कार्डियक अरेस्ट में शुरुआती मिनट बेहद महत्वपूर्ण, सही समय पर सीपीआर से बच सकती है जान

कार्डियक अरेस्ट में शुरुआती मिनट बेहद महत्वपूर्ण, सही समय पर सीपीआर से बच सकती है जान

कार्डियक अरेस्ट में शुरुआती मिनट बेहद महत्वपूर्ण, सही समय पर सीपीआर से बच सकती है जान

कार्डियोलॉजी विभाग ने मरीजों एवं परिजनों को दिया सीपीआर का प्रशिक्षण


अचानक होने वाला कार्डियक अरेस्ट किसी भी व्यक्ति के लिए जानलेवा आपात स्थिति साबित हो सकती है। ऐसे समय में अस्पताल पहुंचने से पहले यदि आसपास मौजूद व्यक्ति सही तरीके से सीपीआर दे सके, तो मरीज की जान बचाने में महत्वपूर्ण मदद मिल सकती है। इसी उद्देश्य से डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय स्थित एसीआई के कार्डियोलॉजी विभाग द्वारा मरीजों एवं उनके परिजनों को सीपीआर (Cardiopulmonary Resuscitation) तकनीक का प्रशिक्षण देते हुए जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। 

इस अवसर पर अम्बेडकर अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर, मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. देवप्रिया लकड़ा, कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. स्मित श्रीवास्तव समेत अन्य चिकित्सक और चिकित्सा छात्र मौजूद रहे।

प्रशिक्षण के दौरान कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. स्मित श्रीवास्तव ने बताया कि कार्डियक अरेस्ट (अचानक हृदय गति रुकना) की स्थिति में शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। मरीज के अचानक बेहोश होने और सामान्य रूप से सांस न लेने की स्थिति को पहचानना, तत्काल आपातकालीन सहायता के लिए सूचना देना तथा आवश्यकता होने पर सीपीआर शुरू करना महत्वपूर्ण है।

 प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को छाती पर सही स्थान और उचित तरीके से दबाव देने, सीपीआर की प्रक्रिया, मरीज की स्थिति पहचानने तथा समय पर आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेने के बारे में जानकारी दी। प्रशिक्षण को व्यावहारिक बनाने के लिए सीपीआर की तकनीक का प्रदर्शन भी किया गया, ताकि मरीजों और उनके परिजन आपात स्थिति में घबराने के बजाय सही तरीके से प्राथमिक जीवनरक्षक सहायता प्रदान कर सकें।

मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. देवप्रिया लकड़ा ने बताया कि कार्डियक अरेस्ट में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है। समय पर शुरू किया गया सीपीआर रक्त संचार बनाए रखने में मदद करता है और चिकित्सा सहायता मिलने तक मरीज के जीवन को बचाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

कार्डियोलॉजी विभाग की ओपीडी में आयोजित इस जागरुकता कार्यक्रम का उद्देश्य आम लोगों में कार्डियक अरेस्ट जैसी आपात स्थिति के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ मरीजों एवं उनके परिजनों को प्राथमिक जीवनरक्षक तकनीक के रूप में सीपीआर का व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करना था।