CAIT ने FSSAI नियमों में बड़े सुधार एवं लाइसेंस को आजीवन वैध बनाने की मांग

CAIT ने FSSAI नियमों में बड़े सुधार एवं लाइसेंस को आजीवन वैध बनाने की मांग

CAIT ने FSSAI नियमों में बड़े सुधार एवं लाइसेंस को आजीवन वैध बनाने की मांग

लाखों व्यापारियों को राहत दिलाने केंद्रीय मंत्री पासवान को को भेजे सुझाव - अमर पारवानी

देश के सबसे बड़े व्यापारिक संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के राष्ट्रीय वाईस चेयरमेन   अमर पारवानी, छत्तीसगढ़ इकाई के चेयरमेन  जितेन्द्र दोशी,  विक्रम सिंहदेव, अध्यक्ष  परमानंद जैन, वाइस चेयरमेन  सुरिन्दर सिंह,  जीवत बजाज, महामंत्री  अवनीत सिंह, कोषाध्यक्ष  विजय पटेल, कार्यकारी अध्यक्ष  राजेंद्र जग्गी,  वासु माखीजा,  राम मंधान,  भरत जैन,  राकेश ओचवानी एवं  शंकर बजाज ने संयुक्त रूप से बताया कि देश के करोड़ों छोटे एवं मध्यम व्यापारियों की प्रमुख राष्ट्रीय संस्था कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के अंतर्गत लागू कुछ नियमों में व्यावहारिक सुधार एवं सरलीकरण की मांग करते हुए केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री चिराग पासवान को एक विस्तृत सुझाव पत्र प्रेषित किया है।


CAIT के राष्ट्रीय वाइस चेयरमेन अमर पारवानी ने अपने पत्र में कहा है कि खाद्य सुरक्षा के मानकों को बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है, किन्तु वर्तमान में लागू कुछ प्रक्रियाओं के कारण विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम व्यापारियों (MSME) को अनावश्यक प्रशासनिक, वित्तीय एवं समयगत कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। यदि इन नियमों को व्यापार-अनुकूल एवं व्यावहारिक बनाया जाए तो ‘Ease of Doing ’ को महत्वपूर्ण बढ़ावा मिलेगा।

श्री पारवानी ने बताया कि CAIT  देशभर के लगभग 9 करोड़ व्यापारियों तथा छत्तीसगढ़ के लगभग 12 लाख व्यापारियों का प्रतिनिधित्व करता है। व्यापारियों से प्राप्त सुझावों एवं अनुभवों के आधार पर FSSAI  के कुछ प्रावधानों में संशोधन की आवश्यकता महसूस की गई है।

लाइसेंस एवं पंजीकरण को बनाया जाए आजीवन वैध

CAIT ने अपने सुझाव पत्र में मांग की है कि FSSAI पंजीकरण एवं लाइसेंस के लिए बार-बार नवीनीकरण की अनिवार्यता समाप्त कर उसे “Lifetime Validity ” (आजीवन वैधता) प्रदान की जाए। संगठन का कहना है कि जब तक व्यवसाय के स्वामित्व, पते, साझेदारी संरचना अथवा व्यवसाय की प्रकृति में कोई महत्वपूर्ण परिवर्तन नहीं होता, तब तक नवीनीकरण की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए।

CAIT  का मानना है कि इस व्यवस्था से विभागीय कार्यभार कम होगा, डिजिटल अनुपालन प्रक्रिया सरल होगी तथा छोटे व्यापारियों को अनावश्यक खर्च एवं जटिलताओं से राहत मिलेगी।


FoSTaC  प्रशिक्षण नियमों में भी हो व्यावहारिक बदलाव

संगठन ने यह भी सुझाव दिया है कि FoSTaC  (Food Safety Training and Certification ) प्रशिक्षण की अनिवार्यता को व्यवसाय की प्रकृति के अनुसार श्रेणीबद्ध किया जाए।

CAITने कहा कि देश में बड़ी संख्या में ऐसे व्यापारी हैं जो केवल सीलबंद, पैकेटबंद एवं ब्रांडेड खाद्य उत्पादों, अनाज, दालों एवं अन्य पूर्व-निर्मित खाद्य सामग्री का विक्रय करते हैं। ऐसे व्यापारी स्वयं खाद्य निर्माण, प्रसंस्करण या पकाने का कार्य नहीं करते। इसलिए इन व्यापारियों को  FoSTaC प्रशिक्षण की अनिवार्यता से छूट दी जानी चाहिए अथवा उनके लिए अलग एवं सरल अनुपालन व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।

व्यापार सुगमता और खाद्य सुरक्षा दोनों साथ-साथ संभव

श्री पारवानी ने कहा कि CAIT  खाद्य सुरक्षा के उच्च मानकों का पूर्ण समर्थन करता है, लेकिन नियमों का उद्देश्य व्यापारियों पर अनावश्यक बोझ बढ़ाना नहीं होना चाहिए। सरकार यदि इन सुझावों पर सकारात्मक विचार करती है तो देश के करोड़ों छोटे एवं मध्यम व्यापारियों को बड़ी राहत मिलेगी तथा वे अपने व्यवसाय, रोजगार सृजन और आर्थिक विकास में अधिक प्रभावी योगदान दे सकेंगे।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्रीय मंत्री  चिराग पासवान व्यापार एवं उद्योग जगत की इन व्यावहारिक मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार करेंगे तथा खाद्य सुरक्षा के उद्देश्यों को अक्षुण्ण रखते हुए व्यापार-अनुकूल सुधारों की दिशा में आवश्यक पहल करेंगे।

“व्यापारी राष्ट्र की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, नियम ऐसे हों जो सुरक्षा भी सुनिश्चित करें और व्यापार को भी प्रोत्साहित करें“ - अमर पारवानी