पेपर लीक संशोधन विधेयक को कैबिनेट की मंजूरी, दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई; 10 साल की सजा और ₹10 करोड़ तक जुर्माने का प्रस्ताव

पेपर लीक संशोधन विधेयक को कैबिनेट की मंजूरी, दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई; 10 साल की सजा और ₹10 करोड़ तक जुर्माने का प्रस्ताव

नई दिल्ली। परीक्षा में पेपर लीक और संगठित नकल के मामलों पर सख्ती बढ़ाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शुक्रवार (24 जुलाई 2026) को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में पेपर लीक संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी गई। प्रस्तावित विधेयक का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में धांधली करने वाले संगठित गिरोहों के खिलाफ अधिक कठोर कानूनी प्रावधान लागू करना है। रिपोर्टों के अनुसार, सरकार इस विधेयक को संसद के मानसून सत्र में अगले सप्ताह पेश करने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित कानून के तहत पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट को कानूनी आधार दिया जाएगा, ताकि मामलों का निपटारा निर्धारित समयसीमा में हो सके। प्रस्ताव है कि ऐसे मामलों में तीन महीने के भीतर सुनवाई पूरी कर फैसला सुनाया जाए।

विधेयक में दोषियों के लिए अधिकतम 10 वर्ष तक की कैद और ₹10 करोड़ तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को इस संशोधन विधेयक का नोडल मंत्रालय बनाया गया है, जो अपराध की प्रकृति और गंभीरता के आधार पर दंड संबंधी प्रावधानों को लागू करेगा। वर्तमान में देश में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 लागू है। इसके तहत व्यक्तिगत स्तर पर परीक्षा में धांधली करने वालों के लिए 3 से 5 वर्ष तक की जेल और ₹10 लाख तक जुर्माने का प्रावधान है। वहीं, संगठित गिरोहों के मामलों में 5 से 10 वर्ष तक की कैद और ₹1 करोड़ तक जुर्माने की व्यवस्था है। नए संशोधन के जरिए इन प्रावधानों को और अधिक कठोर बनाने का प्रस्ताव है।

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर जोर देते हुए कहा था कि प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाएं लाखों छात्रों और उनके परिवारों के भविष्य को प्रभावित करती हैं। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ तेज और कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए कानून को और मजबूत बना रही है।