्यू, सटरडे, संडे का बंद, धार्मिक स्थलों में भीड़ करने की मनाही के फरमान जारी हो रहे हैं परंतु रैलियों आम सभाओं पर कोई भी राजनीतिक पार्टी अपनी तरफ से प्रतिबंध लगाने में आगे नहीं आ रही सब एक दूसरे के ऊपर नियमों का पालन ना करने का आरोप लगा रहे हैं परंतु स्वयं होकर नियमों में बंधना नहीं चाहते | अब इन रैलियों प्रदर्शनों आम सभा की स्थिति को देखकर आप सहज अंदाजा लगा सकते हैं कि करो ना बढ़ाने और करो ना फैलाने और लोगों को मरीज बनाने और लोगों की जान से खिलवाड़ करने के लिए राजनीतिक पार्टियां ही जिम्मेदार हैं जो दावा करती हैं कि हम सुरक्षा देंगे हम व्यवस्था देंगे हम रोजगार देंगे लोग जिंदा रहेंगे तब तो सब कुछ दोगे ना ! सुप्रीम कोर्ट को संज्ञान लेकर इस मामले में आगे आकर चुनावी प्रदेशों सहित पूरे देश में रैलियों आम सभाओं और चुनाव प्रचार ऊपर रोक लगा देना चाहिए जिसको भी अपने बारे में चुनाव प्रचार करना है वह टीवी के माध्यम से करें सोशल मीडिया के माध्यम से करें अखबारों के माध्यम से करें परंतु लोगों की जान के साथ खिलवाड़ ना करें | Sukhbir Singhotra - स्वतंत्र पत्रकार
  •  ओमी क्रोन पीड़ित प्रदेश का पहला व्यक्ति हो सकता हूं :टीएस सिंहदेव
    प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव इन दिनों करोना से पीड़ित हैं | अपने स्वास्थ्य के बारे में वस्तुस्थिति स्पष्ट करने के लिए उन्होंने वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस द्वारा पत्रकारों से चर्चा करते हुए उन्होंने अपने स्वास्थ्य के बारे में जानकारी दी | उन्होंने बताया कि वे पूर्णत: स्वस्थ महसूस कर रहे हैं परंतु गाइडलाइन के नियमों का पालन करते हुए होम आइसोलेशन में रहकर डॉक्टरों के निर्देशों के तहत दवाइयां ले रहे हैं | स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए चुटकी लेते हुए कहा कि हो सकता है कि प्रदेश का पहला ओमीक्रोन मरीज मैं ही घोषित ना हो जाऊं ! जब स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंह देव से पूछा गया कि देश के अनेक राज्यों में करोना मरीजों की बढ़ती संख्या के साथ-साथ अन्य प्रदेशों में स्कूल, सिनेमा, जिम के साथ-साथ निजी एवं सरकारी दफ्तरों में 50% के साथ कार्य करने की पाबंदियां लगा दी गई हैं, छत्तीसगढ़ में ऐसी पाबंदियां के लिए क्या तैयारी है ? जवाब में टी एस सिंहदेव ने कहा कि प्रदेश में करोना मरीजों की जो रफ्तार है उसको देखते हुए दो-चार दिन के अंदर पाबंदियां लग सकती हैं | जब स्वास्थ्य मंत्री से पूछा गया कि 5 प्रदेशों में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर सभी राजनीतिक पार्टियां जो भीड़ भाड़ वाली रैलियां, चुनावी सभाएं कर रही हैं उन्हें आप कितना सही मानते हैं ? तो स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि यह बेवकूफी है, इस तरह की रैलियां नहीं होनी चाहिए | केंद्रीय चुनाव आयोग ने भी स्पष्ट कहा कि चुनाव घोषित नहीं हुए हैं इसलिए हमारा हस्तक्षेप नहीं है, राज्यों को इस बारे में निर्णय लेना है | परंतु राज्य सरकारें ऐसी कोई घोषणा नहीं कर रही है और ना ही कोई सख्त कदम रैलियों पर पाबंदी के लिए उठाए जा रहे हैं जोकि गलत है, इससे करोना मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी होगी जोकि बाद में दुखदाई हो सकता है | एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि ना तो हम वायरस को रोक सकते हैं और ना ही कमरों में बंद रह सकते हैं, देश की सीमाएं जब सील होगी तब इंटरस्टेट बॉर्डर सील करने के बारे में विचार किया जाएगा |