बिलासपुर केंद्रीय जेल में चक्कर अधिकारी की कार्यशैली चर्चा में, अधीक्षक की प्रशासनिक जिम्मेदारियों पर उठ रहे सवाल - मुख्यालय संज्ञान ले
बिलासपुर केंद्रीय जेल में चक्कर अधिकारी की कार्यशैली चर्चा में, अधीक्षक की प्रशासनिक जिम्मेदारियों पर उठ रहे सवाल
कर्मचारियों की ड्यूटी और आंतरिक व्यवस्था में कथित हस्तक्षेप के आरोप, वरिष्ठ अधिकारियों के नाम का प्रभाव दिखाने की चर्चाएं - जेल मुख्यालय संज्ञान ले
बिलासपुर। केंद्रीय जेल बिलासपुर की प्रशासनिक कार्यप्रणाली और आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कुछ गंभीर सवाल सामने आ रहे हैं। जेल के भीतर सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अष्टकोण अधिकारी (चक्कर अधिकारी) विजय आनंद की कार्यशैली को लेकर जेल स्टाफ के बीच कथित असंतोष और हस्तक्षेप की शिकायतों की चर्चा है। जेल सूत्रों एवं प्राप्त शिकायतों एवं सामने आ रही चर्चाओं के अनुसार, जेल में पदस्थ चक्कर अधिकारी विजय आनंद पर आरोप है कि वे अपने निर्धारित दायित्वों से आगे बढ़कर कर्मचारियों की ड्यूटी व्यवस्था और आंतरिक प्रशासनिक कार्यों में हस्तक्षेप करते हैं। बताया जा रहा है कि प्रथम प्रहरी एवं मुख्य प्रहरी जैसे जिम्मेदार पदों पर तैनात कर्मचारियों के कार्यक्षेत्र और ड्यूटी संबंधी मामलों में भी उनके निर्देशों को लेकर असमंजस की स्थिति बन रही है।
इन आरोपों के बाद सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जेल के भीतर प्रशासनिक आदेश जारी करने और कर्मचारियों की ड्यूटी निर्धारित करने की अधिकृत व्यवस्था आखिर किसकी है?
केंद्रीय जेल की समग्र प्रशासनिक व्यवस्था, अनुशासन और सुरक्षा की जवाबदेही जेल अधीक्षक एवं निर्धारित प्रशासनिक पदाधिकारियों की होती है। ऐसे में यदि किसी अधिकारी द्वारा निर्धारित अधिकारों से बाहर जाकर कर्मचारियों की ड्यूटी या प्रशासनिक व्यवस्था में हस्तक्षेप किया जा रहा है, तो यह जांच का विषय है।
सवाल यह भी है कि कर्मचारियों की ड्यूटी में परिवर्तन किस सक्षम अधिकारी के लिखित आदेश से किया जाता है? क्या इसके लिए कोई निर्धारित प्रक्रिया और अनुमोदन व्यवस्था है? यदि किसी अधिकारी के मौखिक निर्देशों से प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है, तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी?
जेल स्टाफ के बीच यह चर्चा भी सामने आ रही है कि संबंधित अधिकारी जेल मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों एवं डीजी स्तर के अधिकारियों से निकटता का हवाला देकर अपना प्रभाव प्रदर्शित करते हैं। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारी का पक्ष सामने नहीं आया है |
जानकारी के अनुसार चक्कर अधिकारी विजय आनंद की पूर्व पदस्थापना कोरबा में होने और वहां उनके कार्यकाल के दौरान एक बंदी के फरार होने की घटना के बाद निलंबन की कार्रवाई किए जाने संबंधी जानकारी भी चर्चा में है।
इस संबंध में निलंबन आदेश, विभागीय जांच और बहाली से जुड़े आधिकारिक दस्तावेजों की पुष्टि आवश्यक है। यदि निलंबन की कार्रवाई हुई थी, तो उसके कारण, विभागीय जांच के निष्कर्ष और वर्तमान महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपे जाने के प्रशासनिक आधार को स्पष्ट किया जाना चाहिए।
केंद्रीय जेल जैसी संवेदनशील संस्था में सुरक्षा संबंधी छोटी-सी चूक भी गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है। इसलिए अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र, कर्मचारियों की ड्यूटी व्यवस्था, बंदियों की निगरानी और आंतरिक प्रशासनिक नियंत्रण में स्पष्टता होना जरूरी है।
यदि कर्मचारियों के बीच असंतोष अथवा प्रशासनिक हस्तक्षेप की शिकायतें हैं, तो जेल मुख्यालय को इनकी निष्पक्ष जांच करानी चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि चक्कर अधिकारी के निर्धारित अधिकार और जिम्मेदारियां क्या हैं तथा जेल अधीक्षक की निगरानी व्यवस्था किस प्रकार काम कर रही है।
क्या केंद्रीय जेल बिलासपुर में कर्मचारियों की ड्यूटी बदलने के लिए निर्धारित लिखित प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है?
चक्कर अधिकारी को कर्मचारियों की ड्यूटी और प्रशासनिक व्यवस्था में हस्तक्षेप करने के कितने अधिकार प्राप्त हैं?
क्या कोरबा पदस्थापना के दौरान बंदी फरारी की घटना के बाद संबंधित अधिकारी को निलंबित किया गया था? यदि हां, तो विभागीय जांच का निष्कर्ष क्या रहा?
क्या जेल अधीक्षक को इन कथित शिकायतों और प्रशासनिक असमंजस की जानकारी है?
क्या जेल मुख्यालय इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने को तैयार है?
CG 24 News का मानना है कि जेल प्रशासन में पदस्थ किसी भी अधिकारी के विरुद्ध बिना प्रमाण कोई निष्कर्ष निकालना हमारा उद्देश्य नहीं है। लेकिन जेल जैसी संवेदनशील संस्था में प्रशासनिक पारदर्शिता, सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करना सार्वजनिक हित का विषय है। इसलिए जेल अधीक्षक, संबंधित चक्कर अधिकारी और जेल मुख्यालय का आधिकारिक पक्ष भी महत्वपूर्ण है।
अब देखना यह है कि जेल प्रशासन और जेल मुख्यालय इन सवालों पर क्या जवाब देते हैं और क्या इस मामले में निष्पक्ष जांच कराकर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाती है?