नैनीताल की इस झील में पूर्णिमा की रात आती हैं परियां? जानिए रहस्यमयी परीताल का राज

नैनीताल की इस झील में पूर्णिमा की रात आती हैं परियां? जानिए रहस्यमयी परीताल का राज

नई दिल्ली। उत्तराखंड का नैनीताल अपनी खूबसूरत झीलों और पहाड़ों के लिए दुनियाभर में मशहूर है। लेकिन इसी इलाके में एक ऐसी झील भी है, जो अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के साथ रहस्यमयी लोककथाओं के लिए जानी जाती है। इसका नाम है परीताल

नैनीताल से करीब 25 किलोमीटर दूर चाफी गांव के आसपास स्थित यह झील मुख्य सड़क से कुछ दूरी पर है। गांव से लगभग 3-4 किलोमीटर की पैदल यात्रा के बाद यहां पहुंचा जा सकता है। पथरीला और दुर्गम रास्ता इस सफर को रोमांचक बना देता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, पूर्णिमा की रात इस झील पर देव परियां आती हैं और पानी में स्नान करती हैं। इसी लोककथा के कारण इसका नाम परीताल पड़ा। कहा जाता है कि इस विश्वास की वजह से कई स्थानीय लोग पूर्णिमा के दौरान झील के पास जाने से बचते हैं।

झील की गहराई को लेकर भी कई तरह की बातें कही जाती हैं। आसपास की काली चट्टानों और प्राकृतिक संरचनाओं को लेकर स्थानीय स्तर पर अलग-अलग मान्यताएं प्रचलित हैं। हालांकि, परियों के आने या झील की असाधारण गहराई से जुड़े दावों का वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। नैनीताल से भीमताल-पदमपुरी मार्ग होते हुए चाफी गांव पहुंचा जा सकता है। इसके बाद करीब 3 किलोमीटर की ट्रेकिंग करनी पड़ती है। रास्ता कठिन होने के कारण स्थानीय लोगों की मदद और मौसम की जानकारी लेकर यात्रा करना बेहतर रहेगा।