केंद्रीय जेल बिलासपुर में मानसिक रूप से अस्वस्थ बंदी ने की आत्महत्या की कोशिश ,जेल प्रशासन की संवेदनशीलता से टली अनहोनी
मन्नू मानिकपुरी संवाददाता बिलासपुर
बिलासपुर। केंद्रीय जेल बिलासपुर में मंगलवार को एक मानसिक रूप से अस्वस्थ बंदी द्वारा आत्म-क्षति का प्रयास किए जाने की घटना सामने आई, जिसे जेल प्रशासन की त्वरित कार्रवाई और सतर्क निगरानी के चलते समय रहते विफल कर दिया गया।
जानकारी के अनुसार, बंदी विकास कश्यप को न्यायालय द्वारा आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी पेंड्रा उपजेल से उसे केंद्रीय जेल बिलासपुर में निरुद्ध किया गया था। बंदी की मानसिक स्थिति को देखते हुए केंद्रीय जेल बिलासपुर प्रशासन ने उसे प्रारंभ से ही मेंटल वार्ड में रखकर विशेष चिकित्सकीय निगरानी में उपचार उपलब्ध कराया। लगभग 8 माह तक सेंदरी मानसिक चिकित्सालय के विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा जेल के भीतर नियमित उपचार किया गया।
चिकित्सकीय परीक्षणों में सुधार की पुष्टि होने के बाद बंदी को नियमानुसार जेल प्रशासन ने कैदी को रियल वार्ड में स्थानांतरित किया गया तथा हल्की जिम्मेदारी दी गई। जेल प्रशासन द्वारा उसकी मानसिक स्थिति पर सतत निगरानी भी रखी जा रही थी।
बताया जाता है कैदी के परिवार जन लगातार उससे मिलने आया करते थे लेकिन लगभग 2 महीने से पारिवारिक मुलाकातें बंद हो गई कैदी के परिवार से कोई मिलने अब नहीं आता था ।
बंदी भावनात्मक रूप से अस्थिर हो गया। कि आखिरकार क्यों परिवार के लोग मुझसे मुलाकात करने नहीं आ रहे इसी मानसिक असंतुलन की स्थिति में मंगलवार को बंदी विकास कश्यप बावर्ची वार्ड में कुछ कार्य से गया था और वहां रहे सब्जी काटने के हशिये से उसने आत्म-क्षति कर अपना गला काटने का का प्रयास किया।
घटना की सूचना मिलते ही जेल स्टाफ एवं अन्य बंदियों ने तत्काल हस्तक्षेप किया। जेल प्रशासन द्वारा बिना विलंब किए बंदी को उपचार हेतु सिम्स (SIMS) भेजा गया, जहां उसका त्वरित उपचार किया गया। वर्तमान में उसकी स्थिति सामान्य एवं नियंत्रण में बताई जा रही है।
यह घटना दर्शाती है कि केंद्रीय जेल बिलासपुर में मानसिक रूप से अस्वस्थ बंदियों के उपचार, पुनर्वास एवं निगरानी के लिए संवेदनशील व्यवस्था लागू है। जेल प्रशासन की तत्परता, चिकित्सकीय समन्वय एवं मानवीय दृष्टिकोण के कारण एक गंभीर स्थिति को समय रहते नियंत्रित किया जा सका।
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