सुपर अल नीनो का बड़ा खतरा अगले 6 महीने में 4.50 लाख मौतों का दावा

सुपर अल नीनो का बड़ा खतरा अगले 6 महीने में 4.50 लाख मौतों का दावा

नई दिल्ली: दुनिया में तेजी से मजबूत हो रहे अल नीनो को लेकर एक नई रिपोर्ट ने गंभीर चेतावनी दी है। यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो से जुड़े Climate Impact Lab की रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा शक्तिशाली अल नीनो से पैदा होने वाली अतिरिक्त गर्मी के कारण वैश्विक स्तर पर करीब 4.51 लाख अतिरिक्त गर्मी-संबंधी मौतें होने का अनुमान है। भारत भी ज्यादा प्रभावित होने वाले देशों में शामिल है। हालांकि यह आंकड़ा निश्चित मौतों की भविष्यवाणी नहीं, बल्कि वैज्ञानिक मॉडल के आधार पर सामान्य परिस्थितियों की तुलना में अतिरिक्त मृत्यु का अनुमान है।  के ‘पोकर फेस’ की चर्चा रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा अल नीनो के कारण आने वाले महीनों में वैश्विक भूमि तापमान सामान्य से करीब 1.2 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रह सकता है। इसके साथ ही सामान्य वर्ष के मुकाबले अत्यधिक गर्म दिनों की संख्या करीब 44 प्रतिशत अधिक होने का अनुमान लगाया गया है। वैज्ञानिकों के अनुसार इतनी ज्यादा गर्मी उन क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से खतरनाक हो सकती है, जहां बड़ी आबादी के पास गर्मी से बचाव के पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं हैं। भारत को लेकर रिपोर्ट में करीब 15,800 अतिरिक्त गर्मी-संबंधी मौतों का अनुमान लगाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत में इसका असर धीरे-धीरे बढ़ सकता है। दिसंबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच ही अनुमानित भारतीय मृत्यु संख्या का लगभग आधा हिस्सा सामने आ सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि फरवरी में छह महीने की मौजूदा पूर्वानुमान अवधि खत्म होने के बाद भी भारत और पाकिस्तान जैसे देशों में खतरा कम होना जरूरी नहीं है, क्योंकि इसके बाद गर्मियों का मौसम शुरू होगा।  के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। इसका असर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बारिश, तापमान, सूखा और अन्य मौसमी परिस्थितियों पर पड़ सकता है। भारत में मजबूत अल नीनो को मानसून और अधिक तापमान को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण कारकों में माना जाता है, हालांकि भारत के मौसम पर इसका असर अन्य समुद्री और वायुमंडलीय परिस्थितियों पर भी निर्भर करता है। जेलेंस्की बोले- दबाव बिना युद्ध खत्म नहीं करेगा रूस रिपोर्ट के अनुसार सबसे ज्यादा जोखिम ग्लोबल साउथ के देशों में दिखाई दे रहा है। अफ्रीका के साहेल क्षेत्र में नाइजीरिया, सूडान, नाइजर और चाड में मिलाकर करीब 66,800 अतिरिक्त मौतों का अनुमान है। इनमें नाइजीरिया में लगभग 31,400 और सूडान में करीब 17,500 अतिरिक्त मौतों का अनुमान लगाया गया है। इंडोनेशिया में करीब 19,300 अतिरिक्त मौतें होने का अनुमान है। भारत करीब 15,800 अनुमानित अतिरिक्त मौतों के साथ सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में शामिल है। इस अनुमान को तैयार करने के लिए शोधकर्ताओं ने दुनिया के 24,378 क्षेत्रों के आंकड़ों का विश्लेषण किया। अलग-अलग क्षेत्रों में तापमान और अतिरिक्त मौतों के बीच संबंध को स्थानीय जलवायु, लोगों की संवेदनशीलता और गर्मी से बचाव की क्षमता जैसे कारकों के साथ जोड़ा गया। इसके बाद आने वाले महीनों के तापमान पूर्वानुमान का इस्तेमाल संभावित अतिरिक्त मृत्यु का आकलन करने में किया गया। तुलना के लिए 1996 से 2025 की औसत परिस्थितियों को आधार बनाया गया। हालांकि रिपोर्ट में इस्तेमाल हुए 4.51 लाख के आंकड़े को लेकर अलग-अलग समाचार रिपोर्टों में समयावधि की व्याख्या में अंतर दिखता है। Climate Impact Lab की मूल घोषणा 4.51 लाख अतिरिक्त गर्मी-संबंधी मौतों का व्यापक अनुमान देती है, जबकि Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार सितंबर 2026 से फरवरी 2027 की छह महीने की पूर्वानुमान अवधि में करीब 2.39 लाख अतिरिक्त मौतें अनुमानित हैं और 4.51 लाख का आंकड़ा जून से शुरू हुए पूरे मौजूदा अल नीनो प्रकरण से जुड़ा है। इसलिए इसे सीधे तौर पर ‘अगले छह महीने में निश्चित 4.51 लाख मौतें’ कहना सावधानी के बिना भ्रामक हो सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार समय रहते तैयारी करके गर्मी से होने वाली मौतों को कम किया जा सकता है। बेहतर हीट अलर्ट सिस्टम, कूलिंग सेंटर, अस्पतालों में अतिरिक्त व्यवस्था, पीने के पानी की उपलब्धता और खुले में काम करने वाले श्रमिकों के लिए सुरक्षा उपाय महत्वपूर्ण हो सकते हैं। रिपोर्ट यह भी रेखांकित करती है कि अल नीनो प्राकृतिक घटना है, लेकिन यह पहले से गर्म हो चुकी वैश्विक जलवायु के ऊपर अपना प्रभाव डाल रहा है, जिससे अत्यधिक गर्मी का खतरा और गंभीर हो सकता है। भारत के लिहाज से आने वाले महीनों में तापमान और अल नीनो की स्थिति पर लगातार नजर रखना महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल 15,800 और वैश्विक 4.51 लाख के आंकड़ों को वैज्ञानिक अनुमान के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि निश्चित मृत्यु संख्या के रूप में।