प्रेस क्लब में अध्यक्ष का फरमान ध्वस्त, निर्वाचित सचिव-कोषाध्यक्ष ही रहेंगे काबिज
सहायक पंजीयक ने 31 जुलाई की बैठक के प्रस्ताव को ठहराया अमान्य, कार्यकारिणी के अधिकारों पर खींची साफ लक्ष्मण रेखा
मन्नू मानिकपुरी संवाददाता बिलासपुर
बिलासपुर- बिलासपुर प्रेस क्लब में पदाधिकारियों के बीच चल रहे विवाद में अध्यक्ष अजित मिश्रा को बड़ा झटका लगा है। सहायक पंजीयक, फर्म्स एवं संस्थाएं ने 31 जुलाई की कार्यकारिणी बैठक में सचिव संदीप करिहार और कोषाध्यक्ष किशोर कुमार सिंह के पदों में बदलाव संबंधी प्रस्ताव को नियम विरुद्ध मानते हुए निरस्त कर दिया है। आदेश के बाद दोनों निर्वाचित पदाधिकारी अपने-अपने पदों पर यथावत बने रहेंगे।
इस आदेश ने प्रेस क्लब की कार्यप्रणाली को लेकर चल रही अंदरूनी खींचतान के बीच यह साफ कर दिया है कि कार्यकारिणी या अध्यक्ष मनमाने ढंग से निर्वाचित पदाधिकारियों के अधिकार और दायित्व नहीं बदल सकते। संस्था का संचालन पंजीकृत संविधान और निर्धारित नियमों के तहत ही करना होगा।
**अध्यक्ष के फैसले पर प्रशासनिक मुहर नहीं, उलटे लगा सवालिया निशान**
विवाद उस समय गहराया, जब 31 जुलाई की बैठक में सचिव और कोषाध्यक्ष के पदों में बदलाव का प्रस्ताव पारित किया गया। इस कार्रवाई के खिलाफ सचिव संदीप करिहार और कोषाध्यक्ष किशोर कुमार सिंह ने सहायक पंजीयक के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की।
दस्तावेजों और संस्था के पंजीकृत संविधान का परीक्षण करने के बाद विभाग ने उक्त प्रस्ताव को नियमसम्मत नहीं माना। इससे अध्यक्ष की अध्यक्षता में लिया गया वह फैसला प्रभावहीन हो गया, जिसके जरिए निर्वाचित पदाधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव करने की कोशिश की गई थी।
**आदेश ने बता दिया—किसके पास कितनी ताकत**
सहायक पंजीयक ज्ञान प्रकाश साहू के आदेश में अध्यक्ष, सचिव, कोषाध्यक्ष, कार्यकारिणी और सामान्य सभा के अधिकारों एवं दायित्वों को लेकर स्थिति स्पष्ट की गई है। बैठकों की प्रक्रिया, प्रस्ताव, मतदान और सामान्य सभा की भूमिका के संबंध में निर्धारित नियमों का पालन अनिवार्य बताया गया है।
यानी संस्था में पदाधिकारी चाहे कोई भी हो, पंजीकृत संविधान से ऊपर किसी का व्यक्तिगत निर्णय नहीं चल सकता। निर्वाचित पदों में परिवर्तन भी निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया के तहत ही किया जा सकता है।
**प्रेस क्लब की निधि पर भी कसा शिकंजा**
वित्तीय व्यवस्था को लेकर भी सहायक पंजीयक ने क्लब प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं। संस्था की निधि बैंक में सुरक्षित रखने तथा राशि की निकासी और संचालन में अध्यक्ष या सचिव एवं कोषाध्यक्ष के संयुक्त हस्ताक्षर सुनिश्चित करने को कहा गया है।
साथ ही आय-व्यय का विधिवत हिसाब रखने और बैठकों की कार्यवाही को नियमों के अनुरूप दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश के बाद क्लब की वित्तीय व्यवस्था भी अब निगरानी के दायरे में दिखाई दे रही है।
**वित्तीय अनियमितताओं की जांच का रास्ता खुला**
सचिव और कोषाध्यक्ष की शिकायत में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई गई थी। हालांकि इस बिंदु पर सहायक पंजीयक ने तत्काल जांच का आदेश देने के बजाय छत्तीसगढ़ सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम की धारा 32 के तहत पंजीयक के समक्ष आवेदन करने का रास्ता खुला रखा है।
इसका मतलब साफ है कि विवाद अभी खत्म नहीं हुआ है। पदों को लेकर फैसला एक तरफ हो चुका है, लेकिन वित्तीय मामलों की जांच का मुद्दा आगे नई कार्रवाई का आधार बन सकता है।
*सूचना पटल पर चस्पा हुआ आदेश, क्लब में मचा सियासी ताप**
विवाद के बीच शुक्रवार देर शाम फर्म्स एवं सोसायटी कार्यालय के अधिकारी बिलासपुर प्रेस क्लब पहुंचे और सूचना पटल पर आदेश चस्पा किया। आदेश में 31 जुलाई की कार्यवाही को निरस्त करते हुए संस्था को उसके पंजीकृत संविधान के अनुसार संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं।
अधिकारी के आदेश के बाद अब गेंद क्लब के जिम्मेदार पदाधिकारियों के पाले में है। संस्था के संचालन में संविधान सर्वोपरि होगा या व्यक्तिगत प्रभाव—यह सवाल भी इस पूरे घटनाक्रम ने सामने ला दिया है।
*एकजुट पत्रकारों की ताकत के आगे झुका विवाद**
पूरे घटनाक्रम के दौरान सचिव संदीप करिहार और कोषाध्यक्ष किशोर कुमार सिंह के समर्थन में बड़ी संख्या में पत्रकार सामने आए। अल्प सूचना पर बुलाई गई आपात बैठक में पत्रकारों की मौजूदगी ने भी विवाद को नया मोड़ दिया।
दोनों पदाधिकारियों ने साथ खड़े पत्रकार साथियों का आभार जताते हुए कहा कि प्रेस क्लब की गरिमा, पत्रकारों के हित और संविधान की मर्यादा से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा।
**अब असली सवाल—क्या आगे भी चलेगा टकराव?**
सहायक पंजीयक के आदेश से फिलहाल सचिव और कोषाध्यक्ष के पदों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो गई है। लेकिन प्रेस क्लब के भीतर चल रहा विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। वित्तीय अनियमितताओं की जांच की मांग, कार्यकारिणी के अधिकारों और संस्था के संचालन को लेकर उठे सवाल अब आगे की कार्रवाई तय करेंगे।
*एक बात जरूर साफ हो गई है—प्रेस क्लब किसी व्यक्ति की निजी जागीर नहीं, बल्कि पंजीकृत संस्था है और उसका संचालन संविधान के मुताबिक ही करना होगा।।




