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  • कांग्रेस विधायिका की साड़ी में श्री कृष्ण का प्रिंट उनके पैरों पर :
    सारंगढ़ से कांग्रेसी विधायक उत्तरी जांगड़े की साड़ी में कृष्ण प्रिंट पैरों पर - साड़ी पहनी सोशल मीडिया पर हो रही ट्रोल, जन्माष्टमी के दिन सारंगढ़ में कृष्ण कुंज के सरकारी कार्यक्रम में हुई थी शामिल | सारंगढ़ से कांग्रेसी विधायक उत्तरी जांगड़े कृष्ण कुंज के कार्यक्रम में कृष्ण प्रिंट वाली साड़ी पहनकर पहुंची, उन्होंने अपनी तरफ से यह सोचकर साड़ी पहनी होगी कि कृष्ण भगवान के प्रति अपनी भक्ति भावना प्रदर्शित कर रही है, परंतु हुआ उल्टा ही उन्होंने जो साड़ी पहनी थी उसमें कृष्ण भगवान का प्रिंट उनके पैरों में आ गया और वह उनके चप्पल तक टच कर रहा था, जो कि एक प्रकार से श्री कृष्ण भगवान का अपमान हुआ | विधायक उत्तरी जांगड़े द्वारा श्री कृष्ण भगवान के प्रिंट वाली साड़ी पहनने की फोटो सोशल मीडिया में वायरल हो रही है और लोग उन्हें ट्रोल कर रहे हैं, परंतु विधायक उत्तरी जांगड़े ने अभी तक इस बारे में अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की है | अब देखने वाली बात यह है कि इस मामले पर कांग्रेस कमेटी क्या स्टैंड लेती हैं | CG 24 news
  • स्वराज : स्वतन्त्रता संग्राम के बलिदानियों की सुनी अनसुनी कहानियां दूरदर्शन के 75 एपिसोड में

    स्वराज : आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले अनेक बलिदानियों की गाथा है, जिसे दूरदर्शन ने 75 एपिसोड के माध्यम से 75 वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देश को समर्पित किया है | स्वराज नामक देशभक्ति के इस सीरियल में देश की आजादी के लिए महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों जिनमें से कुछ को आप जानते हैं और जिन को नहीं जानते उन अनसुनी कहानियों को भी आप इस सीरियल के माध्यम से देख और समझ पाएंगे | आप जान पाएंगे कि आपके प्रदेश और आपके शहर, गांव के भी लोग आजादी के लिए लड़े थे, उन्होंने प्राणों की आहुति दी थी | *भारत के स्वतंत्रता संग्राम की समग्र गाथा स्वराज नामक इस सीरियल में प्रस्तुत की गई है* यह 75 एपिसोड का सीरियल है, दूरदर्शन के डीडी नेशनल चैनल पर 14 अगस्त से हर रविवार रात 9 से 10 बजे प्रसारित होगा, इस सीरियल में स्वतन्त्रता संग्राम के महान नायकों के बलिदानों की बहुत सी सुनी कहानियों को पिरोया गया है। इस सीरियल की 9 क्षेत्रीय भाषाओं और अंग्रेज़ी में डबिंग की जा रही हैं। क्षेत्रीय भाषाओं में सीरियल का प्रसारण 20 अगस्त से रात्रि 8 से 9 बजे दूरदर्शन के रीजनल चैनलों पर किया जाएगा । ये भाषाएं हैं- तमिल तेलुगू, कन्नड़, मलयालम, मराठी, गुजराती, उडिया, बंगाली और असमिया । इस सीरियल को 20 अगस्त से आकाशवाणी के विभिन्न केंद्रों द्वारा भी हर शनिवार दिन में 11 बजे से प्रसारित किया जाएगा | सप्ताह के दौरान एपिसोडों का पुनः प्रसारण भी किया जाएगा। स्वराज सीरियल के लिए गहन शोध किया गया है। इस सीरियल का निर्माण 4K HD उच्च गुणवत्ता में किया गया है। इस सीरियल का आरंभ उस दौर से होता है जब 1498 में वास्को डि गामा ने भारत की धरती पर कदम रखा था। फिर पुर्तगालियों, फ्रांसीसियों, डच और अंग्रेजों ने भारत में उपनिवेश स्थापित करने के प्रयत्न किए। उस दौर से प्रारंभ होकर भारत के आजाद होने तक के संघर्ष और हमारे स्वाधीनता के नायकों की गौरव गाथा को इस सीरियल में संजोया गया है। स्वराज सीरियल की खास बात यह है कि इस कहानी में केवल मंगल पांडे, रानी लक्ष्मीबाई और भगतसिंह जैसे जाने-माने नायकों के किस्से ही शामिल नहीं हैं बल्कि इस सीरियल में अनसुने और भूले-बिसरे नायकों और वीरांगनाओं जैसे रानी अबक्का, बक्शी जगबंधु, तिरोत सिंह सिद्धो कान्हो मुर्मु, शिवप्पा नायक कान्होजी आंग्रे रानी गाइदिन्ल्यू और तिलका मांझी जैसे वीर योद्धाओं की कहानियां भी शामिल की गई हैं, जिनका बलिदान अनसुना अनकहा रह गया। इस सीरियल में दिखाए गए ऐसे ही कुछ नायकों के नाम की लंबी सूची है। • इस सीरियल में आजादी की ये गौरव गाथा केवल अंग्रेजों के अन्याय के खिलाफ़ बुलंद हुई आवाजों को ही बयां नहीं करती बल्कि फ्रांसीसी, डच और पुर्तगाली उपनिवेशवादियों ने भी सोने की चिड़िया कहे जाने वाले भारत में जो अन्यायपूर्ण व्यवहार किया और जिन नायकों ने उनके खिलाफ विद्रोह किया वे अनकही कहानियां भी दर्शकों तक पहुंचाई जाएंगी। इसके अतिरिक्त चार नए सीरियल डीडी नेशनल पर और आ रहे हैं। कॉर्पोरेट सरपंच, महिलाओं के सशक्तिकरण को तो ये दिल मांगे मोर और जय भारती देश प्रेम पर आधारित हैं। सुरों का एकलव्य एक म्यूजिक रियलटी शो है और बप्पी लहरी को श्रद्धांजली है। ये सीरियल डीडी नेशनल पर प्राइम टाइम पर आएंगे। स्टार्ट अप चैम्पिअन्स 2.0 में 46 राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त स्टार्ट अप के संघर्षों और सफलता की कहानी है। इसे डीडी न्यूज़ पर हर शनिवार रात 9 बजे और डीडी नेशनल पर हर रविवार दिन में 12 बजे दिखाया जाएगा। इसका English Version डीडी इंडिया पर शनिवार को 10 बजे आएगा।

     

    दूरदर्शन केंद्र रायपुर में आयोजित पत्रकार वार्ता में दूरदर्शन केंद्र के डायरेक्टर एसके देओहारे, असिस्टेंट डायरेक्टर न्यूज़ मनोज सोनोने, असिस्टेंट डायरेक्टर प्रोग्राम पीके श्रीवास्तव, असिस्टेंट डायरेक्टर इंजीनियर सुनील सिंगवेकर और असिस्टेंट डायरेक्टर पीआईबी सुनील तिवारी द्वारा दी गई |

  • टाटीबंध की सड़कों पर हुए गड्ढ़ों को भरने का काम युद्ध स्तर पर जारी -  कलेक्टर डॉ सर्वेश्वर भुरे के निर्देश पर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अमले

     CG 24 News

    कलेक्टर डॉ सर्वेश्वर भुरे ने CG 24 News की खबरों को गंभीरता से लेते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों को तत्काल गड्ढ़ों को भरकर सड़क को आवागमन लायक बनाने के दिए निर्देश । 

    लगातार बारिश से सड़क पर हुए गड्डों को भरने का काम युद्धस्तर पर जारी, टाटीबंध सड़क के गड्डे भरे गए, वाहनों की आवाजाही हुई आसान*

    *कलेक्टर के निर्देश पर एनएचएआई ने मेटल और मुरुम से भरे गड्डे*
     
    रायपुर 12 अगस्त 2022/ पिछले दिनों से लगातार हो रही बारिश से सड़कों पर हुए गड्ढ़ों को भरने का काम तेजी से युद्ध स्तर पर जारी है। कलेक्टर डॉ सर्वेश्वर भुरे के निर्देश पर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अमले ने सबसे पहले टाटीबंध सड़क पर हो गए बड़े बडे गड्ढ़ों को मेटल और मुरूम से पाट दिया है। निर्माणाधीन टाटीबंध ओवर ब्रिज की इस सड़क पर गड्ढ़ों के ठीक हो जाने से वाहनों का आवागमन आसान हुआ है। साथ ही दुर्ग, बिलासपुर और रायपुर शहर की ओर की सड़कों पर वाहनों के जाम की स्थिति से भी निज़ात मिली है। 
    पिछले तीन चार दिनों से लगातार हो रही बारिश से शहर में निर्माणाधीन टाटीबंध ओवर ब्रिज वाली सड़क पर पानी भरने और भारी वाहनों की आवाजाही से बड़े गड्ढ़े हो गए थे। इन गड्ढ़ों के कारण सड़क पर सभी ओर वाहनों की जाम की स्थिति बन रही थी साथ ही लोगो को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। बारिश के कारण सड़क पर मिट्टी से कीचड़ भी मच गया था जिस से दुर्घटनाओं की भी आशंका थी। ऐसे में कलेक्टर डॉ सर्वेश्वर भुरे ने मिली सूचनाओं और समाचार पत्रों में छपी खबरों को गंभीरता से लेते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों को तत्काल गड्ढ़ों को भरकर सड़क को आवागमन लायक बनाने के निर्देश दिए थे। 
     
     
    कलेक्टर डॉ भुरे के कड़े निर्देशों पर अमल करते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की टीम ने दिन रात युद्ध स्तर पर काम कर इस सड़क के गड्ढ़ों को मेटल गिट्टी और मुरुम से पाट कंप्रेसिंग कर रोल किया है। बारिश में कमी और थोड़ी धूप ने कर्मियों की सहायता की और सड़क अब वाहनों के आवागमन के लायक हो गई है। सड़क की तात्कालिक मरम्मत और गड्ढ़े भर जाने से अब टाटीबंध से सरोना, सिलतरा,कुम्हारी और भनपुरी सहित शहर के अंदर आने वाली सड़क पर भी वाहन आसानी से चल रहे है। कलेक्टर के निर्देश पर जन सुविधा के लिए शहर की अन्य सड़को पर भी बारिश से हुए गड्ढ़ों को भरने का काम तेजी से किया जा रहा है।

    करोड़ों अरबों का ठेका - सड़कों से गुजारना हुआ मुश्किल, शासन प्रशासन की चुप्पी आश्चर्यजनक 10 अगस्त 2022 https://cg24news.in/article-view.php?pathid=43216&article=3

     

    सीजी 24 न्यूज़ द्वारा 10 अगस्त को इस हेडिंग के साथ लगाई गई खबर पर संज्ञान लेते हुए कलेक्टर डॉ सर्वेश्वर भूरे ने तुरंत एक्शन लिया |

  • करोड़ों अरबों का ठेका - सड़कों से गुजरना मुश्किल | शासन - प्रशासन की चुप्पी आश्चर्यजनक
    टाटीबंध चौक करोड़ों का ठेका और सड़कों की हालत बदहाल राजधानी रायपुर का टाटीबंध चौक, जो बरसों से ही अव्यवस्थित रहा है , यहां रोज नए प्रयोग होते रहे हैं और जितने भी प्रयोग हुए हैं सब फेल साबित हुए हैं | यातायात समस्या से जूझने वाला टाटीबंध चौक पिछले 20 वर्षों से इसी तरह अव्यवस्थित यातायात का उदाहरण रहा है | यहां यातायात पुलिस यातायात को व्यवस्थित नही कर पाई और ना ही शासन - प्रशासन कोई ठोस रास्ता निकाल पाया | बहुत जद्दोजहद के बाद टाटीबंध चौक पर फ्लाईओवर के माध्यम से यातायात समस्या को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है, परंतु संबंधित ठेकेदार द्वारा नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए पुलिस प्रशासन, जिला प्रशासन, लोक निर्माण विभाग, यातायात विभाग, पार्षद विधायक, महापौर, सांसद सबकी आंखों में धूल झोंकते हुए परिवर्तित मार्ग की व्यवस्था नहीं की जा रही है | और जो व्यवस्था है उसे आप इस वीडियो और फोटो के माध्यम से समझ सकते हैं कि किस तरह गड्ढे युक्त सड़कों से लोगों को निकलने की मजबूरी है | इस मार्ग से गुजरना मतलब जान जोखिम में डालकर निकलना कहलाता है, चाहे पैदल चलने वाला हो, टू व्हीलर से चलने वाला हो, फोर व्हीलर से चलने वाला हो, थ्री व्हीलर से चलने वाले हों, बस - ट्रक सबके लिए यहां से निकलना दुर्घटनाओं से सामना करते हुए निकलना, अपनी जान जोखिम में डालकर सुरक्षित निकलना कहा जा सकता है| प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री की भी चुप्पी आश्चर्य का विषय है | अनेक विधायक, मंत्री इस मार्ग से गुजरते हैं, परंतु जब वह टाटीबंध चौक पहुंचते हैं तो या तो इनकी आंखों के सामने अंधेरा छा जाता है, या आंखें बंद कर लेते हैं, या आंखों में पट्टी बांध लेते हैं, या फिर जानबूझकर अनदेखा कर आगे निकल जाते हैं, समझ नहीं आता | वक्त है बदलाव का के नारे के साथ प्रदेश की सत्ता में काबिज हुई भूपेश बघेल सरकार भी कोई बदलाव नहीं कर पाई, साढ़े 3 साल से ज्यादा का समय कांग्रेस सरकार का गुजर गया परंतु इस मार्ग से गुजरने वालों को कोई राहत नहीं मिली | *किसी भी सड़क के निर्माण कार्य का टेंडर दिए जाने के नियमों में यह स्पष्ट उल्लेख रहता है कि पक्का परिवर्तित मार्ग ठेकेदार को बनाकर देना है ताकि आवागमन बाधित ना हो |* *अब यह समझ नहीं आता कि इस नियम की अवहेलना के लिए ठेकेदार पर कोई सख्त कार्यवाही क्यों नहीं हो रही ?* करोड़ों - अरबों का ठेका लेने वाले ठेकेदार द्वारा पक्का परिवर्तित मार्ग ना बनाने के पीछे किस-किस के संबंध हो सकते हैं कहा नहीं जा सकता | क्योंकि अगर संबंध नहीं होता तो जनप्रतिनिधि आवाज जरूर उठाते, परन्तु सभी जनप्रतिनिधियों सहित अधिकारियों की भी चुप्पी ठेकेदार से मिलीभगत का संदेह पैदा करती है | बहरहाल जनता तो जनता है उसे हर समस्या से जूझना है, हर तकलीफ का सामना करना है, जान जोखिम में डालना है, दुर्घटनाओं में अपनी जान भी गवाना है, और शासकीय गलतियां दिखने के बावजूद मजबूरी वश अनवरत अपने घरेलू कार्यों के लिए, व्यवसाय के लिए जान जोखिम में डालकर इन गड्ढे भरी सड़कों जिसमें कब कौन कहां गिर जाए ?, कब किस पर पीछे से आने वाली ट्रक - बस चढ़ जाए ? या गड्ढों में गिरकर कब कौन घायल हो जाए ? या मौत के साए में समा जाए ? कहा नहीं जा सकता | *लोक निर्माण मंत्री ताम्रध्वज साहू को चाहिए कि वह स्वयं संज्ञान लेकर संबंधित ठेकेदार सहित संबंधित अधिकारी जो मॉनिटरिंग करते हैं, लाखों की तनखा लेते हैं उन पर इस लापरवाही और अनदेखी के लिए कड़ी कार्रवाई करें | साथ ही पक्का सुविधा युक्त परिवर्तित मार्ग बनवा कर आवागमन को व्यवस्थित करें, और जनता को राहत दिलाएं | CG 24 News
  • करोड़ों अरबों क्या ठेका - सड़कों से गुजरना मुश्किल | शासन - प्रशासन की चुप्पी आश्चर्यजनक
    टाटीबंध चौक करोड़ों का ठेका और सड़कों की हालत बदहाल राजधानी रायपुर के टाटीबंध चौक जो बरसों से ही अव्यवस्थित रहा है वहां रोज नए प्रयोग होते रहे हैं और जितने भी प्रयोग हुए हैं सब फेल साबित हुए हैं यातायात समस्या से जूझने वाला टाटीबंध चौक पिछले 20 वर्षों से इसी तरह अव्यवस्थित यातायात का उदाहरण रहा है यहां यातायात पुलिस यातायात को व्यवस्थित कर पाई और ना ही शासन प्रशासन और पुलिस प्रशासन बहुत जद्दोजहद के बाद टाटीबंध चौक पर फ्लाईओवर के माध्यम से यातायात समस्या को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है परंतु संबंधित ठेकेदार द्वारा नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए पुलिस प्रशासन, जिला प्रशासन, लोक निर्माण विभाग, यातायात विभाग, पार्षद विधायक, महापौर, सांसद सबकी आंखों में धूल झोंकते हुए परिवर्तित मार्ग की व्यवस्था नहीं की जा रही है | इस मार्ग से गुजर ना मतलब जान जोखिम में डालकर निकलना कहलाता है चाहे पैदल चलने वाला हो टू व्हीलर से चलने वाला हो फोर व्हीलर से चलने वाला हो थ्री व्हीलर से चलने वाले हो बस ट्रक सबके लिए यहां से निकलना दुर्घटनाओं से सामना करते हुए निकलना अपनी जान जोखिम में डालकर सुरक्षित निकलना कहा जा सकता है| प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री की भी चुप्पी आश्चर्य का विषय है | अनेक विधायक मंत्री इस मार्ग से गुजरते हैं परंतु जब वह टाटीबंध चौक पहुंचते हैं तो या तो इनकी आंखों के सामने अंधेरा छा जाता है या आंखें बंद कर लेते हैं या आंखों में पट्टी बांध लेते हैं या फिर जानबूझकर अनदेखा कर आगे निकल जाते हैं समझ नहीं आता | वक्त है बदलाव का के नारे के साथ प्रदेश की सत्ता में काबिज हुई भूपेश बघेल की सरकार भी कोई बदलाव नहीं कर पाई साडे 3 साल से ज्यादा का समय कांग्रेस सरकार का गुजर गया परंतु इस मार्ग से गुजरने वालों को कोई राहत नहीं मिली | किसी भी सड़क के निर्माण कार्य का टेंडर दिए जाने के नियमों में यह स्पष्ट उल्लेख रहता है कि पक्का परिवर्तित मार्ग ठेकेदार को बनाकर देना है ताकि आवागमन बाधित ना हो | अब यह समझ नहीं आता कि इस नियम की अवहेलना के लिए ठेकेदार पर कोई सख्त कार्यवाही क्यों नहीं हो रही ? करोड़ों अरबों का ठेका लेने वाले ठेकेदार द्वारा पक्का परिवर्तित मार्ग ना बनाने के पीछे किस-किस के संबंध हो सकते हैं कहा नहीं जा सकता | क्योंकि अगर संबंध नहीं होता तो जनप्रतिनिधि आवाज जरूर उठाते और सभी जनप्रतिनिधियों सहित अधिकारियों की भी चुप्पी ठेकेदार से मिलीभगत का संदेह पैदा करती है | बाहर हाल जनता तो जनता है उसे हर समस्या से जूझना है हर तकलीफ का सामना करना है जान जोखिम में डालना है दुर्घटनाओं में अपनी जान भी गवाना है और शासकीय गलतियां दिखने के बावजूद मजबूरी वश अनवरत अपने घरेलू कार्यों के लिए व्यवसाय के लिए जान जोखिम में डालकर इन गड्ढे भरी सड़कों जिसमें कब कौन कहां गिर जाए कब किस पर पीछे से आने वाली ट्रक बस चल जाए या गड्ढों में गिरकर कब कौन घायल हो जाए या मौत के साए में समा जाए कहा नहीं जा सकता | लोक निर्माण मंत्री ताम्रध्वज साहू से निवेदन है कि वह स्वयं संज्ञान लेकर ठेकेदार सहित संबंधित अधिकारियों जो मॉनिटरिंग करते हैं लाखों की तनखा लेते हैं उन पर कड़ी कार्रवाई कर पक्का सुविधा युक्त परिवर्तित मार्ग बनवा कर आवागमन को व्यवस्थित करें और जनता को राहत दिलाएं | CG 24 News
  • *विश्व आदिवासी दिवस के दिन भारतीय जनता पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष बदला*
    *विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष बदला* बिलासपुर के सांसद अरुण साव को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया | विश्व आदिवासी दिवस के दिन एक वरिष्ठ आदिवासी पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदेश अध्यक्ष विष्णु देव साय को पद से हटाया | भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय को हटाकर बिलासपुर के सांसद अरुण साव को भारतीय जनता पार्टी छत्तीसगढ़ का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है | यह नियुक्ति विश्व आदिवासी दिवस के दिन केंद्रीय नेतृत्व द्वारा की गई | भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह द्वारा जारी पत्र के अनुसार यह नियुक्ति की गई है | इस नियुक्ति से यह बात स्पष्ट हो गई कि भारतीय जनता पार्टी ने विश्व आदिवासी दिवस के दिन एक वरिष्ठ आदिवासी प्रदेश अध्यक्ष को पद से हटाया | अब इसे कौन किस नजर से देखता है यह तो सबका अपना-अपना नजरिया माना जा सकता है |=
  • थाना सिविल लाइन में रोचक शिकायत, चीटियों को लेकर विवाद
    Reporter:- lavinder pal *चीटियों का विवाद* चींटियों का विवाद पहुंचा थाने... चींटि पालने को लेकर हुआ विवाद... सिविल लाइन थाना क्षेत्र का मामला... राजधानी रायपुर के सिविल लाइन थाने में एक रोचक मामला सामने आया है। यहां चींटियों को पालने को लेकर मचा विवाद थाने पहुंच गया है. सिविल लाइन थाना क्षेत्र राजातालाब निवासी जाहिदा बेगम ने शिकायत की है कि उसके पड़ोसी ने चींटियां पाल रखी है जो उनके घर में घुस रही हैं। चींटियों को हटाने की बात कहने पर विवाद हो रहा। दरअसल, पड़ोसी जुम्मन खान ने चींटियों को पाल रखा है। विश्वास है कि चींटियों को पालने व शक्कर खिलाने से पाप धुलते हैं। चींटियों पालना उसका शौक भी बन गया है। उसने गली में अपने घर से चार कदम दूर एक किनारे पर दो सीमेंट व ईंट का छोटा सा टैंक बना रखा है। उसमें शक्कर डालकर रखता है। उसी में लगभग 80 हजार चींटियां रहती हैं. बता दे की इस टैंक के सामने ही शिकायतकर्ता महिला का घर बन रहा है। चींटियां वहां भी घुस रही हैं। महिला को डर है कि जब पूरी तरह से घर बन जाएगा तो चींटियों को झुंड सीधे उसके घर के अंदर जाएगा। महिला ने थाने में शिकायत देते हुए आरोप लगाया है कि चींटियों को हटाने के कहा गया तो जुम्मन और उसके बेटे ने विवाद किया।
  • आखिर ऐसा क्या हुआ कि विपक्ष के ये नेता ईडी के मकड़जाल में फंसे हैं और क्यों ये सरकार के रडार पर हैं?

    देश की राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टियों और बीती सरकारों में मंत्री रहे कई बड़े नेताओं पर इन दिनों प्रवर्तन निदेशालय (ED) का शिकंजा कसा हुआ है. फिर चाहे वह कांग्रेस पार्टी के राहुल गांधी (Rahul Gandhi) हो या फिर शिवसेना के संजय राउत . आखिर ऐसा क्या हुआ कि विपक्ष के ये नेता ईडी के मकड़जाल में फंसे हैं और क्यों ये सरकार के रडार पर हैं?

    हालिया मामलों में ईडी (ED) ने पश्चिम बंगाल के शिक्षक भर्ती घोटाले में गिरफ्तार किए गए पार्थ चटर्जी और उनकी करीबी अर्पिता मुखर्जी को 5 अगस्त तक हिरासत में रखा था. उधर दूसरी तरफ नेशनल हेराल्ड केस में कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से मंगलवार 26 जुलाई को ही ईडी की पूछताछ खत्म हुई है. यहां हम जानने की कोशिश करेंगे कि हाल के दिनों में किस-किस  विपक्षी नेताओं को या तो ईडी ने गिरफ्तार किया है या वो जांच के दायरे में हैं. 

    विपक्षी नेताओं का कहना है कि केंद्र सरकार अपने खिलाफ बढ़ते विरोध की वजह से विपक्षी नेताओं को निशाना बना रही है. अपने खिलाफ बढ़ते विरोध के स्वरों को दबाने के लिए केंद्र सरकार जांच एजेंसियों का बेजा इस्तेमाल कर रही है. 

    नेशनल हेराल्ड केस (National Herald Case) में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और सांसद राहुल गांधी भी ED के शिकंजे में है. इस मामले में ईडी कांग्रेस के इन दोनों नेताओं से पूछताछ की है. हाल ही में इस केस में कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से मंगलवार 26 जुलाई को ही ईडी की पूछताछ खत्म हुई. इन दोनों नेताओं पर नेशनल हेराल्ड न्यूज पेपर चलाने वाली कंपनी एसोसिएट्स जर्नल्स लिमिटेड (AJL) के अधिग्रहण में धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया गया है.

    ये केस यंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (Young India Private Ltd) नाम की नई कंपनी और एजेएल के बीच हुए सौदे का है. गौरतलब है कि यंग इंडिया में सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ ही ऑस्कर फर्नांडिस, सैम पित्रोदा, मोतीलाल वोरा और सुमन दुबे को डॉयरेक्टर बनाया गया था.

    कंपनी में 76 फीसदी शेयर सोनिया और राहुल गांधी के नाम है. बाकि के 24 फीसदी शेयर अन्य डॉयरेक्टर्स के पास है. कांग्रेस पार्टी ने इस नई कंपनी को 90 करोड़ रुपये कर्ज के तौर पर दिए और बाद में इसी कंपनी को अधिगृहित कर लिया. इसी को लेकर ईडी कांग्रेस के नेताओं पर मनीलॉड्रिंग (Money Laundering) का केस चला रही है. उधर दूसरी तरफ कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने अपने नेताओं पर चल रहे इस केस को लेकर भारी विरोध प्रदर्शन किया.

    संजय राउत भी मनी लॉन्ड्रिंग के दायरे में

    शिवसेना सांसद संजय राउत भी अपनी पत्नी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस की वजह से ईडी की जांच के दायरे में है. उन पर ईडी मुंबई के गोरेगांव उपनगर की पात्रा चॉल घोटाला (Patra Chawl Land Scam) में एक पुनर्विकास परियोजना में कथित अनियमितताओं पर जांच चला रही है. इस केस में गुरु कंस्ट्रक्शन कंपनी के निदेशक प्रवीण राउत को गिरफ्तार किया था. इसके बाद ही संजय राउत और उनकी पत्नी वर्षा राउत ईडी के निशाने पर आए थे. इन पर आरोप था कि प्रवीण ने 55 लाख रुपये वर्षा राउत के अकाउंट में डाले. इसी पैसे वर्षा राउत ने दादर में फ्लैट खरीदा था.

    इस मामले में आरोपों का सामना कर रहे  सांसद संजय राउत और उनकी पत्नी वर्षा को शुक्रवार पांच अगस्त को ईडी ने पूछताछ के लिए समन भेजा था. रविवार 31 जुलाई को शिवसेना सांसद संजय राउत को इस मामले में गिरफ्तार किया और उनके घर से 11.50 लाख रुपये बरामद किए गए अदालत ने राउत को चार दिन के रिमांड पर भेजने के ऑर्डर दिया. 

    TMC के पार्थ चटर्जी भी ईडी के दायरे में

    बेहाला दक्षिण से तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विधायक पार्थ चटर्जी और उनकी साथी अर्पिता मुखर्जी को 23 जुलाई को गिरफ्तार किया था. इन दोनों पर साल 2014 और 2021 के बीच पश्चिम बंगाल के सरकारी स्कूलों में करोड़ों रुपये के भर्ती घोटाले के आरोप पर ये कार्रवाई की गई थी.

    इस घोटाले के वक्त पार्थ चटर्जी राज्य के शिक्षा मंत्री (Teacher Recruitment Scam) थे. ईडी ने छापेमारी में अर्पिता मुखर्जी के घरों से 50 करोड़ से ज्यादा नकदी और सोना भी बरामद किया था. बीते हफ्ते टीएमसी ने चटर्जी को मंत्री पद से हटा दिया और पार्टी से भी सस्पेंड कर दिया था. पांच अगस्त को कोलकाता की अदालत ने पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी को की जमानत की दलीले सुनने से भी इंकार कर दिया. अदालत ने इन दोनों आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. 

    टीएमसी के सांसद अभिषेक भी ईडी के निशाने पर

    पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी भी ईडी (ED) के निशाने पर है. टीएमसी (TMC) सांसद अभिषेक पर प्रदेश में कोयले घोटाले के मामले में ईडी की जांच का सामना कर रहे हैं. ईडी ने सांसद बनर्जी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया है. टीएमसी सांसद बनर्जी पर आरोप है कि आसनसोल (Asansol) के निकट कुनुस्तोरिया और कजोरा इलाके में ईस्टर्न कोलफील्ड्स (Eastern Coalfields) की पट्टों पर दी गई खदानों में कोयले का अवैध खनन (Illegal Mining Of Coal) किया गया,इसमें सांसद बनर्जी का भी हाथ रहा.

    सीबीआई (CBI) के मुताबिक जांच में 1,300 करोड़ रुपये के वित्तीय लेन-देन का पता चला है. इस मामले में दो महीने पहले ही ईडी ने उनकी पत्नी रुजीरा बनर्जी से भी पूछताछ की. उधर पश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाला मामले में भी बीजेपी नेताओं ने सीएम ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के शामिल होने का आरोप लगाया है. 

    AAP नेता सत्येंद्र जैन पर भी ED का शिकंजा

    आम आदमी पार्टी (AAP) नेता सत्येंद्र जैन भी ईडी (ED) के शिकंजे में है. 30 मई को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 2017 में दर्ज किए एक केस के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में आप नेता जैन को गिरफ्तार किया था. उन पर दिल्ली में जमीन खरीदने में काले धन का पैसा लगाने का आरोप है. 

    फारूक अब्दुल्ला, जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस

    जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी की जांच के दायरे में हैं. यह केस जम्मू-कश्मीर क्रिकेट संघ (JKCA) में 113 करोड़ रुपये की अनियमितता का है. जब ये घोटाला हुआ था, तब अब्दुल्ला जेकेसीए के चीफ थे. मई में ईडी ने उनके खिलाफ एक एक्सट्रा चार्जशीट दायर की थी. इससे अलावा दिसंबर 2020 में ईडी ने अब्दुल्ला की 11.86 करोड़ रुपये की आवासीय और वाणिज्यिक संपत्तियों की कुर्की की थी. लेकिन अब्दुल्ला इन आरोपों को नकारते रहे हैं.

    अजित पवार, NCP

    एनसीपी के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री अजित पवार (Ajit Pawar) अपने परिवार के सदस्यों से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी की जांच के घेरे में हैं. ED ने आरोप लगाया है कि कई बेनामी संपत्तियों में अवैध धन का इस्तेमाल किया गया था, जिन्हें हाल ही में कुर्क किया गया था. एनसीपी के ही नेता नवाब मलिक (Nawab Malik) को ईडी ने गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम और उसके कुछ नजदीकी साथियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्त में लिया था. मलिक के खिलाफ ईडी ने अदालत में पांच हजार से अधिक पृष्ठों की चार्जशीट दायर की थी. हालांकि मलिक ने इन आरोपों को नकारा था. इन दिनों एनसीपी के नेता जेल में हैं.

    पंजाब के पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी

    पंजाब के पूर्व सीएम और कांग्रेस नेता चरणजीत सिंह चन्नी से भी ईडी के निशाने पर है. साल 2018 में उनके भतीजे भूपिंदर सिंह हनी के अवैध रेत खनन मामले में पूछताछ के लिए ईडी उन्हें भी तलब कर चुकी है. पंजाब के चुनावी अभियान में अवैध रेत खनन का मुद्दा सबसे चर्चित मुद्दों में से एक था.

  •  भ्रष्टाचारियों - रिश्वतखोरों के लिए 2000 के नोट वरदान साबित हुए - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पाती

    माननीय आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी,

    जो नोटों का पहाड़ ईडी द्वारा इकट्ठा किया जा रहा है चाहे वह पश्चिम बंगाल की बात हो चाहे वह उत्तर प्रदेश के कन्नौज की बात हो चाहे वह पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के विधायकों से मिला हो, इन सब के लिए आप ही जिम्मेदार हैं, क्योंकि नोटबंदी के समय आपने 1000 के नोट को बंद करके 2000 के नोट चालू किए - यही 2000 के नोट भ्रष्टाचारियों - रिश्वतखोरों के लिए वरदान साबित हुए | उनकी काली कमाई को संग्रहण करने की क्षमता बढ़ गई | जहां एक करोड़ के लिए अगर 1 फुट की जगह की जरूरत पड़ती थी तो उसी 1 फुट की जगह में उन्हें 2 करोड रुपए रखने की सुविधा मिल गई |


    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी अगर यदि आप बड़े नोटों को जैसे कि तत्कालीन समय में प्रचलित 1000 और 500 के नोटों को बंद कर 100 और 200 के नोट ही चलन में रखते तो काला धन इकट्ठा करने वालों को परेशानियों का सामना करना पड़ता |  कार में भी 1 - 2 करोड रुपए परिवहन में असुविधा होती !

    परंतु आपके द्वारा 1000 के नोट बंद कर 2000 के नोट चालू करने से काला धन इकट्ठे करने वालों को सुविधा हो रही है और यही कारण है कि ईडी द्वारा छापे के दौरान करोड़ों - अरबों रुपए के नोट ढेर की शक्ल में बरामद हो रहे हैं|  इन्हीं 2000 के नोटों की जगह यदि सौ सौ के नोट होते तो यह जमाखोरी और काले धन को इकट्ठा करने की संख्या सिर्फ लाखों में होती, अर्थात भ्रष्टाचारियों . रिश्वतखोरों को इतने ही नोटों को रखने के लिये एफसीआई जैसे बड़े बड़े गोदाम बनाने पड़ते जो संभव ही नहीं नामुमकिन  होता |


    अभी भी अगर आप दिल बड़ा करके एक बार 2000 और 500 के नोटों को बंद करते हैं तो देश में काला धन जमा करने वालों के ऊपर पहाड़ टूट पड़ेगा, साथ ही भविष्य में रिश्वतखोरों - भ्रष्टाचारियों और काला धन जमा करने वालों की संख्या नाम मात्र होगी |

  • *तिल्दा पटवारी संस्कृति शर्मा के द्वारा भूमि प्रमाणीकरण के लिए १०००० रूपये की मांग - स्टिंग आया सामने*
    तिल्दा पटवारी संस्कृति शर्मा के द्वारा भूमि प्रमाणीकरण के लिए १०००० रूपये की मांग रायपुर जिले का तिल्दा तहसील के अंतगत तिल्दा पटवारी हल्का नंबर ८ पटवारी संस्कृती शर्मा के द्वारा अर्पिता दत्ता पति सुजोय दत्ता तिल्दा के निवासी ने सासाहोली स्थित भूमि जिसमे १५०० वर्ग फुट भूमि क्रय की है जिस भूमि का रजिस्ट्री के उपरांत प्रमाणीकरण के लिए मेरे पति सुजॉय के द्वारा पटवारी के कर्मचारी सतीश चौधरी pata पता मौली मंदिर के पास तिल्दा को ₹5000 नगद दिया तथा साथ में रजिस्ट्री की मूल प्रति प्रदान की गई इसके पश्चात सतीश चौधरी के द्वारा मेरे पति को फोन कर पटवारी ऑफिस में बुलाया गया जहां पर ₹5000 अतिरिक्त की राशि की मांग की जो कि उक्त कार्य होने के पश्चात फिर से दूसरे रजिस्ट्री जिसमें मेरे पिता विद्युत मजूमदार के द्वारा भूमि नामांतरण के लिए सतीश चौधरी के द्वारा ₹5000 की मांग की गई जिस पर मेरे पति के द्वारा सतीश चौधरी को 5000 को प्रदान किया गया तथा रजिस्ट्री की मूल प्रति प्रदान कर कुछ समय के बाद मेरे द्वारा कॉल करने पर पटवारी ऑफिस पहुंचने की बात कही तथा कुछ दिनों के बाद सतीश चौधरी के द्वारा मेरे पति को फोन कर पटवारी कार्यालय बुलाया जिस पर तत्पर पटवारी संस्कृति शर्मा के द्वारा ₹5000 की और मांग की गई जिस पर मेरे पिता ने नामांतरण के लिए इतना अधिक राशि नहीं लगता है की बात कही तुम लोग जबरदस्ती शासकीय कार्य होने के बाद भी जहां पैसा नहीं लगने पर भ्रष्टाचार के रूप में खुद के रूप में पैसा लेने की बात कही जिस पर पटवारी के द्वारा पता में आकर आकर मेरे पिता को कई अपशब्द कहे तथा मेरे पिता के ऊपर उक्त रजिस्ट्री की मूर्ति को उसके मुंह पर दे मारा जो कि उक्त कृत्य अश्वनी है तथा अशोभनीय है तथा पटवारी के द्वारा शासकीय शुल्क से अतिरिक्त की राशि की वसूली मुझ से की गई है तथा मेरे साथ साथ और कई भी किसानों से जिनसे बटवारा नामा के लिए ₹40000 तथा भूमि नामांतरण भूमि के प्रमाणीकरण भूमि के नक्शा बटन के लिए अपना एजेंट नियुक्त कर कई हजारों रुपए की वसूली प्रतिमाह में लगभग कई लाखों की वसूली कर रहे हैं इससे शासन प्रशासन के कार्यों को आम जनता के लिए सुविधाजनक ना कर भ्रष्टाचार करते हुए अपने जेब को भरते जा रहे हैं तथा मेरी शासन से यह गुहार है कि क्या पटवारी अपने अंदर कोई कर्मचारी नियुक्त कर सकता है पर अगर नियुक्त कर सकता है तो उसकी पद उसकी नियुक्ति कैसे होगी रकम उगाही कैसे कैसे की जा रही है क्या सोच से परे है तथा उक्त प्रकरण के संबंध में इसकी शिकायत मेरे द्वारा अनुविभागीय अधिकारी राजस्व से किया गया भ्रष्टाचारी पटवारी के साथ-साथ इसके अतिरिक्त कर्मचारी सतीश चौधरी के ऊपर भी कार्यवाही होना चाहिए क्योंकि कोई भी अधिनस्थ कर्मचारी शासकीय दस्तावेजों में अपनी लिखित हस्ताक्षर त्रुटि सुधार कैसे कर सकता है क्या सब समझ से परे है इसमें बड़े से बड़े अधिकारी मिले हुए हैं जिसकी खोजबीन अवश्य की जाए तथा मेरे तरह कई गरीब किसान मध्यमवर्ग ई महिलाएं पुरुषों की जेब से शासन से अतिरिक्त राशि उगाही ना हो तरह तिल्दा में कई पटवारियों के द्वारा भी घुस लिया जाता है संबंध में मेरे द्वारा आम किसानों से बटवारा नामा, भूमि सीमांकन, भूमि के नक्शा दुरुस्ती के लिए किसानों से हजारों रुपए लिए गए हैं तथा खासकर दारु भट्टी के सामने सासाहोली भूमि मालिकों से नक्शा दुरुस्ती एवं भूमि के नाप के लिए कई हजारों रुपए दिए हुए हैं तथा साथ ही साथ तिल्दा और सासाहोलीहोली से लगा हुआ सरहद जहां पर कई जमीन को जहां पर कई लाखों करोड़ों की शासकीय भूमि को पैसे वाली पार्टी को दे दिया गया है इसके बारे में भी विगत कई माह से उक्त मार्ग के लिए वार्ड क गणमान्य नागरिक गण भी उक्त संबंध में मौखिक अपत्ति किए थे परंतु उसका आज दिनांक तक कोई भी हल नहीं निकला है | CG 24 News
  • नोट गिनने के लिए मंगाई गईं 5 मशीनें टॉयलेट में भी छिपा था खजाना

    पश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाले (SSC Scam) की जांच में जुटी प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम नोटों का एक और जखीरा बरामद हुआ है. नए खजाने से ईडी ने 28 करोड़ 90 लाख रुपये और लगभग 5 किलो सोना जब्त किया है. पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी की काली कमाई के रहस्यलोक का दूसरा दरवाजा खुल गया है. पहले टॉलीगंज और अब बेलघरिया. यह अर्पिता मुखर्जी का दूसरा फ्लैट है जहां से गुलाबी नोटों का अंबार बरामद हुआ है. नोटों को प्लास्टिक की थैली में भरकर रखा गया था.

    इस कैश को गिनने के लिए कई मशीनों को मंगवाया गया. यहां से ईडी को 28 करोड़ 90 लाख रुपये कैश मिला था, जिसकी गिनती की गई. लगभग 5 किलो गोल्ड भी बरामद हुआ है. अर्पिता मुखर्जी के नाम पर ऐसे दो फ्लैट हैं इसमें एक है ब्लाक-5 और रहस्य लोक से मिले नए खजाने का नया पता बेलघरिया के रथाला इलाके का ब्लॉक नंबर-5 है. पश्चिम बंगाल शिक्षक घोटाले के मास्टर माइंड माने कहे जाने वाले मंत्री पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी ईडी कस्टडी में हैं. 

    नोट गिनने के लिए मंगाई गईं 5 मशीनें

    प्रवर्तन निदेशालय की टीम के लिए पार्थ चटर्जी का मुंह खुलवाना मुश्किल हो रहा है, लेकिन अर्पिता मुखर्जी काली कमाई का राज लगातार खोल रही है. मिली जानकारी के मुताबिक मुखर्जी ने ही ईडी को कोलकाता के आसपास की अपनी संपत्ति की जानकारी दी है. ED को अर्पिता के एक और फ्लैट से बेशुमार कैश मिला, जिसके बाद ED के अफसरों ने बैंक के अधिकारियों को फ्लैट पर बुलाया. नोटो का जखीरा इतना बड़ा था कि इसके लिए नोट गिनने की पांच मशीने मंगाई गईं.

  • द्रौपदी मुर्मू ने देश की 15वीं राष्ट्रपति के रूप में शपध ले ली है. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एनवी रमना (Chief Justice NV Ramana) ने उन्हें राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई. द्रौपदी मुर्मू (Draupadi Murmu) देश की दूसरी महिला राष्ट्रपति हैं. वह देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन होने वाली पहली आदिवासी महिला (tribal woman) और स्वतंत्र भारत में पैदा होने वाली पहली राष्ट्रपति हैं.

    द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद अपने पहले औपचारिक अभिभाषण के दौरान वहां मौजूद गणमान्य लोगों को संबोधित किया. अपने अभिभाषण ने कोरोना, डिजिटल, शिक्षा कई अहम मुद्दों को लेकर संबोधन दिया. 

    द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद संसद के सेंट्रल हॉल में अपना पहला औपचारिक भाषण दिया. इस दौरान उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति के पद तक पहुंचना, मेरी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, ये भारत के प्रत्येक गरीब की उपलब्धि है. मैं देश की ऐसी पहली राष्ट्रपति भी हूं जिसका जन्म आज़ाद भारत में हुआ है." राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू स्वतंत्रता संग्राम में आदिवासी योगदान को सराहना करते हुए कहा, "संथाल क्रांति, पाइका क्रांति से लेकर कोल क्रांति और भील क्रांति ने स्वतंत्रता संग्राम में आदिवासी योगदान को और सशक्त किया था."