सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने मेडिकल-वैलनेस टूरिज़्म को राष्ट्रीय स्तर पर सशक्त करने के दिए सुझाव

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने मेडिकल-वैलनेस टूरिज़्म को राष्ट्रीय स्तर पर सशक्त करने के दिए सुझाव

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने मेडिकल-वैलनेस टूरिज़्म को राष्ट्रीय स्तर पर सशक्त करने के दिए सुझाव

छत्तीसगढ़ को वैलनेस टूरिज़्म का हब बनाने का प्रस्ताव, आयुर्वेद-योग और प्राकृतिक चिकित्सा पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल का जोर

2033 तक 70.9 बिलियन डॉलर का मेडिकल टूरिज़्म बाज़ार: एस्टीमेट कमेटी में बृजमोहन अग्रवाल ने रखी दूरदर्शी सोच

मेडिकल वीज़ा फास्ट-ट्रैक और सिद्ध चिकित्सा को वैश्विक पहचान देने की मांग, चेन्नई बैठक में सांसद बृजमोहन अग्रवाल की पहल

चेन्नई/रायपुर 29 दिसंबर

सोमवार को चेन्नई में आयोजित लोकसभा की एस्टीमेट कमेटी की बैठक में रायपुर सांसद एवं कमेटी के वरिष्ठ सदस्य श्री बृजमोहन अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ समेत देशभर में मेडिकल और वैलनेस टूरिज़्म को सशक्त करने को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

 श्री अग्रवाल ने बताया कि, वर्ष 2033 तक भारत का मेडिकल टूरिज़्म बाज़ार लगभग 70.9 बिलियन डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है। इस विशाल संभावना को देखते हुए वैलनेस टूरिज़्म — आयुर्वेद, योग और सिद्ध चिकित्सा को संगठित रूप से प्रोत्साहित किए जाने की आवश्यकता है।

उन्होंने वैलनेस टूरिज़्म की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए कहा कि यह केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें स्वास्थ्य सुधार, मानसिक शांति और संतुलित जीवनशैली से जुड़ी गतिविधियाँ शामिल होती हैं, जैसे योग-ध्यान, आयुर्वेद व प्राकृतिक चिकित्सा, स्पा-डिटॉक्स थेरेपी और तनावमुक्ति कार्यक्रम।

श्री अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ को वैलनेस टूरिज़्म के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने का भी प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध वन संपदा, स्वच्छ प्राकृतिक वातावरण, आदिवासी औषधीय ज्ञान तथा हर्बल व आयुर्वेदिक परंपराएँ इसे वैलनेस टूरिज़्म के लिए अत्यंत उपयुक्त बनाती हैं। यहाँ योग-ध्यान केंद्र, प्राकृतिक चिकित्सा, हर्बल उपचार और जंगल आधारित वैलनेस रिट्रीट विकसित कर देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि इससे न केवल छत्तीसगढ़ की राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पहचान सशक्त होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे और पर्यटन को नई गति मिलेगी।

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने सुझाव दिया कि विदेशी मरीजों और मेडिकल टूरिस्ट्स के लिए मेडिकल वीज़ा को फास्ट-ट्रैक किया जाए, ताकि समय पर वीज़ा मिलने से वे उपचार के लिए किसी अन्य देश का रुख न करें। इससे भारत का मेडिकल एवं वैलनेस टूरिज़्म और अधिक सशक्त होगा।

 सिद्ध चिकित्सा पद्धति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह तमिलनाडु से उत्पन्न एक प्राचीन, समग्र और प्रभावी भारतीय पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली है, जिसे वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई जानी चाहिए।

बैठक में पर्यटन, स्वास्थ्य एवं आयुष मंत्रालय भारत सरकार के अधिकारी और प्रतिनिधि उपस्थिति रहे।