टेस्ट मीटर और स्मार्ट मीटर की रीडिंग में भारी अंतर ने खोली पोल, स्मार्ट मीटर फेल तो जनता से वसूली कैसी? - कांग्रेस
टेस्ट मीटर और स्मार्ट मीटर की रीडिंग में भारी अंतर ने खोली पोल, स्मार्ट मीटर फेल तो जनता से वसूली कैसी? - कांग्रेस
स्मार्ट मीटर के नाम पर बिजली बिल में लूट, भाजपा सरकार जनता को जवाब दे
रायपुर/08 सितंबर 2026। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर के नाम पर बिजली उपभोक्ताओं से हो रही मनमानी वसूली की पोल अब खुद बिजली विभाग की जांच ने खोल दी है। बैकुंठपुर में उपभोक्ता की शिकायत पर घर में स्मार्ट मीटर के साथ टेस्ट मीटर लगाकर बिजली खपत की जांच की गई, जिसमें दोनों मीटरों की रीडिंग में भारी अंतर सामने आया। इसके बाद विभाग ने स्मार्ट मीटर में खराबी की जानकारी अपने उच्च अधिकारियों को पत्र लिखकर दी है। इससे साफ है कि जिसे बिजली कंपनी जनता के सामने बिल्कुल सही और विश्वसनीय मीटर बताकर बचाव कर रही थी, वही स्मार्ट मीटर जांच में फैल है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि स्मार्ट मीटर की रीडिंग ही संदिग्ध है तो भाजपा सरकार बताए कि प्रदेश के लाखों उपभोक्ताओं से वसूले जा रहे बिजली बिल कितने सही हैं? जिन परिवारों के घर पहले 400 से 500 रुपये महीने का बिजली बिल आता था, उन्हें अब 1500 से 2500 रुपये तक के बिल थमाए जा रहे हैं। बिजली की खपत पहले जैसी है, लेकिन बिल कई गुना बढ़ गया है। कई उपभोक्ताओं ने शिकायत की है कि महीने भर घर में बिजली की खपत नगण्य रहने के बावजूद हजारों रुपये के बिल भेजे गए।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि यह सिर्फ मीटर की गड़बड़ी नहीं, बल्कि जनता की जेब पर सीधा हमला है। स्मार्ट मीटर को लेकर लगातार शिकायतें हो रही हैं, उपभोक्ता मीटर बदलने के लिए आवेदन दे रहे हैं, लेकिन बिजली कंपनी उपभोक्ताओं की आवाज सुनने के बजाय स्मार्ट मीटर का बचाव करने में लगी हुई है। अब बैकुंठपुर की जांच ने बिजली कंपनी के दावों की कलई खोल दी है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने भाजपा सरकार से पूछा कि जब उपभोक्ता स्वयं खराब स्मार्ट मीटर बदलने की मांग कर रहे हैं तो उनकी मांग क्यों नहीं मानी जा रही? सरकार और बिजली कंपनी किसके दबाव में जनता की शिकायतों को नजरअंदाज कर रही है? अगर स्मार्ट मीटर इतना ही सही है तो टेस्ट मीटर और स्मार्ट मीटर की रीडिंग में इतना बड़ा अंतर क्यों आया? स्मार्ट मीटर जनता की सुविधा के लिए है या बिजली कंपनी की वसूली बढ़ाने का हथियार बन गया है? भाजपा सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि स्मार्ट मीटर लगाने वाली कंपनियों से उसका क्या संबंध है और क्या किसी कंपनी से राजनीतिक चंदा या अन्य लाभ मिला है, जिसके कारण जनता की शिकायतों के बावजूद सरकार स्मार्ट मीटर का बचाव कर रही है?
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस लगातार बिजली उपभोक्ताओं के अधिकारों की लड़ाई लड़ रही है। जनता आवेदन दे रही है, शिकायत कर रही है, लेकिन बिजली कंपनी गूंगी-बहरी बनकर बैठी है। भाजपा सरकार को जनता की पीड़ा दिखाई नहीं दे रही या फिर जानबूझकर आंखें बंद कर ली गई हैं? अन्य भाजपा शासित राज्यों में भी स्मार्ट मीटर को लेकर उपभोक्ताओं की शिकायतों के बाद सरकारों को अपने फैसलों पर पुनर्विचार करना पड़ा है। छत्तीसगढ़ सरकार भी हठधर्मिता छोड़े, जनता की आवाज सुने और खराब स्मार्ट मीटर तत्काल हटाकर सामान्य मीटर लगाने की व्यवस्था करे।


