गुरु ग्रंथ साहिब जी के संपूर्णता दिवस पर प्रदेशभर के गुरुद्वारों में गूंजा शबद-कीर्तन
गुरु ग्रंथ साहिब जी के संपूर्णता दिवस पर प्रदेशभर के गुरुद्वारों में गूंजा शबद-कीर्तन
विशेष कीर्तन दरबार में बाहर से आए रागी जत्थों ने किया गुरु महिमा का गुणगान, संगत ने माथा टेककर लिया गुरु साहिब का आशीर्वाद
रायपुर। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के संपूर्णता दिवस के पावन अवसर पर छत्तीसगढ़ प्रदेशभर के गुरुद्वारों में श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। गुरुद्वारों में विशेष कीर्तन दरबार सजाए गए, जिसमें बड़ी संख्या में सिख समाज के श्रद्धालुओं ने शामिल होकर गुरु साहिब का आशीर्वाद प्राप्त किया।
विशेष कीर्तन दरबार में बाहर से आए रागी जत्थों ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की महिमा का गुणगान करते हुए शबद-कीर्तन एवं कथा के माध्यम से संगत को गुरु साहिब की महान शिक्षाओं से अवगत कराया। रागी जत्थों के मधुर शबद-कीर्तन से गुरुद्वारा परिसर आध्यात्मिक वातावरण से गूंज उठा और संगत निहाल हो गई।
संपूर्णता दिवस के अवसर पर सिख समाज के बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, महिलाओं एवं पुरुषों सहित सभी आयु वर्ग के श्रद्धालुओं ने गुरुद्वारों में पहुंचकर श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के समक्ष माथा टेका और श्रद्धापूर्वक कीर्तन श्रवण किया। श्रद्धालुओं ने वाहेगुरु जी के चरणों में अरदास कर परिवार, समाज, प्रदेश एवं देश की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
सिख इतिहास में विशेष महत्व रखता है संपूर्णता दिवस
श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का संपूर्णता दिवस सिख इतिहास का अत्यंत महत्वपूर्ण आध्यात्मिक अवसर है। पांचवें पातशाह श्री गुरु अर्जन देव जी ने गुरु साहिबान की बाणी तथा संतों एवं भक्तों की वाणी को संकलित कर आदि ग्रंथ का स्वरूप तैयार करवाया था। बाद में दसवें पातशाह श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने श्री गुरु तेग बहादुर जी की बाणी को इसमें शामिल कर श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को संपूर्ण स्वरूप प्रदान किया।
गुरु गोबिंद सिंह जी ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को गुरु रूप में प्रतिष्ठित करते हुए सिखों को सदैव गुरु ग्रंथ साहिब जी की बाणी से मार्गदर्शन प्राप्त करने की प्रेरणा दी। इसी कारण श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी सिख समाज के लिए सर्वोच्च आध्यात्मिक गुरु हैं और इसकी बाणी संपूर्ण मानवता को सत्य, समानता, प्रेम, सेवा एवं भाईचारे का संदेश देती है।
संपूर्णता दिवस हमें यह संदेश देता है कि गुरु की बाणी को केवल पढ़ना या सुनना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके संदेश को अपने व्यवहार और जीवन में उतारना भी आवश्यक है। समाज में प्रेम, भाईचारा, सद्भावना और सेवा की भावना को मजबूत करना ही गुरु साहिब की शिक्षाओं के प्रति सच्ची श्रद्धा है।
संपूर्णता दिवस के अवसर पर प्रदेशभर के गुरुद्वारों में विशेष अरदास की गई। संगत ने गुरु साहिब के समक्ष शीश झुकाकर परिवार, समाज, प्रदेश और देश की सुख-शांति एवं समृद्धि के लिए प्रार्थना की। दिनभर गुरुद्वारों में शबद-कीर्तन एवं गुरु की बाणी की गूंज से आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।


