मंडी बोर्ड MD विवाद में सियासत तेज, पूर्व CM भूपेश बघेल ने CM साय को लिखा पत्र, कांग्रेस नेता सुशील सन्नी अग्रवाल ने भी खोला मोर्चा

मंडी बोर्ड MD विवाद में सियासत तेज, पूर्व CM भूपेश बघेल ने CM साय को लिखा पत्र, कांग्रेस नेता सुशील सन्नी अग्रवाल ने भी खोला मोर्चा

मंडी बोर्ड MD विवाद में सियासत तेज, पूर्व CM भूपेश बघेल ने CM साय को लिखा पत्र, कांग्रेस नेता सुशील सन्नी अग्रवाल ने भी खोला मोर्चा

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य कृषि विपणन (मंडी) बोर्ड के MD महेंद्र सिंह सवन्नी का मामला अब सियासी तूल पकड़ चुका है। इस मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर सवन्नी की संविदा नियुक्ति तत्काल निरस्त करने की मांग की है। वहीं कांग्रेस नेता एवं पूर्व श्रम विभाग निगम बोर्ड के अध्यक्ष सुशील सन्नी अग्रवाल ने भी बयान जारी कर सरकार को घेरा है।

भूपेश बघेल ने CM को लिखा पत्र -
पूर्व CM ने पत्र में लिखा है कि मंडी बोर्ड के दर्जनों पीड़ित अधिकारी-कर्मचारियों ने उनसे मुलाकात कर अपनी पीड़ा बताई है। 2005 की डीपीसी में सवन्नी को 14वें नंबर पर रखा गया था, लेकिन नियम विरुद्ध अपील कर उन्हें 1 नंबर पर लाया गया और 2005-2007 के बीच में पदोन्नति प्राप्त किया है जो नियम के विरुद्ध है उसके पश्चात.. 4 पदोन्नतियां - सहायक संचालक, उप संचालक, संयुक्त संचालक और अपर संचालक ले ली गईं। 16 साल से रायपुर मुख्यालय में जमे हैं और जून 2024 में रिटायर होने के बाद भी 5 बार संविदा विस्तार दिया जा रहा है।

45 प्रतिशत कमीशन का गंभीर आरोप: मंडी बोर्ड में 45% हिस्सेदारी/कमीशन का खेल जगजाहिर है, जो पूर्व में मीडिया में भी चर्चा का विषय रहा है। इसकी भी उच्चस्तरीय जांच हो।

उन्होंने बताया कि कर्मचारी महासंघ के पूर्व प्रांत अध्यक्ष डॉ. मलिक राम पोर्ते एवं अपर संचालक कमलेश इक्का सहित कई कर्मचारियों ने राखी थाने में तानाशाही व प्रताड़ना की शिकायत दर्ज कराई है।

सुशील सन्नी अग्रवाल का बयान -
कांग्रेस नेता सुशील सन्नी अग्रवाल ने कहा कि मंडी बोर्ड के अधिकारी-कर्मचारी आज भय में काम कर रहे हैं। यह GAD नियमों की धज्जियां उड़ाना है। यदि 15 दिन में कार्रवाई नहीं हुई तो वे पीड़ित कर्मचारियों के साथ दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरने का समर्थन करेंगे।

दोनों नेताओं की दो मांगें -
1. महेंद्र सवन्नी की वर्तमान संविदा नियुक्ति तत्काल निरस्त हो।
2. 2005-2007 की पदोन्नतियों व 16 साल के कार्यकाल की निष्पक्ष जांच हो।