शिरोमणि कमेटी की आंतरिक समिति ने सिंह साहिब ज्ञानी रघबीर सिंह को सेवा से किया सेवानिवृत्त
शिरोमणि कमेटी की आंतरिक समिति ने सिंह साहिब ज्ञानी रघबीर सिंह को सेवा से किया सेवानिवृत्त
एडवोकेट धामी ने अपने कार्यकाल के दौरान शिरोमणि कमेटी की संपत्तियों और जमा पूंजी में बड़े बढ़ोतरी का दिया विवरण
अमृतसर, 26 फरवरी —
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की विशेष बैठक आज शिरोमणि कमेटी के मुख्य कार्यालय में आयोजित की गई, जिसमें सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब के मुख्य ग्रंथी सिंह साहिब ज्ञानी रघबीर सिंह को दिए गए 72 घंटे के नोटिस के मामले पर विचार किया गया।

बैठक के दौरान गंभीर विचार-विमर्श के बाद यह पाया गया कि ज्ञानी रघबीर सिंह द्वारा शिरोमणि कमेटी के प्रबंधन पर लगाए गए आरोपों के समर्थन में कोई भी प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया। साथ ही सेवा नियमों की अनदेखी करते हुए प्रबंधन पर पुनः सवाल उठाए गए। इसके चलते उन्हें सेवा से सेवानिवृत्त करने का निर्णय लिया गया।
बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए शिरोमणि कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि ज्ञानी रघबीर सिंह ने हाल ही में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कमेटी के प्रबंधन पर आरोप लगाकर संस्था की छवि को नुकसान पहुंचाया था। आंतरिक समिति के 19 फरवरी के निर्णय के अनुसार उन्हें 72 घंटे का नोटिस देकर आरोपों के प्रमाण प्रस्तुत करने को कहा गया था, लेकिन निर्धारित समय में उन्होंने कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया।
उन्होंने कहा कि प्रेस में दिए गए बयानों से न केवल शिरोमणि कमेटी की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची, बल्कि सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब के मुख्य ग्रंथी पद की गरिमा भी प्रभावित हुई। यह आचरण सेवा नियमों का उल्लंघन भी है। इसके अतिरिक्त ज्ञानी रघबीर सिंह द्वारा हरिमंदिर साहिब में सुबह-शाम की धार्मिक सेवाओं का समुचित निर्वहन भी नहीं किया जा रहा था, जिससे वे अपने जिम्मेदार पद के अनुरूप कार्य नहीं कर रहे थे। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए उन्हें सेवा से सेवानिवृत्त करने का निर्णय लिया गया।
मीडिया से बातचीत में एडवोकेट धामी ने कहा कि कुछ लोग शिरोमणि कमेटी की संपत्तियों को लेकर झूठा प्रचार कर संगत में भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि उनके कार्यकाल में बड़े स्तर पर संपत्तियों की खरीद के साथ-साथ गुरुद्वारों, शिरोमणि कमेटी और धर्म प्रचार कमेटी की वित्तीय जमा पूंजी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2020-2021 से 2025-2026 के दौरान लगभग 111 करोड़ रुपये की संपत्तियां खरीदी गईं तथा गुरुद्वारों का बजट 577 करोड़ रुपये से बढ़कर 1120 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इसी अवधि में विभिन्न गुरुद्वारों की जमा पूंजी में लगभग 600 करोड़ रुपये की वृद्धि दर्ज की गई।
उन्होंने आगे बताया कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की एफडीआर में 273 करोड़ 60 लाख रुपये तथा धर्म प्रचार कमेटी की एफडीआर में 121 करोड़ 45 लाख रुपये की बढ़ोतरी हुई है। शैक्षणिक संस्थानों के लिए इस अवधि में 182 करोड़ रुपये अलग से प्रदान किए गए।
श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की 350वीं शताब्दी के लिए 5 करोड़ रुपये आरक्षित किए गए थे, जो संगत की श्रद्धा से बढ़कर अतिरिक्त राशि सहित जमा हैं। उन्होंने यह भी कहा कि खरीदी गई संपत्तियों का वर्तमान मूल्य कई गुना बढ़ चुका है, जो संगत के सहयोग और गुरु घरों के प्रति श्रद्धा का परिणाम है।
एडवोकेट धामी ने कहा कि सिख धर्म प्रचार, शिक्षा विस्तार और स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में लगातार कार्य किए जा रहे हैं। पिछले पांच वर्षों में चार लाख से अधिक श्रद्धालुओं को अमृतपान कराया गया है तथा अप्रैल तक 51 हजार का अतिरिक्त लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने पावन स्वरूपों के मामले में सरकार द्वारा बदली गई एसआईटी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार की मंशा केवल राजनीति करना प्रतीत होती है। यदि एसआईटी बदलनी ही थी तो श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार के निर्देशानुसार गुरसिख अधिकारियों को शामिल किया जाना चाहिए था।
गुरुद्वारा श्री अंब साहिब मोहाली की भूमि मामले में एफआईआर दर्ज होने के बावजूद पुलिस की कार्यवाही को उन्होंने निराशाजनक बताया।
बैठक में शिरोमणि कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी सहित वरिष्ठ पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।
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