जहां कभी गूंजती थी बंदूकों की आवाज़, अब सुनाई देती है ढोल-नगाड़ों और आरती की गूँज, रामलीला के साथ पहली बार हुआ रास गरबा का भव्य आयोजन

जहां कभी गूंजती थी बंदूकों की आवाज़, अब सुनाई देती है ढोल-नगाड़ों और आरती की गूँज, रामलीला के साथ पहली बार हुआ रास गरबा का भव्य आयोजन