डी-लिस्टिंग मामले में भाजपा अवसरवादी राजनीति कर रही  - दीपक बैज

डी-लिस्टिंग मामले में भाजपा अवसरवादी राजनीति कर रही  - दीपक बैज
डी-लिस्टिंग मामले में भाजपा अवसरवादी राजनीति कर रही  - दीपक बैज
 
भाजपाई कानून बनाने के बजाय खुद ही आंदोलन करवा कर जनता की आँखों में धूल झोंक रहे


रायपुर/26 मई 2026।
 डी-लिस्टिंग मामले में भाजपा अवसरवादी राजनीति कर रही है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि देश में भाजपा की सरकार है, राज्य में भाजपा की सरकार है। संसद मे कानून बनाने का अधिकार इस सरकार के पास है, विधानसभा में कानून बनाने का अधिकार इनके पास है तो डी-लिस्टिंग मामले में कानून बनाने से क्यों डर रहे है? भाजपा आदिवासी नेताओं को बुलाकर भाषण देकर सस्ती लोकप्रियता हासिल करना चाहती हैै। डी-लिस्टिंग के मामले में आदिवासी समाज के पीड़ा से भाजपा को कोई लेना देना नही है। आदिवासियों के हितों की भाजपा को कोई चिंता नही है। यह जैसे धर्मांतरण के मामले में राजनीति करती है, वैसे ही डी-लिस्टिंग के मामले में राजनीति कर रहे है। इनको कानून बनाने से किसने रोका है? भाजपा को लगता है कि डी-लिस्टिंग होना चाहिये, जो कानून बनाये, केवल गुमराह करने का काम नहीं करें।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी को आदिवासियों के हित और अधिकार से कोई सरकार नहीं है, वन अधिकार अधिनियम और पेसा कानून का सर्वाधिक उल्लंघन भाजपा शासित राज्यों में ही किया जा रहा है। अपने पूंजीपति मित्रों के आर्थिक लाभ और अपने राजनैतिक स्वार्थ के लिए भाजपा केवल वर्ग संघर्ष कराना चाहती है। भाजपा सरकारों की बुरी नीयत पांचवी अनुसूची के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के संसाधनों पर है, इसी षडयंत्र के तहत आदिवासियों को आपस में बांटकर संख्या कम दिखाना चाहती है, डी-लिस्टिंग का राजनैतिक पाखंड इसी स्क्रिप्ट का एक हिस्सा है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि डी-लिस्टिंग का विषय केंद्र का है, लोक सभा और राज्य सभा का है, संविधान संशोधन से जुड़ा है, इस मामले में केंद्र की मोदी सरकार को अपनी स्थिति स्पष्ट करना चाहिए। छत्तीसगढ़ से लोकसभा में 11 में से 10 सांसद भारतीय जनता पार्टी के हैं, उनको यह बताना चाहिए कि भारतीय जनता पार्टी का स्पष्ट स्टैंड डी-लिस्टिंग के मामले में क्या है? भारतीय जनता पार्टी समाधान नहीं चाहती केवल समस्या को सुलगाए रख कर घी डालते रहना और राजनीतिक रोटी सेकना है, भाजपा नहीं चाहती कि कोई ठोस समाधान निकले, ट्रिपल इंजन सरकार का दावा करने वाले भाजपाई कानून बनाने के बजाय खुद ही आंदोलन करवा कर जनता की आँखों में धूल झोंक रहे हैं।