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  • कका तै तो कमाल कर देस..,गोबर से बने ब्रीफकेस में बजट लेकर पहुंचे सदन

     सूबे के ठेठ छत्तीसगढिय़ा मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तो आज कमाल ही कर दिया।

    गोबर से बने ब्रीफकेस में बजट लेकर सदन पहुंचे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 

    गोबर से बने ब्रीफकेस में बजट लेकर सदन पहुंचे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तो मौजूद लोग चौंक गए जब उन्हे पता चला कि ब्रीफकेस गोबर से बना हुआ है। आमतौर पर बजट पेश करने वाले वित्त मंत्री सूट-बूट में लक्जरी व कीमती ब्रीफकेस में बजट लेकर सदन पहुंचते रहे हैं|

     गोमय वसते लक्ष्मी..वाकई मां लक्ष्मी के प्रतीक के तौर पर विशेष रूप से तैयार गोधनमय ब्रीफकेस का बजट राज्य के लिए फलदायी होगा। लेकिन लोगों का चौकना इसलिए लाजमी था कि आखिर गोबर इतना कीमती हो गया कि गोबर बेंचने से पैसा मिल रहा,बिजली बन रही है,खाद व पेंट बन रहा और न जाने कितना गुणी है गोबर ..? अब तो ब्रीफकेस भी बन गया। जैसे कि मालूम हो छत्तीसगढ़ की गोधन न्याय योजना ने पूरे देश में अपनी एक अलग पहचान बनायी है। पहले किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि गोबर से कोई सामग्री भी तैयार की जा सकती है। जैसे कि बताया गया मुख्यमंत्री ने बजट पेश करने के लिए जिस ब्रीफकेस का इस्तेमाल किया वो चमड़े या जूट का नहीं होकर गोबर के बाई प्रोडक्ट से निर्मित है। इसे गोबर के पाउडर से तैयार किया गया है जिसे महिला स्वसहायता समूह की दीदी नोमिन पाल द्वारा बनाया गया है। छत्तीसगढ़ देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जिसने मां लक्ष्मी के प्रतीक के रूप में गो-धन से निर्मित ब्रीफकेस का इस्तेमाल किया है। नगर निगम रायपुर के गोकुल धाम गोठान में काम करने वाली एक पहल महिला स्वसहायता समूह की दीदियों ने गोबर एवं अन्य उत्पादों के इस्तेमाल से इस ब्रीफकेस का निर्माण किया है । इस ब्रीफकेस की खासियत ये है कि इसे गोबर पाउडर, चूना पाउडर, मैदा,लकड़ी एवं ग्वार गम के मिश्रण को परत दर परत लगाकर 10 दिनों की कड़ी मेहनत से तैयार किया गया है । बजट के लिए विशेष तौर पर तैयार किए गए इस ब्रीफकेस के हैंडल और कार्नर कोंडागांव शहर के समूह द्वारा बस्तर आर्ट कारीगर से तैयार करवाया गया है। सोशल मीडिया में जैसे ही यह खबर वायरल हुआ एक बार फिर छत्तीसगढ़ की गोधन योजना चर्चा में आ गया,लोग कमेंट्स भी करने लगे कका तै तो कमाल कर देस..।

  • आत्मनिर्भर महिलाएं खरी साबित हुई - अपने जीवन की कमान खुद संभाले हुए हैं
    बापू गांधी ने कहा था "खुद में वे बदलाव लाइए, जो आप दूसरों में देखना चाहते हैं। 
     
    महात्मा गाँधी के इन शब्दों को चरितार्थ कर विकास की हर कसौटी पर आज की आत्मनिर्भर महिलाएं खरी साबित हुई हैं। सदियों से महिलाओं को पुरुषोंकी तुलना में कमजोर और अबला बता दिया जाता था। लेकिन अब स्थितियां बदल रही हैं,  आज की सबल महिलाएं अपने जीवन की कमान खुद संभाले हुए हैं, वे ऐसी भूमिकाओं में बेहतरीन प्रदर्शन कर रही हैं, जहां कभी पुरुषों का बोलबाला था। चाहे वह कारखानों में काम करना हो, लड़ाकू जेट उड़ाना हो या सेना में भर्ती होना।
     
    मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले की 24 वर्षीय सविता भारतीय सेना में शामिल होकर जब अपने गांव लौटी, तो उसका स्वागत माला और ढोल-नगाड़ों के साथ बजते देशभक्ति के गीतों से हुआ। भोपाल की एक अन्य प्रसिद्ध हिंदी लेखिका डॉ स्वाति तिवारी ने भोपाल गैस त्रासदी की विधवाओं के जीवन पर किताब लिखकर ‘नेशनल लाडली मीडिया एंड एडवरटाइजिंग अवॉर्ड फॉर जेंडर सेंसेटिविटी’ जीता। जहां, पुरुषों का दशकों से खेलों पर वर्चस्व रहा है, वहीं विशेष रूप से भारत के गांवों-कस्बों में रहने वाली महिलाओं ने दिखाया है कि पूरे जुनून के साथ कोई काम किया जाए तो बहुत कुछ हासिल किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, शहडोल जिले की 22 वर्षीय पूजा वस्त्राकर क्रिकेट की दुनिया में बल्लेबाज के तौर पर नाम कमा रही हैं। ऐसे अनगिनत नाम हैं जिन्होंने विषम परिस्थितियों में अपने जज्बे से समाज और परिवार की दिशा और दशा बदली है।
     
    अक्सर कहा जाता है कि अगर आप एक महिला को शिक्षित करते हैं तो आप पूरे परिवार को शिक्षित करते हैं। सामाजिक-आर्थिक वर्गों की महिलाएं शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण के महत्व को पहचाना है। वे जानती हैं कि शिक्षा का पुल बनाकर पिछड़ेपन की खाई को पाटा जा सकता है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंहचौहानने समाज में महिलाओं को उनका उचित दर्जा दिलाने में मदद करने के लिए महिला सशक्तिकरण के कई अभियान शुरू किए हैं, जिसका उद्देश्य वंचित महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जोड़कर आत्मनिर्भर बनने में मदद करना और स्वयं के साथ-साथ अपने परिवार को आगे बढ़ाना है। 
     
    एक अन्य महत्वपूर्ण पहल दीदी वाहन सेवा योजना है जिसे राज्य के आदिवासी बहुल झाबुआ जिले में ग्रामीण आजीविका मिशन की महिलाओं द्वारा शुरू किया गया है। महिलाओं में स्टार्ट-अप को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने स्टार्ट-अप नीति और कार्यान्वयन योजना शुरू की है, जिसमें महिलाओं द्वारा स्थापित स्टार्ट-अप को अतिरिक्त 20 प्रतिशत सहायता प्रदान की जा रही है। हिंसा की शिकार महिलाओं को आश्रय, परामर्श, चिकित्सा सहायता, कानूनी सहायता और पुलिस सहायता प्रदान करने के लिए राज्य के सभी 52 जिलों में वन स्टॉप सेंटर संचालित किए जा रहे हैं।
     
     
    उद्योग क्षेत्र और इससे मिलने वाले अवसरों की बात करें तो महिलाओं का प्रतिनिधित्व हमेशा से ही कम रहा है, हालांकि अब यह क्षेत्र भी महिलाओं को काम पर रखने और नए अवसर देने की ओर बढ़ रहा है। हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के संचालन में महिला भागीदारी धारणाओं को तोड़ रही है। 
     
     
    यह भारत की पहली महिला मैनेजर के नेतृत्व वाली खदान है। आगामी बंदर डायमंड परियोजना आत्मनिर्भर बुंदेलखंड की ओर एक कदम है जो युवाओं और महिलाओं सहित स्थानीय लोगों को सैकड़ों रोजगार प्रदान करेगी। इस परियोजना में सरकारी खजाने में लगभग 28, 000 करोड़ के योगदान सहित क्षेत्र में लगभग 40, 000 करोड़ रुपये की आर्थिक गतिविधियों होगी, जिससे रोजगार के अवसर मिलेंगे। परियोजना के कारण आर्थिक विकास के साथ-साथ बंदर डायमंड प्रोजेक्ट अपनी सीएसआर गतिविधियों के माध्यम से सामाजिक प्रभाव पर भी ध्यान केंद्रित करेगा।
     
    कई संगठनों ने सीएसआर के दायरे में विभिन्न पहलों से महिलाओं में शिक्षा और कौशल विकास को आगे बढ़ाया है। उदाहरण के लिए, स्टरलाइट द्वारा जीवन ज्योति, गोदरेज द्वारा सैलून-आई, हिन्दुस्तानजिंक लिमिटेड द्वारा प्रोजेक्ट सखी और आदित्य बिड़ला समूह द्वारा महिला सशक्तीकरण की पहल, उन क्षेत्रों में महिलाओं में सकारात्मक बदलाव की उदाहरण हैं जहां परियोजनाएं शुरू हुई हैं।
     
    ऐसे में भारतीय महिलाओं की उपलब्धियों पर एक नज़र डालें तो लगता है कि वे पीढ़ियों को प्रेरित कर रही हैं। महिलाओं की उपलब्धियों का जश्न न केवल अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर बल्कि पूरे वर्ष चलते रहना चाहिए। 
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    मध्य प्रदेश सरकार द्वारा महिलाओं के लिए पहल और लाभ
    ऽ महिला एवं बाल विकास विभाग -विशेष पोषाहार आहार योजना के लिए 1450 करोड़ रुपए का प्रावधान
    ऽ आंगनबाड़ी  सेवाओं के लिए 1272 करोड़ रुपए का प्रावधान
    ऽ आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं को अतिरिक्त मानदेय हेतु 870 करोड़ रुपए का प्रावधान
    ऽ प्रधानमंत्री मातृवंदना योजना के लिए 196 करोड़ रुपए का प्रावधान
    ऽ राष्ट्रीय पोषण मिशन के लिए 155 करोड़ रुपए का प्रावधान  
    ऽ लाड़ली लक्ष्मी योजना के लिए वर्ष 2021-22 में 922 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
  • राज्य की सी.मार्ट दुकानों में सेल्समैन तथा एकाउंटेंट कम आपरेटर पद के लिए 11 मार्च को प्लेसमेंट कैंप
    *शासकीय रोजगार समाचार* सी.मार्ट दुकानों में सेल्समैन तथा एकाउंटेंट कम आपरेटर पद के लिए 11 मार्च को प्लेसमेंट कैंप रायपुर 08 मार्च 2022/ जिला कौशल विकास प्राधिकरण रायपुर द्वारा उजाला महिला ग्राम संगठन सेरीखेड़ी के लिए 11 मार्च को सुबह 11 बजे कल्पतरू मल्टी यूटिलिटी सेंटर सेरीखेड़ी में प्लेसमेंट कैम्प आयोजित किया जाएगा। इस प्लेसमेंट कैम्प में सी.मार्ट के दुकानों के लिए सेल्समैन तथा एकाउंटेंट कम आपरेटर पद के लिए साक्षात्कार लिया जायेगा। इन पदों के लिए रायपुर जिले के 18 वर्ष से 40 वर्ष तक युवाओं की भर्ती की जाएगी। इन पदों पर ऐसे अभ्यर्थी को प्राथमिकता दी जाएगी, जो रिटेल व्यवसाय में मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना या प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना में प्रशिक्षित है। ऐसे युवा जो 12वी. कक्षा उत्तीर्ण है, जिन्हें कम्प्युटर का ज्ञान है, और जिन्हें रिटेल क्षेत्र में कार्य का अनुभव है, इस प्लेसमेंट कैम्प में अपने सभी प्रमाण पत्रों के साथ साक्षात्कार के लिए उपस्थित हो सकते हैं। इन पदों पर चयनित युवाओं को नालंदा परिसर एवं सुभाष स्टेडियम में स्थापित हो रहे सी.मार्ट के दुकानों के साथ -साथ सेरीखेड़ी में भी कार्य करना होगा। इन्हें उनके योग्यता एवं कार्य अनुभव के आधार पर प्रतिमाह 6 हजार से 10 हजार रूपये तक मानदेय का भुगतान किया जायेगा।
  • महिला दिवस के अवसर पर महिलाओं द्वारा क्रमिक भूख हड़ताल ?
    *महिलाओं द्वारा क्रमिक भूख हड़ताल* अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर देश दुनिया में 8 मार्च को महिलाओं को सम्मानित किया जा रहा है | वहीं दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च के दिन ही छत्तीसगढ़ की राजधानी के नवा रायपुर में किसान आंदोलन मंच पर महिलाएं क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठ रही हैं | शासन प्रशासन को लिखित सूचना देने के बावजूद क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठने से आज के दिन महिलाओं को रोकने कोई अधिकारी किसानों के धरना स्थल मंच पर नहीं पहुंचा | अब ऐसे में महिलाओं के सम्मान, संप्रभुता की बात करना,महिला शक्ति, महिला सशक्तिकरण की बात करना कितना उचित लगता है ? *अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर क्रमिक भूख हड़ताल बैठने वाली महिलाएं के नाम व पते* 1:- मीना यादव (कयाबाधां) 2:- डेरहिन बाई धीवर (कयाबाधां) 3:- रूखमणी बाई सेन (कयाबाधां) 4:- जुगवा बाई पाल (कयाबाधां) 5:- तारा साहू (उपरवारा) 6:- बैजनत्री बाई (उपरवारा) 7:- लक्ष्मी खुटे ( बरौदा) 8:- शांति बाई पाण्डेय (बरौदा) 9:- तोमिन निर्मलकर (बरौदा) 10:- रमा बाई पाल (बरौदा) 11:- नीरा बाई साहू ( उपरवारा) 12: इन्द्रतीन बाई साहू (उपरवारा) नवा रायपुर किसान आन्दोलन स्थल पर आज किसान मंच में आमरण अनशन (भूख हड़ताल) पर बैठें हैं । *आमरण अनशन पर बैठने वाले किसान सदस्य* 1 राजकुमार पटेल (उपरवारा) 2:- भारत दास मानिकपुरी (रीको ) 3:- दुकालू राम सिन्हा (रीको) 4:- जगत राम सोनवानी (खण्डवा नई राजधानी प्रभावित किसान कल्याण समिति द्वारा जारी विज्ञप्ति में उक्त जानकारी दी गई|
  • चुनाव परिणामों से पहले गलत सूचनाओं को रोकने के लिए Koo App ने जारी की एडवाइजरी
     फर्जी खबरों और अनुचित कंटेंट को बढ़ावा देने वाले 800 से ज्यादा स्पैम खातों पर लगाई पाबंदी
    ऑनलाइन स्वीकृत या प्रतिबंधित चीज़ों के बारे में यूजर्स को सशक्त और संवेदनशील बनाने के लिए कई भाषाओं में सामुदायिक दिशानिर्देश जारी किए
    चुनाव परिणामों से पहले गलत सूचनाओं को रोकने के लिए Koo App ने जारी की एडवाइजरी - 
    सूचना की पुष्टि करने के मकसद से यूजर्स को प्रतिष्ठित फैक्ट-चेकर्स तक पहुंच प्रदान की
     
    4 मार्च 2022: उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में चुनाव परिणामों से पहले Koo App ने एक एडवाइजरी  जारी की है। इसका मकसद यूजर्स को जिम्मेदार ढंग से सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने के साथ गलत सूचना और फर्जी खबरों पर अंकुश लगाने के लिए संवेदनशील बनाना है। एडवाइजरी के हिस्से के रूप में कू ऐप ने प्लेटफॉर्म पर मौजूद सभी 10 भाषाओं में अपने सामुदायिक दिशानिर्देश (Community Guidelines) भी जारी किए हैं। ये दिशानिर्देश भारतीय संदर्भ से जुड़े हुए हैं और क्रिएटर्स के साथ ही पहली बार सोशल मीडिया इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को ज्यादा बेहतर कंटेंट बनाने के लिए सशक्त बनाते हैं, इसके अलावा यह भी बताते हैं कि जिम्मेदार ऑनलाइन आचरण क्या होता है। ये दिशानिर्देश फर्जी खबरों और गलत सूचनाओं का विशिष्ट संदर्भ देते हैं और यूजर्स को कुछ भी पोस्ट करने से पहले जानकारी को सत्यापित करने के महत्व पर सूचित करने के साथ ही पर्याप्त सबूत के बिना किसी सूचना को 'फर्जी’ के रूप में करार दिए जाने से भी बचाते हैं। 
     
    चूंकि चुनाव परिणामों से पहले सोशल मीडिया पर आम तौर पर गलत सूचनाओं में बढ़ोतरी देखने को मिलती है, इसलिए कू ऐप ने यूजर्स को सूचना को प्रमाणित करने के मकसद से प्रमुख थर्ड पार्टी फैक्ट-चेकर्स तक पहुंच भी प्रदान की है। सोशल मीडिया मध्यवर्ती होने के नाते जब तक कि कानून द्वारा जरूरी न हो, कू ऐप स्वयं ना तो इन सूचनाओं के पुख्ता होने का आकलन करता है और ना ही कंटेंट में हस्तक्षेप करता है; और इस प्रकार फैक्ट-चेकर्स तक पहुंच को सक्षम बनाकर ऑनलाइन सुरक्षा और पारदर्शिता के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराता है।
     
    चूंकि फर्जी खबरें (फेक न्यूज) अक्सर बोट्स या स्पैम खातों द्वारा फैलाई जाती हैं, इसलिए कू ऐप गलत सूचनाओं को सीमित करने के लिए ऐसे खातों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखता है और इन्हें प्रतिबंधित करता है। बीते 1 दिसंबर 2021 से 28 फरवरी 2022 तक कू पर स्वयं को समाचार चैनल या पत्रकार के रूप में पेश करने वाले या किसी भी तरह से समाचार से संबंधित होने वाले हैंडल की संख्या 4,720 से अधिक थी, जिसमें से स्पैम या अनुचित सामग्री के कारण 834 को प्रतिबंधित कर दिया गया है। कू इनके व्यवहार की लगातार निगरानी कर रहा है।
     
    कू ऐप के सीईओ और सह-संस्थापक अप्रमेय राधाकृष्ण ने कहा, “मूल भाषाओं में आत्म-अभिव्यक्ति के लिए एक सोशल प्लेफॉर्म के रूप में हम क्रिएटर्स का स्वागत करते हैं और यूजर्स को रचनात्मकता और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए ऑनलाइन अधिक समग्र दृष्टिकोण अपनाने के लिए सशक्त बनाते हैं। महत्वपूर्ण घटनाओं से पहले गलत सूचना चिंता का एक प्रमुख विषय है। इस एडवाइडरी के जरिये कू ऐप एक जिम्मेदार मंच के रूप में फर्जी खबरों और द्वेष के प्रसार को रोकने में मदद कर सकता है और अधिक ऑनलाइन सुरक्षा और पारदर्शिता को बढ़ावा दे सकता है। ये एडवाइजरी यूजर्स, विशेष रूप से पहली बार सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को सकारात्मक और सम्मानजनक तरीके से तकनीक का फायदा उठाने के लिए प्रोत्साहित करेगी ताकि ज्यादा सार्थक ऑनलाइन संवाद का निर्माण किया जा सके। कू यूजर्स को एक सुरक्षित और व्यापक अनुभव प्रदान करने के लिए लगातार सबसे बेहतरीन तरीकों की पहचान करने का प्रयास करता है।"
     
    चुनावों के दौरान सोशल मीडिया के नैतिक इस्तेमाल के लिए इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (IAMAI) द्वारा स्वैच्छिक आचार संहिता के एक हस्ताक्षरकर्ता के रूप में कू ऐप चुनावी प्रक्रिया में ज्यादा भरोसा पैदा करने के लिए मतदाता साक्षरता को भी बढ़ा रहा है। भारत के संविधान के मुताबिक पहली बार के मतदाताओं को उनके अधिकारों और जिम्मेदारियों पर सशक्त बनाने के लिए मंच ने कू वोटर्स गाइड जारी की हैं। इन्हें चुनाव से पहले कई भाषाओं में पेश किया गया और मतदाता जागरूकता अभियानों जैसे प्लेज टू वोट, यूपी का घोषणापत्र को सफलतापूर्वक पूरा किया है।
     
    कू के बारे में
     
    Koo App की लॉन्चिंग मार्च 2020 में भारतीय भाषाओं के एक बहुभाषी, माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म के रूप में की गई थी
  • 200 भारतीय छात्रों को लेकर दिल्ली पहुंचा एयरफोर्स का पहला C-17 ग्लोबमास्टर

    यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों को लाने के ऑपशेन गंगा के तहत 200 भारतीयों को लेकर एयरफोर्स( airforce) का पहला C-17 ग्लोबमास्टर विमान आज तड़के हिंडन एयरबेस पर उतरा। इस विमान ने रोमानिया ( romania)के बुखारेस्ट से उड़ान भरी थी। रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्‌ट ने एयरबेस पर यात्रियों का स्वागत किया।

    भारतीयों ने यूक्रेन छोड़ा

    उधर, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि रोमानिया,हंगरी, स्लोवाकिया और पोलैंड से 9 विमानों ने उड़ान भरी है। 6 और विमान जल्द ही उड़ान भरने वाले हैं। इनमें एयरफोर्स (airforce) ग्लोब मास्टर भी शामिल हैं। अब तक 17 हजार भारतीयों ने यूक्रेन छोड़ दिया है।

    भारतीय स्टूडेंट्स को बनाया बंधक ( areest)

    यूक्रेन में फंसे भारतीय स्टूडेंट्स में से कुछ को यूक्रेनी सेना ने बंधक बना लिया है, जिससे उनका इस्तेमाल मानवीय कवच के रूप में किया जा सके। यह दावा भारत स्थित रूसी एम्बेसी ने किया है।

    दिल्ली- मुंबई पहुंची उड़ानें( delhi mumbai)

    उधर,एअर इंडिया का एक और विमान भी गुरुवार तड़के दिल्ली पहुंचा। केंद्रीय राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने एयरपोर्ट पर यात्रियों का स्वागत किया। चौधरी ने बताया कि अब तक कुल 16 उड़ानों से करीब 3000 भारतीयों को यूक्रेन से भारत लाया जा चुका है। वहीं इंडिगो का विशेष विमान भी बुखारेस्ट से 200 भारतीयों को लेकर दिल्ली पहुंचा। इसमें आए स्टूडेंट्स ( students) स्वागत केंद्रीय राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर ने किया।

  • गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ की जगह गढ़बों नवा रायपुर तक सिमट रही प्रदेश सरकार क्यों ? - विशेष लेख

    *गढ़बो नवा छत्तीसगढ़* छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद वैसे तो कोई बड़े काम शुरू होते नजर नहीं आए सिर्फ घोषणा ही हुई हैं, परंतु छोटे-छोटे कार्यों की कोई कमी इस प्रदेश में नहीं है, चौक चौराहों को सजाने की बात हो, बिना वजह के खर्चों की बात हो, कुछ भी तोड़ो फिर बनाओ की बात हो तो यह सब कमाई के साधन प्रदेश में लगातार चल रहे हैं| अब हम आपको बताते हैं कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार जो गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ की बात करती है अब ऐसा लगता है कि वह अपने उस नारे से किनारा कर सिर्फ *गढ़बो नया रायपुर* में सिमटती नजर आ रही है और यह हम नहीं कह रहे हैं यह स्वयं सरकार कह रही है |

     

     

    गढ़बो नया रायपुर का नारा वैसे तो नए रायपुर के लिए होना चाहिए परंतु प्रदेश की भूपेश बघेल सरकार इसे पुराने रायपुर पर आजमा रही है | मुख्यमंत्री निवास के आसपास अच्छे भले बिजली के खंभों को काटकर, उखाड़ कर उसी जगह नए खंभे लगाकर कर्ज लेने वाली यह सरकार बिना वजह के खर्च करके अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की अवैध आवक के साधन पैदा कर रही है ! इस तस्वीर से आप समझ जाएंगे कि अच्छे भले बिजली के पोल जिन पर महंगी लाइटें इस मार्ग को रोशन कर रही थी उन्हें हटाकर इन चौरस काले खंभों के माध्यम से बिना वजह का खर्च दिखाकर कमाई का रास्ता निकाला गया है और यह सब कुछ नागरिकों से वसूले जा रहे हैं टैक्स के अलावा कर्ज लेकर प्रदेश के नागरिकों पर कर्ज लादने वाली सरकार का कारनामा है | वैसे तो इन सब मामलों में जो जिम्मेदारी विपक्ष को दमदार तरीके से निभानी चाहिए थी परंतु पता नहीं विपक्ष सिर्फ दिखावे के धरना - प्रदर्शन और बयान जारी करने तक ही सीमित क्यों है ? इन मामलों को लेकर संबंधित अदालतों में याचिका दायर करने का दायित्व विपक्ष को निभाना चाहिए! आम नागरिक महंगे अदालती खर्चों के कारण शासन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर कार्यवाही करने से पीछे हट जाता है और अपने सामने अपने द्वारा दिए गए टैक्स की बर्बादी को देखकर खून के आंसू रोता है और अंदर ही अंदर घुट घुट कर शासन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत को देखता रहता है | यहां यह सवाल भी उठता है कि जब प्रदेश सरकार लगातार करोड़ों रुपए का कर्ज लेकर गुजारा कर रही है तो फिर इस तरह के फालतू खर्चों पर खर्च कर वह क्या दिखाना चाहती है ? , क्या इन खर्चों से वह जनता का दिल जीत पाएगी ? क्या इन फालतू के खर्चों के दम पर वह प्रदेश का विकास कर पाएगी ?

  • महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नवाब मलिक को ईडी ने किया गिरफ्तार
    एनसीपी नेता एवं महाराज सरकार में मंत्री नवाब मलिक को ईडी ने गिरफ्तार कर लिया है प्रदेश में ईडी के द्वारा प्रदेश के मंत्री की यह दूसरी गिरफ्तारी है | उल्लेखनीय है कि इससे पहले महाराष्ट्र सरकार के गृह मंत्री रहे अनिल देशमुख पहले ही गिरफ्तार हैं | और अब प्रदेश के दूसरे मंत्री नवाब मलिक भी आज गिरफ्तार कर लिए गए हैं | बताया जाता है कि बाजार मूल्य से बहुत ही कम कीमत में जमीन की खरीदी के मामले में ईडी ने नवाब मलिक के घर सुबह दबिश दी और उन्हें पूछताछ के लिए आईडी दफ्तर लाया गया जहां पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार घोषित किया गया और उनकी डॉक्टरी जांच के बाद नियमानुसार कोर्ट में पेश किया जाएगा | उल्लेखनीय है कि आर्यन खान की गिरफ्तारी के समय प्रदेश के मंत्री नवाब मलिक ने खुलकर विरोध किया था, ई डी एवम नारकोटिक्स क्राइम ब्यूरो पर पत्रकार वार्ता के माध्यम से लगातार हमले किए थे | आम लोगों द्वारा माना जा रहा है कि उसी के परिणाम स्वरूप उन पर या कार्यवाही की गई है | अपनी गिरफ्तारी घोषित होने के बावजूद नवाब मलिक हंसते हुए भी दफ्तर से बाहर आए और उन्होंने मीडिया के सवालों के जवाब में कहा कि लड़ेंगे लेकिन डरेंगे नहीं | महाराज सरकार के मंत्री नवाब मलिक की गिरफ्तारी के बाद पक्ष विपक्ष के बीच वार प्रति वार शुरू हो गया है |
  • अहमदाबाद ब्लास्ट - 38 दोषियों को फांसी की सजा का एलान

    साल 2008 में गुजरात (Gujarat) के अहमदाबाद (Ahmedabad) में हुए सीरियल बम धमाकों (Bomb Blast) के मामले में दोषियों को सजा सुना दी गई है. विशेष न्यायाधीश एआर पटेल की अदालत ने 49 अभियुक्तों में से 38 लोगों को फांसी की सजा सुनाई गई है. बाकी 11 दोषियों को उम्र कैद हुई है.

     

     

    साल 2008 में गुजरात (Gujarat) के अहमदाबाद (Ahmedabad) में हुए सीरियल बम धमाकों (Bomb Blast) के मामले में दोषियों को आज सजा सुनाई गयी . इस मामले में 49 अभियुक्तों की सजा का एलान गुजरात की एक विशेष अदालत ने किया |  सजा पर सुनवाई मंगलवार को खत्म हुई थी और विशेष न्यायाधीश ए आर पटेल की अदालत ने आदेश देने के लिए 18 फरवरी की तारीख तय की थी.

    70 मिनट के भीतर हुई थी 56 लोगों की मौत

    अहमदाबाद में 26 जुलाई 2008 को हुए सिलसिलेवार बम धमाके में 70 मिनट के भीतर 56 लोगों की मौत हो गई थी और 200 से अधिक घायल हो गए थे. अदालत में 13 साल से भी ज्यादा समय तक मामला चलने के बाद पिछले सप्ताह 49 लोगों को दोषी ठहराया गया और 28 अन्य को बरी कर दिया गया था.

    आतंकी  संगठन इंडियन मुजाहिदीन से जुड़े हैं दोषी- पुलिस

     

     

     

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    बचाव पक्ष ने सजा पर मंगलवार को अपने दलीलें समाप्त की. सोमवार को अभियोजन पक्ष ने दलीलें खत्म की थीं और अभियुक्तों को अधिकतम सजा देने का अनुरोध किया था. आरोपियों को गैर कानूनी गतिविधि (निवारण) अधिनियम (यूएपीए) के तहत आजीवन कारावास और मौत की सजा हो सकती है. उन पर कानून की अन्य धाराओं में भी मामला दर्ज है.   अदालत ने 77 अभियुक्तों के विरुद्ध पिछले साल सितंबर में मुकदमे की कार्यवाही समाप्त की थी. विचाराधीन  78 आरोपियों में से एक सरकारी गवाह बन गया था. पुलिस का दावा है कि उक्त आरोपी आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन से जुड़े हैं. आरोप था कि इंडियन मुजाहिदीन के आतंकवादियों ने 2002 में हुए गोधरा दंगे का प्रतिशोध लेने के लिए बम धमाके की साजिश रची थी.

  • जेल में भी मुस्लिम महिला बंदियों को हिजाब पहनाया जाएगा क्या ?
    *हिजाब विवाद पर कुछ सवाल* कर्नाटक के स्कूल कॉलेज से उठा हिजाब का विवाद पूरे देश में फैल रहा है | अनेक तरह के बयान सामने आ रहे हैं, कोई कह रहा है कि मुसलमान लड़कियों को बेपर्दा किया जा रहा है, कोई कह रहा है कि उन्हें पढ़ाई से रोका जा रहा है, कोई कह रहा है कि मुसलमान लड़कियां को शिक्षित होने से रोका जा रहा है, कोई कह रहा है कि हिजाब पहनकर ही मुस्लिम लड़कियां जाएंगी अगर कोई बीच में आएगा तो उसका हाथ तोड़ दिया जाएगा, कोई कह रहा है कि मुस्लिम धर्म में हिजाब पहनना आवश्यक है, हिजाब से सर बाल ढके जाते हैं, किसी को मुस्लिम लड़कियों के बाल क्यों देखने हैं ? और भी ना जाने क्या-क्या सवाल-जवाब, मुद्दे टीवी चैनलों, अखबारों और सोशल मीडिया पर चल रहे हैं | *कोई मुस्लिम महिला या लड़की अगर!* इन सबसे हटकर मेरा भी एक सवाल है कि क्या कोई मुस्लिम महिला या लड़की अगर किसी भी स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी, ट्रेनिंग सेंटर, कोचिंग सेंटर में पढ़ाई करने हिजाब पहनकर ही जाएंगी या जाती हैं ? क्या कोई मुस्लिम महिला या लड़की अगर पुलिस में भर्ती होगी तो क्या हिजाब पहनकर ही पुलिस की ड्यूटी करेगी ? पुलिस की वर्दी नहीं पहनेगी ? कोई मुस्लिम महिला या लड़की अगर डॉक्टर बनेगी तो क्या हिजाब पहनकर ही लोगों का इलाज करेगी ? कोई मुस्लिम महिला या लड़की अगर जल थल और वायु सेना में भर्ती होगी तो क्या हिजाब पहनकर ही अपनी ड्यूटी निभायेगी, देश की रक्षा करेगी सेना की वर्दी नहीं पहनेगी ? कोई मुस्लिम लड़की या महिला अगर देश के लिए क्रिकेट खेलेगी तो क्या हिजाब पहनकर क्रिकेट खेलेगी ? या खेलतीं है ? कोई मुस्लिम लड़की और महिला अगर किसी भी तरह के स्पोर्ट्स में भाग लेगी तो क्या हिजाब पहनकर खेलेगी ? या खेलती है ? कोई मुस्लिम महिला या लड़की अगर एंकर या रिपोर्टर बनेगी तो क्या हिजाब पहनकर ही एंकरिंग और रिपोर्टिंग करेगी ? या करती है ? कोई मुस्लिम महिला या लड़की अगर कलेक्टर कमिश्नर है या बनेगी तो क्या हिजाब पहन कर ही ड्यूटी पर जाती है या जाएगी ? कोई मुस्लिम महिला या लड़की जो देश में कहीं भी विधायक, सांसद, मंत्री या जनप्रतिनिधि है वह हिजाब पहनकर ही अपने दायित्व का निर्वहन करेगी ? या करती हैं? कोई भी मुस्लिम महिला या लड़की अगर खुद का व्यवसाय कर रही है तो क्या हिजाब पहनकर ही कर रही है ? या करेगी ? कोई मुस्लिम महिला या लड़की शासकीय या निजी किसी भी तरह की कोई भी नौकरी कर रही है या करेगी तो क्या हिजाब पहनकर ही करेगी ? या हिजाब पहनकर ही कर रही है ? कोई मुस्लिम महिला या लड़की अगर मजदूरी करती है या करेगी तो क्या हिजाब पहनकर ही करती है ? या हिजाब पहनकर ही करेगी ? कोई मुस्लिम महिला या लड़की अपने जान पहचान वालों या पड़ोसी जो किसी अन्य धर्म के हैं उनके विवाह, सगाई, एनिवर्सरी, बर्थडे या अन्य खुशी या दुख के अवसर पर उनके यहां जाएगी तो क्या हिजाब पहनकर ही जाती हैं ? या हिजाब पहनकर ही जाएगी ? कोई मुस्लिम महिला या लड़की अगर मिस प्रदेश, मिस इंडिया, मिस यूनिवर्स, के अलावा किसी भी तरह की प्रतियोगिता में भाग लेगी तो क्या हिजाब पहनकर ही लेगी ? या लेती हैं ? कोई मुस्लिम महिला या लड़की अगर फिल्म लाइन में किसी भी तरह का कोई रोल अदा करती हैं तो क्या हिजाब पहनकर ही करती हैं या करेंगी ? मुस्लिम समाज के सांसद, मंत्री, बड़े जनप्रतिनिधि, मुस्लिम समाज के चौधरी जो जगह-जगह बयान देते फिरते हैं कि देश में मुसलमान 15% हैं | उन्हें यह भी समझ लेना चाहिए कि जब मुस्लिम समाज 15% है और वह अपने आप को समाज के नाते हिंदुस्तान में अलग-थलग अपनी नीतियां चलाएंगे कहते फिरते हैं तो 85% प्रतिशत अन्य समाज अगर उनसे लेनदेन, खरीदी - बिक्री, उठना - बैठना, मिलना जुलना बातचीत करना सुख दुख में बुलाना और जाना छोड़ देगा क्या यह संभव है ? हर समाज के मुखिया से अपील है कि वे समाज को धार्मिक भावनाओं के आधार पर ना बांटें, सामाजिक दूरी ना बनाएं, आपस में मेलजोल रखें, संविधान के अनुसार चलने की बातें बताएं, और अगर संविधान में कोई कमी है तो संविधान में संशोधन होने तक इंतजार करें या संशोधन करवाएं लेकिन कानून के खिलाफ जाकर धार्मिक मतभेद पैदा ना करें, आपसी मेलजोल, उठना - बैठना, सुख दुख में जाना आना प्रभावित ना करें | कोई मुस्लिम महिला या लड़की अगर किसी अपराध में गिरफ्तार होती है तो उसे जेल में भी हिजाब पहनाया जाएगा क्या ?
  • जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा लिया गया ऐतिहासिक कदम - करूणा योजना
    जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा लिया गया ऐतिहासिक कदम


    रायपुर 07 फरवरी 2022/ जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, रायपुर में परिवर्तित नाम श्रीमती कल्पना गुप्ता निवासी हनुमान नगर रायपुर द्वारा सूचना प्रेषित की गयी कि, उनकी आयु और उनके पति की आयु 70-72 साल से अधिक है। उन्होंने अपने मकान को अपनी एक बेटी को इस उद्देश्य से दान दिया था कि वह बुढ़ापे में उनका भरण-पोषण एवं जीवन-यापन करेगी। लेकिन बेटी ने मकान अपने नाम होने के पश्चात् माता-पिता का भरण-पोषण करने से इंकार करते हुए उन्हें दो वक्त की रोटी के लिए भी मोहताज कर दिया। विधिक सहायता हेतु बुजुर्ग दंपत्ति ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, रायपुर में जानकारी प्रेषित की। इस पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, रायपुर अरविंद कुमार वर्मा ने मामले का त्वरित संज्ञान लेकर जिले में पहली बार छ.ग. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा संचालित योजना ‘‘करूणा” के तहत बुजुर्ग दंपत्ति के घर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, के माध्यम से उन्हें हर संभव सहायता पहुंचाने हेतु प्रतिधारक अधिवक्ता श्रीमती सुनीता तोमर, पैरालीगल वालिंटियर  देवेन्द्र धीवर तथा कर्मचारी अमित गार्डिया को भेजा।

    उक्त टीम बुजुर्ग दंपत्ति के घर पहुंचकर उनके सारे दस्तावेज निःशुल्क तैयार करने में सहयोग किया और दंपत्ति को यह बताया कि उनकी हर संभव सहायता प्राधिकरण द्वारा निःशुल्क रूप से सुनिश्चित की जाएगी। उक्त प्रकरण के संबंध में अरविंद कुमार वर्मा ने कहा कि माता पिता की सेवा करना हर संतान का कर्तव्य है और ऐसे बुजुर्ग माता-पिता के लिए न्याय भी उनकी संतान की तरह अपने कर्तव्य का निर्वहन करता है और कानूनन रूप से हर बुजुर्ग माता-पिता या वरिष्ठजन के अधिकारों की सुरक्षा हेतु जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, प्रतिबद्ध है। सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, रायपुर प्रवीण मिश्रा ने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की ‘करूणा योजना‘ बहुत ही प्रभावशाली एवं लाभकारी है।

    इस योजना के तहत वरिष्ठजन प्राधिकरण में फोन के माध्यम से भी सूचना दे सकते है। ऐसे प्रकरण में जिनकी संतान अपने माता-पिता का भरण पोषण नहीं कर रही हैं, प्राधिकरण उसमें समझौता कराकर भरण-पोषण उपलब्ध कराने का प्रयास करता है यदि समझौता सुनिश्चित न हो सके तो भरण-पोषण के विभिन्न कानूनों के माध्यम से त्वरित न्याय प्रदान कराने हेतु निःशुल्क सारे कानूनी कार्यवाही करके प्रकरण न्यायालय में पेश करने में भी प्राधिकरण सहयोग करता है।

  • एयरपोर्ट की टैक्सियों के महंगे किराए पर ज्योतिरादित्य सिंधिया का जवाब
    नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने रायपुर में पत्रकारों से चर्चा करते हुए बजट की जानकारी विस्तार से दी | उन्होंने अपने विभाग के बारे में भी पत्रकारों के सवालों के जवाब दिए | रायपुर में कार्गो सुविधा की बात भी उन्होंने कही, बिलासपुर एयरपोर्ट के विस्तार के बारे में उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री से अनेकों बार चर्चा करने के बावजूद भूमि हस्तांतरण एयरपोर्ट अथॉरिटी को नहीं किया जा रहा है, इसलिए विस्तार रुका हुआ है | इसी प्रकार अंबिकापुर दरिमा हवाई अड्डे के बारे में उन्होंने कहा कि अब प्रदेश सरकार का अपना एयरपोर्ट है परंतु हम अति शीघ्र उसे भी मुख्यधारा में लाएंगे | एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि देश में हवाई अड्डों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है और हवाई यात्रा आसान हुई है , नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने रेल यात्रा और हवाई यात्रा की तुलना करते हुए बताया कि रेल के सेकंड एसी और फर्स्ट एसी के मुकाबले हवाई यात्रा का फेयर 15% कम है | एयरपोर्ट की संख्या में वृद्धि एवं सस्ती हवाई यात्रा के बावजूद यात्रियों को हवाई जहाज की टिकट से ज्यादा खर्च एयरपोर्ट से बाहर शहर जाने में लगता है इस पर नागरिक उड्डयन विभाग ध्यान क्यों नहीं देता ?* एक सवाल के जवाब में नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि हमारा विभाग टैक्सियों का संचालन नहीं करता इसलिए इस बारे में हम कुछ नहीं कर सकते | यहां यह बताना उल्लेखनीय है कि केंद्रीय मंत्री शायद यह भूल गए हैं कि एयरपोर्ट पर टैक्सियों का संचालन करने के लिए कंपनियों को ठेका दिया जाता है और यह ठेका इतना महंगा होता है कि टैक्सी संचालन करने वाले ठेकेदार ठेके की राशि को समायोजित करने के लिए महंगी दर पर टैक्सिया उपलब्ध कराते हैं और बाहर की टैक्सियों को एयरपोर्ट में आने की पूरी तरह मनाही रहती है | एयरपोर्ट में टैक्सियों का संचालन करने वाले ठेकेदार एयरपोर्ट अथॉरिटी के साथ मिलकर खुलेआम दादागिरी करते हैं, यात्रियों को मजबूर करते हैं कि एयरपोर्ट अथॉरिटी द्वारा निर्धारित कंपनी की महंगी टैक्सियों से ही अपने गंतव्य तक जाएं अन्यथा उन्हें पैदल ही जाना पड़ेगा | एयरपोर्ट से शहर तक जाने के लिए हवाई जहाज के टिकिट फेयर के बराबर तथा कभी कभी उससे भी ज्यादा किराया टैक्सी संचालक मांगते हैं | Ola और uber ऑनलाइन बुकिंग वाली कैब को भी एयरपोर्ट से यात्री ले जाने की इजाजत नहीं होती है |