सुरक्षित बचपन अभियान के तहत होली क्रॉस स्कूल में पॉक्सो एक्ट पर विधिक जागरूकता शिविर आयोजित

सुरक्षित बचपन अभियान के तहत होली क्रॉस स्कूल में पॉक्सो एक्ट पर विधिक जागरूकता शिविर आयोजित

सुरक्षित बचपन अभियान के तहत होली क्रॉस स्कूल में पॉक्सो एक्ट पर विधिक जागरूकता शिविर आयोजित

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में तथा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री बलराम प्रसाद वर्मा के मार्गदर्शन में सुरक्षित बचपन अभियान के अंतर्गत होली क्रॉस स्कूल, बैरन बाजार, रायपुर में पॉक्सो एक्ट (लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम) के संबंध में विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। शिविर में विशेष रेलवे मजिस्ट्रेट रायपुर श्री मयंक सोनी एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय श्रेणी श्री दीपक चंद्राकर उपस्थित रहे।

शिविर के दौरान विशेष रेलवे मजिस्ट्रेट श्री मयंक सोनी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए बच्चों की सुरक्षा, उनके अधिकारों तथा लैंगिक अपराधों से बचाव के संबंध में महत्वपूर्ण विधिक जानकारी प्रदान की। उन्होंने पॉक्सो अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों को सरल एवं सहज भाषा में समझाते हुए बच्चों को जागरूक, सतर्क एवं सजग रहने का संदेश दिया। उन्होंने बच्चों के साथ होने वाले लैंगिक अपराधों, यौन उत्पीड़न, अनुचित स्पर्श तथा अन्य प्रकार के शोषण से संबंधित कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। साथ ही, बच्चों को यह समझाया कि किसी भी प्रकार के अनुचित व्यवहार अथवा शोषण की स्थिति में भयभीत या मौन रहने के बजाय अपने माता-पिता, शिक्षकों अथवा किसी विश्वसनीय व्यक्ति को इसकी जानकारी दें तथा आवश्यकता पड़ने पर संबंधित प्राधिकारियों की सहायता लें।

उन्होंने पीड़ित बच्चों एवं महिलाओं के लिए उपलब्ध प्रतिकर संबंधी प्रावधानों, छत्तीसगढ़ पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना, 2018 तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) के अंतर्गत महिलाओं एवं बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों के संबंध में भी जानकारी दी। इसके अतिरिक्त, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (आईटी एक्ट) के प्रासंगिक प्रावधानों के माध्यम से साइबर अपराधों, ऑनलाइन उत्पीड़न तथा डिजिटल माध्यमों पर बच्चों की सुरक्षा के महत्व को रेखांकित किया।

श्री सोनी ने कहा कि “एक सुंदर, सुरक्षित एवं संवेदनशील समाज की स्थापना के लिए बच्चों की सुरक्षा, गरिमा और स्वतंत्रता सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। बच्चे देश की अमूल्य धरोहर हैं और उनके अधिकारों की रक्षा करना केवल माता-पिता का ही दायित्व नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सामूहिक जिम्मेदारी है।” उन्होंने कहा कि विशेष रूप से बाल्यावस्था की संवेदनशील आयु में बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराना अत्यंत महत्वपूर्ण है। समाज के प्रत्येक वर्ग के सक्रिय सहयोग से ही बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण निर्मित किया जा सकता है और कल्याणकारी राज्य की परिकल्पना को साकार किया जा सकता है।

शिविर का उद्देश्य विद्यार्थियों को उनके विधिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना, बाल लैंगिक अपराधों की रोकथाम के लिए संवेदनशीलता विकसित करना तथा बच्चों के लिए सुरक्षित, संरक्षित एवं भयमुक्त वातावरण सुनिश्चित करने में समाज की भूमिका को सुदृढ़ करना रहा।