शराब घोटाले में अनवर ढेबर को सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत, जमानत याचिका खारिज

शराब घोटाले में अनवर ढेबर को सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत, जमानत याचिका खारिज

रायपुर: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 2161 करोड़ के शराब घोटाले मामले में मुख्य आरोपी अनवर ढेबर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सोमवार को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने अनवर की जमानत याचिका खारिज कर दी।

इससे पहले राज्य सरकार ने घोटाले में संलिप्तता के आरोप में 22 आबकारी अधिकारियों को निलंबित कर दिया था। इन अधिकारियों पर शराब घोटाले के सिंडिकेट में शामिल होकर 88 करोड़ रुपये की अवैध कमाई करने का आरोप है।

क्या है छत्तीसगढ़ शराब घोटाला?

यह मामला पूर्व सीएम भूपेश बघेल सरकार के दौरान का है, जिसमें पूर्व IAS अनिल टुटेजा, उनके बेटे यश टुटेजा और सीएम सचिवालय की तत्कालीन उपसचिव सौम्या चौरसिया सहित कई रसूखदारों के खिलाफ आयकर विभाग ने 11 मई 2022 को दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में याचिका दायर की थी।

आरोप था कि प्रदेश में एक संगठित तरीके से रिश्वत और दलाली के जरिए अवैध कमाई हो रही थी, जिसकी अगुवाई रायपुर के तत्कालीन महापौर एजाज ढेबर के भाई अनवर ढेबर कर रहे थे।

इस याचिका के आधार पर ED ने 18 नवंबर 2022 को PMLA एक्ट के तहत केस दर्ज किया और जांच में सामने आया कि यह घोटाला 2019 के बाद नए आबकारी ढांचे (CSMCL) के तहत हुआ।

ED की चार्जशीट में बड़े नाम

ED ने मामले में अब तक 3841 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें शामिल हैं:

  • अनवर ढेबर (मुख्य आरोपी)
  • कवासी लखमा (पूर्व आबकारी मंत्री)
  • अनिल टुटेजा (पूर्व IAS)
  • त्रिलोक सिंह ढिल्लन
  • CSMCL, छत्तीसगढ़ डिस्टलर, वेलकम डिस्टलर, टॉप सिक्योरिटी जैसी कंपनियां
  • दिशिता वेंचर, नेस्ट जेन पावर, भाटिया वाइन मर्चेंट और सिद्धार्थ सिंघानिया आदि।

मुख्यमंत्री ने किया था CSMCL ढांचे का संशोधन

ED के अनुसार, 2017 में आबकारी नीति में बदलाव कर शराब बिक्री CSMCL के माध्यम से करवाई गई। 2019 में अनवर ढेबर ने अपने प्रभाव से अरुणपति त्रिपाठी को CSMCL का एमडी नियुक्त कराया, जिसके बाद बड़े पैमाने पर घोटाले को अंजाम दिया गया।

जांच जारी, कई और गिरफ्तारियां संभव

ED ने इस मामले में 15 जनवरी को कवासी लखमा को गिरफ्तार किया था। अब तक कई रसूखदारों को आरोपी बनाया जा चुका है और जांच की आंच आगे और तेज हो सकती है “सुप्रीम कोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद अब अनवर ढेबर की कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।