आस्था के साथ बाजारों में भी उत्साह, मिठाई-डेयरी से लेकर पूजा सामग्री, परिधान और धार्मिक पर्यटन तक बढ़ेगी आर्थिक गतिविधियां - अमर पारवानी

आस्था के साथ बाजारों में भी उत्साह, मिठाई-डेयरी से लेकर पूजा सामग्री, परिधान और धार्मिक पर्यटन तक बढ़ेगी आर्थिक गतिविधियां - अमर पारवानी

जन्माष्टमी पर छत्तीसगढ़ में ₹750-800 करोड़ के कारोबार का अनुमान - CAIT 

आस्था के साथ बाजारों में भी उत्साह, मिठाई-डेयरी से लेकर पूजा सामग्री, परिधान और धार्मिक पर्यटन तक बढ़ेगी आर्थिक गतिविधियां - अमर पारवानी

देश के सबसे बड़े व्यापारिक संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के नेशनल वाइस चेयरमेन एवं राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड के सदस्य  अमर पारवानी, छत्तीसगढ़ इकाई के चेयरमेन  जितेन्द्र दोशी,  विक्रम सिंहदेव, प्रदेश अध्यक्ष  परमानंद जैन, वाइस चेयरमेन  सुरिन्दर सिंह,  जीवत बजाज, प्रदेश महामंत्री  अवनीत सिंह, प्रदेश कोषाध्यक्ष विजय पटेल, कार्यकारी अध्यक्ष  राजेन्द्र जग्गी,  वासु माखीजा, राम मंधान,  भरत जैन,  राकेश ओचवानी एवं  शंकर बजाज ने संयुक्त रूप से बताया कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर छत्तीसगढ़ के बाजारों में इस वर्ष व्यापक व्यापारिक गतिविधियां देखने को मिल रही हैं। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) छत्तीसगढ़ के आकलन के अनुसार जन्माष्टमी के अवसर पर प्रदेश में लगभग ₹750 से ₹800 करोड़ के कारोबार की संभावना है। इसमें पूजा सामग्री, मिठाई एवं डेयरी उत्पाद, फूल एवं सजावट सामग्री, फल-सूखे मेवे, पारंपरिक परिधान, लड्डू गोपाल की मूर्तियां एवं श्रृंगार सामग्री, उपहार, धार्मिक आयोजन, होटल, परिवहन तथा अन्य सेवाओं से जुड़ा कारोबार शामिल है।

कैट के राष्ट्रीय वाईस चेयरमेन श्री अमर पारवानी ने कहा कि जन्माष्टमी केवल आस्था और भक्ति का पर्व नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ के व्यापार और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी एक महत्वपूर्ण अवसर है। इस पर्व के साथ बाजारों में खरीदारी बढ़ती है और इसका सीधा लाभ छोटे एवं मध्यम व्यापारियों, कारीगरों, स्थानीय उत्पादकों, दुग्ध व्यवसायियों, मिठाई कारोबारियों, फूल विक्रेताओं, परिवहन एवं सेवा क्षेत्र से जुड़े लोगों को मिलता है।

पारवानी ने कहा कि जन्माष्टमी के अवसर पर माखन-मिश्री, दूध, दही, पनीर एवं अन्य डेयरी उत्पादों तथा मिठाइयों की मांग विशेष रूप से बढ़ती है। इसके साथ ही फल, सूखे मेवे, प्रसाद सामग्री, पूजा सामग्री, धूप-अगरबत्ती, पंचामृत, पूजा किट, फूल-मालाएं, बंदनवार, झूले, लड्डू गोपाल की मूर्तियां, मुकुट, बांसुरी, मोरपंख, आभूषण तथा विशेष परिधानों की बिक्री में भी तेजी आती है।

जन्माष्टमी का कारोबार केवल बाजारों तक सीमित नहीं रहता। प्रदेशभर में मंदिरों, धार्मिक स्थलों और सामाजिक संस्थाओं द्वारा आयोजित झांकियों, भजन-कीर्तन, सांस्कृतिक कार्यक्रमों एवं अन्य आयोजनों से भी बड़ी आर्थिक गतिविधि उत्पन्न होती है। श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने से होटल, रेस्तरां, परिवहन, प्रसाद, फूल, सजावट तथा अन्य स्थानीय सेवाओं के कारोबार को भी गति मिलती है।

 अमर पारवानी ने बताया कि जन्माष्टमी पर स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक वस्तुओं की मांग बढ़ना प्रदेश के छोटे कारोबारियों के लिए सकारात्मक संकेत है। मिट्टी की मूर्तियों से लेकर हस्तनिर्मित सजावटी सामग्री, पारंपरिक परिधान, पूजा सामग्री और स्थानीय स्तर पर तैयार मिठाइयों तक अनेक छोटे कारोबारी इस पर्व की आर्थिक श्रृंखला से जुड़े हैं।

उन्होंने कहा कि त्योहारों का व्यापार छत्तीसगढ़ की जमीनी अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। त्योहारों के दौरान होने वाली खरीदारी का लाभ केवल अंतिम विक्रेता तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उत्पादक, किसान, कारीगर, महिला उद्यमी, थोक व्यापारी, खुदरा व्यापारी, परिवहनकर्ता और विभिन्न सेवा प्रदाताओं तक इसकी आर्थिक श्रृंखला पहुंचती है।

कैट छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष  परमानंद जैन ने बताया कि रायपुर सहित बिलासपुर, दुर्ग-भिलाई, राजनांदगांव, धमतरी, महासमुंद, रायगढ़, अंबिकापुर, जगदलपुर और प्रदेश के अन्य शहरों एवं कस्बों में जन्माष्टमी को लेकर बाजारों और धार्मिक स्थलों पर विशेष तैयारियां की गई हैं। इससे स्थानीय स्तर पर व्यापारिक गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है।

 अमर पारवानी ने कहा, “जन्माष्टमी में भक्ति के साथ व्यापार की भी एक पूरी आर्थिक श्रृंखला सक्रिय होती है। मंदिरों की सजावट से लेकर पूजा सामग्री, फूल, मिठाई, डेयरी उत्पाद, वस्त्र और धार्मिक पर्यटन तक अनेक व्यवसाय इससे जुड़े हैं। यही हमारे त्योहारों की आर्थिक शक्ति है।”