विधायक अनुज के जनहित मुद्दों के सवाल से फिर गूंजा सदन:: मंत्रियों से मांगे जवाब

विधायक अनुज के जनहित मुद्दों के सवाल से फिर गूंजा सदन:: मंत्रियों से मांगे जवाब

विधायक अनुज के जनहित मुद्दों के सवाल से फिर गूंजा सदन:: मंत्रियों से मांगे जवाब

विधानसभा बज़ट सत्र के दौरान विधायक अनुज शर्मा ने क्षेत्र की समस्याओं और विकास कार्यों को लेकर सरकार सें जनहित मुद्दों पर कई सारे सवाल किए। प्रश्नकाल के दौरान विधायक ने संबंधित मंत्री का ध्यान आकर्षित करते हुए पांच प्रमुख बिंदुओं पर जवाब मांगा।
विधायक अनुज शर्मा नें सदन में सवाल उठाया कि विधानसभा क्षेत्र धरसींवा के अंतर्गत वर्तमान वित्तीय वर्ष में धान खरीदी हेतु कितने नए और कुल कितने किसान पंजीकृत हैं व 1 नवम्बर 2025 से 10 फरवरी 2026 तक कुल कितने किसानों से कितनी मात्रा में धान खरीदी गई और उन्हें कितना भुगतान किया गया? और क्या क्षेत्र में दूसरे जिलों या राज्यों से धान लाकर बेचने की कोशिश के मामले सामने आए हैं?
जिसका जवाब मंत्री दयालदास बघेल नें दिया कि विधानसभा क्षेत्र धरसींवा के अंतर्गत पूर्व पंजीकृत कृषकों की संख्या 33,273 थीं और 1621 नवीन पंजीकृत किसान हैं ऐसे कुल 34,894 पंजीकृत कृषकों की संख्या हैं।1 नवम्बर 2025 से 10 फरवरी 2026 तक कुल 32,925 लाभान्वित किसान से धान की खरीदी की गई। किसानों से कुल धान खरीदी 1,70,085.20 मीट्रिक टन हैं। किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के रूप में ₹40,293.08 लाख का भुगतान शासन द्वारा किया जा चुका है और रायपुर जिले के अंतर्गत विधानसभा क्षेत्र धरसींवा में उक्त अवधि के दौरान दूसरे जिले या राज्य से अवैध रूप से धान लाकर बेचने की कोई भी शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। 
वहीं दूसरा प्रश्न किया कि राज्य में विभाग के माध्यम से कितनी बाल देखरेख संस्थाओं का संचालन किया जा रहा है तथा 01 अप्रैल, 2024 से दिनांक 10/02/26 तक इन संस्थाओं में कितने बच्चों का एडमिशन एवं पुनर्वास किया गया व विभाग द्वारा इन संस्थाओं और दत्तक ग्रहण एजेंसियों को कितनी राशि प्रदान की गई? और क्या यह सच है कि दत्तक ग्रहण एजेंसियों में नए प्रवेश नहीं हो रहे हैं, फिर भी राशि खर्च की जा रही है? इसके लिए कौन जिम्मेदार है?
जिसका जवाब मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े ने कहा कि किशोर न्याय अधिनियम (2015, संशोधित 2021) के तहत वर्तमान में राज्य में 109 बाल देखरेख संस्थाएं संचालित हैं।01 अप्रैल, 2024 से 10 फरवरी, 2026 तक इन संस्थाओं को आवर्ती (Recurring) और अनावर्ती (Non-recurring) मदों में वित्तीय सहायता प्रदान की गई है।माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'टेंपल ऑफ हीलिंग बनाम भारत संघ' (WP 1003/2021) में दिए गए आदेश (20.11.2023) के पालन में राज्य के उन 20 जिलों में भी 'विशेषीकृत दत्तक ग्रहण अभिकरण' (SAA) शुरू किए गए हैं, जहाँ ये पहले नहीं थे। इन नवीन संस्थाओं में वर्तमान में प्रवेशित बालकों की संख्या निरंक (Zero) है, क्योंकि बालकों का प्रवेश 'बालक कल्याण समिति' के आदेशानुसार ही होता है।वर्तमान में इन नई एजेंसियों का कार्य जिले के मौजूदा कर्मचारियों द्वारा किया जा रहा है। मिशन वात्सल्य योजना के तहत नई नियुक्तियों की प्रक्रिया जारी है। अतः संस्था की स्थापना और आवश्यक संचालन हेतु अनिवार्य व्यय योजना के प्रावधानों के तहत ही किया जा रहा है। 
विधायक नें अपने तीसरे प्रश्न में पूछा की वर्ष 2024-25 से दिनांक 10/02/2026 तक विभाग द्वारा किन-किन फर्नीचर सामग्रियों की खरीदी के लिये निविदा आमंत्रित की गई तथा किस आदेश के तहत किन-किन फर्मों को फर्नीचर सप्लाई का कार्य प्रदाय किया गया? व जिन फर्मों ने सप्लाई किया उन्होंने मूल फर्नीचर निर्माता के माध्यम से एवं आथोराईजेशन से सहमति प्राप्त कर फर्नीचर सप्लाई का कार्य किया य नहीं ? यदि नहीं तो क्या यह शासन द्वारा निर्धारिज जेम पोर्टल के प्रावधानों का सीधा उल्लंघन नहीं है? और क्या मूल निर्माता की ओर से निविदा भरकर किसी और से निम्न स्तरीय सामग्री क्रय कर सप्लाई किया जाना धोखाधड़ी अथवा शासन के विरूद्ध अन्य संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है?  
जिसका जवाब महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े नें दिया कि विभाग द्वारा फर्नीचर सामग्री हेतु आमंत्रित निविदा एवं जेम पोर्टल के माध्यम से खरीदी की जानकारी प्रदान की गई इसके अलावा केवल एक प्रकरण ऐसा पाया गया जहाँ निविदाकर्ता ने मूल निर्माता (OEM) से ऑथोराइजेशन लिया था, लेकिन सामग्री स्वयं निर्मित प्रदाय की। चूंकि OEM ने बाद में सामग्री देने से मना कर दिया था, इसलिए निविदाकर्ता (जो स्वयं भी निर्माता है) ने आपूर्ति की। जेम पोर्टल में इसके लिए कोई विशिष्ट दंडात्मक प्रावधान स्पष्ट नहीं है। सामग्री की जाँच प्री-डिस्पैच और पोस्ट-डिस्पैच निरीक्षण में मानकों के अनुरूप पाई गई है। चूंकि आपूर्ति निर्धारित मापदंडों के अनुसार हुई है, इसलिए इसे धोखाधड़ी या अपराध की श्रेणी में नहीं माना गया है।