इस वर्ष रक्षाबंधन के अवसर पर छत्तीसगढ़ में लगभग ₹715 से ₹820 करोड़ का हुआ कारोबार - अमर पारवानी

इस वर्ष रक्षाबंधन के अवसर पर छत्तीसगढ़ में लगभग ₹715 से ₹820 करोड़ का हुआ कारोबार - अमर पारवानी

रक्षाबंधन पर ‘वोकल फॉर लोकल’ को मिला व्यापक जनसमर्थन, छत्तीसगढ़ के बाजारों में स्वदेशी उत्पादों की रही मजबूत मांग - CAIT

इस वर्ष रक्षाबंधन के अवसर पर छत्तीसगढ़ में लगभग ₹715 से ₹820 करोड़ का हुआ कारोबार - अमर पारवानी

देश के सबसे बड़े व्यापारिक संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के राष्ट्रीय वाइस चेयरमेन एवं राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड (भारत सरकार) के सदस्य श्री अमर पारवानी, छत्तीसगढ़ इकाई के चेयरमेन श्री जितेन्द्र दोशी, श्री विक्रम सिंहदेव, प्रदेश अध्यक्ष श्री परमानंद जैन, वाइस चेयरमेन श्री सुरिन्दर सिंह, श्री जीवत बजाज, प्रदेश महामंत्री श्री अवनीत सिंह, प्रदेश कोषाध्यक्ष श्री विजय पटेल, कार्यकारी अध्यक्ष श्री राजेन्द्र जग्गी, श्री वासु माखीजा, श्री राम मंधान, श्री भरत जैन, श्री राकेश ओचवानी एवं श्री शंकर बजाज ने संयुक्त रूप से बताया कि
भारत केवल उत्सवों और त्योहारों का देश नहीं है, बल्कि एक ऐसी जीवंत सांस्कृतिक एवं आर्थिक व्यवस्था का केंद्र है, जहाँ प्रत्येक त्योहार सामाजिक एवं सांस्कृतिक जीवन के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों को भी नई ऊर्जा प्रदान करता है। वर्ष भर मनाए जाने वाले विभिन्न त्योहार वास्तव में “सनातन अर्थव्यवस्था” के सशक्त स्वरूप का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो करोड़ों लोगों के लिए रोजगार, व्यापार एवं आजीविका के अवसर सृजित कर देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करते हैं। यह बात कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय वाइस चेयरमैन श्री अमर पारवानी ने कही।

कैट के राष्ट्रीय वाइस चेयरमेन श्री अमर पारवानी ने कहा कि भारत की सनातन परंपराओं से जुड़े त्योहार केवल धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वे किसानों, कारीगरों, शिल्पकारों, लघु उद्योगों, महिला उद्यमियों, परिवहन क्षेत्र, सेवा क्षेत्र, थोक एवं खुदरा व्यापारियों सहित एक विशाल आर्थिक श्रृंखला को सक्रिय करते हैं। दीपावली, होली, नवरात्र, गणेश उत्सव, दुर्गा पूजा, ईद, क्रिसमस, छठ पूजा और रक्षाबंधन जैसे पर्व प्रतिवर्ष विशाल आर्थिक गतिविधियों को जन्म देते हैं और राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान करते हैं।

अमर पारवानी ने कहा कि रक्षाबंधन भारत के सबसे महत्वपूर्ण और व्यापक रूप से मनाए जाने वाले त्योहारों में से एक है, जो भाई-बहन के पवित्र संबंध, पारिवारिक मूल्यों, सामाजिक समरसता और भारतीय संस्कृति की समृद्ध विरासत का प्रतीक है। यह पर्व केवल भावनाओं और रिश्तों का उत्सव नहीं है, बल्कि देश के व्यापार, उद्योग और सेवा क्षेत्रों के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक अवसर के रूप में भी स्थापित हुआ है।

कैट छत्तीसगढ़ के एक आकलन के अनुसार, इस वर्ष रक्षाबंधन के अवसर पर छत्तीसगढ़ में लगभग ₹715 से ₹820 करोड़ की आर्थिक गतिविधियाँ हुईं। इसमें अनुमानित ₹575 से ₹650 करोड़ का राखी कारोबार शामिल है, जबकि लगभग ₹140 से ₹170 करोड़ की अतिरिक्त खरीदारी मिठाइयों, ड्राई फ्रूट्स, परिधानों, फैशन एक्सेसरीज़, एफएमसीजी गिफ्ट पैक्स, आभूषणों, इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों तथा अन्य उपहार वस्तुओं पर हुई।

अमर पारवानी ने बताया कि राजधानी रायपुर सहित बिलासपुर, दुर्ग-भिलाई, राजनांदगांव, कोरबा, अंबिकापुर, जगदलपुर एवं प्रदेश के अन्य प्रमुख शहरों तथा छोटे शहरों और ग्रामीण बाजारों में रक्षाबंधन को लेकर अच्छी खरीदारी देखने को मिली। बाजारों में राखियों, उपहार सामग्री, मिठाइयों, ड्राई फ्रूट्स, परिधानों एवं अन्य उत्सवीय वस्तुओं की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि रही। यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि भारतीय त्योहार सामाजिक उत्सव के साथ-साथ स्थानीय व्यापार और उपभोग आधारित अर्थव्यवस्था को गति देने वाले महत्वपूर्ण कारक हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को इस वर्ष रक्षाबंधन पर व्यापक जनसमर्थन प्राप्त हुआ। छत्तीसगढ़ के उपभोक्ताओं ने भी स्वदेशी एवं स्थानीय स्तर पर निर्मित उत्पादों को प्राथमिकता दी। हस्तनिर्मित राखियों, पारंपरिक उपहारों, स्थानीय कारीगरों द्वारा निर्मित वस्तुओं, महिला स्वयं सहायता समूहों तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के उत्पादों की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। इससे स्थानीय कारीगरों, छोटे व्यापारियों और लघु उद्यमियों के लिए आय एवं रोजगार के अवसर बढ़े।

कैट छत्तीसगढ़ के बाजार आकलन के अनुसार, अतिरिक्त ₹140–170 करोड़ के उत्सवीय व्यय में लगभग 25 प्रतिशत राशि मिठाइयों एवं ड्राई फ्रूट्स पर, 20 प्रतिशत परिधान एवं फैशन एक्सेसरीज़ पर, 20 प्रतिशत एफएमसीजी गिफ्ट पैक्स पर, 15 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों पर, 10 प्रतिशत सोने-चांदी एवं आभूषणों पर तथा शेष 10 प्रतिशत अन्य उपहार वस्तुओं पर खर्च होने का अनुमान है।

अमर पारवानी कहा कि भारत की ‘सनातन अर्थव्यवस्था’ की नींव समाज, संस्कृति और व्यापार के गहरे परस्पर संबंधों पर आधारित है। भारतीय त्योहार इस संबंध को और मजबूत करते हैं तथा आर्थिक समृद्धि को समाज के विभिन्न वर्गों, विशेषकर जमीनी स्तर तक पहुँचाने का कार्य करते हैं। यही कारण है कि भारत की उत्सव परंपराएँ केवल सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि राष्ट्र निर्माण और आर्थिक विकास की एक महत्वपूर्ण शक्ति भी हैं।

CAIT के प्रदेश अध्यक्ष परमानंद जैन ने कहा, “रक्षाबंधन आस्था, स्नेह, सामाजिक समरसता और आर्थिक समृद्धि का अद्भुत संगम है। यह पर्व भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को सुदृढ़ करने के साथ-साथ स्थानीय व्यापार को सशक्त बनाता है, उद्यमिता को प्रोत्साहित करता है, रोजगार सृजित करता है और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को आगे बढ़ाता है। इस वर्ष छत्तीसगढ़ के बाजारों में दिखाई दी रौनक इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश के उपभोक्ता स्वदेशी एवं स्थानीय उत्पादों को तेजी से अपना रहे हैं। यह प्रवृत्ति स्थानीय व्यापार, एमएसएमई, कारीगरों और छोटे उद्यमियों को मजबूत करने के साथ-साथ ‘विकसित भारत’ के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।”