महिला जवानों के शौर्य को सलाम CRPF मनाएगा 40 साल का जश्न

महिला जवानों के शौर्य को सलाम CRPF मनाएगा 40 साल का जश्न

नई दिल्ली: केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) में महिला जवानों की कॉम्बैट सेवा के 40 साल पूरे होने जा रहे हैं। इस ऐतिहासिक उपलब्धि को यादगार बनाने के लिए 25 सितंबर 2026 को विशेष समारोह आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में सेवारत और पूर्व महिला कर्मियों को उनके योगदान, साहस और बलिदान के लिए सम्मानित किया जाएगा। CRPF के महानिदेशक जीपी सिंह और CRPF फैमिली वेलफेयर एसोसिएशन की अध्यक्ष इस अवसर पर महिला कर्मियों को सम्मानित करेंगे।  की शुरुआत वर्ष 1986 में हुई थी। इसी वर्ष देश की पहली महिला कॉम्बैटेंट बटालियन का गठन किया गया था। उस समय केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में महिलाओं की ऑपरेशनल भूमिका सीमित थी, लेकिन इसके बाद चार दशकों में उनकी जिम्मेदारियों का लगातार विस्तार हुआ। आज CRPF में छह समर्पित महिला बटालियन हैं और महिला कर्मी देश के विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों में जिम्मेदारियां निभा रही हैं। CRPF की आधिकारिक वेबसाइट भी वर्तमान संगठनात्मक ढांचे में छह महिला बटालियनों का उल्लेख करती है।  विरासत महिला जवान अब केवल सामान्य सुरक्षा ड्यूटी तक सीमित नहीं हैं। वे रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) में भीड़ नियंत्रण और दंगा-रोधी अभियानों में शामिल हैं। इसके अलावा बस्तरिया बटालियन सहित वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में भी महिला कर्मियों की तैनाती की गई है। रिपोर्टों के मुताबिक RAF में 24-24 महिला कर्मियों वाली 64 टीमें भी तैनात हैं। CRPF की महिला जवानों के चार दशक के इतिहास में साहस और बलिदान के कई उदाहरण दर्ज हैं। कांस्टेबल कमलेश कुमारी का नाम इनमें प्रमुख है। 13 दिसंबर 2001 को संसद पर हुए आतंकवादी हमले के दौरान उन्होंने हमलावरों को देखकर सुरक्षा कर्मियों को सतर्क किया था और इस दौरान सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्हें मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया गया। निभाई। कांस्टेबल विमला देवी को 1988 में श्रीलंका के एलिफेंट पास चेक पोस्ट पर उनकी भूमिका के लिए सेना मेडल मिला, जबकि लांस नायक राजवंती देवी को सेना प्रमुख की प्रशंसा मिली। वर्ष 2001 में श्रीनगर एयरपोर्ट पर हुए आतंकवादी हमले के दौरान साहस दिखाने वाली कांस्टेबल बिंदु कुमरे को भी वीरता पदक से सम्मानित किया गया। महिलाओं की नेतृत्वकारी भूमिका भी लगातार बढ़ी है। वर्ष 2022 में पहली महिला बटालियन से जुड़ी एनी अब्राहम और सीमा धुंडिया को इंस्पेक्टर जनरल स्तर की जिम्मेदारी मिली थी। हाल में आईपीएस अधिकारी संजुक्ता पराशर CRPF की विशेष जंगल युद्ध इकाई CoBRA का नेतृत्व करने वाली पहली महिला बनीं। महिला अधिकारी जम्मू, RAF, पूर्वोत्तर, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण सेक्टरों में भी नेतृत्वकारी जिम्मेदारियां संभाल रही हैं। CRPF की महिला कर्मियों की चार दशक लंबी यात्रा को समर्पित होगा। इसमें उन पूर्व और वर्तमान महिला जवानों को सम्मानित किया जाएगा, जिन्होंने अलग-अलग दौर में बल की जिम्मेदारियों को निभाने में योगदान दिया है। एक महिला बटालियन से शुरू हुआ सफर आज छह समर्पित महिला बटालियनों और अनेक विशेष ऑपरेशनल भूमिकाओं तक पहुंच चुका है। चार दशक की यह यात्रा CRPF में महिलाओं की बदलती भूमिका को भी दिखाती है। वर्ष 1986 में शुरू हुआ अध्याय अब फ्रंटलाइन ऑपरेशन, दंगा नियंत्रण, नक्सल प्रभावित इलाकों में तैनाती और वरिष्ठ नेतृत्व पदों तक पहुंच चुका है। 25 सितंबर का आयोजन इसी 40 साल के सफर और इसमें योगदान देने वाली महिला कर्मियों को सम्मान देने का अवसर