बिलासपुर: रसूख के दम पर कानून बेबस? जेल जाने से पहले ‘बीमारी’ का ड्रामा, आरोपी विशाल विधानी सीधे सिम्स में एडमिट
मन्नू मानिकपुरी संवाददाता बिलासपुर
बिलासपुर। शहर में कानून व्यवस्था और प्रभावशाली लोगों की पकड़ पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कोर्ट से जेल वारंट जारी होने के बाद आरोपी **विशाल विधानी** को जेल भेजने की प्रक्रिया चल रही थी, लेकिन ऐन वक्त पर ऐसा घटनाक्रम हुआ जिसने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया।
जानकारी के मुताबिक, जेल में दाखिले (admit) की कागजी कार्रवाई जारी थी। इसी दौरान आरोपी **विशाल विधानी** ने अचानक तबीयत बिगड़ने का हवाला देते हुए हंगामा खड़ा कर दिया। आनन-फानन में जेल डॉक्टर को बुलाया गया, जेल में उपयुक्त सुविधा न होने के कारण जिन्होंने बिना ज्यादा देर किए उसे सिम्स रेफर कर दिया।
यहीं से कथित तौर पर रसूख का खेल शुरू हुआ। पुलिस तुरंत **विशाल विधानी** को सिम्स अस्पताल लेकर पहुंची और भर्ती करा दिया गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसके बाद जेल आरआई या जेल विभाग को इस पूरे घटनाक्रम की कोई स्पष्ट सूचना नहीं दी गई। यह लापरवाही या फिर मिलीभगत—दोनों ही स्थिति में गंभीर सवाल खड़े करती है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आम आरोपी को भी इतनी तेजी से राहत मिलती है, या फिर यह सब कुछ सिर्फ रसूख और पहुंच के दम पर हुआ? जेल जाने से ठीक पहले अचानक तबीयत बिगड़ना और फिर सीधे बड़े अस्पताल में एडमिशन—पूरा मामला संदेह के घेरे में है।
सूत्रों के अनुसार, स्थानीय स्तर पर दबाव और सिफारिश की भी चर्चाएं हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन जिस तरह से प्रक्रिया को दरकिनार किया गया, उसने पुलिस और जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिया है।
अब सवाल यह है कि आरोपी विशाल विधानी के इस ‘बीमारी ड्रामे’ की निष्पक्ष जांच होगी या मामला रसूख के नीचे दबा दिया जाएगा।
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