शहीद भगत सिंह के विचार और आदर्श आज भी युवाओं को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करते हैं -  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

शहीद भगत सिंह के विचार और आदर्श आज भी युवाओं को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करते हैं -  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
शहीद भगत सिंह के विचार और आदर्श आज भी युवाओं को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करते हैं -  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
 
शहीदे आज़म भगत सिंह जयंती पर रायपुर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित


रायपुर, 28 सितम्बर।
भारत के महान क्रांतिकारी और स्वतंत्रता संग्राम के तेजस्वी नायक शहीदे आज़म सरदार भगत सिंह जी की जयंती के अवसर पर आज राजधानी रायपुर के शहीद भगत सिंह चौक में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने भगत सिंह जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया।
मुख्यमंत्री ने अपने उद्बोधन में कहा कि “अमर शहीद भगत सिंह भारत के स्वतंत्रता संग्राम के अद्वितीय नायक थे। अपने अदम्य साहस, अटूट देशभक्ति और सर्वोच्च बलिदान से उन्होंने आने वाली पीढ़ियों के लिए अमिट प्रेरणा छोड़ी है। उनका जीवन हमें यह संदेश देता है कि राष्ट्रहित सर्वोपरि है और स्वतंत्रता के लिए त्याग ही सच्ची देशभक्ति का प्रतीक है। भगत सिंह के विचार और आदर्श आज भी युवाओं को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करते हैं।”


छत्तीसगढ़ सिक्ख समाज के प्रदेश अध्यक्ष सुखबीर सिंह सिंघोत्रा कहा कि  शहीद भगत सिंह का जन्म 28 सितम्बर 1907 को पंजाब के बंगा गांव (अब पाकिस्तान में) में हुआ था। बचपन से ही उनमें देशभक्ति की प्रबल भावना थी। वे हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) के सक्रिय सदस्य बने और अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ क्रांतिकारी आंदोलन को नई दिशा दी।
इस अवसर पर रायपुर की महापौर श्रीमती मीनल चौबे, नगर निगम अध्यक्ष सूर्यकांत राठौर, विधायक पुरंदर मिश्रा, अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत सिंह छाबड़ा, नगर निगम MIC सदस्य अमर गिदवानी एवं अवतार सिंह बागल, रायपुर शहर भाजपा अध्यक्ष रमेश सिंह ठाकुर सहित अनेक जनप्रतिनिधि और देशभक्त नागरिक उपस्थित रहे और सभी ने पुष्पांजलि अर्पित कर शहीदे आज़म को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

साइमन कमीशन के विरोध प्रदर्शन के दौरान लाला लाजपत राय पर पुलिस लाठीचार्ज से उनकी मृत्यु के बाद, भगत सिंह ने साथियों के साथ मिलकर लाहौर में ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जे.पी. सांडर्स की हत्या कर अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती दी।
8 अप्रैल 1929 को उन्होंने और बटुकेश्वर दत्त ने दिल्ली की केंद्रीय विधानसभा में “इंकलाब ज़िंदाबाद” और “साम्राज्यवाद मुर्दाबाद” के नारों के साथ बम फेंका, जिसका उद्देश्य किसी को नुकसान पहुँचाना नहीं बल्कि अंग्रेजी शासन को चेतावनी देना था।
केवल 23 वर्ष की आयु में 23 मार्च 1931 को लाहौर जेल में उन्हें राजगुरु और सुखदेव के साथ फांसी दी गई। उनका बलिदान भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का अमिट अध्याय है।



कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ सिक्ख समाज के प्रदेश अध्यक्ष सुखबीर सिंह सिंघोत्रा, परमजीत सिंह सलूजा, मनजीत सिंह भाटिया गुरमीत सिंह टोनी, देवेंद्र सिंह चावला, सुरजीत सिंह छाबड़ा, अतर सिंह, स्वर्ण सिंह चावला, इंदरपाल सिंह चावला, जसप्रीत सिंह सलूजा, रविंदर सिंह बेदी सहित समाज के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में देशभक्त नागरिक शामिल हुए। उपस्थित जनों ने भगत सिंह जी के आदर्शों को आत्मसात करने और समाज में राष्ट्रप्रेम की भावना को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।