भाजपा अजजा मोर्चा 11 मार्च तक देशभऱ में ममता बैनर्जी का पुतला दहन करेगा : विकास मरकाम मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी पर जमकर हमला बोला और राष्ट्रपति के कार्यक्रम में प्रोटोकॉल के उल्लंघन और अपमान को तृणमूल कांग्रेस की राजनीतिक साजिश बताया।
भाजपा अजजा मोर्चा 11 मार्च तक देशभऱ में ममता बैनर्जी का पुतला दहन करेगा : विकास मरकाम
पत्रकार वार्ता के प्रारम्भ में आदिवासी स्वास्थ्य परम्पराएँ एवं औषधीय पादप बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम ने प. बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कार्यक्रम में हुईं अव्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी पर जमकर हमला बोला और राष्ट्रपति के कार्यक्रम में प्रोटोकॉल के उल्लंघन और अपमान को तृणमूल कांग्रेस की राजनीतिक साजिश बताया। श्री मरकाम ने कहा कि प. बंगाल में राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मू का अपमान न केवल संविधान व लोकतंत्र की मूलभावना का अपमान है, अपितु देश के समूचे आदिवासी समाज व महिलाओं का भी अपमान है। इस अपमान से देशभऱ के आदिवासी बेहद आक्रोश में हैं और देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद की गरिमा के अपमान के विरोध में भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के तत्वावधान में 11 मार्च तक देशभऱ के सभी जिलों में प. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी का पुतला दहन किया जाएगा।
विधायक नीलकंठ टेकाम ने कहा है कि 07 मार्च को पश्चिम बंगाल में आयोजित 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हुआ अपमान न केवल अशिष्ट आचरण की पराकाष्ठा है, बल्कि हमारे देश के लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक मर्यादाओं की हत्या है। भारत की प्रथम नागरिक राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मू का जिस तरह से बंगाल की ममता सरकार ने अनादर किया है, उसने देश के हर आदिवासी और नारी का सिर शर्म से झुका दिया है। श्री टेकाम ने कहा कि प. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को इस अपमानजनक व्यवहार के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू एवं पूरे आदिवासी समाज और देशभऱ की मातृशक्ति से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।
भाजपा विधायक श्री टेकाम ने मंगलवार को एकात्म परिसर स्थित भाजपा कार्यालय में आहूत पत्रकार वार्ता में कहा कि यह भारत के इतिहास में शायद पहली बार हुआ है कि देश की राष्ट्रपति किसी राज्य के दौरे पर हों और न तो वहां की मुख्यमंत्री और न ही कोई वरिष्ठ मंत्री उनके स्वागत के लिए उपस्थित हों। यह केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि राष्ट्रपति पद और संविधान का जानबूझकर किया गया अपमान है। श्री टेकाम ने सवाल किया कि पहले से तय सिलीगुड़ी के 'बिधाननगर' जैसे सुलभ स्थल को अंतिम समय में बदलकर बागडोंगरा के 'गोसाईंनपुर' जैसे दुर्गम और छोटे स्थान पर क्यों ले जाया गया? क्या ममता सरकार डर गई थी कि राष्ट्रपति को सुनने के लिए उमड़ने वाला आदिवासियों का सैलाब उनकी सत्ता हिला देगा? स्वयं महामहिम को सार्वजनिक मंच से कहना पड़ा, “यदि स्थान बड़ा होता, तो अधिक आदिवासी लोग शामिल हो पाते।” ममता बनर्जी ने अपनी राजनीतिक ईर्ष्या के कारण हजारों आदिवासी भाई-बहनों को राष्ट्रपति के संबोधन से वंचित कर दिया।
भाजपा विधायक श्री टेकाम ने कहा कि भारत के इतिहास में पहली बार एक आदिवासी महिला इस सर्वोच्च पद पर आसीन हुई हैं। ममता बनर्जी खुद को महिलाओं की हितैषी बताती हैं, लेकिन एक आदिवासी महिला राष्ट्रपति का स्वागत न करना उनकी 'संकीर्ण मानसिकता' और 'दलित-आदिवासी विरोधी' चेहरे को उजागर करता है। ममता बनर्जी ने बंगाल में लोकतंत्र को पहले ही समाप्त कर दिया है, और अब वे संवैधानिक संस्थाओं को भी चुनौती दे रही हैं। राष्ट्रपति का पद दलगत राजनीति से ऊपर होता है, लेकिन बंगाल सरकार ने इसे अपनी तुच्छ राजनीति का अखाड़ा बना दिया है। श्री टेकाम ने कहा कि ममता सरकार स्पष्ट करे कि राष्ट्रपति के स्वागत के लिए प्रोटोकॉल का पालन क्यों नहीं किया गया? कार्यक्रम स्थल को अंतिम क्षणों में दुर्गम स्थान पर स्थानांतरित करने के पीछे किसका हाथ था? श्री टेकाम ने कहा कि देश का आदिवासी समाज जाग चुका है। हम अपनी बेटी और देश की राष्ट्रपति का अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे। यदि सार्वजनिक माफी नहीं मांगी गई, तो इसका करारा जवाब लोकतांत्रिक तरीके से दिया जाएगा।
भाजपा विधायक श्री टेकाम ने कहा कि दुर्भाग्यवश हाल के वर्षों में कांग्रेस और 'इंडी गठबंधन' के नेताओं द्वारा देश के सर्वोच्च पद को लेकर अमर्यादित टिप्पणियाँ एक "पैटर्न" बन गई हैं। कांग्रेस स्वयं को लोकतंत्र की रक्षक बताती है, लेकिन उसका इतिहास संवैधानिक संस्थाओं और उन पर आसीन व्यक्तियों को नीचा दिखाने का रहा है। विशेषकर जब समाज के वंचित वर्ग (दलित और आदिवासी) से कोई व्यक्ति सर्वोच्च पद पर पहुँचता है, तो कांग्रेस का "सामंती अहंकार" कुंठित होकर अपमानजनक टिप्पणियों के रूप में बाहर आता है। भारत की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति के विरुद्ध कांग्रेस नेताओं की टिप्पणियां केवल राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि गहरे जातीय और लैंगिक द्वेष का प्रतीक हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी द्वारा देश की राष्ट्रपति को "राष्ट्रपत्नी" कहना महज 'जुबान फिसलना' नहीं था। इससे पहले पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का अपमान कर कांग्रेस ने अपना दलित विरोधी चेहरा प्रदर्शित किया है। श्री कोविंद को अक्सर "रबर स्टैंप" कहकर संबोधित किया गया, जो एक शिक्षित और अनुभवी दलित नेता की योग्यता का अपमान था।
भाजपा विधायक श्री टेकाम ने कहा कि ममता बनर्जी द्वारा बंगाल में राष्ट्रपति को रिसीव न करना और कांग्रेस नेताओं द्वारा उनके लिए अपशब्दों का प्रयोग करना, 'इंडी गठबंधन' की एक सोची-समझी रणनीति लगती है। यह गठबंधन देश को जोड़ने के बजाय उन वर्गों को अपमानित कर रहा है जो भारत की असली शक्ति हैं। श्री टेकाम ने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों को यह समझना होगा कि द्रौपदी मुर्मू केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि करोड़ों आदिवासियों और महिलाओं की प्रेरणा हैं। उनका अपमान भारत की लोकतांत्रिक जड़ों को खोखला करने जैसा है।
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