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  • सरकार ने कृषि कानूनों पर चर्चा के लिए समिति बनाने का रखा सुझाव , किसानों ने इस प्रस्‍ताव को ठुकराया

     

    कृषि कानून के मुद्दे पर आंदोलनरत किसानों और सरकार के बीच मंगलवार को वार्ता हुई लेकिन गतिरोध अभी भी बरकरार है- किसानों से चर्चा के दौरान सरकार ने कृषि कानूनों पर चर्चा के लिए समिति बनाने का सुझाव रखा, लेकिन किसानों ने इस प्रस्‍ताव को ठुकरा दिया -

    मामले से जुड़ी अहम जानकारियां :

    1. तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों के 30 से अधिक प्रतिनिधियों के साथ तीन केंद्रीय मंत्रियों ने बातचीत की शुरुआत की. किसान इन कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं. इस बीच किसानों का प्रदर्शन और जोर पकड़ने लगा है. पंजाब राज्‍य से कई और किसान और हरियाणा से खाप आंदोलन के लिए दिल्‍ली पहुंच रहे हैं.किसानों ने कहा है कि मांग पूरी होने तक वे प्रदर्शन जारी रखेंगे - 

    2. सूत्रों ने बताया कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और बीजेपी अध्‍यक्ष जेपी नड्डा के साथ मंगलवार सुबह मुलाकात की. कृषि कानूनों के खिलाफ ये किसान दिल्‍ली में मोर्चा डाले हुए हैं.समझा जाता है कि किसानों के साथ तीसरे राउंड की बातचीत में सरकार नए कृषि कानून के बारे में जानकारी के साथ इस बात का आश्‍वासन दे सकती है कि न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य यानी MSP को खत्‍म नहीं किया जाएगा -

    3. पहले सरकार की ओर से 3 दिसंबर को बातचीत का प्रस्ताव रखा गया था. गृहमंत्री अमित शाह ने शर्त रखी थी कि किसानों को बातचीत के लिए बुराड़ी के निरंकारी ग्राउंड पर जाना होगा और दिल्ली की सीमाओं से हटना होगा. लेकिन सशर्त बातचीत के इस प्रस्ताव को किसानों ने ठुकरा दिया था -

    4. रविवार देर रात केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा सहित कई बड़े नेताओं के साथ मीटिंग की थी. अब सरकार ने सर्दी और कोरोना का हवाला देते हुए किसानों को 3 दिसंबर से पहले ही, एक दिसंबर को यानी आज बातचीत का न्‍योता दिया था -

    5. पंजाब किसान यूनियन के नेता अमरीक सिंह ने NDTV से बात करते हुए कहा कि हम सरकार के सामने अपनी दो मांगें मुख्य तौर पर रखेंगे. पहली मांग कि तीनों कानून को तत्काल प्रभाव से वापिस लिया जाए और दूसरी मांग कि सरकार MSP की लीगल गारंटी दे. जिस तैयारी से किसान आए हैं, वो सोच कर आए हैं कि केंद्र सरकार इनकी बात आसानी से नहीं मानेगी. उनके पास 6 महीने का तेल, गैस, आटा, दाल, चावल हैं. वे इन तीनों क़ानूनों को वापस कराकर अपने घर जाएंगे. सरकार को इनसे खुले मन से बातचीत करनी चाहिए -

    6. बुराड़ी के निरंकारी मैदान से कृषि कानून के खिलाफ डटे किसानों ने NDTV से बात करते हुए कहा कि हमें सरकार से बहुत उम्मीद नहीं है क्योंकि सरकार की नीयत ठीक नहीं है. उन्होंने कहा कि यह किसानों की नहीं पूजीपतियों की सरकार है. किसानों ने साफ कर दिया कि जब तक कानून रद्द नहीं होगा तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा -

    7. केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने केंद्र सरकार से अपील की है कि वह नए कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमा पर प्रदर्शन कर रहे किसानों की बात ''सुने'' और मैत्रीपूर्ण तरीके से मामले को सुलझाए. विजयन ने एक ट्वीट में किसानों को देश का ''जीवन आधार'' बताया और कहा कि यह उनके साथ खड़े रहने का समय है -

    8. इस बीच, किसान आंदोलन  को लेकर हरियाणा की सत्तारूढ़ पार्टी बीजेपी को अब फिर सत्ता में उसकी एक और सहयोगी पार्टी ने चेतावनी दी है. हरियाणा के उप-मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला की पार्टी जननायक जनता पार्टी के अध्यक्ष और उनके पिता अजय चौटाला ने कहा कि सरकार को इस मसले पर बड़ा सोचना चाहिए और किसानों की मांगों पर कुछ समाधान निकालना चाहिए -

    9. किसानों को दिल्ली आने से रोकने की कोशिश करने में हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर की सरकार ने भारी-भरकम तरीकों का इस्तेमाल किया था. खट्टर के आदेश पर पुलिस ने किसानों पर आंसू गैस के गोले बरसाए और कई जगहों पर उनपर वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया गया. यहां तक कि पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश में हाईवे तक खोदकर रख दिया था -

    10. कृषि कानूनों के मामले में केंद्र में बीजेपी पहले ही अपने सहयोगी दल शिरोमणि अकाली दल के साथ को खो चुकी है. सोमवार को ही राजस्थान से उसके एक सहयोगी सांसद हनुमान बेनीवाल ने बीजेपी से अपना रिश्ता खत्म करने की धमकी दी थी. राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक और नागौर से लोकसभा सांसद हनुमान बेनीवाल ने इस मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है -

  • गुरु नानक देव का कहना था कि भगवान एक है और भगवान सभी जगह पर है.

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव की जयंती पर आज उन्हें श्रद्धांजलि दी और कामना की कि उनके विचार समाज की सेवा करने के लिए, बेहतर संसार सुनिश्चित करने के लिए सभी को प्रेरित करते रहें. प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया, "मैं इस प्रकाश पर्व पर  गुरु नानक देव जी को नमन करता हूं. उनके विचार हमें समाज की सेवा करने और एक बेहतर संसार सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित करते रहें.

    देशभर में आज गुरु नानक जयंती मनाई जा रही है. हर साल कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को गुरु नानक जयंती मनाई जाती है. गुरु नानक देव सिख धर्म के संस्थापक और सिखों के पहले गुरु माने जाते हैं. कहा जाता है कि बचपन से ही गुरु नानक देव का आध्यात्मिकता की तरफ काफी रुझान था और वह सत्संग और चिंतन में लगे रहते थे.

     

    30 साल की उम्र तक गुरु नानक देव का ज्ञान परिपक्व हो चुका था और परम ज्ञान हासिल होने के बाद उन्होंने अपना पूरा जीवन सत्य का प्रचार किया. गुरु नानक देव की जयंती को सिख धर्म के लोग बड़े ही धूमधाम और श्रद्धा से प्रकाश पर्व या गुरु पर्व के तौर पर मनाते हैं. कहा जाता है कि ईश्वर की तलाश की खातिर गुरु नानक ने 8 साल की उम्र में ही स्कूल छोड़ दिया था.

     

    गुरु नानक देव का झुकाव बचपन से ही आध्यात्म की तरफ होने के कारण उन्होंने सांसारिक कामों से दूरी बना ली थी. वे लगातार ईश्वर और सत्संग की तरफ रुचि लेने लगे थे. ईश्वर के प्रति गुरु नानक का समर्पण काफी ज्यादा था, जिसके कारण लोग उन्हें दिव्य पुरुष मानने लगे. गुरु नानक जयंती यानी प्रकाश पर्व के मौके पर गुरुद्वारों में शब्द-कीर्तन का आयोजन किया जाता है. इसके साथ ही अलग-अलग जगहों पर लंगर भी लगाए जाते हैं.

     

  • गुरु नानक जयंती आज, PM नरेंद्र मोदी समेत दिग्गजों ने दी बधाई

    गुरु नानक देव ने समाज को एकजुटता के लिए कई संदेश दिए. गुरु नानक देव का कहना था कि भगवान एक है और भगवान सभी जगह पर है. उनका कहना था कि हमेशा मेहनत करनी चाहिए और लोगों की सहायता करनी चाहिए.

  • किसान संगठन 3 दिसंबर से पहले चर्चा करना चाहते हैं, तो सरकार तैयार है - केंद्रीय गृह मंत्री

    नई दिल्ली: 

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि ''मैं प्रदर्शनकारी किसानों से अपील करता हूं कि भारत सरकार बातचीत करने के लिए तैयार है. कृषि मंत्री ने उन्हें 3 दिसंबर को चर्चा के लिए आमंत्रित किया है. किसानों की हर समस्या और मांग पर विचार करने के लिए सरकार तैयार है -

    अमित शाह ने कहा है कि ''कई स्थानों पर, किसान इस ठंड में अपने ट्रैक्टरों और ट्रालियों में रह रहे हैं. मैं उनसे अपील करता हूं कि दिल्ली पुलिस आपको बड़े मैदान में स्थानांतरित करने के लिए तैयार है, कृपया वहां जाएं. आपको वहां कार्यक्रम आयोजित करने के लिए पुलिस अनुमति दी जाएगी.

    अमित  शाह ने कहा है कि ''यदि किसान संगठन 3 दिसंबर से पहले चर्चा करना चाहते हैं, तो मैं आप सभी को आश्वस्त करना चाहता हूं कि जैसे ही आप अपना विरोध प्रदर्शन निर्दिष्ट स्थान पर स्थानांतरित करेंगे, हमारी सरकार अगले दिन आपकी चिंताओं को दूर करने के लिए बातचीत करेगी.

     

  • COVID-19 MHA Guidelines: कोरोना पर सरकार ने जारी की नई गाइडलाइन्स, कंटेनमेंट जोन में बढ़ेगी सख्ती, जानें नए नियम

    केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से यह गाइडलाइन 1 दिसंबर से साल के अंत 31 दिसंबर 2020 तक के लिए जारी की गई है.

    कोरोना के कई राज्यों में तेजी से बढ़ते मामलों के बीच केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने बुधवार को कंटेनमेंट, सर्विलांस, सतर्कता को लेकर नई गाइडलाइन्स जारी की है. इसमें कहा गया है कि राज्य और केन्द्र शासित प्रदेशों को कंटेनमेंट जोन में कड़ाई के साथ नियमों को लागू करना होगा.  केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से जारी गाइडलाइन 1 दिसंबर से  लेकर 31 दिसंबर 2020 तक प्रभावी रहेगी.

     

    इसके साथ ही, कई अन्य गतिविधियों के लिए स्टैंडर्ड ऑफ प्रोटोकॉल्स जारी किए गए हैं. गृह मंत्रालय ने कहा कि कंटेनमेंट जोन में सिर्फ आवश्यक गतिविधियों की ही इजाजत दी जाएगी. कंटनमेंट जोन में नियमों को कड़ाई के साथ लागू करने की जिम्मेदारी स्थानीय जिला, पुलिस और निगम अथॉरिटीज की होगी. इसके साथ ही, राज्य और केन्द्र शासित प्रदेस संबंधित अधिकारियों के साथ मिलकर जिम्मेदारी सुनिश्चित करेंगे.

  • हिंद की चादर गुरु तेग बहादर : शहीदी दिवस
    *गुरु तेग बहादुर शहीदी दिवस* *हिन्दू धर्म के रक्षक को हिन्द की चादर भी कहा जाता है* औरंगजेब द्वारा कश्मीरी पंडितों को जबरन मुसलमान बनाने से बचाने श्री गुरु तेगबहादुर जी ने अपने पुत्र सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोविंद सिंह जी की सलाह पर अपने प्राणों की आहुति देकर कश्मीरी पंडितों सहित हिंदू धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिये | 24 नवंबर सिखों के नौवें गुरु तेग बहादुर के शहादत दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस्लाम कबूल न करने पर मुगल बादशाह औरंगजेब ने चांदनी चौक में उनका सिर कलम करवा दिया था। इस दिन उनकी शहादत को याद करके जुल्म और अन्याय का डटकर मुकाबला करने की प्रेरणा मिलती है। मुगल बादशाह औरंगजेब चाहता था कि सभी गैर-मुस्लिमों को मुस्लिमों में तब्दील कर दिया जाए। इसके लिए उसके अधिकारियों ने लोगों को जबरन मुस्लिम बनाने के लिए सख्ती शुरू कर दी। धर्म बदलने के दबाव से परेशान कश्मीरी पंडितों के एक समूह ने गुरु तेग बहादुर की शरण ली। गुरु की सलाह पर इन कश्मीरी पंडितों ने मुगल अधिकारियों से कहा कि अगर गुरु तेग बहादुर इस्लाम को स्वीकार कर लेते हैं, तो वे भी बड़ी खुशी से मुस्लिम बन जाएंगे। यह सुनते ही औंरगजेब ने गुरु तेग बहादुर को गिरफ्तार करवा दिया। 3 महीनों से भी ज्यादा वक्त तक गुरु को बंदी बनाकर रखा गया। इस दौरान उन्हें लगातार टॉर्चर किया जाता रहा कि वे इस्लाम स्वीकार कर लें, लेकिन गुरु ने ऐसा नहीं किया। तो आखिर में औरंगजेब ने उनका सिर कलम करने का आदेश दे दिया। 11 नवंबर, 1675 ईसवी को चांदनी चौक में उनका सिर कलम करवा दिया गया। शीशगंज नाम का गुरुद्वारा इसी जगह पर है। गुरु तेग बहादुर को ‘हिन्द दी चादर’ भी कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने दूसरों को बचाने के लिए अपनी कुर्बानी दे दी। --------------------- गुरू तेग़ बहादुर सिखों के नवें गुरु थे जिन्होने प्रथम गुरु नानक द्वारा बताए गये मार्ग का अनुसरण किया | उनके द्वारा रचित ११५ पद्य गुरु ग्रन्थ साहिब में सम्मिलित हैं। उन्होने काश्मीरी पण्डितों तथा अन्य हिन्दुओं को बलपूर्वक मुसलमान बनाने का विरोध किया था | 24 नवंबर 1675 में मुगल शासक औरंगजेब ने उन्हे इस्लाम कबूल करने को कहा कि पर गुरु साहब ने कहा सीस कटा सकते है केश नहीं। फिर उसने गुरुजी का सबके सामने उनका सिर कटवा दिया। गुरुद्वारा शीश गंज साहिब तथा गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब उन स्थानों का स्मरण दिलाते हैं जहाँ गुरुजी की हत्या की गयी तथा जहाँ उनका अन्तिम संस्कार किया गया। विश्व इतिहास में धर्म एवं मानवीय मूल्यों, आदर्शों एवं सिद्धांत की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति देने वालों में गुरु तेग़ बहादुर साहब का स्थान अद्वितीय है। - Sukhbir Singhotra सुखबीर सिंघोत्रा Raipur
  • अंग्रेजों के जमाने का कोतवाली थाना बना आधुनिक

    CG 24 News - Lavinderpal Singhotra 

    अंग्रेजों के जमाने के कोतवाली थाने का कायाकल्प

    अत्याधुनिक मल्टी स्टोरी थाना 

    अंग्रेजों के जमाने के कोतवाली थाने का कायाकल्प कर वहां एक अत्याधुनिक मल्टी स्टोरी बिल्डिंग बनाकर थाने का स्वरूप ही बदल दिया गया है -

    नवनिर्मित इस 6 मंजिला बिल्डिंग में कोतवाली थाने के साथ-साथ नगर पुलिस अधीक्षक का कार्यालय भी रहेगा - इस अत्याधुनिक सिटी कोतवाली भवन का उद्घाटन मुख्यमंत्री द्वारा गृह मंत्री की उपस्थिति में किया जाएगा - 

  • मुंगेली वन परीक्षेत्र के जंगल के अंदर बड़ी संख्या में अवैघ कटी हुई लकड़ी का अंबार - फारेस्ट अधिकारियों की मिलीभगत ?
    लोरमी मुंगेली वन परीक्षेत्र के जंगल के अंदर बड़ी संख्या में अवैघ कटी हुई लकड़ी का अंबार - फारेस्ट अधिकारियों की मिलीभगत का अंदेशा - बडी खबर निकल कर सामने आ रही है। मिली जानकारी के अनुसार जंगल के भीतर लगभग 10 ट्रेक्टर सेन्हा और कररा लडकी पाया गया है। लगभग सभी लकड़ी की लंबाई 15 फिट है। जंगल के भीतर 10-12 अलग अलग जगहों पर लगभग 500-600 मिटर दूरी में इस तरह की अवैध कटाई जंगल माफिया और फॉरेस्ट अधिकारियों की मिलीभगत का स्पष्ट संकेत है | । आगे मिली जानकारी के अनुसार एक – एक लकड़ी के ढेर में लगभग 65-70 नग है और यह लकड़ी 7 से 10 दिन पुराना कटी प्रतीत होती है। जिसकी पहचान कर अनुभवों ने बताया। यह पुरा मामला मुंगेली जिले के लोरमी ब्लाक अंतर्गत अचानकमार टाइगर रिजर्व ग्राम पंचायत कटानी के आश्रित पंचायत बम्हनी बिंग गाड 512 और ATR सुरही का है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए लोरमी क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य और प्रतिनिधि साथ ही वन अधिकार समिति बम्हनी अध्यक्ष का कहना है कि वन परिक्षेत्र में कोई अधिकारी जांच कार्यवाही के लिए नहीं आते हैं। जिससे यह अनैतिक कार्य हो रहा है। जिसकी शिकायत जिला पंचायत मुंगेली और उच्च अधिकारी को किया जाएगा। साथ ही इस मामले की उच्च स्तर पर जांच कार्यवाही भी कराया जाएगा।
  • एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू नहीं किए जाने पर आंदोलन की चेतावनी
    *एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू किए जाने की मांग मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से* छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय अधिवक्ता संघ द्वारा एक पत्र के माध्यम से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मांग की गई है कि एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट को शीघ्र लागू किया जाए | पत्र में लिखा गया है कि 1 नवंबर 2000 से मध्य प्रदेश से विभाजित होकर छत्तीसगढ़ प्रदेश का नवनिर्माण हुआ था, तत्पश्चात छत्तीसगढ़ राज्य में उच्च न्यायालय का अलग से निर्माण भी हुआ | छत्तीसगढ़ राज्य में लगभग 35 से 40 हजार अधिवक्ता राज्य अधिवक्ता परिषद से पंजीकृत होकर नियमित वकालत का व्यवसाय कर रहे हैं | छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष सी.के. केशरवानी ने बताया कि एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट राज्य के लिए एक अति महत्वपूर्ण अधिनियम होगा क्योंकि अधिवक्ताओं को सुरक्षा के लिए कोई अन्य फोरम नहीं है जिससे राज्य के अधिवक्ता अपने आप को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं | यदि छत्तीसगढ़ शासन के द्वारा उक्त अधिनियम को यथाशीघ्र लागू नहीं किया जाता तो छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय अधिवक्ता संघ एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट को लागू कराने हेतु आंदोलन करने बाध्य होगा | छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय अधिवक्ता संघ का कहना है कि अधिवक्ताओं के विरुद्ध हो रही हिंसा की घटनाओं में इजाफा हुआ है जिससे यह अत्यंत आवश्यक हो गया है कि एडवोकेट प्रोटेक्शन है छत्तीसगढ़ राज्य में शीघ्र लागू किया जाए | संघ का कहना है कि राज्य शासन द्वारा एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट की समिति का गठन किया जा चुका है | छत्तीसगढ़ की सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार द्वारा अपने चुनावी घोषणा पत्र में भी एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट के संबंध में उल्लेख किया गया था परंतु 2 वर्ष से ज्यादा बीतने के बाद भी इसे लागू नहीं किया जा रहा | छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष सी.के. केशरवानी ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के को पत्र लिखकर अति शीघ्र एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट को लागू करने की मांग की है | उन्होंने छत्तीसगढ़ की राज्यपाल सहित प्रदेश के विधि मंत्री को भी पत्र भेजा है | अब देखने वाली बात यह है कि राज्य सरकार अधिवक्ताओं की मांग कब तक पूरी करती है और दूसरी तरफ अधिवक्ता अपनी मांगों को लेकर आंदोलन पर कब जाते हैं | सीजी 24 न्यूज़ रायपुर
  • Lakshmi Vilas Bank: क्यों मुसीबत में है ये बैंक? संकट से उबारने का क्या है प्लान?

    आरबीआई ने कहा कि पिछले तीन सालों के दौरान लक्ष्मी विलास बैंक को लगातार हो रहे घाटे के चलते इसकी वित्तीय स्थिति काफी कमजोर हुई. आरबीआई ने यह भी कहा कि लगातार हो रहे घाटे से उबरने के लिए बैंक कोई प्लान नहीं बता पाया.

    वित्तीय संकट से जूझ रहे निजी क्षेत्र के एक और बैंक को सरकार ने मोरेटोरियम में डालते हुए 25 हजार रुपये की निकासी तय करने समेत उस पर 16 दिसंबर तक के लिए कई तरह की पाबंदिया लगा दी हैं. रिजर्व बैंक ने लगातार वित्तीय गिरावट को देखते हुए मंगलवार को लक्ष्मी विलास बैंक (एलवीबी) का नियंत्रण अपने हाथों में ले लिया. बैंक के बढ़ते एनपीए और इसे चलाने में आ रही कठिनाइयों के बीच केन्द्र सरकार ने सिंगापुर की सबसे बड़े ऋणदाता डीबीएस बैंक की लोकल यूनिट डीबीएस बैंक इंडिया लिमिटेड (डीबीआईएल) के साथ विलय करने को कहा है. ऐसा पहली बार है जब किसी भारतीय बैंक को सुरक्षित रखने के लिए उसके विदेशी प्रतिद्वंद्वी पैरेंट बैंक को चुना है.

     

    आइये जानते हैं कि आखिर लक्ष्मी विलास बैंक की ऐसी हालत कैसे हो गई:

     

    1-आरबीआई ने कहा कि पिछले तीन सालों के दौरान लक्ष्मी विलास बैंक को लगातार हो रहे घाटे के चलते इसकी वित्तीय स्थिति काफी कमजोर हुई. आरबीआई ने यह भी कहा कि लगातार हो रहे घाटे से उबरने के लिए बैंक कोई प्लान नहीं बता पाया. किसी रणनीतिक योजना के अभाव में, जमा रकम में कमी और एनपीए में बढ़ोत्तरी के चलते इसका घाटा बढ़ता चला गया. इन घाटों की भरपाई के लिए बैंक पर्याप्त पूंजी जुटाने में नाकामयाब रहा.

     

    2-चेन्नई स्थित लक्ष्मी विलास बैंक की समस्या उस वक्त और बढ़ गई जब पिछले साल अक्टूबर में इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड के साथ विलय के प्रस्ताव को आरबीआई ने इजाजत नहीं दी. उसके बाद, क्लिक्स कैपिटेड लिमिटेड के साथ विलय का प्रस्ताव भी सिरे नहीं चढ़ पाया. क्लिक्स ने जून में लक्ष्मी विलास बैंक के लिए गैर बाध्यकारी प्रस्ताव सौंपा था, लेकिन आरबीआई ने मंगलवार को कहा कि संकटग्रस्त बैंक कोई ठोस प्रस्ताव नहीं पेश कर पाया, जिसके बाद बैंक का नियंत्रण अपने हाथों में लेते हुए एडमिनिस्ट्रेटर नियुक्त करना पड़ा.

     

    3- सितंबर में शेयरहोल्डर्स की ओर से सात डायरेक्टर्स के खिलाफ वोटिंग के बाद रिजर्व बैंक ने नकदी संकट से जूझ रहे प्राइवेट बैंक को चलाने के लिए मीता माखन की अगुआई में तीन सदस्यों वाली कमिटी का गठन किया था।इस साल 17 नवंबर को लक्ष्मी विलास बैंक को मोरेटोरियम में रखा गया है. यह आदेश बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट 1949 की धारा 45 के अनुसार 16 दिसंबर 2020 तक प्रभावी रहेगा.

     

    4-इस अनिश्चितता भरे माहौल में लक्ष्मी विलास बैंक के विलय से इसके जमाकर्ताओं, ग्राहकों और कर्मचारियों को स्थिरता और संभावनाएं देगा.


    5-डीबीएस बैंक के भारत में 20 ब्रांच हैं और लक्ष्मी विलास बैंक के साथ विलय के बाद देश में उसको पांव पसारने का बड़ा अवसर मिलेगा. लक्ष्मी विलास बैंक के देशभर में 550 से ज्यादा ब्रांच हैं और 900 से ज्यादा एटीएम हैं.

  •  फिल्म कलाकार की बेटी बनी छत्तीसगढ़ भाजपा प्रदेश प्रभारी
    रायपुर ब्रेकिंग भाजपा ने जारी की राज्य प्रभारियों की सूची डी पुरंदेश्वरी होंगी छत्तीसगढ़ भाजपा प्रदेश प्रभारी पार्टी ने जारी की 36 राज्यों के प्रदेश प्रभारियों की सूची आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और फिल्म कलाकार एनटी रामाराव की बेटी है डी पुरंदेश्वरी
  • जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने हुआ करोना गाइडलाईन का उलंघन

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अनेक सभाओं को संबोधित किया जहां करोना गाइडलाइन का उल्लंघन हुआ, परंतु ऐसी जगहों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गाइडलाइन को लेकर कोई बात नहीं कहीं, ना किसी को डांटा, ना किसी को समझाया, ना अधिकारियों को इसके लिए लताड़ा |

    भाजपा कार्यालय दिल्ली में अनेक लोगों ने मास्क नहीं लगाया था और सभी के सभी एक दूसरे के ऊपर चढ़े पड़े है, सट - सट कर खड़े है  - 

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार भी कार्यकर्ताओं को ना हीं टोका, ना हीं डांटा, उन्हें उनकी गलती का एहसास भी नहीं कराया |

     

    दिल्ली के भाजपा कार्यालय में जो कुछ हुआ वह इन तस्वीरों में साफ नजर आ रहा है - बिहार में एनडीए की जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा कार्यालय में हजारों कार्यकर्ताओं को संबोधित किया,

    संबोधन के दौरान उन्होंने बिहार की जीत के लिए बिहार की महिलाओं, बिहार के नागरिकों को बधाई दी, उनका आभार माना और बताया कि किस तरह महिलाओं ने बढ़ चढ़कर एनडीए को वोट दिया और वह भी इस कारण कि केंद्र की भाजपा सरकार ने महिलाओं को धुए से निजात दिलाते हुए गैस चूल्हे दिए, बेज्जती से निजात दिलाते हुए शौचालय दिए, करोना काल में कोविड-19 के दौरान मजदूरों को मुफ्त राशन के अलावा मुफ्त ट्रेनों की व्यवस्था कर पैदल चलने से बचाया और घर तक पहुंचाया, इसके अलावा उन्होंने इस जीत के लिए वोटों के प्रतिशत को भी सामने रखा और बताया कि करोना महामारी के बावजूद भी लोगों ने बढ़ चढ़कर मतदान किया|

     

         प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार चुनाव का जश्न भाजपा के केंद्रीय कार्यालय दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, परिवहन मंत्री नितिन गडकरी सहित अनेक मंत्रियों नेताओं की उपस्थिति में कार्यकर्ताओं के साथ मनाया | बिहार की जीत के जश्न के दौरान दिल्ली के भाजपा कार्यालय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार भी करोना कोविड-19 महामारी से बचाव के संबंध में कोई बात नहीं कही | ना तो उन्होंने मास्क की बात की, ना सोशल डिस्टेंसिंग की बात की |

     जनता कर्फ्यू , लॉक डाउन 1 , लॉक डाउन 2 , लॉक डाउन 3 सहित अभी तक लगातार लोगों को मास्क लगाकर घर से निकलने, 2 गज की दूरी का पालन करने, अपने साथ-साथ दूसरों को भी करोना महामारी गाइडलाइन का पालन करने का आव्हान समय-समय पर करते रहे | इस विश्वव्यापी महामारी की भयानकता से निजात पाने के लिए वैक्सीन बनने, उसके परीक्षण, उसकी गुणवत्ता का परीक्षण होने में हो रही देरी के लिए उन्होंने आम जनता से अपील भी की है कि जब तक वैक्सीन नहीं बन जाती तब तक मास्क और 2 गज की दूरी ही वैक्सीन है | इस तरह की जन जागरूकता वाली अपील वह लगातार करते रहे हैं, और करते रहते हैं, परंतु भाजपा कार्यालय दिल्ली में उन्होंने अपने सामने उपस्थित कार्यकर्ताओं को नजदीक से देखा, जिनमें से अनेक लोगों ने मास्क नहीं लगाया था और सभी के सभी एक दूसरे के ऊपर चढ़े पड़े थे, सट - सटकर खड़े होकर मोदी है तो मुमकिन है, मोदी जिंदाबाद, भारतीय जनता पार्टी जिंदाबाद के नारे लगाकर मोदी के दम पर बिहार में हुई जीत का जश्न मना रहे थे | परंतु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार भी कार्यकर्ताओं को नाहीं टोका, नाहीं डांटा, साथ ही उन्हें उनकी गलती का एहसास भी नहीं कराया |

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी करोना महामारी , कोविड-19 जैसी भयानक बीमारी से चिंतित हैं, देश अभी तक पटरी पर नहीं आया है, देश की रेलगाड़ियां पटरी पर नहीं उतरी हैं, देश का व्यापार पटरी पर नहीं उतरा है, देश के सभी धार्मिक स्थल पूरी तरह से नहीं खोले गए हैं, सिनेमा हॉल, शॉपिंग मॉल, पर्यटन स्थल, मैरिज हाल सहित अनेक व्यापार अभी भी करोना महामारी गाइडलाइन के कारण पूरी तरह नहीं खुले हैं | आम नागरिकों के लिए कोविड-19 के तहत अभी भी अनेकों बंदीशें हैं | इन सबके बावजूद देश की राजनीतिक पार्टियां अपने अपने राजनैतिक हित के लिए चुनाव के दौरान चाहे बिहार हो, मध्यप्रदेश हो या अन्य प्रदेशों में जहां उपचुनाव हुए हैं सभी जगह चुनावी सभाओं में करोना गाइडलाइन का खुलेआम उल्लंघन हुआ, परंतु किसी पर भी कोई कार्यवाही नहीं हुई |

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अनेक सभाओं को संबोधित किया जहां करोना गाइडलाइन का उल्लंघन हुआ, परंतु ऐसी जगहों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गाइडलाइन को लेकर कोई बात नहीं कहीं, ना किसी को डांटा, ना किसी को समझाया, ना अधिकारियों को इसके लिए लताड़ा |

     

    इतनी सारी बातों को बताने का हमारा मेन उद्देश्य यह है कि जब राजनैतिक दलों की चुनावी सभाओं में, जीत की खुशी में उमड़ी भीड़ के दौरान करोना महामारी का डर एक किनारे रख दिया जाता है, या यूं कहें कि ऐसे आयोजनों के बावजूद ऐसी जगहों पर उमड़ी भीड़ से करोना नहीं फैल रहा,  देश की राजधानी दिल्ली में केंद्र की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जश्न मना कर हजारों की भीड़ को संबोधित करना इस बात की ओर इशारा करता है कि अब देश में करोना गाइडलाइन के पालन की कोई आवश्यकता नहीं है |

    जब 5 - 5, 10 -10 हजार लोगों की भीड़ एक साथ हो तब करोना नहीं फैलता तो धार्मिक स्थलों, सिनेमा हॉल, शॉपिंग मॉल, पर्यटन स्थलों जहां एक बार में 200 - 500 या 1000 से ज्यादा लोगों के जुड़ने की, इकट्ठे होने की संभावना नहीं होती, वहां करोना कहां से आएगा ? और यदि इसके बावजूद भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी धार्मिक स्थलों, सिनेमा हॉल, स्कूल - कॉलेज, पर्यटन स्थलों, रेलगाड़ियों के आवागमन, शादी ब्याह में होने वाले आयोजनों की सीमित संख्या पर यदि छूट नहीं देते हैं तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपनी सभाओं सहित भाजपा के राष्ट्रीय कार्यालय में हजारों कार्यकर्ताओं की भीड़ एकत्रित कर संबोधित करने के लिए माफी मांगनी चाहिए और करोना महामारी कोविड-19 की प्रतिबंधित गाइडलाइन के हटने तक स्वयं भी अपनी पार्टी के पदाधिकारियों और नेताओं - कार्यकर्ताओं सहित गाइडलाइन का पालन करने का आव्हान करें, अन्यथा जिस प्रकार महाराष्ट्र में धार्मिक स्थलों को खोलने के लिए संतो ने आवाज उठाई, पूरा देश आपसे सब कुछ तुरंत सामान्य करने की बात करने लगेगा |

    सुखबीर सिंघोत्रा, स्वतंत्र पत्रकार - सभी फोटो बीजेपी ट्विटर से साभार,