महाराजा सरदार जस्सा सिंह रामगढ़िया का जन्मोत्सव कार्यक्रम 5 मई को

महाराजा सरदार जस्सा सिंह रामगढ़िया का जन्मोत्सव कार्यक्रम 5 मई को

वीरता, सेवा और आस्था के प्रतीक महाराजा सरदार जस्सा सिंह रामगढ़िया को श्रद्धापूर्वक याद किया जाएगा

रायपुर। सिख इतिहास के महान योद्धा और रामगढ़िया मिसल के प्रमुख महाराजा सरदार जस्सा सिंह रामगढ़िया का जन्मदिवस पूरे श्रद्धा, भक्ति और गौरव के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर समाज के लोगों ने उनके अद्वितीय साहस, त्याग और धर्म रक्षा के योगदान को स्मरण किया।

महाराजा जस्सा सिंह रामगढ़िया सिख इतिहास के उन महान वीरों में गिने जाते हैं, जिन्होंने कठिन समय में न केवल सिख पंथ की रक्षा की, बल्कि समाज को संगठित कर मजबूती प्रदान की। वे रामगढ़िया मिसल के प्रमुख नेता थे और अपनी वीरता, युद्ध कौशल तथा नेतृत्व क्षमता के लिए प्रसिद्ध रहे।

इतिहास में उनका नाम विशेष रूप से उस समय के लिए जाना जाता है जब उन्होंने मुग़ल शासन के अत्याचारों के खिलाफ डटकर मुकाबला किया। उन्होंने कई युद्धों में साहसिक विजय प्राप्त की और सिख साम्राज्य की नींव को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दिल्ली विजय के दौरान लाल किले से “तख्त-ए-ताऊस” (मोर सिंहासन) को हटाकर अमृतसर लाने का कार्य भी उनके पराक्रम का प्रतीक माना जाता है।

धार्मिक दृष्टि से भी उनका जीवन अत्यंत प्रेरणादायक रहा। उन्होंने गुरु साहिबानों की शिक्षाओं—सेवा, सिमरन और सरबत दा भला—को अपने जीवन में उतारा। गुरुद्वारों के निर्माण और संरक्षण में उनका विशेष योगदान रहा, जिससे सिख धर्म की आस्था और परंपराएं और मजबूत हुईं।

इसी कड़ी में रायपुर स्थित गुरुद्वारा गुरु सिंह सभा, टाटीबंध में रामगढ़िया समाज द्वारा उनका 303वां जन्मदिवस श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। कार्यक्रम के अंतर्गत श्री सुखमनी साहिब पाठ, कीर्तन एवं अरदास का आयोजन किया गया, जिसके बाद गुरु का अटूट लंगर भी आयोजित किया गया।

रामगढ़िया सेवक सभा रायपुर के बलदेव सिंह भुई, हरपाल सिंह भामरा, ओंकार सिंह मुद्दड़ और मलकीत सिंह सहित सभी पदाधिकारियों ने कहा कि महाराजा जस्सा सिंह रामगढ़िया का जीवन हमें साहस, एकता और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। आज के समय में उनके आदर्शों को अपनाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।