जिला अस्पताल कोण्डागांव के एस.एन.सी.यू. में नवजात को मिला नया जीवन, सतत देखभाल से स्वस्थ हुआ शिशु

जिला अस्पताल कोण्डागांव के एस.एन.सी.यू. में नवजात को मिला नया जीवन, सतत देखभाल से स्वस्थ हुआ शिशु
जिला अस्पताल कोण्डागांव के एस.एन.सी.यू. में नवजात को मिला नया जीवन, सतत देखभाल से स्वस्थ हुआ शिशु


कोण्डागांव, 19 मई 2026/ 
जिला कोण्डागांव में कलेक्टर श्रीमती नूपुर राशि पन्ना के मार्गदर्शन में जिला अस्पताल कोण्डागांव में नवजात शिशुओं हेतु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आर. के. चतुर्वेदी तथा सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक डॉ. प्रेमलाल मंडावी द्वारा एस.एन.सी.यू. में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने हेतु आवश्यक दवाइयों एवं उपकरणों की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। साथ ही स्वास्थ्य टीम को निरंतर सहयोग प्रदान किया जा रहा है, जिसका लाभ बाहरी स्वास्थ्य संस्थानों से रेफर होकर आने वाले गंभीर नवजात शिशुओं को भी मिल रहा है।

18 अप्रैल 2026 को विकासखंड फरसगांव निवासी पूर्णिमा साहू एवं दीपक साहू के पुत्र का जन्म निजी अस्पताल में हुआ। जन्म के समय शिशु का वजन मात्र 2 किलोग्राम था। दंपत्ति के पहले बच्चे की नवजात अवस्था में मृत्यु हो चुकी थी, जिससे परिवार अत्यंत चिंतित था। दूसरे बच्चे की स्थिति भी गंभीर होने पर उसे तत्काल उस अस्पताल से जिला अस्पताल कोण्डागांव रेफर किया गया।

जिला अस्पताल में पदस्थ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. रूद्र कश्यप एवं डॉ. राजेश बघेल द्वारा जांच में पाया गया कि शिशु परिनैटल एस्फिक्सिया, हाइपोथर्मिया, रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस, शॉक, सेंट्रल सायनोसिस, एपनिया एवं गैसपिंग जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा था। शिशु का ऑक्सीजन स्तर मात्र 60 प्रतिशत था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एस.एन.सी.यू. टीम द्वारा तत्काल गहन उपचार प्रारंभ किया गया।

उपचार के दौरान शिशु को 15 दिनों तक वेंटिलेटर सपोर्ट, 2 दिनों तक सीपीएपी सपोर्ट तथा 4 दिनों तक ऑक्सीजन सपोर्ट प्रदान किया गया। आवश्यक दवाइयों, एंटीबायोटिक्स एवं निरंतर निगरानी के माध्यम से उपचार जारी रखा गया। गंभीर बीमारी के कारण प्रारंभिक दिनों में शिशु के वजन में गिरावट देखी गई। स्थिति स्थिर होने के बाद शिशु रोग विशेषज्ञों द्वारा कंगारू मदर केयर की सलाह दी गई।

कंगारू मदर केयर से शिशु के शरीर का तापमान नियंत्रित रखने, वजन बढ़ाने, संक्रमण के खतरे को कम करने तथा माता एवं शिशु के बीच भावनात्मक जुड़ाव मजबूत करने में विशेष लाभ मिला। इससे शिशु के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हुआ।

लगातार 27 दिनों तक समर्पित चिकित्सा एवं विशेष देखभाल के पश्चात शिशु की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ। डिस्चार्ज के समय शिशु का वजन 1.770 किलोग्राम दर्ज किया गया तथा 14 मई 2026 को शिशु को स्वस्थ अवस्था में सफलतापूर्वक डिस्चार्ज किया गया।