स्वास्थ्य मंत्री बताएं एमबीबीएस डॉक्टर पैथोलॉजी रिपोर्ट कैसे जांचेंगे? मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ बंद करे भाजपा सरकार

स्वास्थ्य मंत्री बताएं एमबीबीएस डॉक्टर पैथोलॉजी रिपोर्ट कैसे जांचेंगे? मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ बंद करे भाजपा सरकार
स्वास्थ्य मंत्री बताएं एमबीबीएस डॉक्टर पैथोलॉजी रिपोर्ट कैसे जांचेंगे? मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ बंद करे भाजपा सरकार
 
क्या एचएलएल से भाजपा सरकार ने ऐसा करार किया है कि एमबीबीएस डॉक्टर ही पैथोलॉजी जांच करेंगे? स्वास्थ्य मंत्री जवाब दें?
 
रायपुर/22 सितंबर 2026। प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से पूछा है कि एमबीबीएस डॉक्टर पैथोलॉजी में होने वाले ब्लड टेस्ट, एचआईवी टेस्ट सहित विभिन्न जांचों की रिपोर्ट की विशेषज्ञता के साथ जांच कैसे करेंगे? पैथोलॉजी जांच और उसकी रिपोर्ट का परीक्षण विशेषज्ञ पैथोलॉजिस्ट का कार्य है। ऐसे में बिना आवश्यक विशेषज्ञता वाले डॉक्टरों से पैथोलॉजी जांच करवाना सीधे तौर पर मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ है। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों, जिला अस्पतालों, सिविल अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में होने वाली विभिन्न जांचों का ठेका एचएलएल को दे दिया है। सरकार ने दावा किया था कि मरीजों को बेहतर सुविधा मिलेगी और जांच रिपोर्ट घर तक पहुंचाई जाएगी, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है। दुर्ग जिले के 9 से अधिक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में एचएलएल द्वारा पैथोलॉजी टेस्ट की जिम्मेदारी एमबीबीएस डॉक्टरों को क्यों सौंप दी गई है।  स्वास्थ्य विभाग और एचएलएल  जवाब दे? 
 
प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग ने एचएलएल के साथ जिला अस्पतालों में 134, सिविल अस्पतालों में 111 और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में 97 प्रकार की जांचों का ठेका किया है। जब इतनी बड़ी संख्या में जांचों की जिम्मेदारी एचएलएल को दी गई है तो क्या उसके पास सभी जांचों की रिपोर्ट की विशेषज्ञ जांच के लिए पर्याप्त संख्या में एमडी पैथोलॉजिस्ट हैं? यदि पर्याप्त विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं हैं तो फिर मरीजों की जांच और रिपोर्ट की विश्वसनीयता की जिम्मेदारी कौन लेगा? मरीज की जांच रिपोर्ट में छोटी सी गलती भी उसकी जिंदगी पर भारी पड़ सकती है। एचआईवी जैसी संवेदनशील जांच में गलत रिपोर्ट किसी व्यक्ति और उसके पूरे परिवार के जीवन को प्रभावित कर सकती है। जिला अस्पताल में एक मरीज की एचआईवी रिपोर्ट नेगेटिव होने के बावजूद पॉजिटिव बताए जाने का मामला सामने आ चुका है। यह सामान्य लापरवाही नहीं, बल्कि बेहद गंभीर स्वास्थ्य संबंधी मामला है।
 
प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने स्वास्थ्य मंत्री से पूछा क्या भाजपा सरकार ने एचएलएल को खुली छूट दे रखी है? क्या ठेका देने के बाद सरकार ने यह जांचना भी जरूरी नहीं समझा कि जांच रिपोर्ट कौन और किस योग्यता के आधार पर प्रमाणित करेगा? स्वास्थ्य मंत्री तत्काल एचएलएल द्वारा नियुक्त पैथोलॉजी विशेषज्ञों और जांच प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच करवायें। जिन केंद्रों में एमबीबीएस डॉक्टरों से ऐसी जांचों की जिम्मेदारी ली जा रही है, वहां की पूरी व्यवस्था की जांच हो। यदि नियमों और निर्धारित योग्यता के विपरीत काम कराया जा रहा है तो एचएलएल पर कठोर कार्रवाई की जाए और ठेका निरस्त किया जाए।
 
प्रदेश कांग्रेस मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि भाजपा सरकार मरीजों के स्वास्थ्य को ठेकेदारी व्यवस्था के भरोसे नहीं छोड़ सकती। स्वास्थ्य सेवा कोई प्रयोगशाला नहीं है कि बिना विशेषज्ञता के प्रयोग किए जाएं। सरकार को बताना होगा कि मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाली इस व्यवस्था की जिम्मेदारी आखिर किसकी है और गलत रिपोर्ट आने पर जवाबदेही किसकी तय होगी।