मंचीय पुराधाओं ने छत्तीसगढ़ी लोकमंच को दिया विस्तृत आसमानःमिश्रा
अगासदिया का कोूदराम वर्मा स्मृति समारोह सम्पन्न, शब्दभेदी
अगासदिया संस्था की ओर से प्रसिद्ध कलाकार कोदूराम वर्मा की स्मृति में समारोह आमदीनगर में एक अप्रेल को आयोजित किया गया। इस मौके पर मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा थे। शुरूआत में प्रख्यात पंडवानी गायिका पद्मश्री उषा बारले ने मंगल गान प्रस्तुत किया।
सभा को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि प्रभात मिश्राने कहा कि हमारे पुरखों ने छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण में भाषा, संस्कृति लोकमंच के क्षेत्र से बड़ा योगदान दिया है। अगासदिया द्वारा ऐसे पुरोधा सदैव याद किए जाते हैं। छत्तीसगढ़ी भाषा आठवीें अनुसूची में सम्मिलित हो यह हमारा सपना और संकल्प है। छत्तीसगढ़ी भाषा को सम्मान मिलना ही छत्तीसगढ़ का सम्मान है।
उन्होने कहा कि हमारे रचनाकार प्रतिभा सम्पन्न और यशस्वी हैं। हर विधा में विशेष लेखन हो रहा है। मंचीय पुराधाओं ने छत्तीसगढ़ी लोकमंच के विस्तृत आसमान को चमकदार बनाकर दुनियाँ भर का ध्यान आकृष्ट किया। हमें स्वाभिमान और सम्मान से जीना सिखाया।
अध्यक्षता कर रहे साहित्यकार व भाषाविद् डाॅ. सुधीर शर्मा ने कहा कि ऐसे बहुआयामी आयोजन से जुड़कर हम सब समृद्ध होते हैं। कलाकारों और साहित्यकारों के बीच डाॅ. परदेशीराम वर्मा समान रूप से लोकप्रिय हैं। वे संस्कृति क्षेत्र में भी लेखन के माध्यम से महत्वपूर्ण काम करते हैं।
विशेष अतिथि डाॅ. सोनाली चक्रवर्ती ने अपने वक्तव्य में कहा कि स्वाभिमान और पहचान के लिए हम सब मिलकर काम करते हैं। संचालन करते हुए डाॅ. रजनी नेलसन ने बताया कि एक अप्रैल को वरिष्ठ साहित्यकार संतोष झांझी, रंगोली कलाकार और शिक्षाविद् स्मिता वर्मा तथा रामचरित मानस गायिका ललिता साहू का जन्मदिन भी है। तीनों को अतिथियों ने बधाई दी। इस दौरान श्रीमती स्मिता वर्मा की चुनिंदा रंगोली कलाकृतियों का प्रदर्शन भी हुआ। अतिथियों ने विभिन्न पर्वों, व्यक्तित्वों पर केन्द्रित रंगोली कला को सराहा।
आयोजन में पत्रकार गण, राजेन्द्र सोनबोईर, मुहम्मद जाकिर हुसैन और पुनीत कौशिक विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे। कलाकार महेश वर्मा ने कोदूराम वर्मा के मंचीय योगदान पर वक्तव्य देते हुए उन्हें कलाऋषि के रूप मे याद किया। उन्होंने शब्दभेदी बाण चलाने की स्व. कोदूराम की प्रतिभा का विशेष रूप से उल्लेख किया। अगासदिया के अध्यक्ष डाॅ. परदेशीराम वर्मा ने कहा कि हमारे छत्तीसगढ़ के मंचीय पुरोधा और सूत्रधार दुलारसिंह साव मंदराजी, रामचंद्र देशमुख, महासिंह चंद्राकर सहित कोदूराम वर्मा सभी समृद्ध बड़े भूपति थे। इन्होंने लोककला एवं मंच को समृद्ध करने के लिए पैतृक सम्पत्ति को लगाया। परोपकारी ऐसे पुरोधा सामने आए इसलिए छत्तीसगढी़ लोकमंच का चमकता हुआ आसमान सबको आकृष्ट करता है।
आयोजन में महासमुंद के साहित्यकार राजेश्वर बन्धु खरे, रायपुर के साहित्यकार डाॅ. सुखदेवे’ भिलाई की पद्मश्री कलाकार उषा बारले और समाजसेवी राम सेवक वर्मा ने अतिथियों को सम्मानित किया। कोदूराम वर्मा के पुत्र प्रेमलाल वर्मा सपरिवार आयोजन में उपस्थित थे। श्रीमती संतोष झांझी ने अपना प्रसिद्ध गीत नमन है जिन्दगीं सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
वरिष्ठ नागरिक संघ आमदी नगर के अध्यक्ष अरूण अग्रवाल ने आभार प्रदर्शन किया। अतिथियों तथा विशिष्टि प्रतिभागियों को स्मृतिचिन्ह एवं शाल भेंटकर से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में रामसेवक वर्मा, विनायक अग्रवाल, संतोष अग्रवाल, अब्दुल कलाम, नीतिश कुमार, खड़ानंद वर्मा, प्रहलाद वर्मा, उषा वर्मा, मधु वर्मा और प्रेमलाल बबला सहित संस्कृति साहित्य एवं लोकमंच से जुड़े व्यक्त्वि उपस्थित थे।
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राष्ट्रकवि माखनलाल चतुर्वेदी की जन्मस्थली को प्रणाम कर लौटे डॉ. शर्मा,
भिलाई। इस्पात नगरी भिलाई के साहित्य - संस्कृति के आचार्य डॉ.महेशचन्द्र शर्मा ने विगत दिनों प्रवास के दौरान भारतीय आत्मा के नाम से प्रसिद्ध राष्ट्रवादी कवि पं.माखन लाल चतुर्वेदी की जन्मस्थली में उनकी प्रतिमा के दर्शन किए। मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम् (होशंगाबाद) के पास बाबई नाम का क़स्बा है जो "माखन नगर" कहलाता है। डॉ.शर्मा ने बताया कि यहाॅं पहुॅंचने पर विशेष प्रसन्नता और सन्तोष का अनुभव हुवा।
ज्ञातव्य है कि राष्ट्रभक्त कवि एवं वरिष्ठ पत्रकार पं.माखन लाल चतुर्वेदी की प्रसिद्ध देशभक्ति पूर्ण और कालजयी कविता "पुष्प की अभिलाषा - चाह नहीं मैं सुर बाला के गहनों में गूॅंथा जाऊॅं ..." की रचना का अभी शताब्दी वर्ष हुआ है। पं.चतुर्वेदी ने पांच जुलाई 1921 को बिलासपुर जेल में इसकी रचना की थी। वे असहयोग आन्दोलन के कारण बिलासपुर जेल में थे। गणेश शंकर विद्यार्थी ने इसे "प्रताप" में प्रकाशित किया। आचार्य डॉ.शर्मा ने माखन नगर से लौटने पर बताया कि उक्त कविता का जन्म बिलासपुर में हुआ अतः छत्तीसगढ़ को गौरव और गर्व का अनुभव होना स्वाभाविक है। वैसे तो कविता पूरे राष्ट्र की है परन्तु छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश को विशेष रूप से जोड़ती है।
एक भारतीय आत्मा पं.माखन लाल चतुर्वेदी कर्मवीर और प्रताप जैसे समाचार पत्रों के प्रसिद्ध सम्पादक भी थे। ऐसे ही मनीषी देशभक्त साहित्यकारों और पत्रकारों ने देश की बड़ी सेवा की। लोकमान्य पं.बालगंगाधर तिलक और राष्ट्रपिता महात्मा गान्धी आदि को भी इस सन्दर्भ में आदर्श और प्रेरक माना गया। पं. माखनलाल चतुर्वेदी ने "जवानी" और "जलियाॅंवाला की बन्दी" आदि अन्य देशभक्ति पूर्ण कविताओं की रचना की थी। निश्चित रूप से साहित्यिक पत्रकारिता लोगों को राष्ट्रभक्ति और चरित्र निर्माण से जोड़ती है।
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