चिकित्सा एवं पैरामेडिकल शिक्षा को निजी हाथों में सौंपना, गलत निर्णय - डॉ. महंत
रायपुर, 14 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ विधानसभा नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने राज्य सरकार द्वारा चिकित्सा और पैरामेडिकल पाठ्यक्रमों को आयुष विश्वविद्यालय के नियंत्रण से मुक्त कर निजी विश्वविद्यालय को सौंपने की चल रही कवायद पर कड़ा एतराज जताया है।
डॉ. महंत ने इस मामले में राज्यपाल महोदय को पत्र प्रेषित कर व्यापक जनहित और लाखों छात्रों के भविष्य को देखते हुए इस प्रक्रिया को तुरंत निरस्त करने का आग्रह किया है।
डॉ. महंत ने कहा कि छत्तीसगढ़ में विगत 26 वर्षों से चिकित्सा, पैरामेडिकल सहित अन्य तकनीकी पाठ्यक्रम आयुष विश्वविद्यालय अधिनियम 2008 एवं तकनीकी विश्वविद्यालय अधिनियम के तहत पूरी पारदर्शिता,विश्वसनीयता और उच्च गुणवत्ता के साथ संचालित हो रहे हैं। वर्तमान में प्रदेश के लगभग 5 लाख युवा इन पाठ्यक्रमों में अध्ययन कर अपने भविष्य का निर्माण कर रहे हैं।
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत द्वारा उठाए गए निम्न बिंदु..
- कार्य परिषद के विरोध की अनदेखी - आयुष विश्वविद्यालय की कार्य परिषद ने पहले ही चिकित्सा और पैरामेडिकल पाठ्यक्रमों को निजी विश्वविद्यालयों को सौंपने के प्रस्ताव पर अपनी स्पष्ट असहमति दर्ज कराई है। इसके बावजूद शासन स्तर पर इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाना संदेहास्पद और अनुचित है।
- गरीब व वंचित वर्ग के हितों पर कुठाराघात - इन पाठ्यक्रमों के निजीकरण से उच्च शिक्षा अत्यधिक महंगी होगी। आर्थिक रूप से कमजोर, ग्रामीण और वंचित वर्ग के होनहार विद्यार्थियों के लिए चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करना असंभव हो जाएगा तथा सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को ठेस पहुंचेगी।
- द्विस्तरीय व्यवस्था से विश्वसनीयता को खतरा - स्थापित और सुचारू व्यवस्था में अनावश्यक बदलाव कर द्विस्तरीय प्रणाली लागू करने से राज्य की चिकित्सा शिक्षा प्रणाली, परीक्षाओं की शुचिता और डिग्री की साख पर गंभीर सवाल खड़े होंगे।
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने मान. राज्यपाल से अनुरोध किया है कि वे इस संवेदनशील मामले में त्वरित संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार को इस कार्यवाही को तत्काल रोकने तथा वर्तमान पारदर्शी एवं जनहितैषी व्यवस्था को ही यथावत निरंतर रखने हेतु निर्देशित करें।


