आदिवासी कांग्रेसी नेता की रायपुर सेंट्रल जेल में मौत पर शासन प्रशासन से सवाल
कांकेर जेल से रायपुर सेंट्रल जेल शिफ्टिंग और कांग्रेस नेता जीवन ठाकुर की मौत पर बड़े सवाल, जेल प्रशासन की भूमिका पर सवाल - कौन तय करेगा जिम्मेदारी ?
रायपुर। कांकेर जेल में बंद आदिवासी कांग्रेस नेता एवं चारामा के पूर्व जनपद अध्यक्ष जीवन ठाकुर की रायपुर सेंट्रल जेल में मौत ने समूचे प्रदेश में जेल प्रशासन, शासन और प्रदेश के गृह मंत्री की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वन अधिकार पट्टा घोटाले में सजा काट रहे जीवन ठाकुर को 2 दिसंबर को अचानक कांकेर से रायपुर सेंट्रल जेल शिफ्ट कर दिया गया था, जिसके दूसरे ही दिन तबीयत बिगड़ी और मेकाहारा में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
परिजनों ने जेल प्रबंधन को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि जेल प्रशासन ने न तो बीमारी की जानकारी परिवार को दी और न ही यह बताया कि उन्हें क्यों और किस आधार पर रायपुर भेजा गया। उनकी मौत के बाद अब पूरा मामला संदिग्ध परिस्थितियों से घिर गया है।
मुख्य सवाल जो जेल प्रशासन और गृह विभाग से पूछे जा रहे हैं
यह कि आदिवासी कांग्रेस नेता को कांकेर जेल से रायपुर सेंट्रल जेल क्यों भेजा गया?
यह कि कांकेर जेल से रायपुर जेल शिफ्टिंग सामान्य प्रक्रिया नहीं है। कांग्रेस नेता होने के नाते क्या कोई दबाव या विशेष कारण था?
क्या सुरक्षा कारणों का हवाला दिया गया?
किस अधिकारी ने यह आदेश जारी किया?
परिजनों को सूचना क्यों नहीं दी गई?
कांकेर जेल में जीवन ठाकुर को क्या बीमारी थी?
परिजनों का दावा है कि जीवन ठाकुर की तबीयत पहले से खराब थी—लेकिन यह जानकारी न तो मेडिकल रिपोर्ट में प्रदान की गई और न परिवार को बताया गया।
अगर बीमारी गंभीर थी, तो पूरा मेडिकल रिकॉर्ड सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया?
तबीयत खराब थी तो सीधे अस्पताल क्यों नहीं भेजा गया?
कानून स्पष्ट कहता है कि
“किसी भी बीमार बंदी को प्राथमिकता के आधार पर पहले जेल अस्पताल और फिर जरूरत पड़ने पर जिला अस्पताल भेजा जाएगा।”
मगर यहां जेल-से-जेल ट्रांसफर किया गया - क्या यह स्थापित नियमों की अवहेलना नहीं है?
रायपुर जेल अधीक्षक ने बीमार कैदी को आमद क्यों दी?
अगर दस्तावेज़ों में बीमार होने का उल्लेख था तो रायपुर जेल प्रशासन ने उन्हें आमद क्यों कराया?
क्या मेडिकल चेकअप औपचारिकता पूरी किए बिना कैदी को दाखिल कर लिया गया?
अगर तबीयत ठीक बताई गई, तो उनकी मौत अगले ही दिन कैसे हो गई?
आखिर रायपुर सेंट्रल जेल में मौत कैसे हुई?
जेल प्रशासन कहता है—“तबीयत अचानक बिगड़ी।”
लेकिन परिजनों का आरोप है— कांकेर जेल प्रशासन बीमारी छुपा रहा था
रायपुर जेल में मेडिकल लापरवाही हुई - समय पर समुचित इलाज नहीं मिला
अब यह जांच का विषय है कि
मौत प्राकृतिक थी, लापरवाही से हुई या सिस्टम की अनदेखी ने एक आदिवासी नेता की जान ले ली?
जिम्मेदार कौन?’
क्या आदिवासी नेता के साथ व्यवस्थित लापरवाही हुई ?
बिना परिजन को सूचना दिए ट्रांसफर करना संदिग्ध है
बीमारी के बावजूद लंबी दूरी का जेल ट्रांसफर जानलेवा साबित हुआ
गृह मंत्री व जेल विभाग जवाब दें कि दंड प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं हुआ
पार्टी ने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की न्यायिक जांच हो और जिम्मेदार अधिकारियों पर एफआईआर की कार्रवाई की जाए।
जेल प्रशासन और सरकार की जवाबदेही
इस घटना ने राज्य की जेल प्रणाली की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कुछ प्रमुख बिंदु—
क्या कैदी ट्रांसफर में मेडिकल बोर्ड की अनुमति ली गई?
क्या बीमारी को रिकॉर्ड में सही दर्ज किया गया?
परिजनों की सहमति/सूचना क्यों नहीं ली गई?
ट्रांसफर आदेश की कॉपी क्यों सार्वजनिक नहीं की जा रही?
क्या किसी राजनैतिक दबाव के कारण अचानक शिफ्टिंग हुई?
गृह मंत्री और जेल महानिदेशालय पर सीधा सवाल यह है कि
कैदी की सुरक्षा, स्वास्थ्य और जीवन की जिम्मेदारी किसकी थी और वह जिम्मेदारी किस स्तर पर विफल हुई?
जांच की जरूरत और परिवार की मांग
ठाकुर के परिजनों ने मुख्यमंत्री और गृह मंत्री को ज्ञापन देकर मांग की है कि—
ट्रांसफर से लेकर मौत तक की पूरी प्रक्रिया की हाई-लेवल जांच हो
मेडिकल रिपोर्ट, जेल मूवमेंट रजिस्टर और ट्रांसफर आदेश सार्वजनिक किए जाएं
दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई हो
यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि प्रदेश की जेल व्यवस्था की पारदर्शिता, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
अब पूरा प्रदेश यह जानना चाहता है कि कांग्रेस नेता जीवन ठाकुर की मौत का असली जिम्मेदार कौन है—कांकेर जेल प्रशासन, रायपुर सेंट्रल जेल, या सीधे तौर पर प्रदेश का गृह विभाग?
उपरोक्त मामले में छत्तीसगढ़ शासन ने कांकेर की सहायक जेल अधीक्षक श्रीमती रेणु ध्रुव को जगदलपुर लाइन अटैच कर दिया है। यह कार्रवाई जेल में कैदी की मौत के मामले में की गई है, जिसमें जेल प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाए गए थे। श्रीमती ध्रुव के कार्यकाल में कैदी की मौत के कारणों की जांच की जा रही है, लेकिन अभी तक किसी के खिलाफ जुर्म दर्ज नहीं किया गया है।
*मृत्यु के कारण की जांच*
जेल प्रशासन ने अभी तक कैदी की मौत के कारणों का खुलासा नहीं किया है। जांच के बाद ही पता चलेगा कि कैदी की मौत किन परिस्थितियों में हुई। अन्य जेलों में भी कैदियों की मौत के मामले सामने आए हैं, जिनमें जेल प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाए गए हैं,
ऐसे ही एक मामले में उत्तर प्रदेश के अम्बेडकर जिले में जिला कारागार में कैदी की मौत के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुधा यादव ने बड़ा आदेश दिया था। उन्होंने कैदी की मौत के मामले में SDM-थानाध्यक्ष समेत चार पर हत्या का मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए थे। इसी तरह अन्य मामलों में भी जेल प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाए गए हैं और जांच के बाद कार्रवाई की जा रही है |
अब देखने वाली बात यह है कि आदिवासी नेता जीवन ठाकुर की संदिग्ध मौत पर कांकेर की सहायक जेल अधीक्षक श्रीमती रेणु ध्रुव रायपुर के जेल अधीक्षक योगेश क्षत्रि सहित संबंधित अन्य अधिकारियों पर जुर्म दर्ज होता भी है या नहीं ?
cg24
