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करोड़ों अरबों का ठेका - सड़कों से गुजरना मुश्किल | शासन - प्रशासन की चुप्पी आश्चर्यजनक 10-Aug-2022
टाटीबंध चौक करोड़ों का ठेका और सड़कों की हालत बदहाल राजधानी रायपुर का टाटीबंध चौक, जो बरसों से ही अव्यवस्थित रहा है , यहां रोज नए प्रयोग होते रहे हैं और जितने भी प्रयोग हुए हैं सब फेल साबित हुए हैं | यातायात समस्या से जूझने वाला टाटीबंध चौक पिछले 20 वर्षों से इसी तरह अव्यवस्थित यातायात का उदाहरण रहा है | यहां यातायात पुलिस यातायात को व्यवस्थित नही कर पाई और ना ही शासन - प्रशासन कोई ठोस रास्ता निकाल पाया | बहुत जद्दोजहद के बाद टाटीबंध चौक पर फ्लाईओवर के माध्यम से यातायात समस्या को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है, परंतु संबंधित ठेकेदार द्वारा नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए पुलिस प्रशासन, जिला प्रशासन, लोक निर्माण विभाग, यातायात विभाग, पार्षद विधायक, महापौर, सांसद सबकी आंखों में धूल झोंकते हुए परिवर्तित मार्ग की व्यवस्था नहीं की जा रही है | और जो व्यवस्था है उसे आप इस वीडियो और फोटो के माध्यम से समझ सकते हैं कि किस तरह गड्ढे युक्त सड़कों से लोगों को निकलने की मजबूरी है | इस मार्ग से गुजरना मतलब जान जोखिम में डालकर निकलना कहलाता है, चाहे पैदल चलने वाला हो, टू व्हीलर से चलने वाला हो, फोर व्हीलर से चलने वाला हो, थ्री व्हीलर से चलने वाले हों, बस - ट्रक सबके लिए यहां से निकलना दुर्घटनाओं से सामना करते हुए निकलना, अपनी जान जोखिम में डालकर सुरक्षित निकलना कहा जा सकता है| प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री की भी चुप्पी आश्चर्य का विषय है | अनेक विधायक, मंत्री इस मार्ग से गुजरते हैं, परंतु जब वह टाटीबंध चौक पहुंचते हैं तो या तो इनकी आंखों के सामने अंधेरा छा जाता है, या आंखें बंद कर लेते हैं, या आंखों में पट्टी बांध लेते हैं, या फिर जानबूझकर अनदेखा कर आगे निकल जाते हैं, समझ नहीं आता | वक्त है बदलाव का के नारे के साथ प्रदेश की सत्ता में काबिज हुई भूपेश बघेल सरकार भी कोई बदलाव नहीं कर पाई, साढ़े 3 साल से ज्यादा का समय कांग्रेस सरकार का गुजर गया परंतु इस मार्ग से गुजरने वालों को कोई राहत नहीं मिली | *किसी भी सड़क के निर्माण कार्य का टेंडर दिए जाने के नियमों में यह स्पष्ट उल्लेख रहता है कि पक्का परिवर्तित मार्ग ठेकेदार को बनाकर देना है ताकि आवागमन बाधित ना हो |* *अब यह समझ नहीं आता कि इस नियम की अवहेलना के लिए ठेकेदार पर कोई सख्त कार्यवाही क्यों नहीं हो रही ?* करोड़ों - अरबों का ठेका लेने वाले ठेकेदार द्वारा पक्का परिवर्तित मार्ग ना बनाने के पीछे किस-किस के संबंध हो सकते हैं कहा नहीं जा सकता | क्योंकि अगर संबंध नहीं होता तो जनप्रतिनिधि आवाज जरूर उठाते, परन्तु सभी जनप्रतिनिधियों सहित अधिकारियों की भी चुप्पी ठेकेदार से मिलीभगत का संदेह पैदा करती है | बहरहाल जनता तो जनता है उसे हर समस्या से जूझना है, हर तकलीफ का सामना करना है, जान जोखिम में डालना है, दुर्घटनाओं में अपनी जान भी गवाना है, और शासकीय गलतियां दिखने के बावजूद मजबूरी वश अनवरत अपने घरेलू कार्यों के लिए, व्यवसाय के लिए जान जोखिम में डालकर इन गड्ढे भरी सड़कों जिसमें कब कौन कहां गिर जाए ?, कब किस पर पीछे से आने वाली ट्रक - बस चढ़ जाए ? या गड्ढों में गिरकर कब कौन घायल हो जाए ? या मौत के साए में समा जाए ? कहा नहीं जा सकता | *लोक निर्माण मंत्री ताम्रध्वज साहू को चाहिए कि वह स्वयं संज्ञान लेकर संबंधित ठेकेदार सहित संबंधित अधिकारी जो मॉनिटरिंग करते हैं, लाखों की तनखा लेते हैं उन पर इस लापरवाही और अनदेखी के लिए कड़ी कार्रवाई करें | साथ ही पक्का सुविधा युक्त परिवर्तित मार्ग बनवा कर आवागमन को व्यवस्थित करें, और जनता को राहत दिलाएं | CG 24 News
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