Top Story
  • हवाई या रेलवे सफर  कर आने वाले यात्री  रहेंगे क्वारेंटिंन सेंटर में -छत्तीसगढ़ शासन
    क्वारेंटिंन सेन्टर के लिए  5 भवनों का  अधिग्रहण
     
    सेन्टरो की आवश्यक व्यवस्था हेतु नोडल अधिकारी नियुक्त
     

          रायपुर 24 मई 2020/  रायपुर शहर में रेल्वे या हवाई जहाज से यात्रा कर आने वाले यात्रियों को शासन के आदेशानुसार क्वारेंटिंन किया जाना आवश्यक है। इस तारतम्य में छत्तीसगढ़ शासन के आदेशानुसार प्रभारी कलेक्टर  सौरभ कुमार ने महामारी् नियंत्रणा एक्ट 1897 के तहत  क्वारेन्टाइन सेन्टर हेतु 5 भवनों को तत्काल प्रभाव से अधिग्रहित किया है। इन केंद्रों में आवश्यक व्यवस्था बनाये रखने के लिये अधिकारियों को नियुक्त भी किया है।

    जिन भवनों को कोरन्टीन सेंटर के लिए अधिग्रहित और अधिकारियों को जिम्मेदारी सौप गया है , उनके नाम इस तरह है।

    जैनम मानस भवन (पैलेस) व्ही.आई.पी. रोड, रायपुर  के लिए अधिकारी एस पी गोस्वामी, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी  और राकेश द्विवेदी, सहायक अभियंता, लोक निर्माण विभाग है।

    निरंजन धर्मशाला, वी.आई.पी. रोड, रायपुर में डी एस चौहान, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी और आशीष कुमार दुबे, सहायक अभियंता, कार्यालय मुख्य अभियंता, राष्टीय राजमार्ग  है।

    मनुआस रियाल्टी. रिंग रोड नं.-01 अग्रोहा कालोनी, चंगोराभाठा, रायपुर  के लिए अधिकारी बी एल देवांगन, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी  और एस. डी जोद्दार, सहायक अभियंता, लोक निर्माण विभाग, प्रमुख अभियंता कार्यालय, रायपुर है।

     अग्रसेन धाम व्ही.आई.पी. रोड, फुंडहर, रायपुर में दिनेश शर्मा, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी और गोपी नाथ राम, सहायक अभियंता, लोक निर्माण विभाग, है।

     सलासार रायपुर में डी.के, नेताम, संयुक्त संचालक, पशु चिकित्सा सेवायें रायपुर और आलोक चांडक, सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी, आरंग, रायपुर है।

          इन परिसरों पर भोजन तथा साफ-सफाई की व्यवस्था नगर पालिक निगम रायपुर द्वारा की जायेगी तथा आवश्यक सेवाएं हेतु सहयोग पर्यटन विभाग द्वारा किया जायेगा। इसके लिए नोडल अधिकारी बी.आर. अग्रवाल, अधीक्षण अभियंता, नगर पालिक निगम रायपुर रहेंगे।

  • न्याय योजना का लाभ रमन सिंह, धरमलाल कौशिक को मिलने से भाजपा क्यों तिलमिला रही है - कांग्रेस
    रमन सिंह के शासनकाल में योजनाएं बनती थी लेकिन न्यूज़ चैनल विज्ञापन तक सीमित रहती थी
     
    न्याय योजना का लाभ रमन सिंह, धरमलाल कौशिक को मिलने से भाजपा क्यों तिलमिला रही है
     
    न्याय योजना का लाभ किसानों को मिलने से भाजपा के किसान विरोधी मंसूबे पर फेरा पानी
     
    मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सरकार की योजना बिना भेदभाव सभी वर्गों को लाभ पहुंचाती है 
     
    रमन सरकार के योजनाओं की जमीनी हकीकत पर कांग्रेस के सवाल उठाने से भाजपा कहती थी योजना का ना ले लाभ
     
    रायपुर/24 मई 2020। राजीव गांधी किसान न्याय योजना की पहली किस्त प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह विधानसभा में नेताप्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक के खाते पर पहुंचने की सार्वजनिक हुई सूचना से तिलमिलाये भाजपा पर कांग्रेस ने कड़ा प्रहार किया। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि रमन सिंह सहित भाजपा से जुड़े किसानों के खाते में न्याय योजना का पैसा पहुँचना,भाजपा के न्याय योजना के खिलाफ दुष्प्रचार करने की राजनीतिक मंसूबे पर पानी फेर दिया है। भाजपा द्वारा न्याय योजना के खिलाफ  तैयार की गई  झूठी मनगढ़ंत कहानियां सब का सत्यानाश हो गया है। राजीव गांधी किसान न्याय योजना बिना किसी भेदभाव के धान बेचने पंजीकृत किसानों को लाभ पहुंचा रही है।  मक्का और गन्ना की पैदावार करने वाले किसान भी लाभान्वित हो रहे हैं।आने वाले दिनों में दलहन और तिलहन पैदा करने वाले किसान के साथ भूमिहीन किसान भी न्याय योजना से लाभ पाएंगे।
    प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि रमन सिंह के शासनकाल में किसान, गरीब, मजदूर, महिलाएं, छात्रों के नाम से सरकारी योजनाएं बनती थी लेकिन वह कागजों से बाहर धरातल पर हितग्रहियों तक ठीक से पहुँच नही पाती थी मात्र बड़े-बड़े होर्डिंग्स समाचार पत्रों के मुखपृष्ठ और न्यूज़ चैनल विज्ञापन तक सीमित रहती थी।कांग्रेस विपक्ष में रहते जब रमन सरकार से सरकारी योजनाओं के संबंध में सवाल जवाब करती थी उस दौरान भाजपा के नेता कांग्रेस को योजनाओं का लाभ ना लेने की नसीहत देते थे? 
    प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने रमन सिंह धरमलाल कौशिक को न्याय योजना की राशि मिलने से तिलमिलाए भाजपा से सवाल किये।क्या भाजपा को रमन सिंह धरमलाल कौशिक के किसान होने पर शक है? क्या भाजपा चाहती है रमन सिंह धरमलाल कौशिक को न्याय योजना का लाभ नही लेना चाहिये था ? रमन सिंह धरमलाल कौशिक सहित भाजपा से जुड़े किसानों को न्याय योजना का लाभ मिलने से बौखलाई भाजपा क्या भाजपा नेताओं पर अनुशात्मक कार्यवाही करेगी? कांग्रेस की सरकार अपने वादे को पूरा कर रही है किसानों की कर्ज माफी, सिंचाई शुल्क माफ,किसानों की अधिग्रहित जमीन लौटना, किसानों को धान की कीमत 2500 देना। तब भी भाजपा का रवैया किसान विरोधी ही है भाजपा हमेशा की तरह आज भी किसानों के विरोध में ही खड़ी है। राजीव गांधी किसान  न्याय योजना छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि देश के अन्य राज्यों के लिए भी मॉडल है। मोदी सरकार स्वामीनाथन कमेटी के सिफारिश के अनुसार लागत मूल्य का डेढ़ गुना समर्थन मूल्य नहीं दे रही है। ऐसे समय में उत्तर प्रदेश बिहार झारखंड तमिलनाडु आंध्र प्रदेश राजस्थान महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों को भी राजीव गांधी किसान न्याय योजना को अमल में लाकर किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत और कृषि को लाभकारी बनाना चाहिए।
    प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि मोदी सरकार के द्वारा किसानों से नाम से शुरू की गई किसान सम्मान निधि किसानों में भेदभाव करने का जीता जागता उदाहरण है पहली बार में शुरू हुई किसान सम्मान निधि में 5 एकड़ तक के किसानों को हितग्रही बनाया गया था बाद मे उसमें अन्य किसानों को जोड़ा गया। लेकिन किसान सम्मान निधि योजना का लाभ धरातल में शत प्रतिशत किसानों को नहीं मिल पा रहा है बार-बार योजना में नियम शर्ते जोड़कर किसानों के साथ भद्दा मजाक मोदी सरकार कर रही है।
  • झीरम हत्याकांड की जांच को भाजपा की सरकारें क्यों बाधित करती हैं ? - कांग्रेस
    झीरम हत्याकांड की सातवीं बरसी पर कांग्रेस का सवाल
     
     
    झीरम हत्याकांड की जांच को भाजपा की सरकारें क्यों बाधित करती हैं ?
     
     
    रायपुर/24 मई 2020। झीरम की घटना को 7 साल पूरे होने पर प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग प्रमुख शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि झीरम की दुखद घटना के पीछे की साजिश उजागर होना ही चाहिए। 
     
    झीरम हत्याकांड की सातवीं बरसी पर प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग प्रमुख शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि  झीरम मामले को लेकर सवाल जनमानस में लगातार उठते रहे हैं ।
     
    छत्तीसगढ़ सरकार को झीरम मामले की जांच से क्यों रोका जा रहा है ?
     
    झीरम मामले में जिन महत्वपूर्ण जानकारियों के मिलने की खबरें एनआईए के हवाले से लगातार आती रही, एनआईए ने चार्जशीट में उन जानकारियों का उल्लेख तक क्यों नहीं किया ?
     
    झीरम मामले की जांच की हर कोशिश को पहले भाजपा की राज्य सरकार और फिर भाजपा की केंद्र सरकार ने क्यों बाधित किया ?
     
    छत्तीसगढ़ की जनता, हम कांग्रेस के लोग और शहीदों के परिजन अगर यह चाहते हैं कि झीरम की साजिश उजागर हो और  झीरम के गुनाहगारों को सजा मिले तो इसमें गलत क्या है ? 
     
    झीरम हत्याकांड की जांच को भाजपा की ही सरकारें क्यों बाधित करती हैं ?
     
    प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग प्रमुख शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि  झीरम की सातवीं बरसी पर कांग्रेस केंद्र सरकार से मांग करती है कि छत्तीसगढ़ सरकार को झीरम मामले की जांच करने से न रोका जाए और एनआईए जब अपनीअंतिम रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत कर चुकी है तो एनआईए के पास उपलब्ध अभी तक के जांच के दस्तावेज छत्तीसगढ़ सरकार को आगे की जांच के लिए सौंप दिये जायें।
     
    प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग प्रमुख शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि  2018 में कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव  झीरम मामले की जांच और दोषियों को सजा दिलाने पर लड़ा है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार बनते ही झीरम के मामले की जांच की पहल की लेकिन कांग्रेस की सरकार बनने के बाद झीरम मामले की जांच के हर कोशिश को भाजपा की केंद्र सरकार  के इशारों पर बाधित किया गया है।
     
    प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग प्रमुख शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि लोकसभा चुनाव 2014 के चुनाव प्रचार के लिए नरेंद्र मोदी जब छत्तीसगढ़ आए थे तो धमतरी की सभा में उन्होंने कहा था कि भाजपा की सरकार बनने पर झीरम की जांच को अंजाम तक पहुंचाया जाएगा और झीरम के आरोपियों को सजा मिलेगी।
     
    प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग प्रमुख शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि लेकिन मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने के बाद तो जांच की दिशा ही बदल गई। पहले भाजपा की राज्य सरकार ने एनआईए की जांच में सहयोग नहीं किया और केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद एनआईए को षडयंत्र की जांच नहीं करने दी गयी।
     
    2013 में विधानसभा चुनाव के पहले कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पूरे प्रदेश का भ्रमण करने के बाद बस्तर पहुंची थी और सुकमा के बाद यह यात्रा राजधानी रायपुर आने वाली थी जहां परिवर्तन यात्रा का समापन होता। 25 मई को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर सुकमा से वापस आते समय झीरम घाटी में हमला हुआ और तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल विद्याचरण शुक्ल महेंद्र कर्मा उदय मुदलियार दिनेश पटेल योगेंद्र शर्मा गोपी माधवानी अभिषेक गोलछा सहित कांग्रेस के अनेक नेता और सुरक्षाकर्मी इस हमले में शहीद हुए।
     
    प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग प्रमुख शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि  घटना के बाद रात को कांग्रेस नेता राहुल गांधी और दूसरे दिन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी जी भी रायपुर पहुंचे। झीरम की घटना से पूरे प्रदेश के लोग और कांग्रेस जन आहत हुए थे। एनआईए की जांच स्थापित की गई। प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा एनआईए जांच के लिए नियुक्त नोडल अधिकारियों ने एनआईए जांच में सहयोग नहीं किया जिस बात को तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष डॉ चरणदास महंत और कांग्रेस विधायक दल के नेता रविंद्र चौबे ने अनेक बार उठाया था ।
     
  • सुनील सोनी को लोकसभा चुनाव में वोट सिर्फ हवाई जहाज में उड़ने वालों ने दिया था क्या ? - काँग्रेस
    कांग्रेस का बड़ा सवाल : क्या सुनील सोनी को लोकसभा चुनाव में वोट सिर्फ हवाई जहाज में उड़ने वालों ने दिया था ? सांसद सुनील सोनी बताए कि घरेलू विमान सेवा बिना फिजिकल डिस्टेंसिंग और बिना क्वॉरेंटाइन नियमों की अनिवार्यता के क्यों चालू होगी ? आपदा काल के नियम भी गरीबों और अमीरों के लिए अलग-अलग क्यों? दुर्घटना, अन्य बीमारी और सर्पदंश जैसे कारणों से होने वाली मौत को कोरोना से जोड़कर डर और भय का वातावरण बनाने में जुटे हैं छत्तीसगढ़ के भाजपा नेता! रायपुर/23 मई 2020 । विमानों में चलने वालों और रेल यात्रा सड़क यात्रा करने वालों में दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि क्या सुनील सोनी को लोकसभा चुनाव में वोट सिर्फ हवाई जहाज में उड़ने वालों ने दिया था ? भारतीय जनता पार्टी के सांसद सुनील सोनी आपदा काल में भी दोहरे मानदंड अपनाते हुये कोरी बयानबाजी और दिखावे की राजनीति कर रहे हैं। एक तरफ़ तो विदेशों में फंसे छात्रों के लिए केंद्र के बजाय राज्य सरकार को पत्र लिखते हैं, दूसरी ओर देश में सवा लाख कोरोना संक्रमण के आंकड़े पार होने पर घरेलू विमान सेवा शुरू करने एयरपोर्ट का जायजा लेने जाते हैं। प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने पूछा है कि सोनी जी यह बताएं कि व्यावहारिक रूप से क्या इस स्थिति में पहुंच गए हैं की अंतरराज्य परिवहन सेवा चालू किया जाए? क्या इससे सामुदायिक प्रसार बहुत तेजी से नहीं फैलेगा? श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से आने वाले कामगार भाइयों और बहनों के लिए जब 14 दिन क्वारंटाइन सेंटर में रहना अनिवार्य है तो फिर फ्लाईट से आने वालों के लिए क्यों नहीं? प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि देश में जब कोरोना संक्रमण के मामले 519 थे तब घरेलू विमान सेवा और रेलगाड़ियां बंद की गई। और वर्तमान में जब करोना के सामुदायिक प्रसार के मामले तेजी से आने लगे हैं तो अंतर राज्य परिवहन खोला जाना क्या प्रदेश की जनता के स्वास्थ्य और उनके जीवन से खिलवाड़ नहीं है? प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि श्रमिक स्पेशल ट्रेनों, यात्री और छात्रों के साथ ही विशेष बसों से आने वाले लोगों के लिए फिजिकल डिस्टेंसिंग का नियम है लेकिन 25 मई से आरंभ हो रही घरेलू विमान सेवा में 1 सीट छोड़ने का नियम भी नहीं रखा गया और ना ही 14 दिन के क्वॉरेंटाइन का पालन करना इन हवाई यात्रियों के लिए अनिवार्य होगा। प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि अमीर और गरीबों के बीच इतना भेदभाव क्यों? पूर्व में भी इसी तरह के कारणों से कोरोना का प्रसार हुआ है। यदि विदेशों से आने वाले लोगों को एयरपोर्ट पर ही उचित जांच और कोरनटाइन कर दिया गया होता तो पूरे देश में लॉक डॉउन लागू करके सभी को कैद में रखने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती! प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में अपनी राजनीतिक जमीन खिसकता हुआ देखकर भाजपा नेता गलत बयानी कर रहे हैं। देश में जहां कोरोना संक्रमण से मौत के मामले 3600 से अधिक पर पहुंच गया है, वहीं छत्तीसगढ़ सरकार की दूरदर्शिता, सही समय पर लिए गए सही निर्णय, प्रदेश की जनता के संकल्प और जागरूकता तथा स्वास्थ्य, सफाई और सुरक्षा अमलों के अथक प्रयासों से छत्तीसगढ़ में अब तक एक भी मौत कोरोना संक्रमण के कारण नहीं हुई है। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को यही तथ्य गले नहीं उतर रही है। प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि प्रदेश की जनता डॉक्टरों, स्वास्थ्य कर्मियों, शासकीय कर्मचारियों, अधिकारियों और पुलिस के जवानों और पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ सरकार के कार्यों की प्रशंसा के बजाय हतोत्साहित करने झूठे और भ्रामक तथ्य गढ़ने में भाजपा नेता लगे हुये हैं। प्रदेश में होने वाले दुर्घटना अन्य कारणों से आत्महत्या के प्रकरण अन्य बीमारी से होने वाली मौत और सर्पदंश जैसे मामलों को कोरोना से जोड़कर डर और भय फैलाने का उचित प्रयास भारतीय जनता पार्टी के नेताओं द्वारा किया जा रहा है!
  • सरकार एग्रो एमएसएमई के नए सेक्टर का गठन करेगीं - गड़करी

    सरकार एग्रो एमएसएमई के नए सेक्टर का गठन करेगीं - गड़करी
    व्यापारियों को एमएसएमई के सेवा क्षेत्र में शामिल किया जाएगा  

    काॅन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर परवानी, कार्यकारी अध्यक्ष मंगेलाल मालू, कार्यकारी अध्यक्ष विक्रम सिंहदेव, महामंत्री जितेंद्र दोषी, कार्यकारी महामंत्री परमानंद जैन, कोषाध्यक्ष अजय अग्रवाल एवं प्रवक्ता राजकुमार राठी ने बताया कि केंद्रीय सड़क परिवहन एवं एमएसएमई मंत्री श्री नितिन गडकरी ने आज कॉन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) की 57 वी वीडियो कांफ्रेंस को सम्बोधित करते हुए कहा की कोविड  लॉकडाउन के बाद देश में व्यापार करने का तौर तरीका पूरी तरह से परिवर्तित हो जाएगा और नवीन दृष्टि , उद्यमिता, ज्ञान, डिजिटल प्रौद्योगिकी देश में भविष्य के व्यापार के चार बुनियादी स्तम्भ होंगे और इसलिए भारत के व्यापारियों को पारंपरिक व्यापारिक प्रणाली के स्थान डिजिटल प्रणाली को बहुत तेजी से अपनाना होगा । देश के सभी राज्यों के 100 से अधिक प्रमुख व्यापारी नेता वीडियो कांफ्रेंस में शामिल थे ।
    श्री गडकरी ने व्यापारियों को एमएसएमई क्षेत्र के तहत शामिल करने पर उन्होंने  इस मामले को सकारात्मक रूप से देखने ला आश्वासन देते हुए कहा की सरकार द्वारा व्यापरियों को सहायता अवश्य मिलनी चाहिए !उन्होंने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए यह अधिक महत्वपूर्ण है कि व्यावसायिक समुदाय बेहतर व्यावसायिक संभावनाओं की खोज करते रहें और सर्वश्रेष्ठ व्यापार करने के लिए उन्नत तकनीक से युक्त हों। व्यापारियों के अर्थव्यवस्था में योगदान की सराहना करते हुए उन्होंने विशेष रूप से लॉकडाउन अवधि के दौरान आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बनाए रखने के बारे में व्यापारी समुदाय और कैट  के प्रयासों की सराहना की और कहा कि यह राष्ट्र के प्रति उनकी असीम भक्ति को दर्शाता है।
    कोरोना की  वर्तमान स्थिति के बारे में बात करते हुए श्री गडकरी ने कहा कि देश अपनी सबसे अधिक विकट समस्या का सामना कर रहा है जिसने अर्थव्यवस्था को काफी हद तक बर्बाद कर दिया है। वर्तमान स्थिति से उबरने के लिए बाजार में अर्थ की बेहतर तरलता का प्रवाह बहुत आवश्यक है। किसानों की क्रय शक्ति बढ़ाने की जरूरत है और कृषि क्षेत्र में नई तकनीक को अपनाना समय की जरूरत है।
    श्री गडकरी ने व्यापारियों से कहा कि सरकार ष्एग्रो एमएसएमईष् की एक नई श्रेणी बनाने की सोच रही है, जिसमें ग्राम पंचायत स्तर पर एमएसएमई उद्योग लगेंगे और ऐसे उद्योग संबंधित गाँव के विकास में योगदान देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार के पास राजमार्गों के दोनों ओर स्मार्ट गांव, स्मार्ट सिटी, औद्योगिक क्लस्टर और अन्य सुविधाएं बनाने की योजना है। इस तरह की पहल से न केवल लॉजिस्टिक्स की लागत कम होगी, बल्कि बिजली और श्रम की लागत भी निम्न स्तर पर रहेगी और एमएसएमई प्रतिस्पर्धी कीमतों पर गुणवत्ता के सामान का उत्पादन कर सकते हैं।
    व्यापारियों को सलाह देते हुए, श्री गडकरी ने कहा कि कोविड लॉकडाउन के बाद व्यापार को पुन चालू  करने के लिए व्यापारियों को अपने व्यवहार परिवर्तन की बहुत आवश्यकता है। सकारात्मकता और आत्मविश्वास के तत्वों को व्यापारियों और उद्यमियों के बीच विकसित करने की आवश्यकता है, लोगों की हताशा समाप्त होनी चाहिए और एक सामूहिक और सहयोगात्मक दृष्टिकोण के साथ हम निश्चित रूप से कोरोना की लड़ाई जीतेंगे

     

  • यह क्या हो रहा है --  इको आ रहा है यहां पर - राहुल गांधी
    राजीव गांधी किसान न्याय योजना के शुभारंभ अवसर पर छत्तीसगढ़ से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल एवं उनके मंत्रिमंडल के सभी सहयोगीयों के साथ प्रदेश के प्रमुख अधिकारियों की उपस्थिति में राजीव गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर इस योजना की शुरुआत की गई | जिसमें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी एवं राहुल गांधी भी जुड़े | कार्यक्रम की शुरुआत में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने किसानों के धान खरीदी के अंतर की राशि का भुगतान करने की तथा इस बड़ी योजना के बारे में विस्तार से 6 मिनट 24 सेकंड तक जानकारी दी | तत्पश्चात उन्होंने कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी से आशीर्वचन देने के लिए निवेदन किया, इस दौरान स्क्रीन पर कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी नजर आई और वह अपने पास खड़े किसी सहयोगी से कुछ पूछती समझती रही | 50 सेकंड के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राहुल गांधी से संबोधन के लिए पुनः निवेदन किया | 23 सेकंड बाद राहुल गांधी स्क्रीन पर प्रकट हुए और उन्होंने पूछा की सुनाई दे रहा है क्या ? - मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा जी सर -- 6 सेकंड बाद राहुल गांधी को कहा नमस्कार सर और उसके बाद इको डिस्टरबेंस शुरू हो गया, 7 सेकंड बाद राहुल गांधी ने कहा आवाज नहीं आ रही है - तब कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुरजेवाला ने कहा बघेल जी जरा वॉल्यूम इको है, थोड़ा कम करवाएं जो होस्ट कर रहा हैे उनसे बोल कर तो बहुत मेहरबानी होगी , तब 20 सेकंड बाद राहुल गांधी ने संबोधन शुरू किया भूपेश जी नमस्कार, सोनिया गांधी जी कांग्रेस प्रेसिडेंट इतना बोलते ही इको में कांग्रेस प्रेसिडेंट - कांग्रेस प्रेसिडेंट की आवाज आती है - तब राहुल गांधी बोलते हैं यह क्या हो रहा है -- तब फिर डिस्टरबेंस को सुधारने की कोशिश चलती है और 44 सेकंड बाद राहुल गांधी सुरजेवाला से कहते हैं कैन यू हियर मी तब सुरजेवाला कहते हैं जी सर गो अहेड -- तब राहुल गांधी फिर कहते हैं इको आ रहा है यहां पर , फिर इको डिस्टरबेंस को सुधारने की कोशिश होती है - 21 सेकंड बाद राहुल गांधी पुनः संबोधन शुरू करते हैं - कांग्रेस प्रेसिडेंट सोनिया गांधी जी, चीफ मिनिस्टर बघेल जी, मोतीलाल वोरा जी,पूनिया जी, मोहन मरकाम जी, टी एस सिंह देव जी, चरण दास महंत जी, रविंद्र चौबे जी हमारे सब मंत्री, एमएलए, कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता एवं छत्तीसगढ़ के प्यारे भाइयों बहनों सबका मैं वीडियो कांफ्रेंस में स्वागत करता हूं |जानते हैं कोविड-19 ------ डिस्टरबेंस शुरू अर्थात डिस्टरबेंस के बीच 1 मिनट का आधा अधूरा संबोधन काम की बात किए बिना ही समाप्त हो जाता है | इस पूरे डिटेल को आपके सामने रखने का हमारा उद्देश्य सिर्फ इतना है कि प्रदेश के सबसे बड़े तकनीकी संस्थान चिप्स के अंतर्गत काम करने वाले बड़े बड़े अधिकारियों के निर्देशन में कांग्रेस की महत्वपूर्ण , पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी के पुण्यतिथि के अवसर पर शुभारंभ होने वाली राजीव गांधी किसान न्याय योजना के उद्घाटन अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल एवं कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की उपस्थिति में वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से शुरू होने के दौरान डिस्टरबेंस होना चिप्स के अधिकारियों की कार्यक्षमता, कार्यप्रणाली के साथ-साथ लापरवाही पूर्ण जिम्मेदारियों पर बड़ा सवाल है ? - इतने महत्वपूर्ण कार्यक्रम में व्यवधान उत्पन्न होने के लिए संबंधित सभी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, क्योंकि डिस्टरबेंस होने से सिर्फ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल उनकी राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी या कांग्रेस परिवार का आपसी मामला नहीं है , यह भारत सहित पूरी दुनिया में छत्तीसगढ़ की टेक्नोलॉजी व्यवस्था के लिए गलत संदेश है - इतनी बड़ी गलती के लिए इस विभाग के अधिकारियों पर प्रदेश के मुख्यमंत्री क्या कार्यवाही करते हैं ? - प्रदेश की जनता देखेगी ? - क्योंकि जनता के टैक्स के रूप में वसूले गए रुपयों का उपयोग इन अधिकारियों की मोटी मोटी तनख्वाहों पर खर्च हो रहा है - Congress (@INCIndia) Tweeted: LIVE: INC President Smt Sonia Gandhi & Shri @RahulGandhi at Rajiv Gandhi Kisan NYAY Yojana event #CongressGivesNYAY https://t.co/Sl0VqHR7Ux https://twitter.com/INCIndia/status/1263359066195103744?s=20 सुखबीर सिंघोत्रा - CG 24 News - 9301094242
  • पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्वर्गीय राजीव गांधी के शहादत दिवस पर सोनिया राहुल की विशेष उपस्थिति -

    पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्वर्गीय राजीव गांधी के शहादत दिवस पर श्रीमती सोनिया गांधी और राहुल गांधी की विशेष उपस्थिति पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों के साथ छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए राजीव गांधी किसान न्याय योजना का शुभारंभ किया। श्रीमती सोनिया गांधी और राहुल गांधी नई दिल्ली से वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए शामिल हुए।  

    इस योजना का शुभारंभ कार्यक्रम मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के रायपुर स्थित निवास कार्यालय में आयोजित किया गया, जहां मुख्यमंत्री श्री बघेल, विधानसभा अध्यक्ष डाॅ. चरणदास महंत और अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों के साथ उपस्थित रहे। श्रीमती सोनिया गाँधी और राहुल गांधी ने किसानों के हित मे प्रारंभ की गई छत्तीसगढ़ सरकार इस अभिनव योजना के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनके मंत्रिमण्डल के सहयोगियों की सराहना की। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रारंभ की गई देश मे अपनी तरह की पहली योजना राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत धान, मक्का और गन्ना (रबी) उत्पादक किसानों के खाते में लगभग 5700 करोड़ रूपए की राशि किसानों को खेती किसानी के लिए प्रोत्साहित करने, उन्हें उपज का सही दाम  दिलाने के उद्देश्य से आदान सहायता के रूप में दी जा रही है। यह राशि चार किश्तों में किसानों को दी जाएगी। आज इसकी पहली किश्त के रूप में 1500 करोड़ रूपए की राशि आज डीबीटी के माध्यम से किसानों के खाते में ऑनलाइन अंतरित की गई।

         इस कार्यक्रम में जिलों से सांसद, विधायक, अन्य जनप्रतिनिधि, किसान और विभिन्न योजनाओं के हितग्राही भी वीडियो कांफ्रेसिंग से जुड़े।

  • राजीवगांधी गांधी किसान न्याय योजना -कांग्रेस और भूपेश बघेल की वायदा निभाने की प्रतिबद्धता का प्रतीक         --सुशील आनंद शुक्ला
    भारत रत्न स्व राजीवगांधी गांधी की पुण्यतिथि के दिन 21 मई को छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण योजना शुरू करने जा रही है ।राजीव गांधी किसान न्याय योजना ,इस योजना के माध्यम से किसानों को उनके उत्पादन के हिसाब से प्रोत्साहन राशि देने जा रही है। कांग्रेस का वायदा सिर्फ धान उत्पादक किसानों से था लेकिन इस योजना में राज्य के सभी प्रकार की फसलों को उत्पादित करने वाले किसानों को शामिल किया गया है।खरीफ में इस योजना के अंतर्गत धान मक्का सोयाबीन मूंगफली तिल अरहर मूंग उड़द कुल्थी रामतिल कोदो कुटकी तथा रवि में गन्ना को लिया गया है ।योजना में 2019 में खरीफ फसलों धान और मक्का की फसल लेने वाले किसान जिन्होंने सहकारी समितियों के माध्यम से अपनी उपज को बेचा है उन्हें अधिकतम दस हजार रु प्रति एकड़ की सहायता दी जाएगी। इस योजना के अंतर्गत 1834834 (लगभग 18.35 लाख )पंजीकृत किसानों को 5700 करोड़ रु चार किस्तों में दिया जायेगा।प्रथम चरण में लगभग 1499.94 करोड़ रु का भुगतान किया जाएगा।इस योजना के अंतर्गत गन्ना उत्पादक किसानों को पेराई वर्ष 18 -19 में 24414 किसानों को 50 रु प्रति कुंटल प्रोत्साहन राशि की दर से 10.27 करोड़ रु का भुगतान होगा । पेराई वर्ष 19 -20 में प्रोत्साहन राशि 93.75 रु प्रति कुंटल की दर से भुगतान किया जाएगा इसका लाभ 34637 किसानो को होगा इनको कुल73.55 करोड़ रु का भुगतान किया जाएगा। राजीव गांधी किसान न्याय योजना कांग्रेस और मुख्यमंत्री भूपेशबघेल की चुनावी वायदे को पूरा करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। कांग्रेस ने 2018 के विधान सभा चुनाव में अपने जन घोषणा पत्र में राज्य के धान उत्पादक किसानों से वायदा किया था कि उसकी सरकार बनने पर धान की सरकारी खरीदी 2500 रु प्रति कुंटल में की जाएगी । सरकार बनने के तुरन्त बाद 9000 करोड़ रु की कर्ज माफी के वायदे को पूरा करने के साथ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल धान की खरीदी 2500 रु में सुनिश्चित करने जुट गए ।कांग्रेस सरकार ने इस वर्ष धान की खरीदी में केंद्र द्वारा घोषित समर्थन मूल्य 1750 रु के अतिरिक्त किसानों को लगभग 750 रु प्रति कुंटल जादा भुगतान किया । यह चुनावी वर्ष था केंद्र और राज्य दोनो ही जगह भाजपा की सरकारे थी अतः इस वर्ष केंद्र ने छत्तीसगढ़ सरकार को धान पर बोनस देने की छूट दे रखी इस छूट के कारण कांग्रेस की नई सरकार को किसानों को धान की बढ़ी कीमत देने में कोई परेशानी नही हुई ।लेकिन राज्य में कांग्रेस की सरकार बनने के कारण परिस्थितियां बदल चुकी थी दूसरे वर्ष केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार को धान पर बोनस या अतिरिक्त भुगतान की छूट देने से न सिर्फ मना कर दिया यह भी चेतावनी दी गयी कि यदि राज्य सरकार केंद्र द्वारा घोषित समर्थन मूल्य से अधिक कीमत पर धान की खरीदी करेगी तो वह राज्य से लेने वाली सेंट्रल पुल के कोटे का चावल नही लेगी ।मोदी सरकार का यह फर्मान भूपेश सरकार के सामने बड़ी चुनौती थी यदि केंद्र के आदेश को धता बता कर 2500 में धान की खरीदी की जाती है तो इतने बड़े पैमाने पर लगभग 82लाख टन धान और उससे बनने वाले लगभग 55 लाख टन चावल के भंडारण और उसका खपत राज्य के सामने बड़ी चुनौती थी ।मुख्यमंत्री भूपेशबघेल ने घोषणा किया कि धान की खरीदी केंद्र के द्वारा घोषित समर्थन मूल्य पर ही किया जाएगा लेकिन किसानों को निराश होने की जरूरत नही समर्थन मूल्य और 2500 रु के बीच की जो अंतर राशि है उसका भुगतान किसी अन्य ढंग से किया जाएगा ।किसानों को अंतर राशि का भुगतान कैसे किया जाएगा इसके लिए एक मंत्रिमण्डलीय समिति का गठन किया गया ।समिति के अध्ययन और अनुसंशा पर तथा मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप धान के अलावा अन्य फसल उत्पादित करने वालो किसानों को भी प्रोत्साहन राशि देने का फैसला लिया गया ।इस फैसले के दूरगामी परिणाम होंगे राज्य में धान के साथ वैकल्पिक जिंसों की खेती के प्रति किसानों का रुझान बढ़ेगा।मोदी सरकार सन 2022 तक किसानों की आय दुगनी करने जुबानी लक्ष्य रखा है इसे पूरा करने अभी तक कोई कार्य योजना नही दिखी। छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री भूपेशबघेल ने तो सन 2018 से ही छत्तीसगढ़ के किसानों की आय लगभग दुगनी कर दिया । किसी सरकार और राजनैतिक दल के द्वारा अपने चुनावी वायदे को पूरा करने का जुनून मुख्यमंत्री भूपेशबघेल ने दिखया उनके पास तार्किक ठोस बहाना था केंद्र समर्थन मूल्य से जादा धान की कीमत नही देने दे रहा इसलिए हम मजबूरी में धान की कीमत 2500 नही दे पा रहे विपक्षी भाजपा भी इस तर्क के सामने बचाव की ही मुद्रा में रहती लेकिन किसान पुत्र भूपेशबघेल को किसानों के साथ यह वायदा खिलाफी मंजूर नही थी उन्होंने न सिर्फ पूरी शिद्दत से अपने चुनावी वायदे को निभाने के लिए प्रयत्न किए अंततः राजीव गांधी किसान न्याय योजना के रूप में उसे पूरा भी किया। यह जानकारी कांग्रेस के प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला ने जारी की है
  • कब और कैसे घर पहुँचेंगे सड़कों पर कष्ट झेलते यह लोग ?

    इतनी पीड़ा - इतनी परेशानी और इतना लंबा सफर तो 1947 के भारत पाकिस्तान विभाजन के समय भी लोगों को नहीं झेलना पड़ा था

     

     

    करोना वायरस की महामारी से निपटने के लिए किया गया लॉक डाउन 25 मार्च से 17 मई तक तीन बार हुआ - चौथा लॉक डाउन शुरू

    विश्वव्यापी बीमारी से निपटने के लिए लाक डाउन तो जरूरी था परंतु साथ ही पहले लॉक डाउन के बाद दूसरा लाक डाउन लगाने से पहले पूरे हिंदुस्तान में फंसे जरूरतमंद यात्रियों तथा प्रवासी मजदूरों की वापसी की व्यवस्था भी जरूरी थी |

     

    21 दिनों तक लाक डाउन का ईमानदारी से पालन करने के बाद लोग खाने पीने को मोहताज हो गए | सरकारों द्वारा राशन की व्यवस्था के दावे कितने सही होते हैं यह राजनेता, अधिकारियों की कार्यप्रणाली को बखूबी समझते हैं क्योंकि वास्तविक आंकड़ों और कागजी आंकड़ों में जमीन आसमान का अंतर होता है | चलो मान भी लिया जाए की मजबूर मजदूरों को सरकारों द्वारा राशन और भोजन उपलब्ध करवाया जा रहा था परंतु इतने लंबे समय के लिए सिर्फ राशन और भोजन काफी है ? - इसके अलावा गैस, बिजली, मकान किराया, सब्जी, दूध आदि की भी आवश्यकता होती है | इसके लिए भी मजदूर मजबूर हो गए और थक हार कर घर वापसी के लिए निकल पड़े | अब सवाल उठता है कि जब करोड़ों की संख्या में पूरे देश के मजबूर मजदूर अपने अपने घरों अपने-अपने प्रदेशों के लिए रवाना हुए तो सड़कों पर इनकी भीड़ को देखकर, इनकी परेशानियों को देखकर, बच्चों की तकलीफ को देखकर, बूढ़ों की परेशानियों को देखकर, धूप - पानी - बरसात में बिना भोजन, बिना दवाई के हजारों किलोमीटर के पैदल सफर पर निकले इन मजदूरों की भीड़ पर इनकी व्यथा पर प्रदेश की सरकारों सहित केंद्र सरकार की नजर क्यों नहीं पड़ी ?

     

    क्यों नहीं इन्हें घर पहुंचाने की व्यवस्था केंद्र सरकार द्वारा की गई ? और आज जब जगह-जगह मीडिया इनकी परेशानियों को जनता के सामने, अधिकारियों के सामने, नेताओं के सामने, सरकार के सामने ला रहा है तब भी केंद्र और राज्य सरकारों के बीच तू-तू मैं-मैं - वो तेरा वह मेरा का झगड़ा चल रहा है | सब राजनीतिक पार्टियां अलग-अलग प्रदेशों की सरकारें एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं, सब राजनीति कर रहे हैं क्यों ? - इतनी पीड़ा - इतनी परेशानी और इतना लंबा सफर तो 1947 के भारत पाकिस्तान विभाजन के समय भी लोगों को नहीं झेलना पड़ा था, जो लोग पैदल चले भी थे मुश्किल से 15 से 20 किलोमीटर बॉर्डर से इधर और बॉर्डर से उधर तक | परंतु आज देश में करोड़ों की संख्या में मजदूर मजबूर होकर हर तरह की पीड़ा - तकलीफ - डंडा - लाठी - एक्सीडेंट - बीमारी को सहकर भूखा प्यासा बच्चों, महिलाओं, बूढ़ों, अपाहिजों सहित पैदल ही अपने घर जाने निकल पड़ा है - क्यों नहीं केंद्र सरकार अपने दम पर बिना राज्य सरकारों से पूछे इन मजदूरों को जो जिस प्रदेश का है उसके घर तक पहुंचाने की व्यवस्था करती ? - केंद्र सरकार पूरे भारत, पूरे हिंदुस्तान के लिए निर्वाचित सांसदों का प्रतिनिधित्व करती है - फिर क्यों उसे राज्य सरकारों की सहमति की आवश्यकता है ? जो लोग सड़कों पर मजबूरी वश असहनीय तकलीफें सहते चल रहे हैं उनका तो यह मानना है की कारोना से तो लोग कम मर रहे हैं परंतु इस तकलीफ दायक स्थिति में ज्यादा मर रहे हैं | जितना खर्च केंद्र एवं राज्य सरकारें इनके क्वॉरेंटाइन सेंटर में रहने खाने की व्यवस्था पर खर्च कर रहे हैं उससे कम खर्च में तो इन्हें घर पहुंचाया जा सकता है | रही बात परहेज की, स्वास्थ्य जांच की, क्वॉरेंटाइन की तो वह क्वॉरेंटाइन इनके गांव के पास भी करवाया जा सकता है | जिससे इनके मन में कम से कम तसल्ली तो रहेगी कि हम अपने घर के पास अपने गांव के बाहर स्वास्थ्य परीक्षण के लिए रुके हुए हैं | इन मजबूर मजदूरों की सड़कों पर आवाजाही तकलीफें हर व्यक्ति को द्रवित कर रही है, परंतु जवाबदार लोग सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप के अलावा कुछ नहीं कर रहे हैं | अभी भी आज की तारीख में जो लोग सड़कों पर परिवार सहित घर पहुंचने के लिए पैदल चल रहे हैं उनमें पूरे हिंदुस्तान के सभी प्रदेशों के लोग हैं, जो कि टीवी चैनलों के रिपोर्टरों की रिपोर्ट में स्पष्ट नजर आ रहा है | परंतु राजनीति के चक्कर में कुछ प्रदेशों को घेरे में लेकर इन जरूरतमंदों के घर पहुंचने के रास्ते को आसान करने के बदले तेरे प्रदेश और मेरे प्रदेश के चक्कर में उनकी राह को और तकलीफ दायक बनाया जा रहा है | जिन लोगों के हाथ में पावर है उनसे हाथ जोड़कर - पैर पकड़कर निवेदन है की राजनीति छोड़कर सभी को जल्द से जल्द घर पहुंचाएं | भावनाओं में बहकर कुछ गलत लिखा गया हो तो उसके लिए क्षमा प्रार्थी हूं - जय हिंद जय भारत सुखबीर सिंघोत्रा 93010 94242

  • लॉक डाउन 4 -- 31 मई तक - गाइडलाइन जारी

    *लॉक डाउन 4 की गाइडलाइन घोषित* लॉक डाउन में मेट्रो नहीं चलेगी, विमान सेवाएं अभी बंद रहेगी, नेशनल और इंटरनेशनल दोनो तरह की उड़ाने नहीं शुरू होंगी - धार्मिक स्थलों को खोलने की इजाजत अभी भी नहीं दी गई है अर्थात सभी धर्मों के धार्मिक स्थल बंद रहेंगे | शाम 7:00 से सुबह 7:00 तक घरों से निकलने पर मनाही रहेगी | स्टेडियमों में स्पोर्ट्स तो होंगे परंतु दर्शकों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा सभी के मोबाइलों पर आरोग्य सेतु एप होना आवश्यक है मॉल और जिम भी नहीं खुलेंगे बसों का आवागमन राज्य सरकारों की आपसी सहमति से हो सकेगा होटल रेस्टोरेंट भी अभी नहीं खोले जा सकेंगे *CG 24 News*

  • यह समय राजनीति करने और चुनौती देने का नहीं है बल्कि साथ मिलकर संकट का सामना करने का - सीएम भूपेश बघेल
    रायपुर। 17 मई 2020 । मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि रेल मंत्री पीयूष गोयल जी ने पहले यह कहा कि छत्तीसगढ़ ट्रेन की अनुमति नहीं दे रहा है। हम ने जवाब दिया कि सभी ट्रेन की अनुमति सहमति दी जा चुकी है। छत्तीसगढ़ में कोई अनुमति लंबित नहीं है। इसका जवाब रेल मंत्री पीयूष गोयल ने अभी तक नहीं दिया है। अब रेल मंत्री ने पटरी बदल दी है। रेलवे केंद्र के अधीन है और वर्तमान प्रक्रिया के अनुसार रेलवे दोनों राज्यों रिसीविंग स्टेट एवं सेंडिंग स्टेट की सहमति के बाद ट्रेन देता है । हमने जम्मू उत्तर प्रदेश कर्नाटक आदि से सहमति मांगी है। सहमति संबंधित राज्यों में लंबित है। रेल मंत्री को इसमें मार्गदर्शन देना चाहिए कि क्या करें और इसे कैसे हल करना चाहिए। लेकिन रेल मंत्री समस्या का हल करने के बजाय चुनौती दे रहे हैं । प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रेल मंत्री पीयूष गोयल से अनुरोध किया है कि यह समय राजनीति करने और चुनौती देने का नहीं है बल्कि साथ मिलकर संकट का सामना करने व मजदूरों की मदद का है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि रेलवे द्वारा मजदूरो का रेल किराया मांगे जाने के बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने ट्रेनों का किराया भी जमा किया है। हमने अभी तक एक करोड़ 16 लाख रुपए से अधिक की राशि मजदूरों के रेल किराये के रूप में रेलवे के पास जमा कर दी है।
  •  राज्यसभा सांसद सरोज पांडे ने  फिजिकल डिस्टेंसिंग के पालन को किया दरकिनार
    यह फोटो सांसद सरोज पांडे के दुर्ग जिले के ग्राम पंचायत अछोटी और चंदखुरी में मनरेगा के कामगारों से मुलाकात के समय की है | दरअसल भाजपा की राष्ट्रीय महासचिव एवं राज्यसभा सांसद सरोज पांडे मनरेगा के कामगारों का कुशल क्षेम जानने तथा मनरेगा में चल रहे कार्यों की जानकारी लेने, मोदी सरकार द्वारा उनकी मजदूरी बढ़ाए जाने एवं जनधन खातों में पैसे भेजे जाने के बारे में जानकारी देने पहुंची थी | इन कामगारों को सांसद सुश्री पांडे ने करोना संक्रमण से बचाव के लिए सरकार के सभी दिशा निर्देशों का पालन करने का आग्रह भी किया - परंतु यह आग्रह सिर्फ कहने तक ही सीमित रहा और वे खुद भी चेहरे पर मास्क लगाना भूल गई या फिर अपनी पहचान छिपने की चिंता में उन्होंने मास्क नहीं हटाया ? भाजपा की राष्ट्रीय महासचिव मनरेगा कामगारों के बीच पहुंचकर मोदी सरकार की उपलब्धियों और 20 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज की घोषणा के बारे में प्रचार प्रसार करने के चक्कर में फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन करवाने या उन्हें समझाने की तरफ ध्यान देना भूल गई | इस फोटो में आप साफ तौर पर देख सकते हैं कि सैकड़ों की संख्या में महिलाएं एक दूसरे के साथ सटकर बैठी है और पीछे महिलाओं के आने का क्रम जारी है | अब सवाल यह उठता है कि भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय स्तर की नेता ही करोना महामारी के दरमियान जब लोगों के बीच पहुंचकर इतनी बड़ी गलती करेंगी तो पार्टी के अन्य नेता और कार्यकर्ता इस महामारी के दौर में लोगों को जागरूक कैसे करेंगे ?