प्रधानमंत्री के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करना देश की गरिमा पर सीधा आघात है।

प्रधानमंत्री के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करना देश की गरिमा पर सीधा आघात है।

विश्व के सबसे लोकप्रिय नेता यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी, जिनके नेतृत्व में कश्मीर से आतंकवाद खत्म होने के कगार पर है, साथ ही देश से नक्सलवाद समाप्त हुआ है। जिन्होंने कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाकर उसे देश का अभिन्न अंग बनाया और वहा शांति एवं विकास का नया दौर शुरू हुआ, ऐसे प्रधानमंत्री के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करना देश की गरिमा पर सीधा आघात है।

परिवारवाद, घमंड और तुष्टिकरण की सोच से ग्रसित कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आदरणीय प्रधानमंत्री मोदी जी को “आतंकवादी” कहकर 140 करोड़ देशवासियों के साथ देश के सर्वोच्च पद की गरिमा को भी ठेस पहुंचाई। यह  आलोचना नहीं, बल्कि ऐसी भाषा है जो सीधे-सीधे राजनीतिक दिवालियापन को दर्शाती है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा दिया गया यह बयान कांग्रेस की गिरती हुई राजनीतिक सोच और उसकी हताशा को उजागर करता है। जब-जब कांग्रेस तथ्यों, विकास और जनहित के मुद्दों पर जवाब देने में असफल होती है, तब वह इस तरह की निम्नस्तरीय भाषा का सहारा लेकर अपनी विफलताओं को छिपाने की कोशिश करती है। यह न तो स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान है और न ही जिम्मेदार विपक्ष की।

ऐसे ओछी सोच और शब्द न केवल प्रधानमंत्री पद की गरिमा का अपमान करते हैं, बल्कि उन करोड़ों देशवासियों के विश्वास और जनादेश का भी अनादर हैं, जिन्होंने लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से अपना नेतृत्व चुना है।

कांग्रेस नेतृत्व, विशेषकर राहुल गांधी और उनके सहयोगियों को समझना चाहिए कि देश की जनता अब इस तरह की भाषा और राजनीति को स्वीकार करने वाली नहीं है। बार-बार मर्यादा का उल्लंघन करना और फिर उसे राजनीतिक बयानबाजी बताकर टाल देना, यह अब नहीं चलेगा।

इस अत्यंत आपत्तिजनक और निंदनीय बयान के लिए कांग्रेस और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष को देश की जनता से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। लोकतंत्र में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन भाषा की मर्यादा और राष्ट्र के सर्वोच्च पद का सम्मान हर हाल में बनाए रखना आवश्यक है।