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जलभराव रोकने अढ़ाई करोड़ की योजना गई पानी में 05-Jul-2021
बरसात के दिनों में निचली बस्तियों में जलभराव की स्थिति लगातार बनी हुई है बरसों बाद भी निगम प्रशासन एवं प्रदेश शासन इस ओर से लापरवाह नजर आ रहा है | राजधानी में 1 घंटे की बारिश से अनेक निचली बस्तियां कालोनियां जलमग्न हो गई, लोगों के घरों दुकानों में पानी भर गया और लाखों का नुकसान हुआ सो अलग वाहन पानी में डूब गए परंतु नहीं डूबे तो अधिकारी और जनप्रतिनिधि | छत्तीसगढ़ को अलग राज्य का दर्जा मिले 21 साल होने वाले हैं, परंतु इन 21 सालों में प्रदेश की बात तो रहने ही दे, राजधानी के हाल बेहाल हैं | जहां प्रदेश के राज्यपाल के साथ-साथ मुख्यमंत्री एवं तमाम मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी जो प्रदेश की कमान संभालते हैं रहते हैं, उसी राजधानी में थोड़ी सी बरसात पर अनेक कालोनियां 3 से 4 फीट तक पानी में डूब जाती हैं | सत्ता किसी की भी हो हर बार यही दावा किया जाता है कि अगले साल जलभराव की समस्या से रहवासियों को छुटकारा मिल जाएगा परंतु कुछ नहीं होता | नेताओं, अधिकारियोंके दौरे जलभराव से परेशान अपने आप को बचाने की तमाम कोशिशों में लगे क्षेत्रवासियों को आश्वासन और अगले साल इन समस्याओं का समाधान कर दिया जाएगा, आपको जलभराव की परेशानियों से मुक्ति मिल जाएगी कह कर इतिश्री कर दी जाती है , 1 फुट पानी में घुसकर फोटो खिंचवा कर अपने वोट पक्के कर वापस जाने वाले अधिकारी और नेता अगले साल तक फिर पलट कर नहीं देखते कि जलभराव वाली कालोनियों बस्तियों की क्या स्थिति है उन्हें बचाने के लिए क्या करना है ? 40 - 45 वर्ष पूर्व राजधानी के लोग महादेव घाट खारुन रिवर की बाढ़ को देखने परिवार सहित जाया करते थे, कुम्हारी नदी के ऊपर से नदी के उफान को देखकर मनोरंजन किया करते थे, वैसा ही कुछ आजकल के नेता और अधिकारी जलमग्न बस्तियों कालोनियों में जाकर पर्यटन स्थल की तरह, मनोरंजन कर, फोटो खिंचवा कर, सहानुभूति के दो शब्द बोल कर अपनी जिम्मेदारी से मुक्त मान लेते हैं | राजधानी में सौंदर्यीकरण पर अरबों - खरबों रुपया फूंका जाता है, चौक चौराहों का बिना वजह बार बार सौंदर्यीकरण किया जाता है - बाग बगीचे में बार-बार कभी लाइट लगाई जाती है, कभी पाथवे के पत्थर बदले जाते हैं और कुछ नहीं समझ आया तो बाग बगीचों के दरवाजों को उखाड़ कर नया लगाया जाएगा, शौचालयों को तोड़कर कभी इधर कभी उधर करके अपनी सक्रियता दिखाई जाएगी और इन सभी कार्यों से अपना कमीशन निकाला जाएगा | मुख्यमंत्री सहित जनप्रतिनिधियों नेताओं, मंत्रियो द्वारा शहर के हर चौक चौराहों पर एलईडी लाइट के बड़े-बड़े डिस्प्ले बोर्ड लगाकर अपना प्रचार प्रसार किया जा रहा है | ऐसे डिस्प्ले बोर्ड राजधानी में हजारों की संख्या में है जिन पर बिना वजह का मेंटेनेंस एवं बिजली बिल का भुगतान करके टैक्स की बर्बादी की जा रही है | परंतु जलभराव से बचाव के मामले में यदि उसका 5% भी खर्च कर दिया जाता तो राजधानी जलभराव मुक्त हो जाती परंतु ऐसा लगता है कि अब जनता को खासकर के मध्यमवर्गीय परिवारों को जागरूक होकर अपने मतदान का सही उपयोग करने के बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए ताकि प्रदेश की राजनीतिक पार्टियां जो सिर्फ गरीब बस्तियों और किसानों पर निर्भर हैं उन्हें पता लग जाए कि मध्यम वर्गीय परिवार भी सरकार को बदलने की ताकत रखता है | राजधानी के जल विहार कॉलोनी में जलभराव को रोकने अढ़ाई करोड़ के प्रोजेक्ट को स्वीकृति मिलने के बावजूद इतने रुपयों का कार्य कहीं नजर नहीं आता क्योंकि कमीशन के इस धंधे में गुणवत्ता की तरफ ध्यान देने की चिंता ना अधिकारियों को है ना जनप्रतिनिधियों को सबको मतलब है अपने हिस्से के कमीशन से | संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों जनप्रतिनिधियों पर अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं करने के लिए कार्यवाही होनी चाहिए परंतु जब नीचे से ऊपर तक हर कोई इस दलदल में डूबा हो तो कार्यवाही कौन करें बाहर हाल हम तो जनता से यही कहेंगे कि अपने मत का उपयोग बहुत सोच समझ कर बिना किसी लालच के अपने स्वयं के नफा नुकसान को देखकर करें किसी के बहकावे में ना आए किसी के लालच में ना आए | चुनाव के समय दो चार पांच दिन में कुछ रुपयों के लालच में किसी उपहार के लालच में किसी झूठे आश्वासन के लालच में अपने मत को गिरवी ना रखें जागरूक रहें सीजी 24 न्यूज़ आपसे यही अपील करता है ताकि भविष्य में होने वाली समस्याओं परेशानियों तकलीफों के लिए आप संबंधित जनप्रतिनिधि से दबाव पूर्वक अपनी बात रखकर कार्य करवा सकते हैं |
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