दसवीं, बारहवीं की परीक्षा शुल्क में वृद्धि वापस ले भाजपा सरकार
रायपुर/06 फरवरी 2026। दसवीं, बारहवीं की परीक्षा शुल्क एवं अन्य 22 मदों की फीस ने दोगुनी वृद्धि को भाजपा सरकार की शिक्षा विरोधी नीति करार देते हुये प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि परीक्षा पर चर्चा करने वाली भाजपा सरकार ने दसवीं, बारहवीं की परीक्षा शुल्क एवं 22 मदों के फीस में दोगुना वृद्धि कर गरीब एवं एससी, एसटी वर्ग के छात्रों का खर्चा बढ़ा दिया है। महंगाई की मार झेल रही जनता के ऊपर कुठाराघात है। ये फैसला भाजपा सरकार की शिक्षा विरोधी होने का प्रमाण है। इससे गरीब एवं आरक्षित वर्ग के छात्र तनाव में आ गये है। गरीब माता-पिता पर व्यय भार बढ़ गया। कांग्रेस परीक्षा शुल्क में की गई वृद्धि तत्काल वापस लेने की मांग करती है। आखिर सरकार को दसवीं, बारहवीं की नियमित फीस 460 रु. से बढ़ाकर 800 रु. नामांकन शुल्क 80 रु. से बढ़ाकर 200 रु., अतिरिक्त विषय का फीस 110 रु से 250 रु. सम्पूर्ण विषय 10वीं, 12वीं 1230 रु. से 1600 रु. एक विषय का 280 रु. से 500 रु., दो विषय का 340 रु., से 600 रु., परीक्षा केंद्र परिवर्तन 240 रु से 400 रु., स्वाध्यायी विलम्ब शुल्क 770 रु. 1000 रु, विशेष विलम्ब शुल्क 1540 रु से 2000 रु. करने की आवश्यकता क्यों पड़ी? इसका जवाब शिक्षा मंत्री को देना चाहिये।
प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि डबल इंजन की सरकार में आम जनता को राहत मिलने का वादा किया गया था लेकिन डबल इंजन की सरकार प्रदेश की जनता के लिए ट्रबल इंजन साबित हो रही है। कांग्रेस सरकार में आम जनता के रियायत के लिए जितने योजना शुरू की गई थी विभिन्न मदों में छूट देकर आम जनता को आर्थिक लाभ पहुंचाया गया था, डबल इंजन की सरकार बनते ही उन सभी लाभकारी योजनाओं को बंद कर दिया गया है और उन सभी योजनाओं में राशि बढ़ा दी गई है, स्कूल शिक्षा में फीस दोगुनी कर दिया गया, बिजली बिल हाफ योजना में 400 युनिट की छूट खत्म कर दी गयी, गरीबों को छोटी जमीन खरीदने में रजिस्ट्री में मिलने वाले 30 प्रतिशत छूट खत्म कर दिया गया, जमीन गाइडलाइन दर में बेतहाशा वृद्धि किया गया, कांग्रेस सरकार में प्रतियोगी परीक्षा में भाग लेने वाले छात्रों से फीस नहीं लिया जाता था, इस सरकार में फीस लिया जा रहा है, सारी रियायत को खत्म कर दिया गया है। यह सरकार का मुनाफाखोरी नीति है। भाजपा सरकार बनने के बाद राज्य की वित्तीय व्यवस्था चरमरा गई है। केंद्र सरकार से जो आर्थिक मदद का वादा था वह मिल नहीं रहा है, बल्कि राज्य सरकार मोदी की गारंटी को पूरा करने के लिए कर्ज पर कर्ज ले रही है और उसका प्रभाव अब शिक्षा विभाग में भी दिख रहा है। पहले ही शिक्षा विभाग अव्यवस्थाओं से जूझ रहा है, अब फीस बढ़ाकर गरीब छात्रों पर अत्याचार किया जा रहा है। कांग्रेस मांग करती है की फीस में की गई वृद्धि तत्काल वापस लिया जाए।
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