फर्जी मरीजों के नाम पर आयुष्मान से पैसे निकाले जा रहे
प्रदेश में संगठित आयुष्मान घोटाला हो रहा - कांग्रेस
फर्जी मरीजों के नाम पर आयुष्मान से पैसे निकाले जा रहे
घोटाले के लिए जिम्मेदार स्वास्थ्य विभाग खुद जांच कर रहा है
रायपुर/23 अक्टूबर 2026। फर्जी मरीजों के आयुष्मान योजना के तहत इलाज बताकर लोकधन की लूट के लिए प्रदेश के स्वास्थ विभाग को बराबर का जिम्मेदार ठहराते हुए प्रदेश कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा है कि भाजपा सरकार में गरीबों की बीमारी भी कमाई का साधन बन चुकी है। आयुष्मान भारत योजना में फर्जी मरीज दिखाकर करोड़ों रुपये की कमीशनखोरी और घोटाला अंजाम दिया जा रहा है। दूसरे राज्यों से तक फर्जी मरीज लाने की शिकायतें आई हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि जिस स्वास्थ्य विभाग के संरक्षण में यह डाका पड़ा है, वही विभाग इसकी जांच का ढोंग कर रहा है। स्वास्थ्य विभाग खुद आरोपों के कटघरे में है, आरोपी ही अगर जांचकर्ता बन जाए, तो न्याय कैसे मिलेगा? कांग्रेस पार्टी यह स्पष्ट करती है कि हमें विभागीय लीपापोती पर बिल्कुल भरोसा नहीं है। इस बहुचर्चित घोटाले की निष्पक्ष जांच उच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीश की सीधी निगरानी में कराई जाए।
प्रदेश कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा है कि जब योजना में सेंध लगाने वाला खुद विभाग और उसके भ्रष्ट अधिकारी हों, अस्पताल प्रबंधन हों, तो विभाग द्वारा खुद कराई जा रही जांच केवल एक खानापूर्ति और लीपापोती है। स्वास्थ्य विभाग खुद संदेह के दायरे में है, इसलिए उसकी जांच पर जनता को रत्ती भर भी भरोसा नहीं है। छत्तीसगढ़ के गरीब, मध्यमवर्गीय परिवार और गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीज, जिन्हें इलाज की सख्त जरूरत है, उनके कार्ड के पैसों का फर्जीवाड़ा कर निजी अस्पताल और अधिकारी अपनी जेबें भर रहे हैं। असली मरीज दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
प्रदेश कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा है कि पूर्ववती कांग्रेस सरकार ने डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना और मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के जरिए पारदर्शी तरीके से हर छत्तीसगढ़िया को इलाज की गारंटी दी थी। मोहल्ला क्लीनिक, हाट बाजार क्लीनिक, स्लम स्वास्थ्य योजना, हमर अस्पताल, ब्लॉक और जिला अस्पतालों की व्यवस्था सुदृढ़ की थी आज भाजपा राज में इलाज के नाम पर सिर्फ डाका डाला जा रहा है। कमीशन के लालच में सरकारी अस्पतालों में जांच के लैब और फार्मेसी तक निजी कंपनियों को दे दिए।
प्रदेश कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा है कि जब आयुष्मान योजना में फर्जी मरीजों के नाम पर करोड़ों के बिल पास हो रहे थे, तब स्वास्थ्य विभाग के आला अफसर और विभागीय मंत्री सो रहे थे या इसमें उनका भी हिस्सा तय था? फर्जीवाड़ा करने वाले जिन निजी अस्पतालों पर कार्रवाई होनी चाहिए थी, उन्हें राजनीतिक संरक्षण देकर क्यों बचाया जा रहा है? अब तक एफआईआर, गिरफ्तारी, वसूली की प्रक्रिया शुरू क्यों नहीं हुई? क्या स्वास्थ्य मंत्री इस नैतिक विफलता की जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा देंगे?


