इस साल जन्माष्टमी के दिन मासिक कालाष्टमी के साथ 5 और भी व्रत-पर्व हैं. इस वजह से यह दिन अत्यंत शुभ फलदायी है. उस दिन माता लक्ष्मी की पूजा का भी सुंदर संयोग बना है. जन्माष्टमी पूजा से संतान प्राप्ति और लक्ष्मी पूजा से धन-वैभव में बढ़ोत्तरी का अवसर है.
anmashtami 2026: इस साल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर शुक्रवार को है. उस दिन व्रत रखकर रात्रि के समय में जन्माष्टमी का उत्सव मनाया जाएगा. जन्माष्टमी के दिन मासिक कालाष्टमी के साथ 5 और भी व्रत और पर्व हैं. जन्माष्टमी के अवसर पर लक्ष्मी पूजा का भी सुंदर संयोग बना है. इस दिन व्रत और पूजा से आपके धन-संपत्ति में वृद्धि होगी, वहीं जन्माष्टमी व्रत से संतान प्राप्ति का एक अच्छा अवसर है. जिन दंपत्तियों की कोई संतान नहीं है, वे इस अवसर का लाभ ले सकते हैं.
जन्माष्टमी पर और भी 5 व्रत
जन्माष्टमी के दिन आद्याकाली जयंती, विन्ध्यवासिनी जयंती, अगस्त्य अर्घ्य, मासिक कालाष्टमी और शुक्रवार व्रत है.
जन्माष्टमी व्रत: भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि को जन्माष्टमी व्रत रखते हैं. इस साल 4 सितंबर को 2:25 एएम से भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि शुरू है और यह 5 सितंबर को 12:13 एएम तक मानी जाएगी. उदयातिथि के आधार पर जन्माष्टमी व्रत 4 सितंबर को रखा जाएगा. 4 सितंबर को मध्य रात्रि के समय में बाल गोपाल का जन्म होगा, उस समय उत्सव माना जाएगा.
अगस्त्य अर्घ्य: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी यानि भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को अगस्त्य अर्घ्य देने की पंरपरा है. अगस्त्य ऋषि का वर्णन रामायण और महाभारत काल में मिलता है. 4 सितंबर को अगस्त्य अर्घ्य देने का समय प्रात:काल 04 बजकर 58 मिनट से सुबह 06:00 ए एम तक है. उस दिन अर्घ्य के लिए आपको 1 घंटा 2 मिनट का शुभ समय प्राप्त होगा. जो व्यक्ति अगस्त्य ऋषि को अर्घ्य देता है, उसे मृत्यु के बाद परब्रह्म की प्राप्ति होती है.