"पिछले बजट में मैंने पतंग उड़ाने की घोषणा की थी, इस बजट में मैं पतंग के कन्ने बांधने की घोषणा करता हूँ, फिर अगले बजट में मैं पतंग में माँझा बांधने का ऐलान करूँगा, फिर उसके अगले बजट में पतंग उड़ाने की कोशिश करूँगा"..... और फिर जनता जुमलों की यह पतंग काट देगी. कुछ ऐसा ही बजट आज विधानसभा में देरी से पहुंचे वित्तमंत्री ने पेश किया. अपनी "अज्ञानता" से प्रदेश की "दुर्गति" करने के बाद आज जो ट्रकों के पीछे लिखी शायरी पढ़कर एक भाषण दिया गया, वह जनता को बार-बार याद दिला रहा है कि सिर्फ कांग्रेस ही "विकल्प" है. ऐसा लगता है यह बजट ChatGPT से लिखवाया गया बजट है. जिसमें सिर्फ Artificial Intelligence का प्रयोग हुआ है. न सरकार की बुद्धिमत्ता दिखी और न अधिकारियों की गंभीरता. वैसे जनता के विवेक से ऊपर कुछ भी नहीं.