बस्तर की औषधीय विरासत को मिलेगी नई पहचान,सांसद महेश कश्यप ने केंद्रीय आयुष मंत्री से की अनुसंधान केंद्र खोलने की मांग
बस्तर की औषधीय विरासत को मिलेगी नई पहचान,सांसद महेश कश्यप ने केंद्रीय आयुष मंत्री से की अनुसंधान केंद्र खोलने की मांग
बस्तर लोकसभा क्षेत्र के सांसद महेश कश्यप ने बस्तर संभाग की प्राकृतिक संपदा और पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। नई दिल्ली में केंद्रीय आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव से भेंट कर सांसद कश्यप ने बस्तर में एक उच्च स्तरीय जड़ी-बूटी (औषधीय पादप) अनुसंधान एवं विकास केंद्र की स्थापना के लिए मांग पत्र सौंपा और इस परियोजना को क्षेत्र के विकास के लिए अनिवार्य बताया।
सांसद महेश कश्यप ने आयुष मंत्री को विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ का बस्तर संभाग अपनी अद्वितीय जैव-विविधता और घने वनों के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है। यहाँ सदियों से जनजातीय समुदायों द्वारा पारंपरिक वैद्यकीय पद्धतियों का उपयोग किया जा रहा है, जिसमें दुर्लभ प्राकृतिक जड़ी-बूटियों का विशेष महत्व है। वर्तमान में बस्तर में सर्पगंधा, कालमेघ,अश्वगंधा, गिलोय, हर्रा-बहेड़ा,अर्जुन और सतावर जैसी बहुमूल्य औषधीय वनस्पतियां प्राकृतिक रूप से उपलब्ध हैं, लेकिन एक समर्पित अनुसंधान केंद्र के अभाव में इस संपदा का वैज्ञानिक दोहन और मूल्य संवर्धन नहीं हो पा रहा है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि बस्तर में आयुष मंत्रालय के अंतर्गत इस केंद्र की स्थापना होती है, तो इससे न केवल स्थानीय औषधियों को वैज्ञानिक प्रमाणिकता मिलेगी, बल्कि यह केंद्र जनजातीय युवाओं के लिए रोजगार और प्रशिक्षण का एक बड़ा हब बनकर उभरेगा। इससे पारंपरिक वैद्यों के पास मौजूद उस प्राचीन ज्ञान को भी संरक्षित किया जा सकेगा जो अब लुप्त होने की कगार पर है। केंद्र की स्थापना से स्थानीय किसानों और वनवासियों को उनकी उपज का बेहतर दाम मिलेगा, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में व्यापक सुधार आएगा।
सांसद कश्यप ने आगे बताया कि यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'आत्मनिर्भर भारत' और 'वोकल फॉर लोकल' अभियान को धरातल पर उतारने जैसा होगा। इससे बस्तर की पहचान केवल कच्चे माल की आपूर्ति करने वाले क्षेत्र के रूप में नहीं, बल्कि औषधीय अनुसंधान और तैयार उत्पादों के केंद्र के रूप में बनेगी। चर्चा के दौरान आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव ने सांसद की इस मांग को गंभीरता से सुना और बस्तर की जनभावनाओं एवं जनजातीय हितों को प्राथमिकता देते हुए इस विषय पर सकारात्मक निर्णय लेने का भरोसा दिलाया।
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