मुनाफाखोरी छोड़कर महंगाई नियंत्रित करे केंद्र सरकार - कन्हैया 

मुनाफाखोरी छोड़कर महंगाई नियंत्रित करे केंद्र सरकार - कन्हैया 

मुनाफाखोरी छोड़कर महंगाई नियंत्रित करे केंद्र सरकार - कन्हैया 
नाफेड के जरिए आम जनता को लूटने का खेल बंद हो — कन्हैया 
  MSP का उद्देश्य बाजार दर को नियंत्रित करना, नाफेड खुद दाम बढ़ाकर खाद्यान्न महंगाई न भड़काए: कन्हैया 
 किसान को MSP और उपभोक्ता को महंगी दाल...
 सरकार व्यापार और कमाई में मस्त, जनता महंगाई से त्रस्त...

रायपुर । प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री कन्हैया अग्रवाल ने केंद्र सरकार और उसकी विपणन एजेंसियों (नाफेड/NCCF) पर देश में दाल एवं दलहन की कीमतें बढ़ाने और मुनाफाखोरी करने का सीधा आरोप लगाया है । उन्होंने कहा कि सरकारी एजेंसियों द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय करने और खरीद करने का मुख्य उद्देश्य बाजार में कीमतों को नियंत्रित रखना और किसानों व उपभोक्ताओं को राहत पहुंचाना होता है। 
          प्रदेश महामंत्री कन्हैया अग्रवाल ने कहा कि इसके विपरीत केंद्र सरकार की एजेंसियां खुद महंगे दामों पर खाद्यान्न बेचकर देश में महंगाई भड़काने का काम कर रही हैं ।
सरकारी एजेंसी बनी 'व्यापारी', जनता पर महंगाई की मार
कांग्रेस महामंत्री कन्हैया अग्रवाल ने बयान जारी कर कहा, "लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार का काम व्यापार करना या मुनाफा कमाना नहीं होता, बल्कि आम जनता को राहत देना और बाजार में बढ़ती दरों को नियंत्रित करना होता है। महाराष्ट्र समेत देश के विभिन्न राज्यों में नाफेड ने किसानों से लगभग 5,700 रुपए प्रति क्विंटल की दर से चना खरीदा और बिना किसी प्रोसेसिंग के उसी कच्चे चने को खुले बाजार/ऑक्शन में 6,400 रुपए से अधिक के भाव पर बेचा जा रहा है । जब सरकारी संस्थाएं ही मुनाफा कमाने के लिए महंगे दामों पर माल बेचेंगी, तो निश्चित रूप से देश में खाद्यान्न की महंगाई दरें बेकाबू होंगी।

      उन्होंने कहा कि जब नाफेड जैसी केंद्रीय एजेंसी ऊंचे दामों पर ई-ऑक्शन में अनाज बेचेगी, तो निजी व्यापारी और मिल मालिक उपभोक्ता तक पहुंचते-पहुंचते दालों के दाम और अधिक बढ़ा देंगे। इस नीति का सीधा असर आम गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों की रसोई पर पड़ रहा है। जिस चने और दाल को सस्ते दर पर बाजार में उतारकर राहत देनी चाहिए थी, उसे महंगे दामों पर बेचकर केंद्र सरकार अपनी तिजोरी भरने में लगी है।
       उन्होंने कहा कि नाफेड और अन्य केंद्रीय एजेंसियां बफर स्टॉक से खाद्यान्न को वाजिब दरों पर बाजार में जारी करें ताकि खुदरा कीमतें नीचे आ सकें।
 श्री अग्रवाल ने कहा कि ई-ऑक्शन में अनाजों के न्यूनतम बोली मूल्य (Reserve Price) को घटाया जाए, जिससे बिचौलिए और व्यापारी इसका फायदा उठाकर जनता को न लूट सकें। किसानों से MSP पर खरीदे गए अनाज को प्रोसेसिंग के बाद 'भारत दाल' जैसी योजनाओं के माध्यम से व्यापक स्तर पर सस्ती दरों पर सीधे आम जनता तक पहुंचाया जाए।
        कन्हैया अग्रवाल ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि केंद्र सरकार ने अपनी मुनाफाखोरी की नीति बंद नहीं की और दलहन-खाद्यान्न की बढ़ती कीमतों पर तत्काल रोक नहीं लगाई, तो कांग्रेस पार्टी जनता के हक के लिए सदन से सड़क तक आंदोलन करेगी ।