*पद्मश्री जे. एस. नेल्सन का आंजनेय यूनिवर्सिटी में सम्मान, भरतनाट्यम् की शास्त्रीय गरिमा से सजी सांस्कृतिक संध्या*

*पद्मश्री जे. एस. नेल्सन का आंजनेय यूनिवर्सिटी में सम्मान, भरतनाट्यम् की शास्त्रीय गरिमा से सजी सांस्कृतिक संध्या*

*पद्मश्री जे. एस. नेल्सन का आंजनेय यूनिवर्सिटी में सम्मान, भरतनाट्यम् की शास्त्रीय गरिमा से सजी सांस्कृतिक संध्या*

रायपुर। आंजनेय यूनिवर्सिटी, रायपुर में कला, संस्कृति और साधना को समर्पित एक गरिमामय समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें देश के प्रख्यात कलाकार एवं भिलाई निवासी पद्मश्री सम्मानित श्री जॉन मार्टिन नेल्सन का विश्वविद्यालय परिवार की ओर से सम्मान किया गया। इस अवसर पर उन्हें शॉल, स्मृति-चिन्ह एवं सम्मान-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। यह सम्मान भारतीय शिल्प कला में उनके अतुलनीय योगदान के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक रहा। ज्ञात हो कि जॉन मार्टिन नेल्सन एक प्रसिद्ध भारतीय मूर्तिकार और पद्मश्री सम्मानित कलाकार हैं। उन्हें कला के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए वर्ष 2008 में भारत सरकार द्वारा देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक पद्मश्री से सम्मानित किया गया। उनकी कला-साधना और उत्कृष्ट उपलब्धियों के सम्मान में उन्हें वर्ष 2010 में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रदान किया जाने वाला प्रतिष्ठित राजा चक्रधर सम्मान भी प्राप्त हुआ। राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर मिले अनेक पुरस्कार एवं सम्मान उनकी आजीवन कला-साधना और सांस्कृतिक योगदान को प्रतिबिंबित करते हैं। *कुलपति डॉ टी रामाराव ने कहा कि* नेल्सन जी की शिल्प कला में परंपरा और आधुनिक दृष्टि का संतुलित समन्वय दिखाई देता है, जो उन्हें विशिष्ट बनाता है। उन्होंने महात्मा बुद्ध, विवेकानन्द, महात्मा गांधी जैसी मूर्तियां बनाई जो कला के प्रति उनके दृष्टिकोण को केवल प्रदर्शन तक सीमित न रखकर सामाजिक और आध्यात्मिक चेतना से भी जुड़ाता है। इसी कारण उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्मश्री जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से अलंकृत किया गया। उनका संपूर्ण जीवन भारतीय कला-परंपरा की जीवंत मिसाल है।

*समारोह की विशेष प्रस्तुति रही भरतनाट्यम् की शास्त्रीय संध्या*

समारोह की विशेष प्रस्तुति रही भरतनाट्यम् की शास्त्रीय संध्या, जिसका निर्देशन सुप्रसिद्ध नृत्यांगना एवं गुरु डॉ. राखी रॉय ने किया। मंच पर शास्त्र, भाव, ताल और अभिनय का अद्भुत समन्वय देखने को मिला। डॉ. रॉय दूरदर्शन की नियमित कलाकार रही हैं और उन्होंने चक्रधर महोत्सव, चिदंबरम नटराज महोत्सव, मैसूर दशहरा, लिंगराज महोत्सव सहित अनेक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय मंचों पर अपनी प्रस्तुतियाँ दी हैं। इसके साथ ही उन्होंने थाईलैंड, मलेशिया, सिंगापुर और दुबई जैसे देशों में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक उत्सवों में भी भारतीय शास्त्रीय नृत्य भरतनाट्यम् का प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। डॉ. राखी रॉय के शिष्यों आहाना लोध, अमृता बोरकर, सान्वी अवधूत, मेहक गेंद्रे, शारनी देवांगन, पलक उपाध्याय, दुष्यंत साहू एवं सृजनी बनर्जी ने मंच पर मनमोहक प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। शास्त्रीय भरतनाट्यम् की शुद्ध मुद्राओं, लयात्मक भाव-भंगिमाओं और सटीक ताल-संयोजन के माध्यम से इन कलाकारों ने गुरु-शिष्य परंपरा की गरिमा को सजीव रूप में प्रस्तुत किया। प्रस्तुति के दौरान अनुशासन, सौंदर्य और भावनात्मक गहराई देखने को मिली, जिससे विश्वविद्यालय परिसर तालियों से गूंज उठा। डॉ. रॉय के इस यात्रा को विश्वविद्यालय ने सम्मानित किया। इस कार्यक्रम का संयोजन फिल्म मेकिंग विभाग के विभागाध्यक्ष अंकित शुक्ला ने किया।

कार्यक्रम में महानिदेशक डॉ बी सी जैन, डायरेक्टर डॉ जयेंद्र नारंग, डायरेक्टर अकादमिक डॉ संध्या वर्मा, डायरेक्टर फिल्म मेकिंग श्री भगवान तिवारी, कुलसचिव डॉ रुपाली चौधरी सहित समस्त प्राध्यापकगण, विद्यार्थी और कला-प्रेमियों की उपस्थिति रही।